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महिलाओं के आम स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति एक प्राकृतिक दृष्टिकोण

एरिक मैड्रिड, एमडी द्वारा

इस लेख में:


ऑटो-इम्यून रोग, व्यग्रता, अवसाद, हृदय रोग, कमज़ोर हड्डियाँ, और पाचन की चुनौतियाँ वे आम बीमारियाँ हैं जिनके होने का जोखिम दुनिया की अधिकतर महिलाओं को है। आहार और जीवनशैली के परिवर्तन उस जोखिम -- और महिलाओं के जीवन की समग्र गुणवत्ता के सामने उससे होने वाली दीर्घावधि समस्याओं को कम करने में बहुत मदद कर सकते हैं।

हम इन आम रोगों पर चर्चा करेंगे और स्वास्थ्य को सही रूप में रखने में महिलाओं की मदद करने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रदान करेंगे। निम्नलिखित आम रोग महिलाओं को प्रभावित करते हैं।

ऑटो-इम्यून रोग

पिछली शताब्दी में, ऑटो-इम्यून रोग अधिक आम हो गए हैं। कई लोग मानते हैं कि इसका एक कारण एंटीबायोटिक्स का उपयोग और अति-उपयोग तथा पेट के लाभदायक जीवाणुओं, या माइक्रोबायोम पर उनका गलत प्रभाव हो सकता है। संक्षेप में कहें तो, हो सकता है कि हमने कुछ संक्रामक रोगों के बदले ऑटो-इम्यून रोगों को पाल लिया है। ऑटो-इम्यून रोग तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के विशिष्ट भागों पर, गलती से, हमला करने लगती है।

आम ऑटोइम्यून रोगों में लूपस, रुमेटॉइड आर्थ्राइटिस, जोग्रेन्स सिंड्रोम, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 मधुमेह इत्यादि शामिल हैं।

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समस्या प्रतिरक्षा प्रणाली के "व्याकुल" होने के परिणामस्वरूप शुरू होती है। जब प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य रूप से काम करती है, तब वह उसे पता चलने वाले हानिकारक जीवाणुओं, कवक, वायरसों, या विदेशी प्रोटीनों पर हमला करती है। इसे प्रतिरक्षा अनुक्रिया कहते हैं, और यह शरीर को संक्रमण से सुरक्षित करती है। तथापि, कभी-कभी, प्रतिरक्षा प्रणाली से गलती हो जाती है और वह ऐसे एंटीबॉडी बनाती है जो स्वयं शरीर पर हमला करते हैं। इसके परिणामस्वरूप ऑटो-इम्यून रोग होते हैं। 

ऑटो-इम्यून रोगों से ग्रस्त कई लोगों की आंतें अधिक पारगम्य होती हैं, जिसे आम तौर पर लीकी गट (रिसती हुई आंतें) कहते हैं, जिसके बारे में मैंने एक पहले वाले लेख में अधिक विस्तार से लिखा है। अपने पेट के स्वास्थ्य को अच्छी हालत में रखना न केवल लीकी गट की रोकथाम के लिए बल्कि उसके परिणामस्वरूप हो सकने वाले इम्यून रोगों के उपचार में भी महत्वपूर्ण है। आहार में परिवर्तन और खाद्य पदार्थों की एलर्जी से बचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

पेट को वापस नीरोग बनाने और शारीरिक शोथ को कम करने वाले पूरक

व्यग्रता

व्यग्रता विश्व-भर में लाखों-करोड़ों महिलाओं को प्रभावित करती है। व्यग्रता विविध प्रकार के संकेतों और लक्षणों में से किसी के साथ भी प्रकट हो सकती है जिसके कारण इससे प्रभावित लोगों का रोजमर्रा का जीवन एक चुनौती बन जाता है। दीर्घकालिक व्यग्रता के लक्षणों में अनिद्रा, एकाग्र होने में कठिनाई, बेचैनी, सतत चिंता, और थकान शामिल हैं। तीव्र व्यग्रता या आतंक के दौरे के दौरान, आपको हृदय की तेज धड़कन, मांसपेशी में ऐंठन, सांस लेने में कठिनाई और कभी-कभी सीने में दर्द या दबाव का अनुभव हो सकता है। अक्सर, अवसाद के लक्षण भी व्यग्रता के लक्षणों के साथ ही आते हैं।

कई लोग अपने व्यग्रता के लक्षणों से पार पाने के लिए नुस्खे की दवाईयों का सहारा लेते हैं। आम तौर पर प्रयुक्त व्यग्रता की दवाईयों में अल्प्रैज़ोलैम (जैनैक्स), लोराज़ेपाम (एटीवान), और डायज़ेपाम (वैलियम) शामिल हैं। हालांकि वे लघु अवधि में उपयोगी होती हैं, 2014 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वे मनोभ्रंश के विकसित होने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। फलस्वरूप, उनका उपयोग कम से कम करें या हो सके तो उनसे बचें। अपनी दवाई की दिनचर्या को बदलने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। 

दीर्घकालिक व्यग्रता में संभावित रूप से लाभदायक दवाईयों में सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इन्हिबिटर्स या SSRIs शामिल हैं। इनमें सिटैलोप्रैम, एसिटैलोप्रैम, फ्लुऑक्सेटीन, पैरॉक्सेटीन, सेर्ट्रालीन इत्यादि शामिल हैं। मोटे तौर पर, ये दवाईयाँ काफी हद तक सुरक्षित हैं। तथापि, कुछ लोग इनसे बचना पसंद करते हैं जबकि अन्य लोग इन्हें किसी हर्बल पूरक या विटामिन के संयोजन में लेते हैं। 

व्यग्रता के लिए प्राकृतिक उपचार 

अवसाद

अवसाद से ग्रस्त अधिकतर लोग किसी लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक या पेशवर से दुर्लभ रूप से ही उपचार करवाते हैं। अवसाद से ग्रस्त लोगों को अक्सर सोने में कठिनाई, गतिविधियों में दिलचस्पी में कमी, अपराध बोध, ऊर्जा की कमी और एकाग्र होने में मुश्किल होती है। अवसाद से ग्रस्त लोग काम भी धीरे-धीरे करते हैं और कभी-कभी उन्हें आत्महत्या करने के विचार भी आते हैं। 

अध्ययनों के अनुसार, जो महिलाएं अपने मूड को सुधारना चाहती हैं, उन्हें स्वस्थ सुसंतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। अध्ययन दर्शाते हैं कि नियमित व्यायाम और घर के बाहर समय बिताना भी उदास मूड को ठीक करने में लाभदायक होता है। 

अवसादग्रस्त होने पर, आपको अपने निजी चिकित्सक से उपचार करवाना चाहिए। अध्ययनों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अवसाद के लिए नुस्खे की दवाईयाँ ले रहा है, तो पूरकों को साथ में लेने से उनके प्रभाव में सकारात्मक वृद्धि हो सकती है। 

नुस्खे की आम दवाईयों में सिटैलोप्रैम, एसिटैलोप्रैम, फ्लुऑक्सेटीन, पैरॉक्सेटीन, सेर्ट्रालीन, बुप्रोपियॉन आदि शामिल हैं। कुछ लोगों को, व्यक्तिगत जरूरतों पर निर्भर करते हुए, दो या तीन पूरकों का संयोजन सबसे अधिक कारगर लग सकता है।

अवसाद के लिए अक्सर लिए जाने वाले पूरक

हृदयवाहिकीय रोग 

विश्व भर में, हृदय रोग लाखों-करोड़ों महिलाओं को प्रभावित करता है। विश्व भर में, 3 में से 1 महिला की मृत्यु हृदय रोग या मस्तिष्काघात से होगी। पारंपरिक रूप से, यह माना जाता है पुरुषों को हृदय रोग होने की अधिक संभावना होती है लेकिन सबूत दर्शाते हैं कि महिलाओं को भी लगभग इतना ही जोखिम होता है। तथापि, कई डॉक्टर महिलाओं में हृदय रोग के लक्षणों को पहचानने में देर कर देते हैं क्योंकि वे पुरुषों से अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य सेवा अधिकारी इस विसंगति को दूर करने के लिए स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को शिक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।. 

अधिकांश रोगों की तरह, रोकथाम सर्वश्रेष्ठ तरीका है। धूम्रपान न करने, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने, शरीर के वज़न को कम रखने और संतुलित आहार खाने जैसी सरल आदतें उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं। रक्तचाप और शर्करा के स्तरों को नियंत्रित रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

हृदय को स्वस्थ रखने वाले आहार विकल्प

  • नारियल का तेल – उच्च तापमानों पर खाना पकाने के लिए आदर्श
  • आहारीय लिग्नैन्स – जो अलसी के बीज, ग्रीन टी और स्ट्राबेरी
  • में पाए जाते हैं
  • ग्रीन टी – हृदय के लिए लाभदायक
  • मछली – जंगली (फार्म में पाली गई नहीं) मछली खाएं, लेकिन पारे के संभावित संदूषण के कारण प्रति सप्ताह एक बार से अधिक नहीं (कम पारे वाली मछलियों में शामिल हैं, ट्राउट, व्हाइटफिश, सामन, एंकोवी, इत्यादि)
  • फल -- ऑर्गैनिक ताज़ा फल। कम से कम 4 सर्विंग्स प्रतिदिन। मौसमी फल खाने की कोशिश करें। कम शक्कर वाले फलों में बेरीज़, स्ट्राबेरी और एवोकेडो शामिल हैं
  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ वाहिकीय प्रणाली की रक्षा करती हैं
  • Nuts – नमकरहित ब्राज़ील नट, पाइन नट, बादाम, काजू और अखरोट. मेवों में लिनोलीक एसिड, एक अनूठा, स्वस्थ शोथ-रोधी ओमेगा-6 फैटी एसिड
  • प्रचुर मात्रा में होता है
  • जैतून का तेल – ओलीक एसिड, एक ओमेगा-9 फैटी एसिड, से भरपूर। जैतून के तेल के साथ केवल कम और मध्यम तापमान पर पकाएं 
  • लाल मांस और पोल्ट्री – प्राथमिक रूप से घास खिलाई गई और हारमोन-मुक्त मांस और खुला घूमने वाली पोल्ट्री
  • बीज – नमक रहित कद्दू, चिया, और सूरजमुखी के बीज
  • तिल का तेल (हल्का) – उच्च तापमानों पर पकाने के लिए स्वीकार्य

हृदय के लिए लाभदायक पूरक

ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस

कई लोगों की हड्डियाँ उम्र के बढ़ने के साथ पतली होने लगती हैं। तथापि, ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें करके हड्डियों का मजबूत बना रहना सुनिश्चित करने में मदद और उम्र के बढ़ने के साथ हड्डी के टूटने की संभावना कम की जा सकती है। 

ऑस्टियोपोरोसिस जापान, यूरोप और अमेरिका में 75 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करती है और अनुमान है कि यह विश्व भर में 200 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करती है। ऑस्टियोपोरोसिस के विकसित होने से पहले, ऑस्टियोपीनिया नामक एक रोग होता है जिसमें हड्डियाँ सामान्य से पतली हो जाती हैं लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस के जितनी पतली नहीं होती हैं। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में इसका अधिक जोखिम होता है। 

हड्डियों के पतला होने के जोखिम कारकों में शामिल हैं, 65 वर्ष से अधिक की उम्र, खून में विटामिन डी की कमी और ऐसे खाद्य पदार्थों का कम सेवन करना जिनमें कैल्शियम, मैगनीशियम और विटामिन के की प्रचुरता होती है। 

एसिड रेड्यूसर्स (ओमेप्रैज़ोल, पैंटोप्रैज़ोल, आदि), स्टेरॉयड्स (प्रेड्निसोन, सॉल्यु-मेड्रॉल) जैसी दवाईयाँ और मिर्गी के दौरे की कुछ दवाईयाँ भी हड्डी की मजबूती को कम कर सकती हैं। 

हड्डी के स्वास्थ्य के लिए पूरक 

संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के अलावा, निम्नलिखित पूरक हड्डी के स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। 

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम

IBS या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण हैं पेट में दर्द, मलत्याग की आदत में परिवर्तन, मरोड़ आना, पेट फूलना और गैस से संबंधित दर्द। दीर्घकालिक थकान, लीकी गट और स्माल इंटेस्टाइनल बैक्टीरियल ओवरग्रोथ या SIBO भी अक्सर मौजूद होती है। कई रोगियों को कब्ज़, दस्त या दोनों के संयोजन के लक्षण हो सकते हैं। 

IBS वाले लोगों में अक्सर लीकी गट और कई खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता होती है। यह महत्वपूर्ण है कि IBS से ग्रस्त व्यक्ति का किसी विशेषज्ञ द्वारा मूल्यांकन किया जाए ताकि सुनिश्चित हो सके कि कोई अधिक अंतर्निहित रोग तो मौजूद नहीं है। IBS से ग्रस्त लोग अक्सर परेशान करने वाले खाद्य पदार्थ से परहेज करने पर ठीक होने लगता है। इसे निर्मूलन आहार (elimination diet) कहते हैं। कुछ खाद्य पदार्थों का चंद हफ्तों के लिए निर्मूलन करके यह देखना उपयोगी होता है कि क्या इससे आपके लक्षण बेहतर होते हैं। यदि कोई अंतर नज़र नहीं आता है, तो उस खाद्य पदार्थ को भोजन में वापस ले आएं। यदि संभावित उत्तेजक का निर्मूलन पर्याप्त नहीं है, तो प्रोबायोटिक्स और पाचक एंज़ाइम लाभदायक हो सकते हैं। 

IBS के लिए आहार अनुशंसाएं

  • डेयरी का निर्मूलन करें (लैक्टोज़ और कैसीन से प्रदाह उत्पन्न हो सकता है)
  • गेहूं और ग्लूटेन से युक्त उत्पादों का निर्मूलन करें
  • कम फॉडमैप (FODMAP - Fermentable Oligo-, Di-, Mono-saccharides And Polyols) वाले आहार पर विचार करें
  • कृत्रिम स्वीटनरों से बचें

IBS से ग्रस्त लोगों की मदद करने वाले पूरक

संदर्भ:

  1. Billioti de Gate Sophie Moride Yola, Ducruet Thierry, et al. Benzodiazepine use and risk of Alzheimer’s disease: case-control study BMJ 2014;349 :g5205
  2. Br J Nutr. 2019 Sep 25:1-20. doi: 10.1017/S0007114519002435. (Diet’s effect on depression)
  3. Masoumi SZ, Kazemi F, Tavakolian S, et al. Effect of Citalopram in Combination with Omega-3 on Depression in Post-menopausal Women: A Triple Blind Randomized Controlled Trial. J Clin Diagn Res. 2016;10(10):QC01–QC05. doi:10.7860/JCDR/2016/19487.8597
  4. Journal of The American College of Nutrition 2017, Vol 36. Mp 6. 434-441 Association between Urinary Phytoestrogens and CRP in the Continuous National Health and Nutrition Examination Survey
  5. Osteoporosis Int. 2006 Dec;17(12):1726-33. Epub 2006 Sep 16.

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