beauty2 heart-circle sports-fitness food-nutrition herbs-supplements

2019 के शीर्ष हर्बल पूरक

एरिक मैड्रिड एमडी द्वारा लिखित 

इस लेख में:


मनुष्यों ने सदियों से स्वास्थ्य को उपयुक्त बनाने में मदद के लिए जड़ी-बूटियों का सहारा लिया है। आजकल जड़ी-बूटियों का उनकी मूल अवस्था में सेवन करना और इसके साथ ही पोषक तत्वों की सुसंगतता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण लग सकता है। इस वजह से, कई लोगों ने स्वास्थ्य को उपयुक्त बनाने और लक्षित स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करने के लिए हर्बल पूरकों का चुनाव किया है। नीचे हमने 2019 के शीर्ष हर्बल पूरकों और उनके फायदों के वैज्ञानिक आधार पर चर्चा की है।

मिल्क थिसल (सिलीमैरिन)

मिल्क थिसल (सिलीबम मैरियानम) यकृत के स्वास्थ्य को उपयुक्त बनाने की कामना करने वाले लोगों द्वारा आम तौर पर प्रयुक्त पूरक है। इस जड़ी-बूटी में, जिसका उपयोग 2,000 से अधिक वर्षों से स्वास्थ्य के लिए किया जाता रहा है और पाया गया है कि प्राचीन मिस्री लोग इसका उपयोग करते थे, सिलीमैरिन और सिलीबिन का अर्क होता है, जो कि मिल्क थिसल के फल और बीज का मुख्य सक्रिय घटक है। 

हाल के दिनों में, इस जड़ी-बूटी का उपयोग लोगों ने यकृत के शोथ, फैटी लीवर, कैंसर, और सूत्रण रोग (सिरोसिस) जैसे रोगों में किया है। इसे नियमित रूप से शराब पीने वाले लोगों द्वारा भी यकृत की सुरक्षा के उपाय के रूप में लिया जाता है। 

मिल्क थिसल के निम्नलिखित फायदे भी हैं:

  • शोथ-रोधी गुण (IL-1, IL-6 और TNF को कम करता है)
  • इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाता है (मधुमेह के रोगियों में लाभदायक)
  • कॉलेस्ट्रॉल स्तरों को कम करता है

2003 में Journal of Clinical Gastroenterology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि मिल्क थिसल शराब के अत्यधिक सेवन से उत्पन्न यकृत की क्षति के बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। यही नहीं, 2009 में Journal of Hepatology में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि यक-त के रोग से ग्रस्त लोगों में फाइब्रोसिस पैदा करने के लिए जिम्मेदार कारक को निष्क्रिय कर सकता है और एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडैंट के रूप में काम करता है।

अनुशंसित खुराक: लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार। कैप्सूलों में, अर्क, और चूर्ण के रूप में उपलब्ध।

एकिनेशिया

एकिनेशिया पर्पुरिया एक सारे वर्ष उगने वाली जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग 1,500 से अधिक वर्षों से किया जाता रहा है, और माना जाता है कि उत्तरी अमेरिका के देशज निवासियों ने इसकी खोज की थी। यह पौधा पारंपरिक रूप से अमेरिका में रॉकी पर्वतों के पूर्व में उगता है। 

श्वसन, मूत्र, और त्वचा के संक्रमणों के लिए प्रयुक्त, एकिनेशिया जड़ी-बूटी शक्तिशाली एंटीऑक्सिडैंट गुणों के लिए प्रसिद्ध है। 

2015 में JAMA में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि हालांकि रोकथाम में इससे कोई लाभ नहीं मिलता है, एकिनेशिया का उपयोग आम सर्दी-जुकाम की अवधि को कम कर सकता है। इसके विपरीत, 2016 में Holistic Nurse Practitioner में प्रकाशित एक अध्ययन ने प्रदर्शित किया कि एकिनेशिया सर्दी के वायरस की रोकथाम में मदद करने में कारगर हो सकती है। अन्य अध्ययनों ने भी ऐसे ही निष्कर्ष दर्शाए हैं। 

2016 में Pharmaceutical Biology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि एकिनेशिया शोथ को कम करने और साथ ही रक्त-शर्करा स्तरों को भी कम करने में मदद करने में फायदेमंद हो सकती है, जिससे पूर्व-मधुमेह (प्री-डायबिटीज) और मधुमेह के रोगियों को मदद मिल सकती है। 

अनुशंसित खुराक: इसका सेवन अक्सर चाय के रूप में किया जाता है लेकिन इसे कैप्सूल या अर्क के रूप में भी लिया जा सकता है। एकिनेशिया 400 मिग्रा, प्रतिदिन एक या दो बार।

माका रूट

माका रूट दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतों में, प्राथमिक रूप से पेरू नामक देश में उगाई जाने वाली एक एडैप्टोजेनिक जड़ी-बूटी है। समुद्र के स्तर से 13,000 से 16,000 फुट (4-5 किमी) की ऊंचाईयों पर उगाई जाने वाली, माका रूट का उपयोग इंका लोगों द्वारा कई चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए, लेकिन प्राथमिक रूप से यौनिच्छा और प्रजनन शक्ति को बढ़ाने के लिए एक कामोत्तेजक पदार्थ के रूप में किया जाता था। 

2009 में Andrologia में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि माका रूट का सेवन करने वाले लोगों को सामान्य और यौन सुख की अनुभूति में वृद्धि का अनुभव हुआ, जबकि 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन ने सुझाया कि माका रूट का सेवन शुक्राणुओं की गतिशीलता में वृद्धि करने में मदद कर सकता है। तथापि, ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि यह टेस्टोस्टेरोन या एस्ट्रोजन स्तरों में कोई परिवर्तन करता है। 

2017 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, माका रूट के सक्रिय घटक थकान-रोधी गुणों से भी युक्त हैं, जो कि शायद उपरोक्त निष्कर्षों से संबंधित है। यदि लंबे समय से थकान के लक्षणों से ग्रस्त व्यक्ति माका रूट का नियमित रूप से सेवन करता है तो उसे लाभ मिल सकता है। अन्य अध्ययनों ने दर्शाया है कि माका व्यग्रता और रजोनिवृत्ति से संबंधित लक्षणों में भी सुधार कर सकती है।

2017 में पशु मॉडलों का उपयोग करके किए गए एक अलग अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि माका रूट संधिशोथ से संबंधित दर्द और परिधीय तंत्रिकाविकृति से राहत दिलाने में मददगार हो सकती है, जो मधुमेह या रक्त संचार की खराबी से ग्रस्त लोगों में आम है। 

अनुशंसित खुराक: 1,500 से 3,000 मिग्रा प्रतिदिन या लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार

जिंकगो बिलोबा

यह पेड़ पर उगने वाला पत्ता सबसे अधिक अध्ययन की गई जड़ी-बूटियों में से एक है — 2008 से अब तक इस पर 2,000 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडैंट, जिंकगो बिलोबा को मस्तिष्क को बढ़ावा देने वाले और साथ ही रक्त संचार में सुधार करने वाले गुणों से युक्त मानी जाती है। 

कुछ लोग मानते हैं कि जिंकगो “जीवित जीवाष्म” है और इसे 270 मिलियन वर्ष पुरानी चट्टानों की परतों में पाया गया है। चीन में मूल रूप से पाई जाने वाली यह ज़ड़ी-बूटी अक्सर उन लोगों द्वारा ली जाती है जिन्हें अल्ज़ाइमर्स रोग सहित याददाश्त की समस्याएं होती हैं, और यह मानसिक कुशाग्रता में सुधार कर सकती है। 

2017 में Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि जिंकगो बिलोबा, 200 मिग्रा प्रतिदिन की खुराक पर, मनोभ्रंश से ग्रस्त लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा, 2018 में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि जिंकगो बिलोबा हिप्पोकैम्पस (मस्तिष्क का वह भाग जो लघु-अवधि और दीर्घावधि, दोनों तरह की याददाश्त के निर्माण में शामिल होता है) को ऑक्सीकरण से होने वाली क्षति से बचाने में मदद करती है। 

अंत में, 2015 में प्रकाशित 2,500 से अधिक रोगियों के एक अध्ययन ने दर्शाया कि जिंकगो हृदय रोग - विशिष्ट तौर पर, एंजाइना पेक्टोरिस के रोगियों में फायदेमंद हो सकती है। 

अनुशंसित खुराक: लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार

रोडियोला

रोडियोला (रोडियोला रोज़िया) एक एडैप्टोजेन है, एक जड़ी-बूटी जो कोशिकाओं और अवयवों को ऑक्सीकरण से होने वाली क्षति से बचाने में मदद करती है। एडैप्टोजेन वातावरण की कठिन परिस्थितियों में उगते हैं और उन्हें मौसम के तीव्र उतार-चढ़ावों से स्वयं की रक्षा करनी पड़ती है जिससे वे सहनशील हो जाते हैं। 

अध्ययनों के अनुसार रोडियोला में शोथरोधी, एंटीऑक्सिडैंट, हृदयसंबंधी, तंत्रिकातंत्रीय, और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित लाभ होते हैं। रोडियोला पर पहले प्रकाशित एक लेख में अधिक विस्तार से चर्चा की गई है। 

2016 में प्रकाशित एक लेख में दर्शाया गया कि रोडियोला संभवतः मूड में सुधार कर सकती है और तनाव के समग्र प्रबंधन में फायदेमंद हो सकती है। 

यह जड़ी-बूटी थकान-रोधी प्रभावों से भी युक्त है और शारीरिक सहनशीलता, याददाश्त और रक्तचाप को सुधारने में भी मदद कर सकती है। यह व्यग्रता और अवसाद में भी मदद कर सकती है।

अनुशंसित खुराक: रोडियोला कैप्सूल -- 200 - 500 मिग्रा प्रतिदिन एक या दो बार या लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार। रोडियोला तरल अर्क – लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार।

बेरबेरीन

बेरबेरीन को बारबेरी (बेरबेरिस वल्गैरिस) की झाड़ी से निकाला जाता है, जो सदाबहार और झड़ने वाले, दोनों तरह के पौधों से युक्त होती है। पैदा होने वाली बेरियाँ, जो सारे यूरोप, उत्तर अफ्रीका, मध्य पूर्व, और एशिया में पाई जाती हैं, विटामिन सी का प्रचुर स्रोत हैं। 

बेरबेरीन एक सक्रिय घटक है और इसे हर्बल खाद्य पदार्थ या पूरक के रूप में खाया जा सकता है। इसे वैज्ञानिक अध्ययनों में विभिन्न स्वास्थ्य लाभों से युक्त दर्शाया गया है और पारंपरिक चीनी औषधि शास्त्र (TCM) और आयुर्वेदिक चिकित्सा शास्त्र, जो भारत में विकसित हुई एक चिकित्सा परंपरा है, में इसका आम तौर पर उपयोग किया जाता है।

माना जाता है कि बेरबेरीन रक्त शर्करा को कम कर सकती है और बैक्टीरिया और वायरसों से लड़ सकती है। यह कैंसर की रोकथाम में मदद भी कर सकती है। संक्रामक दस्तों का उपचार करने की इसकी क्षमता के कारण प्राचीन वैद्यों ने भी इसका उपयोग किया है। साथ ही, बेरबेरीन में एंटीऑक्सिडैंट गुण हैं, जो शोथ को कम करने में मदद कर सकते हैं और हृदयवाहिकीय रोग की रोकथाम और उपचार करने में फायदेमंद हो सकते हैं।

मधुमेह सारी दुनिया में लाखों-करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है। 2012 के एक अध्ययन ने दर्शाया कि बेरबेरीन इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम करने में मददगार हो सकती है, जिससे अंततः ग्लुकोज के स्तरों को कम करने में मदद मिलती है। यह मधुमेह की एक लोकप्रिय दवाई, मेटफॉर्मिन के समान ही काम करती प्रतीत होती है। 

बेरबेरीन के कई अतिरिक्त संभावित लाभ हैं। 2015 में Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि बेरबेरीन रक्त शर्करा और कुल कोलेस्ट्रॉल स्तरों को कम करने में मददगार हो सकती है। अध्ययन में एचडीएल (अच्छे) कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि भी पाई गई, जो दिल के दौरों से सुरक्षा से संबद्ध है। वैज्ञानिकों ने यह भी दर्शाया है कि बेरबेरीन पेट में स्वस्थ बैक्टीरिया की वृद्धि को प्रोत्साहित करके पेट के सूक्ष्मजीवियों के लिए लाभों से युक्त हो सकती है।

अनुशंसित खुराक: प्रतिदिन 3 बार तक 500 मिग्रा या लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार।

पाउ डी आर्को

टैबेकुला पेड़ मूल रूप से दक्षिण अमेरिका के अमेजॉन क्षेत्र में पाया जाता है। पाउ डी आर्को नाम मूलतः पुर्तगाली है और इसका मतलब "झुकने वाला पेड़" है। देशज संस्कृतियों में औषधि के रूप में प्रयुक्त, यह पेड़ गुलाबी-बैंगनी फूल देता है और 125 फुट तक बढ़ सकता है। इस पेड़ की लकड़ी का उपयोग पारंपरिक रूप से धनुष बनाने के लिए किया जाता है। पाउ डी आर्को के सक्रिय घटक नैफ्थोक्विनोलोन हैं, जो संभवतः इसके स्वास्थ्य संबंधी गुणों के लिए जिम्मेदार हैं। 

2001 में प्रकाशित एक अध्ययन ने त्वचा पर लगाने पर इसमें कवक-रोधी गतिविधि दर्शाई जबकि 2009 में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि इस जड़ी-बूटी में कवक-रोधी और बैक्टीरिया-रोधी, दोनों प्रकार के लाभ हैं। 

पाउ डी आर्को शोथ से लड़ने में भी उपयोगी हो सकती है। 2008 में Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि यह जड़ी-बूटी संधिशोथ और एथिरोस्क्लेरोसिस में देखे गए शोथ के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है। इसी प्रकार, 2012 में Molecular Medicine Reports में प्रकाशित एक अनुवर्ती अध्ययन ने दर्शाया कि पाउ डी आर्को शोथ-रोधी प्रभावों से युक्त है और शोथ में 50 प्रतिशत तक की कमी करता है। 

चेतावनी: रक्त को पतला करने वाली दवाईयाँ लेने वाले लोगों को पाउ डी आर्को लेने से पहले सावधान रहना चाहिए और अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। अनुशंसित खुराक: लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार। तरल, कैप्सूल या गोलियों के रूप में उपलब्ध। चाय के रूप में भी उपलब्ध। 

हरी चाय

हरी चाय (कैमेलिया सिनेनंसिस) दुनिया में, पानी के बाद, सबसे आम तौर पर पिया जाने वाला पेय पदार्थ है। इसके अलावा, यह संभवतः सबसे स्वास्थ्यप्रद पेय पदार्थों में से एक है। PubMed नामक एक शोध डेटाबेस में खोज करने से पता चलता है कि पिछले 10 से अधिक वर्षों में हरी चाय पर 10,000 से अधिक अध्ययन प्रकाशित किए गए हैं। 

इस चाय की उत्पत्ति हजारों साल पहले चीन में हुई थी। आज, हरी चाय चीन में सबसे ज्यादा उपजाई जाने वाली चाय है और हर वर्ष इसके 1.5 मिलियन टन से अधिक का उत्पादन होता है।

हरी चाय पॉलीफेनॉल नामक एंटीऑक्सिडैंटों, विशिष्ट तौर पर EGCG (एपीगैलोकैटेचिन-3-गैलेट) से प्रचुर होती है। हरी चाय में फ्लैवोनॉइड नामक वनस्पतिक चयापचयी पदार्थ भी मौजूद होते हैं जो, माना जाता है कि, स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, जिनमें क्वेरसेटिन शामिल है। अन्य सक्रिय घटकों में शामिल हैं कैफीन और एल-थियानाइन, जिसे एक नूट्रोपिक (nootropic) माना जाता है, ये मस्तिष्क को लाभ पहुंचाते हैं। 

माना जाता है कि हरी चाय में असंख्य स्वास्थ्य संबंधी लाभ होते हैं जिनमें हृदय को सुरक्षा प्रदान करने और रक्त-शर्करा का नियंत्रण करने से लेकर मस्तिष्क के स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल में सुधार करना शामिल है। कई लोग इसका उपयोग शोथ को कम करने, कैंसर-रोधी गुणों, वज़न कम करने, और सामान्य सुख-चैन के लिए भी करते हैं। 

किए गए अध्ययनों ने विविध प्रकार के लाभ प्रदर्शित किए हैं। 2017 में Phytomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन, जिसमें 21 अन्य अध्ययनों की समीक्षा की गई थी, ने निष्कर्ष निकाला कि हरी चाय व्यग्रता को कम करने और कार्यशील याददाश्त को सुधारने में मदद करती है। इससे पहले 2016 में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि हरी चाय शोथजनक रोगों से ग्रस्त लोगों में जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में मदद कर सकती है। ऐसा ECGC के कारण होता है, जो साइटोकाइन नामक शोथजनक रसायनों के लिए जिम्मेदार जीन/प्रोटीनों का दमन कर सकता है।

साथ ही, 2017 में Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि जो पुरुष हरी चाय (>7 कप प्रतिदिन) का सेवन करते हैं, उनमें प्रॉस्टेट ग्रंथि का कैंसर, जो पुरुषों में दूसरा सबसे आम कैंसर है, विकसित होने का जोखिम कम हो जाता है। 

हरी चाय का सेवन कैप्सूल और चाय के रूप में किया जा सकता है। अनुशंसित खुराक: लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार। 

एल्डरबेरी (सैम्बुकस)

एल्डरबेरी (सैम्बुकस प्रजाति), एक फूल देने वाला पौधा है, जिसका उपयोग विश्वभर की मूल आबादियों द्वारा सैकड़ों वर्षों से औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता रहा है। ब्लूबेरी और क्रैनबेरी जैसे पोषक तत्वों से भरे फलों से अधिक मात्रा में एंटीऑक्सिडैंट, विशिष्ट तौर पर पॉलीफेनॉल (जो इन्हें गहरा रंग देते हैं) से युक्त होने के कारण, हाल के वर्षों में एल्डरबेरी की लोकप्रियता बढ़ गई है। 

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में, एल्डरबेरी का उपयोग जोड़ों और संधिशोथ से संबंधित दर्द के उपचार के लिए किया जाता रहा है। कई लोग इसका उपयोग ऊपरी श्वसन मार्ग के संक्रमणों के लक्षणों का प्रबंधन करने के लिए भी करते हैं। कहा जाता है कि अमेरिका के देशज निवासी भी एल्डरबेरी का उपयोग विभिन्न संक्रमणों और बुखार के उपचार के रूप में करते आए हैं। इसी प्रकार, यूरोप में, औषधीय प्रयोजनों के लिए एल्डरबेरी के फलों का शर्बत बनाया जाता है। 

हाल के वर्षों में एल्डरबेरी पर कई अध्ययन किए गए हैं। यहाँ कुछ निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए हैं:

प्रतिरक्षा प्रणाली: 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि एल्डरबेरी हवाई यात्रियों में सर्दी-जुकाम के लक्षणों को कम कर सकती है जबकि 2009 में Phytochemistry में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया था कि एल्डरबेरी नुस्खे की लोकप्रिय वायरल-रोधी दवाईयों ओसेल्टामिविर (टैमिफ्लू) और एमैंटेडीन के समान ही काम कर सकती है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली की शक्ति को भी बढ़ा सकती है -- 2001 और 2002, दोनों में प्रकाशित अध्ययनों ने दर्शाया था कि एल्डरबेरी प्रतिरक्षा प्रणाली की अनुक्रिया को मजबूत बनाने में लाभदायक है। 

रक्तचाप: 2016 में Pharmaceutical Biology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि एल्डरबेरी उच्च रक्तचाप के प्रबंधन में मददगार हो सकती है, 

शोथ: 2011 में Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि इसका बौनी (dwarf) एल्डरबेरी नामक एक प्रकार चिरकालिक शोथ संबंधी रोगों में TNF-alpha नामक एक रक्त मार्कर के शोथ को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, 2017 में Pharmaceutical Biology में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि एल्डरबेरी का अर्क परीक्षण के प्रतिभागियों में शोथ को कम करने में भी मदद कर सकता है। 

मधुमेह - 2016 में प्रकाशित एक पशुओं के अध्ययन ने भी दर्शाया कि एल्डरबेरी मधुमेह के उपचार में मददगार हो सकती है। 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि एल्डरबेरी मधुमेह-रोधी प्रभाव से युक्त है और इस पर मधुमेह के विरुद्ध लड़ाई में एक "क्रियाशील खाद्य पदार्थ" के रूप में विचार किया जा सकता है। 

अनुशंसित खुराक: एल्डरबेरी चाय, शर्बत, और खराब गले के लिए लॉज़ेंज के रूप में उपलब्ध है। सामान्य स्वास्थ्य संबंधी उपयोग के लिए गमीज़ और कैप्सूलों के रूप में भी उपलब्ध। 

संदर्भ:

  1. Assessing bioflavonoids as regulators of NF-kappa B activity and inflammatory gene expression in mammalian cells. Saliou C, Valacchi G, Rimbach G Methods Enzymol. 2001; 335():380-7
  2. Effect and the probable mechanisms of silibinin in regulating insulin resistance in the liver of rats with non-alcoholic fatty liver. Yao J, Zhi M, Gao X, Hu P, Li C, Yang X Braz J Med Biol Res. 2013 Mar; 46(3):270-7.
  3. Silymarin inhibits the development of diet-induced hypercholesterolemia in rats. Krecman V, Skottová N, Walterová D, Ulrichová J, Simánek V Planta Med. 1998 Mar; 64(2):138-42.
  4. Silymarin retards the progression of alcohol-induced hepatic fibrosis in baboons. Lieber CS, Leo MA, Cao Q, Ren C, DeCarli LM J Clin Gastroenterol. 2003 Oct; 37(4):336-9.
  5. J Hepatol. 2009 Jun;50(6):1102-11.
  6. Karsch-Völk M, Barrett B, Linde K. Echinacea for preventing and treating the common cold. JAMA. 2015;313(6):618–619.
  7. Holistic Nurse Practitioner. 2016 Jan-Feb;30(1):54-7. 
  8. Aarland RC, Bañuelos-Hernández AE, Fragoso-Serrano M, et al. Studies on phytochemical, antioxidant, anti-inflammatory, hypoglycaemic and antiproliferative activities of Echinacea purpurea and Echinacea angustifolia extracts. Pharm Biol. 2017;55(1):649–656.
  9. Andrologia. 2009 Apr;41(2):95-9
  10. Maturitas. 2016 Oct;92:64-69.
  11. Int J Biol Macromol. 2017 Feb;95:1305-1311.
  12. Z Naturforsch C J Biosci. 2017 Oct 26;72(11-12):449-457
  13. J Ethnopharmacol. 2017 Jan 4;195:1-9.
  14. Inflammopharmacology. 2018 Feb;26(1):87-104.
  15. Phytomedicine. 2016 Jun 15;23(7):770-83.
  16. Berberine and its derivatives: a patent review (2009 - 2012). Singh IP, Mahajan S Expert Opin Ther Pat. 2013 Feb; 23(2):215-31
  17. Drug Metab Rev. 2017 May;49(2):139-157.
  18. Berberine improves insulin sensitivity by inhibiting fat store and adjusting adipokines profile in human preadipocytes and metabolic syndrome patients. Yang J, Yin J, Gao H, Xu L, Wang Y, Xu L, Li M
  19. Evid Based Complement Alternat Med. 2012; 2012():363845
  20. Oncotarget. 2017 Sep 11;9(11):10135-10146.
  21. J Ethnopharmacol. 2015 Feb 23;161:69-81.
  22. Modulating gut microbiota as an anti-diabetic mechanism of berberine. Han J, Lin H, Huang W
  23. Med Sci Monit. 2011 Jul; 17(7):RA164-7.
  24. J Ethnopharmacol. 2001 Jun;76(1):93-8.
  25. Bioorg Med Chem. 2009 Sep 1;17(17):6286-91.
  26. J Ethnopharmacol. 2008 Sep 2;119(1):145-52.
  27. Mol Med Rep. 2012 Oct;6(4):791-6.
  28. Phytomedicine. 2017 Oct 15;34:26-37
  29. Antiinflamm Antiallergy Agents Med Chem. 2016;15(2):74-90.
  30. Crit Rev Food Sci Nutr. 2017 May 24;57(8):1631-1637.
  31. Guo Y, Zhi F, Chen P, et al. Green tea and the risk of prostate cancer: A systematic review and meta-analysis. Medicine (Baltimore). 2017;96(13)
  32. Nutrients. 2016 Mar 24;8(4):182. doi: 10.3390/nu8040182.
  33. Phytochemistry. 2009 Jul;70(10):1255-61.
  34. Ho GT, Wangensteen H, Barsett H. Elderberry and Elderflower Extracts, Phenolic Compounds, and Metabolites and Their Effect on Complement, RAW 264.7 Macrophages and Dendritic Cells. Int J Mol Sci. 2017;18(3):584. Published 2017 Mar 8. doi:10.3390/ijms18030584
  35. Eur Cytokine Netw. 2001 Apr-Jun;12(2):290-6.
  36. Isr Med Assoc J. 2002 Nov;4(11 Suppl):919-22.
  37. Pharm Biol. 2016 Dec;54(12):3063-3067. Epub 2016 Jul 14.
  38. Schwaiger S, Zeller I, Pölzelbauer P, et al. Identification and pharmacological characterization of the anti-inflammatory principal of the leaves of dwarf elder (Sambucus ebulus L.). J Ethnopharmacol. 2011;133(2):704-9.
  39. Benevides Bahiense J, Marques FM, Figueira MM, et al. Potential anti-inflammatory, antioxidant and antimicrobial activities of Sambucus australis. Pharm Biol. 2017;55(1):991-997.
  40. Salvador ÂC, Król E, Lemos VC, et al. Effect of Elderberry (Sambucus nigra L.) Extract Supplementation in STZ-Induced Diabetic Rats Fed with a High-Fat Diet. Int J Mol Sci. 2016;18(1):13. Published 2016 Dec 22. doi:10.3390/ijms18010013
  41. J Agric Food Chem. 2017 Apr 5;65(13):2677-2685. 

संबंधित लेख

सभी देखें

तंदुरुस्ती

पोटेशियम के बारे में 5-मिनट में जानें: लाभ, कमी, तथा और बहुत कुछ

तंदुरुस्ती

शीर्ष 10 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और उनके स्वास्थ्य लाभ

तंदुरुस्ती

स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए पेशेवरों की तरफ़ से सबसे उत्तम आदतें