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स्वास्थ्य की वे 4 अवस्थाएं जिनमें मेलाटोनिन लाभदायक हो सकता है

वीनस रैमोस, एमडी द्वारा

इस लेख में:


यदि आपको कभी भी रात के समय अच्छी नींद लेने में समस्या हुई है, तो आपने मेलाटोनिन के बारे में सुना होगा। यह नींद में सहायक के रूप में उपयोग करने के लिए आम तौर पर अनुशंसित पूरक है।

लेकिन इसे स्वयं के लिए आजमाने का निर्णय लेने से पहले, आप शायद थोड़ी अधिक जानकारी पाना चाहेंगे। इसलिए, यहाँ प्रस्तुत है मेलाटोनिन, इसके लाभों और इसका उपयोग करने के बारे में जानकारी।

मेलाटोनिन क्या है और यह कैसे काम करता है?

मेलाटोनिन मस्तिष्क में पीनियल ग्रंथि द्वारा बनाया जाने वाला एक प्राकृतिक हारमोन है। मानव शरीर में सामान्य तौर से काम करते समय, मेलाटोनिन को मस्तिष्क के द्वारा प्रकाश में परिवर्तन की अनुक्रिया में मुक्त किया जाता है। जब रात के समय आँखों के माध्यम से कम प्रकाश प्रविष्ट होता है, तब मेलाटोनिन का अधिक उत्पादन होता है।

इसके बाद मेलाटोनिन रक्तप्रवाह और प्रमस्तिष्कमेरु द्रव (मस्तिष्क और मेरु दंड के चारों ओर मौजूद द्रव) के माध्यम से शरीर के विभिन्न क्षेत्रों में जाता है। जब यह हारमोन शरीर के मेलाटोनिन अभिग्राहकों से संलग्न होता है, तो यह संकेत देता है कि सोने का समय हो गया है, जिससे शरीर विश्राम की स्थिति में चला जाता है और अपने मूलभूत तापमान को कम कर देता है। इस तरह मेलाटोनिन शरीर की आंतरिक घड़ी, जिसे सर्केडियन रिद्म भी कहते हैं, के विनियमन में भूमिका निभाता है।

इस प्रकार से, शरीर के मेलाटोनिन स्तर का उतार और चढ़ाव सोने-जगने के चक्र को नियंत्रित करता है। 

साधारणतया, चक्र के प्रत्येक दिन, मेलाटोनिन स्तर सूर्यास्त के बाद बढ़ने लगता है। यह बात शरीर के सोने के सामान्य समय से लगभग दो घंटे पहले सोने की अधिक प्रवृत्ति से मेल खाती है। जब तक अंधेरा रहता है, तब तक आम तौर पर यह स्तर दिन के समय की मात्राओं से कम से कम 10 गुना अधिक बना रहता है। फिर, सुबह के समय जैसे-जैसे सूरज उगता है, मेलाटोनिन के स्तर गिरने लगते हैं, और शरीर को जागने का संकेत मिलता है।

मेलाटोनिन और मौसमी भावनात्मक विकार

लगभग 24 घंटे के चक्र में चलने वाले सर्केडियन रिद्म के अलावा, मेलाटोनिन का एक मौसमी चक्र भी है। जब शरद और सर्दी के मौसम में रातें लंबी होती हैं, तब मेलाटोनिन के स्तर आम तौर पर अधिक होते हैं। इसके विपरीत, वसंत और गर्मी के मौसम में, ये स्तर कम रहते हैं।

सर्दी के मौसम में छोटे दिनों और लंबी रातों के कारण, शरीर का सोने-जगने का प्राकृतिक चक्र अस्त-व्यस्त हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप हर वर्ष लगभग समान काल में एक प्रकार का अवसाद विकसित हो सकता है। इस अवस्था को मौसमी भावनात्मक विकार (seasonal affective disorder (SAD)) कहते हैं और इसके लक्षणों में नींद की समस्याएँ, उपद्रव, ऊर्जा की कमी, भूख में परिवर्तन, और अवसादित मनोदशा शामिल हैं।

मेलाटोनिन न केवल सूर्य के प्रकाश से, बल्कि प्रकाश के कृत्रिम स्रोतों से भी प्रभावित होता है। रात के समय मद्धम रोशनी के संपर्क में आने पर भी मेलाटोनिन का सामान्य उत्पादन कम हो सकता है। इसलिए, सोने के समय के करीब स्मार्टफोन, टेलीविजन, या कम्प्यूटर स्क्रीन से आने वाला प्रकाश भी मेलाटोनिन के स्राव को कम कर सकता है, जिससे नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्रकाश के अलावा, विशिष्ट खाद्य पदार्थ भी मेलाटोनिन के स्तरों को प्रभावित कर सकते हैं। चावलअखरोट, जैतून, चेरी, टमाटर, स्ट्राबेरी, और गाय का दूध उन खाद्य पदार्थों में शामिल हैं जिनमें मेलाटोनिन होता है। इन खाद्य पदार्थों से हारमोन को अवशोषित करने के बाद, शरीर विश्राम की अवस्था में जा सकता है, जिससे आपको शांति और उनींदेपन की अनुभूति हो सकती है।

स्वास्थ्य की वे 4 अवस्थाएं जिनमें मेलाटोनिन लाभदायक हो सकता है 

ऐसा प्रतीत होता है कि मेलाटोनिन के स्तरों, चाहे वे कम हों या अधिक, से जुड़ी कोई उल्लेखनीय स्वास्थ्य समस्याएँ नहीं हैं। और जबकि नींद के लिए मेलाटोनिन का होना जरूरी नहीं है, इसके स्तरों में वृद्धि से सोना अधिक आसान हो जाता है। इसके िवश्राम की अवस्था में लाने वाले प्रभावों के कारण, मेलाटोनिन का अनुपूरण कुछ अवस्थाओं में मददगार साबित हुआ है।

1. अनिद्रा 

अनिद्रा से ग्रस्त लोगों को मेलाटोनिन से राहत मिल सकती है। शोध ने दर्शाया है कि मेलाटोनिन का अनुपूरण अधिक शीघ्रता से सोने में लोगों की मदद कर सकता है और उनकी नींद की अवधि को बढ़ा सकता है।

2. जेट लैग

जब आप एकाधिक समय क्षेत्रों में तेजी से यात्रा करते हैं, तो सामान्य निद्रा पैटर्न के अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण जैट लैग हो सकता है। इसके लक्षणों में अनिद्रा, दिन के समय थकान, एकाग्रता में कमी, और पाचन संबंधी समस्याएँ शामिल हैं। अध्ययनों ने दर्शाया है कि मेलाटोनिन जेट लैग के समग्र लक्षणों को कम करता है।

3. विलम्बित सोने-जगने के चरण का विकार (Delayed sleep-wake phase disorder (DSWPD)) 

विलम्बित सोने-जगने के चरण का विकार एक अवस्था है जिसमें सर्केडियन रिद्म का विनियमन बिगड़ जाता है। DSWPD से ग्रस्त लोगों को सोने के पारंपरिक समय के 2 या उससे अधिक घंटों के बाद तक नींद नहीं आती है। उन्हें सुबह के समय जागने में भी कठिनाई होती है। उनके लिए, नींद का समय सुबह लगभग 2 और 6 बजे के बीच शुरू होता है, और वे सुबह 10 और 1 बजे के बीच जागना पसंद करते हैं।

DSWPD से ग्रस्त व्यक्तियों पर शोध ने हर रात एक नियत समय पर सोने जाने की दिनचर्या के संयोजन में सोने के वांछित समय से एक घंटा पहले मेलाटोनिन लेने पर लाभ दर्शाया है। दिन के समय की गतिविधि में सुधार, रात के शुरुआती हिस्से में बेहतर नींद, और समय से थोड़ा पहले नींद आने जैसी बातें नोट की गई हैं।

4. व्यग्रता 

शल्यक्रिया करवाने से पहले व्यग्रता होना आम बात है। हाल में किए गए शोध की एक समीक्षा पुख्ता सबूत प्रदान करती है कि मेलाटोनिन का अनुपूरण शल्यक्रिया से पहले अनुभव होने वाली व्यग्रता को कम करता है। वास्तव में, यह व्यग्रता-रोधी दवाई मिडाज़ोलैम के जितना ही कारगर हो सकता है।

मेलाटोनिन को कैसे और कब लें

मेलाटोनिन गोली, कैप्सूल, गमी, पाउडर, तरल, और लोज़ेंज के रूप में अनुपूरण के लिए उपलब्ध है। मेलाटोनिन के लिए सुझाई गई खुराक हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। शरीर का वज़न, चयापचय और साधारण स्वास्थ्य सहित विभिन्न कारक मेलाटोनिन के प्रति शरीर की अनुक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

सर्वोत्तम परिणामों के लिए, मेलाटोनिन को सोने के समय से 30-60 मिनट पहले लें। नेशनल स्लीप फाउंडेशन 0.2 और 5 मिग्रा रोज़ाना की वयस्क खुराक की अनुशंसा करता है। खुराक को पर्याप्त नींद के हासिल होने तक धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। खुराक को 5 मिग्रा से अधिक करने की कोशिश करने से पहले किसी स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से परामर्श करें।

मेलाटोनिन को आजमाना शुरू करते समय, कम खुराक से शुरू करना और किसी भी दुष्प्रभाव पर नज़र रखना समझदारी होगी। यदि सुबह के समय होने वाली जड़ता से समस्या होती है, तो खुराक को कम करके या उसे थोड़ा पहले लेकर देखें।

मेलाटोनिन को लेने के साथ-साथ सोने की स्वस्थ परिपाटियों को भी अपनाना चाहिए (इसका उपयोग इन परिपाटियों के स्थान पर नहीं करना चाहिए)। इनमें शामिल है, सोने से पहले कैफीन, इलेक्ट्रॉनिक्स या प्रकाशित स्क्रीनों का उपयोग न करना, सोने के समय की सुसंगत दिनचर्या, और सोने और जगने के नियमित समय का पालन करना।  

एक प्राकृतिक रसायन होने के कारण, मेलाटोनिन अधिकांश लोगों में लघु अवधि के उपयोग के लिए साधारणतया सुरक्षित प्रतीत होता है। इसके बावजूद, इससे होने वाले सिरदर्द, चक्कर आने, और दिन के समय होने वाले उनींदेपन जैसे संभावित दुष्प्रभावों के कारण गाड़ी चलाते समय इसका उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।

तथापि, किसी भी अन्य आहार पूरक की तरह, दवाइयाँ लेने वाले लोगों को मेलाटोनिन को आजमाने से पहले अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से बात करनी चाहिए। यह संभव है कि मेलाटोनिन की अन्य औषधियों के साथ परस्पर क्रिया के कारण नुकसान हो सकता है, जिसमें उनकी प्रभावकारिता का कम होना, प्रतिकूल प्रभावों का होना, या शरीर द्वारा औषधि के चयापचय के तरीके में परिवर्तन शामिल है।

जिन लोगों को अपस्मार की बीमारी है और जो लोग खून पतला करने की दवाई लेते हैं उनमें मेलाटोनिन का अनुपूरण करते समय चिकित्सीय देखरेख की सलाह दी जाती है।  यही नहीं, अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के 2015 के दिशानिर्देशों के अनुसार, मनोभ्रंश से ग्रस्त लोगों द्वारा मेलाटोनिन का उपयोग न करने की अनुशंसा की जाती है।

बच्चों में मेलाटोनिन का उपयोग

प्राकृतिक रूप से मिलने वाला हारमोन होने के कारण, मेलाटोनिन बच्चों में नींद में सहायता के रूप में एक लोकप्रिय विकल्प है। यह अधिकांश बच्चों में लघु अवधि के उपयोग के लिए साधारणतया सुरक्षित प्रतीत होता है।

अनिद्रा से पीड़ित बच्चों में शोध ने दर्शाया है कि मेलाटोनिन स्वलीनता, ध्यान के अभाव के विकार, और तंत्रिकातंत्र के विकास से संबंधित अन्य विकारों के मामलों में नींद लगने के समय को कम कर सकता है।

बच्चों को मेलाटोनिन देने के बारे में विचार केवल किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श के साथ ही करें। अनुपूरण शुरू करने से पहले, किसी बालरोग विशेषज्ञ द्वारा अनिद्रा के संभावित कारणों के लिए बच्चे का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है। व्यग्रता (जैसे, स्कूल को लेकर तनाव होना), कुछ प्रकार की दवाइयाँ, नींद का कोई अन्य विकार (जैसे, बार-बार पैर हिलाने की बीमारी , ऑबस्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया), और चिकित्सीय या मानसिक स्वास्थ्य अवस्थाएँ (जैसे, दमा, अवसाद), ये सभी इसके संभावित कारण हो सकते हैं।

मोटे तौर पर, तीन वर्ष से कम आयु के सामान्य रूप से विकसित हो रहे स्वस्थ बच्चे को मेलाटोनिन देना उचित नहीं है। ऐसे बच्चों में नींद आने में कठिनाई आम तौर पर बर्ताव–शायद सोने के समय सोने से इंकार करना या रात में देर तक जगना जिस पर माता-पिता को ध्यान देने की जरूरत है, से संबंधित होती है।

बच्चों में मेलाटोनिन के लंबे समय तक उपयोग पर बहुत थोड़ा शोध किया गया है। सैद्धांतिक रूप से, इसके प्रतिरक्षा, चयापचयी, प्रजनन, और हृदयवाहिकीय प्रणालियों के विकास पर प्रभाव हो सकते हैं।

चाहे जो भी हो, मेलाटोनिन का उपयोग बच्चे की अनिद्रा के लिए एकमात्र उपचार के रूप में नहीं करना चाहिए। इसे हमेशा सोने के समय की नियमित दिनचर्या, सोने के सुसंगत कार्यक्रम, बिस्तर में रहने के लिए सकारात्मक समर्थन, और सोने के समय से पहले उत्तेजित करने वाली गतिविधियों से बचने जैसे बर्ताव संबंधी हस्तक्षेप के साथ संयोजित करना चाहिए।

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