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बीटा-ग्लूकन: रोगप्रतिरोधक क्षमता के प्रकटन के लिए प्रकृति की कुंजी

डॉ. माइकल मुरे द्वारा

बीटा-ग्लूकन क्या है?

बीटा-ग्लूकन रेशे सरीखे पॉलिसैक्राइड(जटिल शर्करायें) होते हैं, जो विभिन्न प्रकार के खाद्य स्त्रोतों जैसे यीस्टजई चोकर, जौ रेशे, वैद्यकीय  मशरूम माइताके  रेइशि जैसे एल्गी), और समुद्री फफूंद  में मिलते हैं

सभी बीटा-ग्लूकन एक जैसे नहीं होते

कुछ अध्ययनों ने दर्शाया है कि यीस्ट extracted from yeast has had the best overall benefit to immune health. 

से निकाले गए बीटा-ग्लूकन का रोगप्रतिरोधक स्वास्थ्य पर सर्वोत्तम कुल लाभ होता है। यीस्ट के बीटा-ग्लूकन, विशेषकर बेकर्स यीस्ट( सैक्रोमाइसेस सेरेविसिए) में एक लंबा बीटा-ग्लूकन कोर होता है, जिसमें अन्य बीटा-ग्लूकन्स(बीटा-1,3-ग्लूकन और बीटा-1,6-ग्लूकन) की बहुत सटीक लंबाइयों के ब्रांचिंग साइड शृंखलाएं पाई जाती हैं। माइताके जैसे मशरूम में भी साइड शृंखला वाले बीटा-ग्लूकन (बीटा-1,3-ग्लूकन और बीटा-1,6-ग्लूकन), पर यह साइड शृंखलायें यीस्ट से बहुत छोटी होती हैं। ओट, बारली और रई के बीटा-ग्लूकन में बीटा-1,3-ग्लूकन और बीटा-1, 4-ग्लूकन) की एक रेखीय शृंखला होती है।  

इन अधिक सरल प्रकार के बीटा-ग्लूकन में अच्छे आहार संबंधी रेशे और कोलेस्टरोल कम करनेवाले लाभ देखे गए हैं, पर इनमें यीस्ट और माइताके के बीटा-ग्लूकन की तरह रोगप्रतिरोधक प्रणाली बढ़ानेवाले प्रभाव नहीं हैं।  

प्रतिरोधक प्रणाली पर बीटा-ग्लूकन का लाभ

बीटा-ग्लूकन का प्रमुख स्वास्थ्य लाभ, विशेषकर जो यीस्ट और माइताके मशरूम में होते हैं, रोगप्रतिरोधक प्रणाली पर होता है। बीटा-ग्लूकन के विशिष्ट लाभ तफ़सील से दिखाने वाले कई पूर्व वैद्यकीय अभ्यासों के साथ वैद्यकीय साहित्य में इस पर गहन अध्ययन किया गया है। यह पाया गया है कि हमारी श्वेत रक्त कोशिकाओं में यीस्ट और माइताके बीटा-ग्लूकन के लिए उनकी कोशिकाओं की सतहों पर संग्राहक स्थल होते हैं। जैसे किसी दरवाज़े का ताला केवल सही चाबी से खुल सकता है, यह संग्राहक स्थल विशेष रूप से बीटा-ग्लूकन की ढांचा गत संरचना में ही पाए जाते हैं। जब यीस्ट या माइताके बीटा-ग्लूकन संग्राहक से जुड़ जाता है, वह बहुत विशिष्ट पद्धतियों में श्वेत रक्त कोशिकाओं को सक्रिय करता है और आक्रमणकारी सूक्ष्मजीवों को दूर रखने में सहायता करता है। रोगप्रतिरोधक प्रणाली पर यीस्ट और माइताके बीटा-ग्लूकन के विशिष्ट प्रभाव:

  • स्रवणात्मक इम्यूनोग्लोबिन ए (IgA) के स्तर बढ़ा देता है। यह संरक्षक पदार्थ हमारे शरीर के म्यूकस मेंब्रेन की लाइनिंग बनाता है उदाहरण के लिए, नासिका मार्ग, गला, वायुनलिकाएं, पेट और ऑंत की मार्गिका, योनि और यूरेथ्रा। स्रवणात्मक IgA कम होना संक्रमण का ख़तरा बढ़ने से जुड़ा होता है। 
  • मैक्रोफ़ेजेस को सक्रिय करता है। यह विशेष श्वेत रक्तकोशिकायें होती हैं, जो म्यूकस मेंब्रेन, यकृत, प्लीहा और लिंफ़ नोड्स की लाइनिंग जैसे विशिष्ट तंतुओं में होती हैं। मैक्रोफ़ेजेस दो महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। वे जीवाणु और कोशिकाओं के कचरे जैसे बाहरी पदार्थों को फ़ंसाने के लिए कचरा संग्राहक के रूप में कार्य करती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मैक्रोफ़ेजेज़ रोगप्रतिरोधक प्रणाली के ख़तरे का विश्लेषण करती हैं, और आवश्यक हो तो प्रतिक्रिया बढ़ाने के लिए अन्य श्वेत कोशिकाओं को रासायानिक संदेश भेजती हैं। इस कारण, वास्तविक रूप से, यीस्ट बीटा-ग्लूकन महत्तम कार्य के लिए पूरी प्रतिरोधक प्रणाली को तैयार करता है। 
  • मोनोसाइट को सक्रिय करता है। मोनोसाइट ऐसे मैक्रोफ़ेज(कचरा संग्राहक) होते हैं, जो कई प्रतिरोधक प्रतिक्रियाओं का आरंभ करने के साथ ही तत्सम कार्य करते हैं। 
  • न्यूट्रोफोलिस को सक्रिय करता है। वे जीवाणु, गॉंठ की कोशिकाओं और मृत कणात्मक पदार्थों को सक्रिय रूप से फ़ंसाने के लिए कचरा संग्राहक के रूप में कार्य करती हैं। न्यूट्रोफ़िलिस जीवाणु संक्रमण से बचने में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण होते हैं। 
  • प्राकृतिक विनाशक(NK) कोशिकाओं का संवर्धन करते हैं। इन कोशिकोओं को यह नाम कर्करोगजनक बन चुकी अथवा विषाणुओं से संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता के कारण मिला है। सामान्य विनाशक कोशिकाओं की गतिविधि का स्तर क्रोनिक फैटीग सिंड्रोम, कर्करोग और असाध्य विषाणु संक्रमणों में सामान्यतया कम होता है। 

यीस्ट बीटा-ग्लूकन पर वैद्यकीय अभ्यास: एपिकॉर और वेलम्यून

यह यीस्ट बीटा-ग्लूकन के विभिन्न व्यावसायिक रूप हैं। एपिकॉर और वेलम्यून के सामान्य नामों से जानेवाली मौलिक प्रक्रियाओं के द्वारा बेकर्स यीस्ट से निर्मित दो विशेष मिश्रणों पर  वैद्यकीय  अध्ययन उपलब्ध है। दोनों प्रकार के बीटा-ग्लूकन के लिए दैनिक मात्रा दिन की 500 mg है, जिसे सामान्य रूप से दिन में दो बार 250 mg के हिसाब से लिया जाता है।  

एपिकॉर  और वेलम्यून कुल 20 से अधिक वैद्यकीय परीक्षणों में मानवों की प्रतिरोधक कार्य को स्फुरित करने में प्रभावी सिद्ध हुई हैं। स्रवणात्मक IgA तथा विशिष्ट श्वेत रक्त कोशिकाओं के सक्रियन तथा कुल प्रतिरोधक कार्यों पर चर्चित यंत्रणाओं के द्वारा ऊपर दिए लाभ प्राप्त हुए हैं। 

एपिकॉर और वेलम्यून पर किए गए इन अध्ययनों के वैद्यकीय परिणाम कई प्रभाव दर्शाते हैं, जो ऊपरी श्वसननलिका के संक्रमणों(सर्दी और फ़्लू) से बचने में कारगर हैं। एपिकॉर का पूरण 500 mg की दैनिक मात्रा में दिए जाने से ऐसे रोगियों में सर्दी और फ़्लू के लक्षणों का प्रकटीकरण कम करने में लाभ हुआ है, जिन्हें फ्लू शॉट दिया या न दिया गया हो। वेलम्यून का पूरण 500 mg की दैनिक मात्रा में दिए जाने से दोहरे अज्ञात अध्ययनों में सर्दी और फ़्लू के लक्षणों से निपटने में लाभ हुआ है।  

  • सर्दी के लक्षणों के कारण वेलम्यून प्रयुक्त समूह के किसी भी सहभागी को एक भी दिन स्कूल या काम से छुट्टी नहीं लेनी पड़ी। इसके विपरीत, प्लैसीबो समूह के प्रयुक्तों ने परीक्षण के दौरान लगभग औसत 1.38 दिन छुट्टी ली।  
  • इसके अलावा, प्लैसीबो समूह के 3.5 सहभागियों में बुखार का प्रकटीकरण हुआ, जो वेलम्यून समूह में शून्य रहा।  
  • वेलम्यून का जीवन की कुल गुणवत्ता, भौतिक ऊर्जा और कुल उत्कर्ष को सुधारने में भी बहुत प्रभाव रहा। 

मशरूम बीटा-ग्लूकन के ऊपर वैद्यकी अध्ययन 

1980 के शुरुवाती दशक में जापान के डॉ. हिरोआकि नाबा द्वारा माइताके बीटा-ग्लूकन के अनुसंधान का नेतृत्व किया गया। डॉ. नान्बा ने मशरूम के प्रतिरोधक प्रणाली  सुधारक गुणधर्मों पर अध्ययन करते हुए निष्कर्ष  निकाला कि माइताके मशरूम सारों में अन्य मशरूम सारों की तुलना में प्राणी परीक्षणों में अधिक ठोस गतिविधि देखी गई। मौखिक रूप से दिए जाने पर काफ़ी प्रभावी रहने की क्षमता माइताके के महत्त्वपूर्ण लाभों में से एक था। इसके विपरीत, शिइताके जैसे अन्य मशरूम, जिसपर डॉ. नान्बा अध्ययन कर रहे थे, वे केवल खून की धारा में इंजेक्शन द्वारा दिए जाने पर कारगर रहे।  

1984 में, डॉ. नान्बा ने मैकक्रोफेजेस में सुधार करने की विशेष क्षमता रखनेवाले माइताके के एक भाग की पहचान कर ली थी। इस भाग में मुख्य रूप से बीटा-1,6 ग्लूकन और बीटा-1,3 ग्लूकन का समावेश था। जबकि अन्य मशरूम में तत्सम बीटा-ग्लूकन घटक देखे गए थे, डॉ. नान्बा ने पाया कि माइताके में मिलनेवाले बीटा-ग्लूकन में अधिक संख्या में ब्रांचिंग साइड शृंखलाएं होती हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रांचिंग का प्रमाण जितना अधिक होता है, बीटा-ग्लूकन के भाग की अधिक प्रतिरोधक कोशिकाओं तक पहुंचकर उन्हें सक्रिय करने की संभावना भी उतनी ही अधिक होती है। माइताके सारों  की  मात्रा उस डी- या एमडी-भाग के स्तर पर निर्भर करती है, जिसमें बीटा-ग्लूकन होता है, सामान्य रूप से अत्यधिक आवश्यकता होने पर दिन में 35-70 mg डी- या एमडी-भाग और सामान्य उपयोग के लिए दिन में 5 से 15 mg। सर्वोत्तम परिणामों के लिए उसे खाने से 20 मिनट पहले या खाली पेट लें।

यीस्ट या मशरूम बीटा-ग्लूकन पूरण के साथ  

ओट बीटा-ग्लूकन और कोलेस्टरोल लेने से आंत और पेट के कार्य और ऑंत के माइक्रोबायोम(कुल स्वास्थ्य और रोगप्रतिरोधक कार्य के लिए बहुत ही आवश्यक अमाशय सूक्ष्म जीवों का संग्रह) के स्वास्थ्य पर  रेशे-जैसे प्रभाव होते हैं। यही मात्रा कोलेस्टरोल स्तर कम करने में उतनी प्रभावी सिद्ध नहीं हुई है। बीटा-ग्लूकन के इस लाभ के लिए ओट  ब्रैन, बार्ली फाइबर या रई के रेशे से बने पदार्थों का उपयोग करना सबसे बढ़िया होगा, जो बीटा-ग्लूकन से समृद्ध होता है। इन तीन अनाजों में से, ओट बीटा-ग्लूकन व्यापक रूप से उपलब्ध है।  

पूरा ओट, ओट ब्रेन और बीटा-ग्लूकन कोलेस्टरोल कम करनेवाले पदार्थों के रूप में सुस्थापित हैं। पूरे ओट में  बीटा ग्लूकन  3 से 5% होता है, और ओट ब्रेन में 15 से 35%। कोलेस्टरोल कम करने का प्रभाव लगभग पूरी तरह से बीटा-ग्लूकन घटक के कारण होता है, क्योंकि रोज़ कम से कम 3g ओट बीटा-ग्लूकन लेने से एलडीएल कोलेस्टरोल 10%, और हृदय रोग का खतरा 20% तक कम हो सकता है। 

बीटा-ग्लूकन के सह प्रभाव और औषधि प्रतिक्रिया 

सुझाए गए स्तरों पर  बीटा-ग्लूकन के कोई सह प्रभाव ज्ञात नहीं हैं। 

संदर्भ: 

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