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बीमारियाँ

व्यग्रता से राहत पाने के 9 प्राकृतिक तरीके

11 नवंबर 2019

एरिक मैड्रिड एमडी द्वारा

इस लेख में:


विश्व भर में लाखों लोग व्यग्रता से ग्रस्त हैं। यह कई रूपों में कई अलग-अलग लक्षणों और तीव्रताओं के साथ प्रकट हो सकती है। यह आम तौर पर देखा जाता है कि रोगी छाती में दर्द, सिरदर्द, पेट दर्द, या दिल के तेजी से धड़कने की शिकायत लेकर आपात्कालीन कक्ष में आते हैं और जाँच के बाद पता चलता है कि वे व्यग्रता के लक्षणों से ग्रस्त हैं।

व्यग्रता भय, अत्यधिक चिंता, और घबराहट की अनुभूतियाँ उत्पन्न कर सकती है -- जो आम तौर पर इतनी शक्तिशाली होती हैं कि व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों में खलल पड़ने लगता है। इसके आम लक्षण शरीर के विभिन्न भागों में, दिल और मांसपेशियों से लेकर आंत्र पथ इत्यादि में दिखाई दे सकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपके लक्षण व्यग्रता से संबद्ध हैं, तब भी आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अधिक गंभीर चिकित्सीय मुद्दा तो इसका कारण नहीं है। 

कई लोग दीर्घकालिक व्यग्रता को नियंत्रित करने, या संभावित रूप से, व्यग्रता के तीव्र दौरे से राहत पाने में मदद के लिए नुस्खे की दवाईयों का सहारा लेते हैं। मददगार होने पर भी, नुस्खे की दवाई हमेशा ही इसका इलाज नहीं होती है और उसका उपयोग अत्यंत सावधानी से -- और केवल किसी डॉक्टर की लगातार देखभाल के अंतर्गत ही करना चाहिए। 

व्यग्रता का उपचार करने के लिए प्रयुक्त दवाईयाँ

उपयोग की जाने वाली नुस्खे की दवाईयों के दो मुख्य वर्ग हैं। 

पहले वर्ग का नाम बेंज़ोडायज़ेपाइन्स है, जिनमें अल्प्रैज़ोलैम (जैनेक्स), लोरज़ेपाम (एटीवान), और डायज़ेपाम (वैलियम) शामिल हैं। सामान्य तौर पर जरूरत के अनुसार प्रयुक्त, ये दवाईयाँ, 2014 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मनोभ्रंश के विकसित होने के बढ़े हुए जोखिम से संबद्ध पाई गई हैं। इस वर्ग की औषधियों से होने वाली अन्य आम प्रतिक्रियाओं में लत पड़ जाना, थकान, विभ्रम, अवसाद, चक्कर आना, और भुलक्कड़पन शामिल हैंष जोखिमों के बावजूद, उनका उपयोग करना कभी-कभी काफी उपयुक्त होता है।

दवाईयों का दूसरा वर्ग है सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (जिन्हें SSRIs भी कहते हैं)। इन दवाईयों में सेर्ट्रालीन (ज़ोलॉफ्ट), सिटैलोप्रैम (सेलेक्सा), फ्लुऑक्सेटीन (प्रोज़ैक), और एसिटैलोप्रैम (लेक्साप्रो) इत्यादि शामिल हैं। हालांकि ये कई लोगों के लिए मददगार और जीवन को बदलने वाली होती हैं, ये दवाईयाँ कुछ लोगों में चिंताजनक दुष्प्रभाव भी पैदा कर सकती हैं, जिनमें थकान, बेचैनी, चक्कर आना, और यौनिच्छा में कमी शामिल हैं। दुर्लभ और गंभीर दुष्प्रभावों में सेरोटोनिन सिंड्रोम और आत्महत्या करने के जोखिम में वृद्धि शामिल हो सकते हैं। 

व्यग्रता से ग्रस्त कई लोग इन दवाईयों से बचने का चुनाव करते हैं और अधिक प्राकृतिक विकल्प की तलाश करते हैं। तथापि, यदि आप कोई नुस्खे की दवाई ले रहे हैं, तो आपको उसे रोकने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दवाई को रोकने से होने वाले लक्षण पैदा हो सकते हैं।

यहाँ कुछ प्राकृतिक विकल्प दिए गए हैं जिन पर विचार किया जा सकता है।

ब्लैक काहौश

ब्लैक काहौश की खोज और उपयोग मूल अमेरिकियों ने 300 से अधिक वर्ष पहले किया था। ब्लैक काहौश एक ऊँचा, फूल देने वाला पौधा है जो बड़ा होने पर घना, छायादार वृक्ष बन जाता है, बटरकप परिवार का हिस्सा है। आज, ब्लैक काहौश का उपयोग अमेरिका में आम तौर पर किया जाता है और यूरोप में भी वे लोग व्यापक रूप से इसका उपयोग करते हैं जो स्त्रियों की आम स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे हॉट फ्लैश और व्यग्रता के उपचार के लिए अधिक प्राकृतिक तरीका चाहते हैं। 

ब्लैक काहौश को स्त्रियों में व्यग्रता के लक्षणों को कम करते दर्शाया गया है। 2007 में किए गए एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि ब्लैक काहौश व्यग्रता और अवसाद से ग्रस्त लोगों की उल्लेखनीय मदद करता है। 2011 में स्तन कैंसर के इतिहास वाली स्त्रियों, जिनका उपचार टैमॉक्सिफेन नामक औषधि से किया जा रहा था, के एक अध्ययन ने दर्शाया कि ब्लैक काहौश व्यग्रता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है, जो कि गहन चिकित्सीय उपचार प्राप्त करने वाले लोगों में आम है। 2018 में किए गए एक अध्ययन ने भी व्यग्रता के लक्षणों के लिए इसके उपयोग का समर्थन किया। अनुशंसित खुराक: लेबल पर दिए निर्देश के अनुसार।

लेमन बाम

लेमन बामलाखों लोगों द्वारा प्रयुक्त एक लोकप्रिय जड़ी-बूटी है। वैज्ञानिक इसे "मेलिस्सा ऑफिसिनैलिस" ("मेलिस्सा" शब्द एक यूनानी शब्द से आया है जिसका अर्थ "मधुमक्खी" है) कहकर बुलाते हैं, लेकिन इसके और भी कई नाम हैं, जिनमें "नेक्टर ऑफ लाइफ", "क्यूर ऑल", "बाम मिंट", "स्वीट मेरी" या केवल "हनी प्लांट" शामिल हैं।

लेमन बाम मिंट परिवार का सदस्य है और मूल रूप से यूरोप में पाया जाता है। इसका रंग चमकीला हरा होता है और इसके पत्ते छोटे, दिल की आकृति के होते हैं जिन पर पुदीने के पत्तों के जैसी आकृति वाले सफेद और पीले फूलों के गुच्छे लगते हैं।

लेमन बाम को एक शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है और इसका उपयोग औषधीय उद्देश्यों के लिए 500 से भी अधिक वर्षों से किया जा रहा है।  

यह दर्शाने वाले कई अध्ययन उपलब्ध हैं कि लेमन बाम व्यग्रता के लक्षणों को कम कर सकता है। यह माना जाता है कि लेमन बाम मस्तिष्क के एक रसायन, GABA (गामा, अमाइनोबुटाइरिक एसिड) को बढ़ाने में मदद करता है। यह रसायनिक पथ व्यग्रता के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कुछ नुस्खे की दवाईयाँ का वास्तव में लक्ष्य होता है। फिजियोथेरेपी रिसर्च में 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन ने GABA पथों पर लेमन बाम के प्रभावों का विश्लेषण किया और पाया कि यह जड़ी-बूटी व्यग्रता के उपचार में मदद कर सकती है।

2016 में प्रकाशित एक लेख में भी लेमन बाम की रचना करने वाले यौगिकों का करीब से अध्ययन किया और निष्कर्ष निकाला कि वह GABA को प्रेरित करने वाले ग्राहियों से युक्त है। एक और अध्ययन ने दर्शाया कि लेमन बाम में रॉसमैरिनिक एसिड की उपस्थिति व्यग्रता के लक्षणों को कम करने में मदद करने के लिए जिम्मेदार है। 

कुल मिलाकर, ये शोध अध्ययन दर्शाते हैं कि लेमन बाम व्यग्रता का उपचार करने के एक सुरक्षित और कारगर स्रोत के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अपने डॉक्टर से परामर्श किए बिना लेमन बाम को व्यग्रता की दवाईयों के साथ संयोजित मत करें। 

ओमेगा–3 वसा अम्ल

ओमेगा-3 वसा अम्ल PUFAs या पॉलीअनसैचुरेटेड वसा अम्लों के नाम से भी जाने जाते हैं। वे मानव स्वास्थ्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके, खास तौर पर मस्तिष्क और दिल के लिए असंख्य लाभ हैं।

2011 में मेडिकल छात्रों के एक अध्ययन ने दर्शाया कि ओमेगा-3 वसा अम्ल व्यग्रता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। अड़सठ छात्रों को दो समूहों में बाँटा गया। एक समूह को ओमेगा-3 वसा अम्ल और दूसरे को एक प्लेसिबो दिया गया। ओमेगा-3 वसा अम्ल लेने वाले छात्रों को उसे न लेने वाले लोगों की तुलना में 20 प्रतिशत कम व्यग्रता हुई। उन्हें कोई उल्लेखनीय दुष्प्रभाव नहीं हुए। 

2018 में JAMA में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण, जिसमें 11 देशों से 2240 सहभागी शामिल थे, निष्कर्ष निकाला कि ओमेगा-3 वसा अम्ल नैदानिक व्यग्रता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। अन्य अध्ययनों ने भी ऐसे ही निष्कर्षों की सूचना दी। अनुशंसित खुराक: 1,000 से 4,000 मिग्रा प्रति दिन। 

प्रोबायोटिक्स

प्रोबायोटिक्स वे लाभदायक बैक्टीरिया हैं जिन्हें आंतों में स्वस्थ जीवाणुओं को कायम रखने के लिए खाया जाता है। वे पेट के फूलने, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम, या बृहदांत्र की जलन से ग्रस्त लोगों में मददगार साबित हो सकते हैं। एसिड रेड्यूसर्स लेने वाले, या एंटीबायोटिक उपचार करवाने वाले लोगों को भी लाभ हो सकता है क्योंकि ये दवाईयाँ आंतों के स्वस्थ वातावरण को भंग कर सकती हैं। 

2019 में किए गए एक अध्ययन में व्यग्रता की दवाई और प्रोबायोटिक लेने वाले लोगों की तुलना केवल व्यग्रता-रोधी दवाई और प्लेसिबो लेने वाले लोगों से की गई। प्रोबायोटिक लेने वाले लोगों को दूसरे समूह की तुलना में व्यग्रता के कम लक्षण हुए। 2019 में किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि प्रोबायोटिक पूरक भी व्यग्रता के लक्षणों को नियंत्रित करने में ऐसे ही लाभ देते हैं। शोध की एक बड़ी मात्रा ने दर्शाया है कि किसी भी व्यक्ति की समग्र तंदुरुस्ती के लिए पेट का स्वस्थ होना महत्वपूर्ण है। 

माका रूट (लेपिडियम मेयेनाई)

माका रूट एक एडैप्टोजेनिक जड़ी-बूटी है जिसकी खेती दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतों में की जाती है। यह समुद्र के स्तर से 13,000 से 16,000 फुट (4-5 किमी) की ऊँचाई पर उगती है। माका का उपयोग इन्का जाति के लोग हजारों वर्षों से कर रहे हैं और माना जाता है कि इसके कई औषधीय लाभ हैं। इन्का जाति के लोग इसका उपयोग प्राथमिक रूप से यौनिच्छा और प्रजनन शक्ति को बढ़ाने के लिए करते हैं। तथापि, आधुनिक चिकित्सा शास्त्र ने पाया है कि यह व्यग्रता और अवसाद से ग्रस्त लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। 

2008 में रजोनिवृत्ति पर किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि 3.5 ग्राम (3,500 मिग्रा) माका रूट प्रति दिन लेने वाली स्त्रियों में प्लेसिबो गोली लेने वाली स्त्रियों की तुलना में व्यग्रता और अवसाद से संबंधित लक्षणों में कमी हुई। 2015 के एक अध्ययन में भी व्यग्रता से ग्रस्त लोगों में माका के लाभों की सूचना दी। अनुशंसित खुराक: लेबल पर की गई अनुशंसा के अनुसार।

रोडियोला (रोडियोला रोसिया)

रोडियोला एक एडैप्टोजेन है जो असंख्य स्वास्थ्य लाभों से युक्त प्रतीत होता है। प्राचीन वैद्यों द्वारा हजारों वर्षों से प्रयुक्त, रोडियोला, अन्य एडैप्टोजेन्स की तरह, एक जड़ी-बूटी है जो कोशिकाओं और ऊतकों की ऑक्सिडेटिव तनाव और रोजमर्रा के जीवन के कारण होने वाले नुकसान से रक्षा करने में मदद करती है। क्योंकि एडैप्टोजन चुनौतीपूर्ण जलवायु स्थितियों और मौसम के भीषण परिवर्तनों में उगते हैं, वे स्वयं की रक्षा करना सीखते हैं और उनका उपभोग करने वाले लोगों को अपने गुणों को स्थानांतरित करते हैं। 

2012 में किए गए एक अध्ययन ने प्रदर्शित किया कि रोडियोला को एक पूरक के रूप में लेने पर तनाव के स्तर कम करने में मदद मिल सकती है। 2016 में फाइटोमेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि रोडियोला अवसाद से ग्रस्त लोगों के लिए कारगर उपचार हो सकता है। 2015 में डॉ. मार्क क्रॉपले द्वारा किए गए एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि रोडियोला के प्रयोक्ताओं ने "....14 दिनों पर स्वतः सूचित व्यग्रता, तनाव, क्रोध, विभ्रम और अवसाद में उल्लेखनीय कमी और समग्र मनोदशा में उल्लेखनीय सुधार दर्शाए।"

अंत में, 2018 में गट पैथोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि रोडियोला पेट के सूक्ष्मजीवियों पर लाभदायक प्रभाव डालता है, जिससे व्यग्रता के लक्षणों में मदद करने के उसके लाभों की संभवतः व्याख्या की जा सकती है। 

ेनवलेरियन रूट

वलेरियन रूट एक प्राचीन जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग हजारों वर्षों से व्यग्रता के लक्षणों से राहत दिलाने के लिए किया जा रहा है। 2012 में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि वलेरियन रूट व्यग्रता को नियंत्रित करने में मददगार हो सकती है जबकि 2019 के एक अध्ययन ने भी व्यग्रता के लक्षणों को नियंत्रित करने में इसकी उपयोगिता दर्शाई। अनुशंसित खुराक: लेबल पर दिए निर्देश के अनुसार।

सुगंधित तेल और व्यग्रता

मानव सभ्यता की शुरुआत से, लोगों ने कई बीमारियों का उपचार करने में सुगंधित तेलों के लाभ को समझा है। प्राचीन मिस्र के लोग रस्मी उत्सवों और शव-परिरक्षण की प्रक्रिया में उनका उपयोग करते थे।

इन तेलों को बहुमूल्य माना जाता था और अक्सर इत्रों के रूप में प्रयोग किया जाता था, उपहारों के रूप में दिया जाता था, और एक प्रकार की मुद्रा के रूप में विनिमय भी किया जाता था। पिछले कुछ वर्षों में, कई लोगों ने कुछ सुगंधित तेलों को, जिनमें कैमोमाइल, चकोतरा, और लैवेंडर शामिल हैं, व्यग्रता के लक्षणों को कम करने में लाभदायक पाया है। इन तेलों को त्वचा पर लगाया जा सकता है या विसारक में रखा जा सकता है।

 चाय और व्यग्रता

व्यग्रता के लक्षणों से ग्रस्त लोगों के लिए गर्म चाय का एक कप पीना भी लाभदायक सिद्ध हो सकता है। व्यग्रता का उपचार करने वाली छह शीर्ष चायों में शामिल हैं कैमोमाइल, लैवेंडर, कावा, पेपरमिंट, जिन्सेंग और लेमन बाम।

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