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तंदुरुस्ती

पामिटॉइलइथेनॉलअमाइड (PEA) पर एक त्वरित मार्गदर्शिका

31 दिसंबर 2019

डा. माइकेल मरे द्वारा लिखित

इस लेख में:


पामिटॉइलइथेनॉलअमाइड (PEA) एक वसायुक्त पदार्थ है जो शरीर में निर्मित होने के साथ-साथ खाद्य पदार्थों में भी काफी मात्रा में पाया जाता है जिसमें आंतरिक अंगों का मांस, मुर्गी के अंडे की जर्दी, जैतून का तेल, कुसुम के फूल और सोया कालेसिथिन, मूंगफली इत्यादि शामिल हैं।

PEA का तकनीकी नाम “प्रो-रिसॉल्विंग लिपिड सिग्नलिंग मॉलीक्यूल” है। इसका मतलब यह है कि हमारी कोशिकाओं के भीतर केंद्रीय नियंत्रण प्रक्रियाओं के माध्यम से, PEA शोथ और कोशिकीय तनाव को ठीक करने की क्षमता रखता है। यह अत्यंत लाभदायक प्रभाव 600 से अधिक वैज्ञानिक जाँचों में प्रदर्शित किया गया है। 

PEA के संभावित नैदानिक उपयोग काफी विस्तृत हैं, लेकिन शोध और लोकप्रिय इस्तेमाल एक शोथ-रोधी और पीठ के निचले भाग में दर्द, शयाटिका (कटिस्नायुशूल), अस्थिसंधिशोथ आदि जैसे रोगों में दर्द से राहत पहुंचाने वाली औषधि के रूप में इसके उपयोग पर केंद्रित हैं। रोग से पूर्व के और मानव अध्ययनों में अवसाद, मानसिक गतिविधि और याददाश्त को बढ़ाने, स्वलीनता, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, मोटापे, और चयापचयी सहलक्षण पर इसके प्रभावों की भी जांच की गई है। जबकि इसकी कई खूबियां कैनाबिडियॉल (CBD) से मिलती-जुलती हैं, PEA का फायदा यह है कि विज्ञान इसके उपयोग का बेहतर ढंग से समर्थन करता है।

PEA शोथ-रोधी और दर्द से राहत पहुंचाने वाले प्रभाव कैसे प्रदान करता है?

PEA के स्वास्थ्य संबंधी लाभों में खास तौर पर मस्तिष्क में, शोथ को नियंत्रित करने वाली प्रतिरक्षी कोशिकाओं पर प्रभाव सहित विविध प्रकार के प्रभाव शामिल हैं। PEA शोथ पैदा करने वाले यौगिकों के उत्पादन को कम करता है। लेकिन, PEA का प्रमुख प्रभाव उन कोशिकाओं के ग्राहियों पर होता है जो कोशिकीय गतिविधि के सभी पहलुओं को नियंत्रित करते हैं। इन ग्राहियों को PPARs के नाम से जाना जाता है। PPARs को सक्रिय करने वाले PEA और अन्य यौगिक दर्द को कम करते हैं और वसा को जलाकर चयापचय को बढ़ावा देते हैं, सीरम ट्राइग्लिसराइड को कम करते हैं, सीरम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, रक्त शर्करा के नियंत्रण में सुधार करते हैं और वज़न कम करने में मदद भी करते हैं।

चूंकि PEA मस्तिष्क के शोथ को ठीक करने का काम करता है, क्या यह मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले अन्य रोगों में मददगार हो सकता है?

हां, PEA सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं को संबोधित करता है जो चिरकालिक दर्द तथा मानसिक गतिविधि और अवसाद में मुख्य भूमिका निभाती हैं। इस बात का काफी प्रमाण है कि PEA मानसिक संज्ञान की कमी और चिरकालिक दर्द से संबद्ध अवसाद को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय योगदान करता है। अवसाद के पशु मॉडलों और मनुष्यों में किए गए एक दोहरे अज्ञात, प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण में इसका अवसाद-रोधी प्रभाव प्रदर्शित किया गया है। PEA को तनाव और व्यग्रता के प्रभावों के विरुद्ध एक केंद्रीय सुरक्षात्मक भूमिका का समर्थन करने वाली एक तनाव अनुक्रिया को कम करते हुए भी दर्शाया गया है।

PEA के नैदानिक उपयोग क्या हैं?

PEA के कोशिकीय गतिविधि को नियंत्रित करने वाले कारकों पर अनोखे प्रभावों के कारण इसके विस्तृत संभावित नैदानिक उपयोग हैं। PEA पर केंद्रित मुख्य नैदानिक शोध दर्द और शोथ के उपचार से संबंधित है। शोध के इस क्षेत्र में, PEA के साथ कम से कम 21 नैदानिक परीक्षण किए गए हैं। इन अध्ययनों में 20 से लेकर 636 रोगियों ने भाग लिया था और PEA का उपयोग 14 दिनों से लेकर 120 दिनों तक किया गया। इनमें रोजाना 300 मिग्रा से लेकर 1200 मिग्रा तक की खुराक दी गई। अधिकांश मामलों में PEA को मौखिक गोलियों के रूप में दिया गया और दर्द के मूल्यांकन का सबसे आम तरीका विजुअल एनालॉग स्केल (VAS) था, जिसमें रोगी 0 से 10 के एक पैमाने पर अपने दर्द का व्यक्तिपरक आकलन करता है जहाँ 0 का मतलब कोई दर्द नहीं और 10 का मतलब सबसे खराब कल्पनीय दर्द है। एक को छोड़कर सभी अध्ययनों ने, नैदानिक परीक्षणों में अधिकतर दर्द की गहनता में उल्लेखनीय कमी और दुष्प्रभावों की लगभग पूर्ण अनुपस्थिति की सूचना दी है।

सबसे बड़े दोहरे अज्ञात अध्ययन में पीठ के निचले भाग या शयाटिका के दर्द पर PEA के प्रभावों की जांच की गई। परिणामों ने दर्शाया कि PEA की 600 मिग्रा प्रति दिन और 300 मिग्रा प्रतिदिन की खुराक प्लेसिबो से ज्यादा कारगर थी और अधिक खुराक (600 मिग्रा) ने सबसे ज्यादा प्रभाव दर्शाया था। अध्ययन का बड़ा निष्कर्ष दर्द में 50% की कमी प्रदर्शित करने के लिए उपचार के लिए आवश्यक रोगियों की संख्या (NNT) थी। NNT को चिरकालिक दर्द के उपचारों की कारगरता को वरीयता देने के लिए सांख्यिकीय रूप से भरोसेमंद और तत्काल समझाया जा सकने वाला माप माना जाता है। NNT की व्याख्या उन रोगियों की संख्या के रूप में की जाती है जिनकी प्लेसिबो से उपचार करने पर लाए जाने वाले व्यक्तियों की तुलना में सक्रिय उपचार पर एक और अनुक्रिया करने वाले व्यक्ति को लाने के लिए जरूरत पड़ती है। NNT जितना कम होता है, कारगरता उतनी ही अधिक होती है। अध्ययन में, PEA ने 1.5 का NNT दर्शाया जिसका मतलब था कि 3 में से दो लोग अनुक्रिया देंगे। तुलना के लिए, इबुप्रोफेन 400 मिग्रा का NNT 2.8 है; एसिटअमाइनोफेन 600 मिग्रा का NNT 5 है; और कोडीन 60 मिग्रा का NNT 18 है।

इबुप्रोफेन के प्रति यह उत्कृष्टता एक अध्ययन में भी दर्शाई गई जिसमें टेम्पोरोमैंडिबुलर जोड़ (TMJ) के अस्थिसंधिसोथ में दर्द से राहत के लिए PEA बनाम इबुप्रोफेन की तुलना की गई। 24 से 54 वर्ष के 24 रोगियों (16 महिलाएं और 8 पुरुष) को दो समूहों में बेतरतीब ढंग से विभाजित किया गया: समूह अ (12 प्रयोगाधीन व्यक्ति) को 7 दिन के लिए सुबह के समय 300 मिग्रा और शाम को 600 मिग्रा और फिर 7 और दिनों के लिए 300 मिग्रा दिन में दो बार PEA दिया गया। समूह ब (12 प्रयोगाधीन व्यक्ति) को 2 सप्ताह के लिए 600 मिग्रा दिन में तीन बार के रूप में इबुप्रोफेन की अत्यंत अधिक खुराक दी गई। प्रत्येक रोगी ने एक विजुअल एनालॉग स्केल पर दिन में दो बार स्वतः पैदा होेने वाले दर्द की गहनता रिकार्ड की। एक अनजान ऑपरेटर द्वारा पहली मुलाकात के दौरान और फिर दवाई के उपचार के 14वें दिन के बाद मुंह के अधिकतम खुलने को रिकार्ड किया गया। उपचार के दो सप्ताह बाद, प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया और देखा गया कि PEA लेने वाले लोगों में इबुप्रोफेन की बनिस्बत दर्द में कमी उल्लेखनीय रूप से अधिक हुई। समूह ब की अपेक्षा समूह अ में मुंह के अधिकतम खुलने में अधिक सुधार देखा गया। इस अध्ययन ने दर्शाया कि TMJ के शोथजन्य दर्द में PEA कारगर है और कि इसने इबुप्रोफेन से बेहतर काम किया।

PEA पर सबसे हाल में किया गया अध्ययन घुटने के अस्थिसंधिशोथ के उपचार पर था। 111 प्रतिभागियों को 8 सप्ताह के लिए 300 मिग्रा PEA या प्लेसिबो प्रतिदिन लेने के लिए यादृच्छिकृत किया गया। PEA प्राप्त करने वाले समूहों में, घुटने के अस्थिसंधिशोथ के लिए कुल लक्षण स्कोरों और साथ ही दर्द, अकड़न, गतिविधि और व्यग्रता के व्यक्तिगत स्कोरों में भी उल्लेखनीय कमी हुई। इस अध्ययन में PEA के साथ कोई दुष्प्रभाव नहीं हुए। जबकि 300 मिग्रा प्रति दिन की खुराक कारगर थी, 600 मिग्रा प्रति दिन की खुराक और भी अधिक कारगर थी। इसके दुष्प्रभावों के अभाव के कारण, अधिक खुराक की अनुशंसा की जाती है।

दर्द से संबद्ध रोगों में PEA के सकारात्मक रोग-संबंधी लाभ

  • पीठ के निचले भाग में दर्द 
  • शयाटिक दर्द
  • अस्थिसंधिशोथ 
  • फाइब्रोमायल्जिया
  • कार्पल टनेल सहलक्षण
  • परिधिक न्यूरोपैथी – मधुमेह की न्यूरोपैथी & कीमोथेरेपी से उत्पन्न परिधिक न्यूरोपैथी
  • न्यूरोपैथी का दर्द – मस्तिष्काघात से संबंधित & मल्टीपल स्क्लेरोसिस
  • दांत का दर्द
  • चिरकालिक श्रोणि और योनि मार्ग का दर्द 
  • हर्पीज़ के बाद होने वाला तंत्रिकाओं का दर्द

कई अध्ययनों में PEA का उपयोग मानक औषधि उपचार के संयोजन में किया गया है। उदाहरण के लिए, फाइब्रोमायल्जिया के उपचार में, जो एक सहलक्षण है जिसमें लगातार दर्द, अवसाद, और नींद की कमी होती है, जब PEA का एक अवसाद-रोधी और पेंटाग्लोबिन (न्यूरोटिन) के साथ संयोजन किया गया और केवल औषधि लेने वालों के साथ तुलना की गई, तो PEA लेने वाले लोगों ने दर्द सहित फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों के स्कोर में 50% से अधिक कमी दर्शाई। शोधकर्ताओं का निष्कर्ष था कि “हमारा अध्ययन… फाइब्रोमायल्जिया से ग्रस्त रोगियों में दर्द के उपचार में PEA के लाभ और सुरक्षा की पुष्टि करता है।”

PEA के अवसाद-रोधी प्रभावों को एक यादृच्छिकृत दोहरे अज्ञात, प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन में सिद्ध किया गया। PEA का उपयोग प्रमुख अवसाद संबंधी विकार से ग्रस्त रोगियों में एक सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर, सिटैलोप्रैम (सेलेक्सा) नामक औषधि के साथ "अतिरिक्त" उपचार के रूप में किया गया। 54 रोगियों को छह सप्ताह के लिए सिटैलोप्रैम के अलावा या तो PEA (600 मिग्रा दिन में दो बार) या प्लेसिबो लेने के लिए यादृच्छिकृत किया गया। परिणामों ने PEA के साथ अवसाद के स्कोरों में अधिक कमी दर्शाई जो कि केवल 2 सप्ताह के उपयोग के बाद ही दिखने लगी थी। इस प्रकार, PEA एक तेज अवसाद-रोधी प्रभाव डालता है। प्लेसिबो समूह की तुलना में PEA का फायदा परीक्षण की समूची अवधि में दिखाई दिया। परीक्षण के अंत में, PEA समूह के 100% रोगियों ने केवल अवसाद-रोधी औषधि लेने वाले समूह में 74% की तुलना में अपने अवसाद स्कोर में 50% से अधिक कमी का अनुभव किया। 

PEA अलज़ाइमर्स रोग, पार्किंसन्स रोग, और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे डीजेनरेटिव मस्तिष्क रोगों के मॉडलों में भी अनेकों प्रभाव दर्शाता है।

PEA कहाँ से प्राप्त होता है?

बाज़ार में मूल तौर पर PEA के दो प्रकार उपलब्ध हैं:

  • एक संश्लेषित प्रकार जिसमें इथेनॉलएमाइड भाग को टोलीन जैसे शक्तिशाली संश्लेषित विलायक की मदद से पामिटिक एसिड के साथ संलग्न किया जाता है। 
  • कुसुम के लेसिथिन से व्युत्पन्न एक प्राकृतिक प्रकार।

स्पष्ट है कि, प्राकृतिक प्रकार को अधिक पसंद किया जाता है। 

PEA की अनुशंसित खुराक क्या है?

अधिकांश अध्ययनों में 300 मिग्रा दिन में दो बार या 600 मिग्रा रोजाना की खुराक का उपयोग किया गया। अवसाद एक अपवाद है जिसमें 600 मिग्रा प्रति दिन की खुराक का उपयोग किया जाता है।

क्या इससे कोई दुष्प्रभाव या सुरक्षा संबंधी समस्या होती है?

PEA पूर्णतया सुरक्षित और निराविषी है और मनुष्यों में नैदानिक परीक्षणों में PEA के साथ उपचार से संबंधित कोई भी उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव नहीं हुए हैं। PEA के साथ किसी भी औषधीय परस्पर क्रिया के होने की जानकारी नहीं है।

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