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सिंहपर्णी (Dandelion Root) की जड़ के स्वास्थ्य-लाभ

25 सितंबर 2019

एलेन एल्बर्टसन, पीएचडी, आरडीएन, एनबीसी-एचडबल्यूसी द्वारा

इस लेख में:

 

सामान्य सिंहपर्णी, टैरेक्सकम ऑफिशियनेल, को आम तौर पर एक कष्टप्रद, तेजी से फैलने वाले पौधे के रूप में देखा जाता है जिसे नियंत्रित करना कठिन होता है, लेकिन वास्तव में यह शानदार स्वास्थ्य-लाभों वाला एक आश्चर्यजनक पौधा है जिनमें पाचनशक्ति को सुधारने से लेकर सोरियासिस को नियंत्रित करना शामिल है।

सिंहपर्णी के चमकीले, पीले फूल जो फुज्जी (fluff) में बदल जाते हैं, बच्चों के लिए कामनाओं के अग्रदूत और आपके लॉन के लिए दुःस्वप्न हैं। इसका कारण यह है कि परिपक्व सिंहपर्णी पौधा एक लंबी, मोटी जड़ होती है जिसे निकालना कठिन होता है। एक बार ठीक से लग जाने के बाद, सिंहपर्णी का पौधा हर मौसम में उगने लगेगा और हवा के माध्यम से बगीचों, लॉनों, मैदानों, गोल्फ कोर्सों और यहाँ तक कि फुटपाथ की दरारों में भी अपने बीजों को फैला देगा।

सिंहपर्णी का इतिहास और उपयोग

10वीं और 11वीं शताब्दी में अरबी चिकित्सकों द्वारा और बाद में 12वीं शताब्दी में वेल्श हकीमों द्वारा दवाई के रूप में उल्लिखित, सिंहपर्णी का उपयोग सदियों से एक विरेचक, पेट के इलाज, त्वचा के टोनर और संधि-शोथ, मस्सों, पीएमएस और गुर्दे की पथरी के उपचार के रूप में किया जाता रहा है। इसके नाम की उत्पत्ति फ्रेंच डेंट डी लायन— सिंह के दाँत—से हुई है क्योंकि इस पौधे की पत्तियों पर दांतों जैसे कंगूरे होते हैं, जो पानी को जड़ तक पहुंचाते हैं।

यूरेशिया के मूल निवासी, सिंहपर्णी का परिचय शेष दुनिया से भोजन और दवाई के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में कराया गया था। यह पौधा विटामिन ए, विटामिन के और विटामिन सीका बढ़िया स्रोत है; फाइबर, कैल्शियम और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है और इसमें पालक से अधिक प्रोटीन(1.5 ग्राम प्रति कप) होता है। इसकी पत्तियों में विटामिन ई, फोलेट और अन्य बी विटामिन भी होते हैं।

सिंहपर्णी की जड़, जिसमें पौधे के अधिकांश औषधीय गुण होते हैं, की कटाई जून, जुलाई और अगस्त में करना सबसे अच्छा होता है जब वह सबसे कड़वी होती है। पत्तियों को कभी भी चुना जा सकता है, लेकिन वे वसंत में अधिक स्वादिष्ट होती हैं जब वे छोटी और कोमल होती हैं। उन्हें सलाद में कच्चा या थोड़ा सा उबालकर मिलाया जा सकता है और पालक की तरह—उबालकर और मसाले डालकर सब्ज़ी के रूप में परोसा जा सकता है। सूखी पत्तियों का उपयोग पाचक पेयों और हर्बल चायमें किया जा सकता है, सूखी पत्तियाँ कॉफ़ी की जगह इस्तेमाल की जा सकती हैं, और फूलों का उपयोग वाइन या बीयर बनाने के लिए किया जा सकता है।

आपके स्वास्थ्य के लिए सिंहपर्णी

इस पौधे का लैटिन नाम, टैरेक्सकम ऑफीशियनेल एक यूनानी शब्द टैराज़ोस (विकार) और एकॉस (उपचार) से आया है जो पौधे की रोगों को ठीक करने की क्षमता से संबंधित है। शरीर के लिए सामान्य तौर पर स्फूर्तिदायक, सिंहपर्णी प्राकृतिक विरेचक, मूत्रवर्धक और यकृत के अनुकूल है। यह गुर्दे और यकृत की गतिविधि को बढ़ाता है और मूत्र-विसर्जन की आवृत्ति में वृद्धि करता है। हालांकि कैंसर के उपचार के रूप में इसकी कारगरता के समर्थन में अब तक कोई मानव अध्ययन नहीं हुए हैं, पशु और प्रयोगशाला अध्ययनों ने सिंहपर्णी की जड़ के सार की बड़ी आंत और यकृत के कैंसरों से प्रभावशाली ढंग से लड़ने की क्षमता दर्शाई है।

जबकि कोई भी जड़ी-बूटी या पूरक लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करना हमेशा सही होता है, लगता है कि सिंहपर्णी सुरक्षित और प्रमुख विषाक्तता और प्रतिकूल प्रभावों से मुक्त है। यहाँ इस ताकतवर पौधे के कुछ स्वास्थ्य-लाभ प्रस्तुत हैं।

पेट के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है

पेट के फूलने, अपच या पेट की अन्य समस्याओं से परेशान हैं? सिंहपर्णी की जड़ से शानदार चाय बनती है जो पेट को शांत करती है, पाचनक्रिया को बढ़ावा देती है और आंतों की गतिविधि में वृद्धि करती है। यह पित्त के उत्पादन को प्रेरित करता है, जो यकृत द्वारा स्रवित और पित्ताशय में भंडारित एक तरल है, जो वसा को विघटित करने में मदद करता है। सिंहपर्णी की जड़ में इन्युलिन भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो एक प्रकार का घुलनशील फाइबर है जो पौधों में पाया जाता है और पेट में स्वस्थ जीवाणुओं की वृद्धि का समर्थन करता है।

यदि आपको बार-बार पेट की गड़बड़ होती है, तो हर रोज एक कप सिंहपर्णी की चाय पीने का प्रयास करें और देखें कि क्या इससे मदद मिलती है। इसे मीठा करने के लिए इसमें थोड़ा सा शहद भी डाला जा सकता है या इसमें पेट को शांत करने वाली अन्य जड़ें जैसे अदरक और मुलैठी मिलाई जा सकती है।

कब्ज़ से लड़ता है

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज़ एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिसीसेज़ के अनुसार, कब्ज़ अमेरिका में सबसे व्यापक पाचन-संबंधी समस्याओं में से एक है, और 16 प्रतिशत वयस्कों और 60 से अधिक उम्र के 33 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है। इसके कारणों में शामिल हैं:

  • फाइबर की कम मात्रा वाला आहार
  • कतिपय दवाइयां
  • कुछ रोग
  • निर्जलीकरण
  • व्यायाम का अभाव

विरेचक गुणों वाली जड़ी-बूटियों की छोटी खुराकें जिनमें शामिल हैं सिंहपर्णी, कैस्कैरा सैग्रैडा, रेवन्दचीनी की जड़, अदरक और दारुहल्दी फिर से सामान्य महसूस करने में आपकी मदद कर सकती हैं।

पानी के अवधारण को कम करता है

तरल का अवधारण, जिसे शोफ़ भी कहते हैं, तब होता है जब गुर्दे पानी का पर्याप्त रूप से निष्कासन नहीं करते हैं। महिलाएं गर्भावस्था या प्रागार्तव के दौरान इसका अनुभव कर सकती हैं। शोफ़ गुर्दे या हृदय रोग के कारण भी हो सकता है।

सूजन और रक्तचाप को कम करने के लिए डॉक्टर अक्सर मूत्रवर्धक या वाटर पिल्स लिखते हैं, ताकि शरीर से तरलों को निष्कासित करने में मदद मिल सके। पोटैशियम अक्सर पानी के साथ बाहर निकल जाता है, जिससे पोटैशियम के स्तर कम हो जाते हैं, जो--खास तौर पर हृदय रोग से ग्रस्त लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। सिंहपर्णी एक शानदार मूत्रवर्धक है क्योंकि कारगर होने के साथ-साथ, यह पोटैशियम से प्राकृतिक रूप से प्रचुर होता है।

सूजी हुई नसों को शांत करता है

Varicose veins तब होती हैं जब नसें बड़ी, विस्फारित और टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं। वे शरीर में कहीं भी प्रकट हो सकती हैं लेकिन पैरों में सबसे आम हैं। निष्क्रियता, मोटापा, गर्भावस्था और पैर के रक्तप्रवाह को कम करने वाली कोई भी चीज आपके जोखिम को बढ़ा सकती है। उपचारों में शामिल हैं: अधिक फल और सब्ज़ियाँ खाना और पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी, विटामिन ई और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन लेना। यदि पानी का अवधारण इस समस्या का हिस्सा है, तो लक्षणों से राहत पाने में मदद करने के लिए मूत्रवर्धक के रूप में सिंहपर्णी का उपयोग किया जा सकता है।

सोरियासिस को काबू में लाता है

सोरियासिस एक दीर्घकालिक त्वचा रोग है जिसके कारण खास तौर पर कोहनियों, घुटनों और सिर की खाल पर लाल, पपड़ीदार धब्बे होते हैें—यह समस्या पश्चिमी दुनिया में रहने वाले 2% तक लोगों को प्रभावित करती है। हालांकि वर्तमान में सोरियासिस का कोई इलाज नहीं है, सही निदान करना और तनाव, आहार और कार्य-जीवन संतुलन जैसे व्यक्तिगत तथ्यों को समझना महत्वपूर्ण है जो इसे सक्रिय कर सकते हैं।

सिंहपर्णी सहित, कई पौधे लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और धूप भी इस रोग से राहत पाने में मदद कर सकते हैं। ऐसी क्रीमें जो संकूटन (comfrey), ऐलो वेरा या विटामिन डी से युक्त होती हैं, वे भी जलन को कम कर सकती हैं।

अगली बार जब आपको वे पीले फूल या फुज्जी के सफेद गोले दिखें, सिंहपर्णी को कोसने से पहले दो बार सोचें। इसे एक मित्र समझें जो स्वस्थ और तंदुरुस्त बने रहने के आपके मार्ग में आपकी मदद कर सकता है।

संदर्भ:

  1. https://www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/taraxacum-officinale
  2. https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/definition-facts
  3. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5739857/
  4. https://pdfs.semanticscholar.org/2d3c/7b118a7d60b06f65082d96ed1164fd008df4.pdf
  5. Ovadje P, Ammar S, Guerrero JA, Arnason JT, Pandey S. Dandelion root extract affects colorectal cancer proliferation and survival through the activation of multiple death signalling pathways. Oncotarget. ;7(45):73080–73100. doi:10.18632/oncotarget.11485
  6. Vandeputte D, Falony G, Vieira-Silva S, et al. Prebiotic inulin-type fructans induce specific changes in the human gut microbiota. Gut. 2017;66(11):1968–1974. doi:10.1136/gutjnl-2016-313271

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