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Wellness

प्राकृतिक रूप से एलर्जी से छुटकारा कैसे पाएं

22 मई 2019

वीनस रामोस, एमडी द्वारा

इस लेख में:

मौसम का परिवर्तन कभी-कभी केवल मौसम में बदलाव या रंगों के बदलाव से बढ़ कर कुछ और   भी हो सकता है। दुनिया भर में उन सैकड़ों लाखों लोगों के लिए जो मौसमी एलर्जी से पीड़ित हैं, यह छींकने, भरी हुई नाक, साइनस दबाव, और आंखों में पानी जैसे उत्तेजक लक्षण ले कर आता है।

हालाँकि दवा की दुकानों में इसके कई औषधीय उपचार उपलब्ध हैं, फिर भी एलर्जी के लक्षणों से राहत दिलाने के प्राकृतिक तरीके भी मौजूद हैं। हालाँकि, एलर्जी प्रतिक्रिया के तंत्र को समझना सबसे अच्छा विचार है। फिर, आप न केवल लक्षणों से निपटने के लिए एक प्रभावी और व्यापक योजना बना सकते हैं, बल्कि अपनी एलर्जी की प्रतिक्रिया के कारणों का भी निवारण कर सकते हैं।

एलर्जी तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली किसी एक पदार्थ के लिए अत्यधिक संवेदनशील हो  जाती है जो कि आमतौर पर गैर हानिकारक पदार्थ होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली आम तौर पर वायरस, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक रोगाणुओं पर स्थित प्रोटीन (एंटीजन) को पहचानने वाले एंटीबॉडी बनाकर आपके शरीर की रक्षा करती है। सामान्य परिस्थितियों में, कई हितकारी पदार्थ आपके शरीर में बिना किसी समस्या के प्रवेश कर सकते हैं। जब आपको एलर्जी होती है, तो आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इनमें से कुछ समान पदार्थों की एंटीजन के रूप में पहचान कर लेती है, और आपके शरीर को एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए संकेत देती है। बदले में, इन एंटीबॉडीज के कारण कुछ कोशिकाएं हिस्टामाइन और ल्यूकोट्रिअन रसायन छोड़ती हैं, ये वो रसायन हैं जो परेशानी का सबब बनने वाले एलर्जी के लक्षणों को उत्पन्न कर सकते हैं।

एलर्जी के लक्षणों से प्राकृतिक रूप में राहत देने वाले पदार्थ

प्राकृतिक रूप से एलर्जी के लक्षणों से राहत के लिए निम्नलिखित पूरक प्रभावी हो सकते हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड

EPA और DHA ओमेगा-3 एसिड्स के विशिष्ट प्रकार हैं जो कि ज़बरदस्त शोथरोधी भी हैं। इसके खाद्य स्रोतों में घास चरने वाले जानवरों का मांस और अंडे, साथ ही क्रिल्ल तेल भी शामिल हैं। यह देखते हुए कि मानक पश्चिमी आहार में ओमेगा-6 फैटी एसिड की अधिकता है,  इसके साथ ओमेगा-3 एसिड का सेवन प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कुछ कम कर सकता है और संभवतः एलर्जी के प्रति आपकी संवेदनशीलता को कम कर सकता है। आदर्श खुराक: प्रति दिन 1 से 1.2 ग्राम EPA और DHA

क्वरसेटिन

एंटीऑक्सिडेंट क्वरसेटिन को फ्लेवोनोइड के रूप में वर्गीकृत किया गया है और माना जाता है कि यह हिस्टामाइन के स्त्राव को रोकता है। यह वनस्पतिक खाद्य पदार्थों जैसे कि जामुन, काली चाय, सेब (त्वचा के साथ), लाल प्याज, और क्रूसिफेरस सब्जियों (जैसे ब्रोकोली या फूलगोभी) में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। क्वरसेटिन पूरक रूप में भी उपलब्ध है। यदि आप मौसमी एलर्जी से ग्रस्त हैं, तो वसंत ऋतु आने से कुछ हफ्ते पहले जब पेड़ पौधे फिर से हरे भरे होने लगते हैं तब आपको पूरक का सेवन शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इसके प्रभावी होने में कुछ समय लगता है। आदर्श खुराक: 200 से 500 मिलीग्राम, दिन में तीन बार

बटरबर

बटरबर (पेटासाइट्स हाइब्रिडस) नामक जड़ी बूटी ने मौसमी एलर्जी से पीड़ित लोगों को राहत प्रदान करने की अच्छी क्षमता दिखाई है। शोधकर्ताओं ने बटरबर में ऐसे यौगिकों की पहचान की है जो ल्यूकोट्रिएन और हिस्टामाइन को एलर्जी की प्रतिक्रिया को सक्रिय करने से रोकते हैं। आदर्श खुराक: प्रतिदिन 100 मिलीग्राम।

कच्चे बटरबर का उपयोग न करें क्योंकि इसमें पाइरोलिज़िडिन एल्कलॉइड होता है जो यकृत और गुर्दे के लिए विषाक्त हो सकता है, और शायद कैंसर का कारण भी हो सकता है। व्यावसायिक रूप से उपलब्ध बटरबर के उत्पादों में से कई एल्कलॉइडस को हटा दिया गया है।

यदि आपको रैगवीड, डेज़ी, मैरीगोल्ड या गुलदाउदी से एलर्जी है तो इस जड़ी बूटी का परहेज करें क्योंकि बटरबर रैगवीड परिवार से संबंधित है।

ब्रोमेलैन

ब्रोमेलैन एक प्रोटीन-पचाने वाला एंजाइम है जो अनानास में पाया जाता है और यह पूरक के रूप में भी उपलब्ध है। इसमें एंटी-एलर्जी और शोथरोधी गुण हैं जो श्लेष्म को तोड़ने और वायुमार्ग के ऊतकों की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। आदर्श खुराक: 500 मिलीग्राम, दिन में  तीन बार।

विटामिन सी

आमतौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाने वाला, विटामिन सी एक प्राकृतिक एंटीहिस्टामाइन भी है। यह हिस्टामाइन के स्त्राव को रोकता है, और नाक की सूजन और स्राव को कम करता है। आदर्श खुराक: प्रति दिन 2 ग्राम।

सेब का सिरका

सेब के सिरके में मौजूद फेनोल्स इसे एंटीऑक्सिडेंट गुण प्रदान करते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन कर सकते हैं। इसके समर्थकों का सुझाव है कि प्रतिदिन एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच सेब का  सिरका और कुछ ताजे नींबू का रस मिला कर पीना चाहिए, फिर दांतों के इनेमल को नुकसान से बचाने के लिए पानी से कुल्ला कर लेना चाहिए।

एलर्जी के कारण

हालाँकि एलर्जी के मौसम में लक्षणों से राहत मिलने पर आपका समय निश्चित रूप से अधिक आराम और सुकून के साथ गुजर सकता है,  फिर भी यदि आप किसी भी तरह के लंबे समय तक चलने वाले समाधान चाहते हैं, तो आपकी एलर्जी के मूल कारण का पता लगाना महत्वपूर्ण है।

पाचन संबंधी दुष्क्रिया

पाचन संबंधी दुष्क्रिया प्रतिरक्षा प्रणाली को उल्लेखनीय ढंग से प्रभावित कर सकती है। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि 80% प्रतिरक्षा प्रणाली आंत में ही स्थित है। यदि आंत में किसी भी प्रकार का असंतुलन है, तो शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र पर प्रभाव के कारण एलर्जी उत्पन्न हो सकती है। ऐसा ही असंतुलन माइक्रोबायोम, आंत में सूक्ष्मजीवों का संग्रह, का भी हो सकता है।

माइक्रोबायोम में "बुरे" बैक्टीरिया शामिल होते हैं जो आपको बीमार कर सकते हैं और साथ ही साथ "अच्छे" बैक्टीरिया भी जो "खराब" बैक्टीरिया को फैलने से रोकने में सक्षम पदार्थों को स्रावित करते हैं। इन बैक्टीरिया का संतुलन बाधित हो सकता है, जिससे "खराब" बैक्टीरिया की बढ़ोत्तरी हो सकती है और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संभावित समस्याओं की अधिकता हो सकती है।

अधिक मात्रा में "अच्छे" बैक्टीरिया को ग्रहण करना, जिसे प्रोबायोटिक्स के रूप में भी जाना जाता है, सूक्ष्मजीव संतुलन को बहाल करने में मदद कर सकता है। प्रोबायोटिक्स को खाद्य पदार्थों (जैसे किमची, दही, कोम्बुचा, और सॉरक्राउट) के माध्यम से आपके आहार में शामिल किया जा सकता है या फिर पूरक रूप में भी इनका उपयोग किया जा सकता है। एक अनुसंधान में पाया गया है कि जो लोग एलर्जी के मौसम में प्रोबायोटिक्स का इस्तेमाल करते हैं उनमें लक्षणों को उत्तेजित करने वाली एंटीबॉडी का स्तर कम होता है।

तनाव

तनाव का प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से गहरा संबंध है। जब शरीर तनाव ग्रस्त होता है, तो यह कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन छोड़ता है। ये वही हार्मोन हैं जो एलर्जी प्रतिक्रियाओं का सामना करने में एक भूमिका निभाते हैं। बहुत अधिक तनाव ग्रस्त होने पर शरीर को इन हार्मोनों का हद से ज्यादा झेलना पड़ सकता है, जिसकी वजह से इसकी एलर्जी से निपटने की क्षमता कम हो जाती है।

व्यायाम, ध्यान और गहरी सांस लेने जैसे जीवन शैली विकल्पों के अलावा, प्रतिरक्षा फ़ंक्शन को अनुकूलित करने के लिए एडाप्टोजेंस से भरपूर पूरक तनाव प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। एडाप्टोजेन विकल्पों में अश्वगंधा, शिसांद्रा, और आर्कटिक जड़ शामिल हैं।

कुपोषण

कुपोषण निश्चित रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को बदल सकता है। किसी भी समय प्रतिरक्षा प्रणाली के ढंग से काम ना करने पर, शरीर में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है और इससे एलर्जी की संभावना बढ़ जाती है। विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली को ढंग से चलाने वाला एक ज़बरदस्त आपरिवर्तक है, जो विभिन्न प्रतिरक्षा कोशिकाओं को वापस संतुलन में लाता है ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली सही ढंग से काम कर सके।

विटामिन डी का सबसे प्राकृतिक स्रोत सूरज की रोशनी है। लेकिन अगर आपको पर्याप्त धूप नहीं मिल रही है, तो पूरक का इस्तेमाल एक अच्छा समाधान हो सकता है। विटामिन डी काउंसिल प्रतिदिन 5000 IU विटामिन डी3 ओरल पूरक लेने की सलाह देती है। इस बीच, चिकित्सा संस्थान अधिकांश वयस्कों के लिए खुराक के रूप में 4000 IU तक की सिफारिश करता है। वास्तव में विटामिन डी का रक्त में उचित स्तर बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसे 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी परीक्षण से जांचा जा सकता है। 50 से 70 ng/ml के बीच का स्तर बनाए रखना इष्टतम प्रतिरक्षा प्रणाली प्रदान कर सकता है।

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