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बीमारियाँ

DHEA, टेस्टोस्टेरोन और उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक कमी और मनोभ्रंश

30 सितंबर 2019

जेम्स लेक, एमडी के द्वारा

इस लेख में:

 

डिहाइड्रोएपिएंड्रोस्टेरोन (DHEA) टेस्टोस्टेरोन और अन्य एंड्रोजेनिक हार्मोन का एक अग्रगामी है और शरीर क्रियाविज्ञान में इसकी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं, जिनमें संज्ञान, भूख और यौन व्यवहार शामिल हैं। DHEA के सीरम स्तर और इसका सल्फेट रूप DHEA-S उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे घटते जाते हैं और 7वें दशक में अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंच जाते हैं। सीरम DHEA के स्तर में क्रमिक गिरावट से टेस्टोस्टेरोन का संश्लेषण कम हो जाता है, जो विभिन्न प्रकार के शारीरिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक लक्षणों जैसे थकान, वजन के घटने, उदास मनोदशा, चिड़चिड़ापन और स्मृति समस्याओं से जुड़ा होता है। ये लक्षण प्रमस्तिष्कखंड और हाइपोथैलेमस सहित मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों पर टेस्टोस्टेरोन के लाभकारी प्रभावों में कमी के कारण होते हैं जो संज्ञानात्मक और भावनात्मक प्रकार्य को व्यवस्थित करते हैं। 

पशु अध्ययनों ने स्थापित किया है कि बहिर्जात DHEA और DHEA-S का प्रतिरक्षा और हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी प्रणालियों पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। दोनों प्रोहॉर्मोन्स के मस्तिष्क में न्यूरोप्रोटेक्टिव, एंटीऑक्सिडेंट और प्रदाहनाशी प्रभाव होते हैं, ये न्यूरोजेनेसिस को बढ़ावा देते हैं और कैटेकोलामाइन न्यूरोट्रांसमीटर नॉरपेनेफ्रिन और डोपामाइन के संश्लेषण और रिलीज को बढ़ाते हैं। पश्चिमी चिकित्सा में सामान्य उम्र बढ़ने के साथ जुड़े संज्ञानात्मक प्रकार्यों में कमी के स्व-उपचार के लिए DHEA का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। 

DHEA और संज्ञानात्मक प्रकार्य के बारे में अनुसंधान का क्या कहना है?

कई अध्ययनों ने स्वस्थ वयस्कों में DHEA की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप तर्कसंगत याददाश्त, दृश्य जागरूकता, विज़ूओमोटर निपुणता और ध्यान में सुधार का वर्णन किया है। ये लाभकारी प्रभाव DHEA प्रेरित कॉर्टिकल प्लास्टिसिटी, जो दृश्य ध्यान अंतर्निहित तंत्रिका प्रक्रियाओं को बढ़ाती है, द्वारा मध्यस्थता कर सकते हैं। हालांकि, स्वस्थ और संज्ञानात्मक रूप से क्षीण हुए वयस्कों में स्मृति पर DHEA के प्रभावों पर शोध निष्कर्ष असंगत हैं। DHEA उन बुजुर्ग रोगियों में स्मृति में सुधार कर सकता है जिनमें सामान्य DHEA स्तर वाले युवा वयस्कों की तुलना में कम DHEA सीरम स्तर हैं। 

एक छोटे से मानव नैदानिक परीक्षण (N = 10) में वयस्क पुरुषों को DHEA 500mg की मात्रा दी गई, जिनमें नींद की शुरुआत के तुरंत बाद तीव्र नेत्र संचलन (REM) में महत्वपूर्ण वृद्धि का अनुभव किया गया। इस अनुसंधान से पता चलता है कि DHEA से प्रेरित मस्तिष्क में न्यूरोस्टेरॉइड परिवर्तनों का GABA (गामा-अमीनोब्यूट्रिक एसिड) पर प्रभाव पड़ता है।वास्तव में, DHEA &गामा; -अमीनोब्यूट्रिक एसिड (GABA) रिसेप्टर्स और एन-मिथाइल-डी-एस्पेरेट (NMDA) रिसेप्टर्स दोनों से बाइन्ड होता है, हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये रिसेप्टर संबंध इसके संज्ञानात्मक-बढ़ाने वाले प्रभावों से संबंधित हैं या नहीं। 

एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण ने स्वस्थ बुजुर्ग व्यक्तियों में संज्ञानात्मक बढ़ाने के रूप में DHEA के लिए कोई समर्थन नहीं पाया। निष्कर्षों का महत्व इस तथ्य से सीमित था कि केवल तीन अध्ययन शामिल किए गए मानदंडों को पूरा करते थे, सभी अध्ययनों की समीक्षा की अवधि 3 महीने या उससे कम थी, और परीक्षण की गई खुराक की मात्रा केवल 25 और 50 mg के बीच थी। एक अलग व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि अल्जाइमर रोग वाले व्यक्तियों में सीरम DHEA-S स्तर लगातार कम हो रहे थे लेकिन DHEA स्तर सामान्य थे। अनुसंधानकर्ताओं का तर्क है कि यह निष्कर्ष DHEA-S संश्लेषण के लिए एक सब्सट्रेट के रूप में DHEA की भूमिका के अनुरूप है और सल्फेटेज या DHEA-S बायोकॉनवर्जन के अन्य आणविक तंत्र की गतिविधि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों में खराब हो सकती है। सीरम DHEA-S के स्तर में गिरावट प्रगति के विभिन्न चरणों या अल्जाइमर रोग की गंभीरता के स्तर से जुड़ी हो सकती है, जैसे कि कम DHEA-S का स्तर अधिक गंभीर संज्ञानात्मक हानि की ओर इशारा करता है। यह निर्धारित करने के लिए अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है कि क्या DHEA-S का स्तर अल्जाइमर रोग जोखिम के लिए एक विश्वसनीय नैदानिक साधन प्रदान करता है। 

6 महीने के यादृच्छिक प्लेसीबो-नियंत्रित अध्ययन में अल्जाइमर रोग वाले उन पुरुष रोगियों को यादृच्छिक रूप से केवल DHEA (रोजाना दो बार 50 mg) और प्लेसिबो दी गई जो पहले कोई दवा नहीं ले रहे थे। 3 महीनों में DHEA समूह ने प्लेसीबो समूह की तुलना में बेहतर संज्ञानात्मक प्रदर्शन की ओर रुझान दिखाया जो अध्ययन के अंत तक कायम रहा। एक छोटे से 4-सप्ताह के खुले अध्ययन में, मल्टी-इन्फार्कट डिमेंशिया वाले 7 व्यक्ति, जिन्हें प्रतिदिन 200 mg DHEA-S की इन्ट्रावेनस खुराक दी गई, उनमें DHEA-S के सीरम और CSF स्तरों में उल्लेखनीय वृद्धि, दैनिक जीवन की गतिविधियों में सुधार और लगातार कम भावनात्मक परेशानियाँ दिखाई दी। दोनों अध्ययनों के निष्कर्षों का महत्व उनमें शामिल कम लोगों की संख्या द्वारा सीमित है। 

वृद्ध पुरुषों में कम परिसंचारी टेस्टोस्टेरोन का स्तर अल्जाइमर रोग के विकास के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। 6 महीने के डबल-ब्लाइंड प्लेसीबो-नियंत्रित अध्ययन में, अल्जाइमर रोग से पीड़ित 16 पुरुषों और 22 स्वस्थ व्यस्क पुरुषों को उनकी सामान्य दवाओं के साथ यादृच्छिक रूप से टेस्टोस्टेरोन 75 mg (ड्रमल जेल के रूप में) बनाम प्लेसीबो दी गई। विकृत मस्तिष्क और स्वस्थ समूह दोनों में जीवन की सार्वत्रिक गुणवत्ता में सुधार हुआ। अध्ययन के अंत में दोनों समूहों में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाए गए हालांकि कम विकृत मस्तिष्क वाले रोगी जिन्हें टेस्टोस्टेरोन दिया गया उनमें विजुओस्पेशिअल क्षमताओं में कम गिरावट का अनुभव किया गया।

DHEA और टेस्टोस्टेरोन के दुष्प्रभाव और सुरक्षा चिंताएं

बहिर्जात DHEA और टेस्टोस्टेरोन सुरक्षा चिंताओं से जुड़े हैं। मंद अनिद्रा DHEA, जिसे सुबह लिया जाना चाहिए, का एक असामान्य दुष्प्रभाव है। बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी या प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास होने पर DHEA ना लेना समझदारी है। टेस्टोस्टेरोन पूरकता हृदय रोग, स्ट्रोक, और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। DHEA या टेस्टोस्टेरोन शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करना समझदारी है।

एक आशाजनक शुरूआत लेकिन अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है

सुरक्षित और इष्टतम खुराक योजनाओं को निर्धारित करने के लिए स्वस्थ और अल्जाइमर रोग या मल्टी-इन्फार्क्ट मनोभ्रंश वाले व्यक्तियों दोनों में DHEA के संभावित संज्ञानात्मक-बढ़ाने वाले प्रभावों का और अधिक वर्णन करने के लिए बड़े संभावित प्लेसीबो-नियंत्रित अध्ययनों की आवश्यकता है।

संदर्भ:

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