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तंदुरुस्ती

महिलाओं का स्वास्थ्य: प्रोबायोटिक्स और पेट

30 अक्टूबर 2019

एरिक मैड्रिड, एमडी द्वारा

इस लेख में:


यह अनुमान लगाया गया है कि औसत मानव में लगभग 10 ट्रिलियन "मानव कोशिकाएं" होती हैं, लेकिन हम लगभग 100 ट्रिलियन जीवाणुओं की मेजबानी भी करते हैं। इसका मतलब है कि मानव शरीर में मानव कोशिकाओं की तुलना में 10 गुना अधिक जीवाणु और खमीर कोशिकाएं होती हैं। ये खरबों लाभकारी जीवाणु श्वसन पथ, जननांग पथ, और यहां तक कि हमारी त्वचा पर पाए जाते हैं, जहां वे एक महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक भूमिका निभाते हैं, लेकिन अधिकांश आंतों में पाए जाते हैं। इन जीवाणुओं को लाभकारी बनाए रखना अच्छे पेट के स्वास्थ्य को बनाए रखने की कुंजी है और महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए आवश्यक है। 

महिलाओं में सामान्य स्वास्थ्य स्थितियां जो एक अस्वस्थ पेट से प्रभावित हो सकती हैं:

  • अम्ल प्रतिवाह
  • इर्रिटेबल बाउअल सिंड्रोम
  • चिंता
  • अवसाद 
  • वेजिनोसिस 

हम शरीर के लाभकारी जीवाणुओं को कैसे नुकसान पहुँचाते हैं

  • एंटीबायोटिक का उपयोग और अति उपयोग
  • अम्ल को कम करने वाली दवाएं
  • अधिक शर्करा वाला आहार
  • सरल कार्बोहाइड्रेट वाला अधिक आहार
  • संसाधित और जंक फूड्स का सेवन
  • कीटनाशक संपर्क
  • तनाव
  • आसीन जीवन शैली

अपने पेट के स्वास्थ्य में कैसे सुधार करें 

अपने पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हम कई सरल चीजें कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, स्मार्ट भोजन विकल्प (संवर्धित और प्रीबायोटिक खाद्य पदार्थों सहित) लेना और नियमित रूप से व्यायाम करना पेट के स्वस्थ सूक्ष्मजीवों को बनाए रखने में मदद करता है। दैनिक तनाव के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के तरीके खोजने से हमारे पेट को भी लाभ होता है क्योंकि तनाव हार्मोन के ऊंचे स्तर से आंत के लाभकारी जीवाणु मर सकते हैं। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि कम-से-कम 16 घंटों से 48 घंटों या उससे अधिक समय तक उपवास करने से पाचन तंत्र को विराम मिलता है और आंतों की तंदुरुस्ती को बनाए रखने में सहायता मिलती है।

संवर्धित खाद्य पदार्थों और पेय का सेवन करें

  • केफिर पेय (घर में केफिर बनाने के लिए स्टार्टर किट उपलब्ध हैं)
  • सौकरकूट
  • कोम्बुचा चाय
  • किम्ची - कोरिया में एक आम पारंपरिक अतिरिक्त व्यंजन है जिसे नमकीन और किण्वित सब्जियों से बनाया जाता है
  • टेम्पेह - एक संवर्धित सोया उत्पाद 
  • मीसो – एक किण्वित सोयाबीन पेस्ट जिसे पतला करके अक्सर सूप के रूप में पिया जाता है
  • मसालेदार खीरे
  • नाटो – एक पारंपरिक जापानी भोजन जो किण्वित सोयाबीन से बना है   

प्रीबायोटिक्स

प्रीबायोटिक खाद्य पदार्थ एक विशेष प्रकार के कार्बोहाइड्रेट से समृद्ध होते हैं, जिन्हें ओलिगोसेकेराइड्स कहा जाता है (ओलिगो अर्थ "कुछ" और सैकराइड अर्थ "शर्करा")। पेट के स्वस्थ जीवाणु पेट के सूक्ष्मजीवों की विविधता को सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए इन विशेष शर्करा को खाते हैं। संक्षेप में, अपने खुद के प्रीबायोटिक या लाभकारी जीवाणु बनाने के लिए ओलिगोसेकेराइड्स शरीर का “भोजन” बनते हैं। प्रीबायोटिक पूरक पेट के स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद कर सकते हैं ।

चिकित्सा स्थितियां जिनमें स्वस्थ पेट से लाभ मिलता है

पाचन संबंधी समस्याएं 

दो हजार साल पहले, हिप्पोक्रेट्स ने उपदेश दिया कि सभी रोग पेट से शुरू होते हैं। आज, हम इस प्राचीन चिकित्सक की सच्चाई का एहसास कर रहे हैं। आम पाचन संबंधी समस्याएं जिनका सामना महिलाएं करती हैं उनमें अम्ल प्रतिवाह, सूजन, कब्ज, दस्त, और कभी-कभी बृहदांत्रशोथ, समग्र बृहदान्त्र सूजन शामिल हैं। पाचन संबंधी समस्याओं वाले लोगों में अक्सर चिंता, अवसाद, आवर्तक संक्रमण और यहां तक कि ऑटो-इम्यून स्थितियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। 

अपच

अपच पेट का एक असहज एहसास है जिसका अनुभव कई महिलाएं रोजाना करती हैं। यह अपच, ख़राब पेट, अम्ल प्रतिवाह, या GERD (गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स के रूप में भी जाना जाता है) से जुड़ा हो सकता है, जिससे पेट में और कुछ मामलों में गले में अम्ल जैसी जलन हो सकती है। अपच, गैस्ट्रिटिस, पेट की सूजन के कारण भी हो सकती है। प्रीबायोटिक से फायदा हो सकता है।

अपच के लक्षण:

  • पेट दर्द या पेट भरा हुआ लगना
  • पेट फूलना
  • गले में जलन महसूस होना
  • तीव्र या पुरानी खांसी
  • अस्थमा के लक्षण (फेफड़ों में अम्ल की फुहार के कारण)

वर्ष 2018 के एक डबल-ब्लाइंड, यादृच्छिक, प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन से पता चला कि प्रोबायोटिक, बिफीडोबैक्टीरियम पेट से संबंधित लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकता है जबकि 2015 के अध्ययन में इसी तरह के निष्कर्ष सामने आए थे। वर्ष 2007 के एक अध्ययन से पता चला है कि किण्वित दूध, जिसे केफिर भी कहा जाता है, अल्सर पैदा करने वाले बैक्टीरिया, एच. पाइलोरी वाले लोगों में अम्ल प्रतिवाह के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। 

इर्रिटेबल बाउअल सिंड्रोम

IBS या इर्रिटेबल बाउअल सिंड्रोम पुरुषों की अपेक्षा अक्सर महिलाओं को प्रभावित करता है। IBS को आमतौर पर पेट में दर्द, ऐंठन और सूजन से वर्णित किया जाता है। कई पीड़ितों में कब्ज, दस्त या दोनों के संयोजन के लक्षण भी हो सकते हैं। 

IBS वाले लोगों में अक्सर रिसती हुई आंत और कई खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता होती है। IBS वाले लोगों में आम तौर पर तब सुधार होता है जब वे उन खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं जिनसे इसके होने की संभावना होती है। IBS उकसाने वाले आम खाद्य पदार्थों में डेयरी उत्पाद, गेहूं- या ग्लूटेन युक्त उत्पाद, सोया, मक्का और कभी-कभी कृत्रिम मिठास शामिल होते हैं।  अगर IBS उकसाने वाले खाद्य पदार्थों का परहेज करने से कोई मदद नहीं मिलती है तो, प्रोबायोटिक्स से फायदा हो सकता है। 

मनोवैज्ञानिक स्थितियां जिनमें स्वस्थ पेट से लाभ मिलता है

चिंता

सामान्य चिंता दुनिया भर में 100 मिलियन से अधिक महिलाओं को प्रभावित करती है। कई महिलाओं में, लक्षण कमजोरी लाने वाले हो सकते हैं। सामान्य लक्षणों में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, स्मृति समस्याएं, लगातार चिंता और नींद न आना शामिल हैं। यह चिंता के लक्षण वाले व्यक्तियों में असामान्य बात नहीं है कि उनमें अवसाद के लक्षण भी हो सकते हैं। एक तीव्र चिंता हमले के दौरान, लक्षण गंभीर और बेहद डरावने हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई महिलाएं आपातकालीन कक्ष तक पहुँच सकती हैं. 

घबड़ाहट हमले के लक्षण:

  • छाती में दर्द
  • दिल की घबराहट
  • सांस लेने में तकलीफ
  • हाथों और कभी-कभी पैरों में मांसपेशियों में ऐंठन होना
  • बर्बाद होने का भाव

न्यूजीलैंड के 2017 के एक अध्ययन से पता चला है कि लैक्टोबेसिलस स्ट्रेन प्रसवोत्तर चिंता के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकती है, एक बीमारी जो आमतौर पर नवजात शिशुओं वाली महिलाओं को प्रभावित करती है। 

वर्ष 2019 के एक डबल-ब्लाइंड, प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण ने प्रोबायोटिक्स के प्रभावों और केवल चिंता के लिए चिंता की दवा का अध्ययन किया। परिणामों से पता चला कि जिन लोगों ने प्रोबायोटिक्स और दवा ली, उनमें प्रोबायोटिक न लेने वालों की तुलना में कम चिंता लक्षण थे। 

अवसाद

अवसाद एक मनोदशा विकार है जो जीवन में उदासी और खुशी की कमी से जुड़ी है। यह इतना कमजोर करने वाली हो सकता है कि यह सामाजिक निर्लिप्तता, मादक द्रव्यों का सेवन और यहां तक कि आत्महत्या का कारण बन सकता है। दुनिया भर में, लाखों महिलाएं इससे प्रभावित हैं—यह किसी भी उम्र में और किसी भी सामाजिक/आर्थिक वर्ग में हो सकता है। अक्सर, अवसाद दर्दनाक बचपन या नकारात्मक वयस्क अनुभवों से उपजा होता है, जिसके परिणामस्वरूप अनसुलझे और मुश्किल से सामना करने वाली समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, कभी-कभी अवसाद किसी स्पष्ट कारण के बिना हो सकता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कारण क्या है, एक स्वास्थ्य पेशेवर से मार्गदर्शन लेने की सलाह दी जाती है। 

आहार, पेट का स्वास्थ्य, और रिसती हुई आंत की मरम्मत महिलाओं को भावनात्मक चिंताओं को बेहतर महसूस करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। American Journal of Clinical Nutrition में वर्ष 2015 के एक अध्ययन से पता चला है कि रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में उच्च शर्करा वाले आहार का सेवन करने से अवसाद का खतरा बढ़ गया था। हम जानते हैं कि अतिरिक्त शर्करा हानिकारक जीवाणुओं के विकास को बढ़ावा देते हुए पेट के स्वस्थ जीवाणुओं को दबा सकती है। वर्ष 2002 के एक अध्ययन ने उच्च शर्करा के सेवन और अवसाद की शुरुआत के बीच संबंध का भी समर्थन किया। अंत में, वर्ष 2014 के एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि मीठा सोडा युक्त पेय, जिसमें डायट सोडा शामिल है, के सेवन से अवसाद का खतरा बढ़ गया जबकि कॉफी के सेवन से अवसाद का खतरा कम हो गया।

Nutrition में वर्ष 2016 के डबल-ब्लाइंड, प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन से पता चला है किप्रोबिओटिक्स प्लेसिबो की तुलना में अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। Nutrients में वर्ष 2016 के मेटा-विश्लेषण अध्ययन ने अवसाद के लक्षणों को कम करने में प्रोबायोटिक्स के लाभ का प्रदर्शन भी किया। न्यूजीलैंड के वर्ष 2017 के एक अध्ययन से पता चला है कि लैक्टोबैसिलस स्ट्रेन प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकती है।

योनि स्वास्थ्य में स्वस्थ पेट से लाभ मिल सकता है

महिलाएं योनि के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली विभिन्न बीमारियों से प्रभावित हो सकती हैं। इनमें खमीर संक्रमण और, अक्सर, बैक्टीरियल वेजिनोसिस, योनि डिस्बिओसिस की स्थिति शामिल हो सकती है। ये स्थितियाँ उनकी किशोरावस्था और बाद में महिलाओं को प्रभावित कर सकती हैं.

स्वस्थ जीवाणुओं में असंतुलन होने पर महिलाओं में खमीर संक्रमण आम है, जिसके परिणामस्वरूप कैंडिडा अल्बिकन्स नामक कवक की अतिवृद्धि होती है। लक्षणों में योनि की खुजली, लालिमा, जलन और सफेद रिसाव शामिल हैं। एंटीबायोटिक के उपयोग के बाद और उच्च शर्करा वाले आहार और/या मधुमेह वाले लोगों में, योनि खमीर संक्रमण चार में से तीन महिलाओं को उनके जीवनकाल में कम-से-कम एक बार प्रभावित करेगा।  

बैक्टीरियल वेजिनोसिस तब होता है जब एक विशिष्ट जीवाणु, गार्डनेरेला वेजिनालिस, योनि नलिका में फैल जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि प्रोबायोटिक सैकरोमायसिस सेरेविसिए सैकरोमायसिस बौलार्दी जब मौखिक रूप से लिया जाता है, तो इनसे योनि स्वास्थ्य में लाभ हो सकता है और ये बैक्टीरियल वेजिनोसिस संक्रमण को रोकने में मदद कर सकते हैं। 2014 के एक अध्ययन के अनुसार लैक्टोबैसिलस प्रोबायोटिक्स के स्ट्रेन भी सहायक हैं, जबकि 2014 के एक अन्य अध्ययन में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए प्रोबायोटिक लाभों का समर्थन किया गया था और निष्कर्ष निकाला गया था कि किसी भी प्रकार के नुकसान की पहचान नहीं की गई थी।    

संदर्भ:

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