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ऊर्जा में कमी महसूस होती है? यहाँ माइटोकॉन्ड्रिया के स्वास्थ्य के लिए 5 पूरक बताए गए हैं

मेलिसा एंज़ेलोन, एनडी द्वारा

इस लेख में:


क्या आपको अपने खाए हुए भोजन को पचाना है? आपको ऊर्जा की आवश्यकता है। क्या आप व्यायाम करना चाहते हैं? आपको ऊर्जा की आवश्यकता है। क्या आप अपना पसंदीदा टीवी शो देखना चाहते हैं? हां, इसके लिए भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। और आपके पूरे शरीर में इस जीवन-सहायक ऊर्जा को प्रदान करने के लिए माइटोकॉन्ड्रिया प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

‌‌हमारे माइटोकोंड्रिया क्या करते हैं?

हमारी प्रत्येक कोशिका में कोशिकांग या छोटे अवययों की एक प्रणाली उपस्थित रहती है, जो शरीर के प्रमुख कार्यों को करती है। अपनी कोशिकाओं को अपने शरीर के भीतर मौजूद एक और छोटे शरीर के रूप में सोचें।

माइटोकॉन्ड्रिया हमारी कोशिकाओं के भीतर के अवयय हैं, जो हमारे शरीर में हर एक कार्य को शक्ति देने के लिए ऊर्जा या ATP का उत्पादन करते हैं।

‌‌‌‌माइटोकॉन्ड्रिया का इतिहास

वैज्ञानिकों का मानना है कि पहला माइटोकॉन्ड्रिया दो अरब साल पहले की तरह है। पहले ये छोटे-छोटे कोशिकांग अपने दम पर रहते थे। सिद्धांतों से पता चलता है कि पहली मानव-निर्मित कोशिका तब निर्मित हुई थी, जब बैक्टीरिया जैसी कोशिका माइटोकॉन्ड्रिया को निगल गई। यह माइटोकॉन्ड्रिया तब कोशिका के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत बन गया, और फिर क्रमागत उन्नति के इतिहास के माध्यम से, पूरे शरीर के लिए बन गया।1

‌‌‌‌क्या होगा यदि मेरा माइटोकॉन्ड्रिया स्वस्थ नहीं है?

यदि आपके माइटोकॉन्ड्रिया को कुछ सहारे की आवश्यकता है, तो आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आप दिन के दौरान कमज़ोर और थक के चूर हो गए हैं।

अक्सर भोजन में अपर्याप्त पोषक तत्त्व, अच्छी तरह से नींद नहीं लेना, तनाव का उच्च स्तर और एक गतिहीन जीवन शैली के परिणामस्वरूप माइटोकॉन्ड्रिया आपके लिए पर्याप्त ऊर्जा का उत्पादन नहीं कर पाने का कारण हो सकते हैं।

शोधकर्ता अब सोचते हैं कि माइटोकॉन्ड्रिया का खराब स्वास्थ्य उम्र बढ़ने के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है, थका हुआ दिखना या महसूस करना और साथ ही भीतरी तथा बाहरी दृष्टि से हमारे शरीर के बूढ़े होने की धीमी या तेज गति से सम्बंधित हो सकता है।

मुक्त कण या प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन एक प्रकार के भोजन के सामान्य विघटन से निर्मित अणु होते हैं; ये यौगिक माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुँचा सकते हैं। मुक्त कणों का मुख्य कार्य है अन्य कोशिकाओं से ऊर्जा चोरी करना क्योंकि ऐसा करके वे अधिक स्थिर हो जाते हैं। दुर्भाग्य से, जब यह ऊर्जा चोरी करता है, तो यह उन कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है जिनसे यह ऊर्जा लेता है। शुक्र है, शरीर इन संभावित हानिकारक घटकों को संसाधित करने और निकालने में सक्षम है।

इन प्रक्रियाओं पर हमारा कुछ नियंत्रण अवश्य है। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने माइटोकॉन्ड्रिया के स्वास्थ्य का कितने अच्छे से खयाल रखते हैं।

‌‌‌‌माइटोकॉन्ड्रिया के स्वास्थ्य में सुधार के 5 तरीके

1. कार्बोहाइड्रेट का कम सेवन

जब आपकी रक्त शर्करा में वृद्धि होती है, तो इससे वजन बढ़ सकता है और सूजन बढ़ सकती है, जिससे हमारे माइटोकॉन्ड्रिया पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि शरीर में बढ़ती सूजन से निपटने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। नतीजतन, हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।2

अपने कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करने से माइटोकॉन्ड्रिया को ऊर्जा के लिए वसा के चयापचय में मदद मिलती है। यह ऊर्जा उत्पन्न करने का एक अधिक कुशल और स्वस्थ तरीका है। अक्सर जब माइटोकॉन्ड्रिया कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा बनाते हैं, तो मुक्त कण बनते हैं। ये अणु हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे समय से पहले बूढ़ा होने की संभावना होती है।

किराने की दुकान के मध्य गलियारों में अधिकांश खाद्य पदार्थ अत्यधिक संसाधित होते हैं, और चीनीयुक्त हैं जिसकी जानकरी कभी-कभी छिपी होती है। उन खाद्य पदार्थों को चुनें जिनमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं या विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट युक्त होते हैं। इसका मतलब है कि घास पर पले जानवरों के माँस, प्राकृतिक स्रोत से पकड़ी गई मछली, जैविक सब्जियाँ, एवोकाडो, सूखे मेवे और फलियाँ और हरी पत्तेदार सब्जियाँ इत्यादि को आहार के रूप में अपनी खाने के थाली में शामिल करें। इनमें से बहुत सारे खाद्य पदार्थ बी विटामिन से भरपूर होते हैं, जो ऊर्जा के लिए हमारे भोजन के विघटन में मदद करते हैं और हमारे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के सामान्य स्तर को बनाए रखने में सहायक हैं।

2. निराहार रहना

समय-समय पर निराहार रहना भी माइटोकॉन्ड्रिया के स्वास्थ्य के लिए सहायक है, क्योंकि यह हानिकारक मुक्त कणों को कम करने में मदद करता है। आप इसे अपने खाने के 8 घंटे के समय को संकुचित करके और दिन के बीच में खा कर शुरू कर सकते हैं।

3. व्यायाम

उच्च-तीव्रता अंतराल प्रशिक्षण (HIIT) के माध्यम से शारीरिक हलचल माइटोकॉन्ड्रिया द्वारा हमारी ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करती है और इससे माइटोकॉन्ड्रिया की क्षति को रोकने में मदद मिलती है। जब आप इस प्रकार के व्यायाम में संलग्न होते हैं, तो न केवल माँसपेशियों को धीरज रखने में मदद मिलती है, बल्कि इससे माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या भी बढ़ती है जो उन माइटोकॉन्ड्रिया को शक्ति प्रदान करता है।

4. नींद

शोधकर्ताओं का सुझाव है, अच्छी नींद भी हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को संरक्षित कर सकती है। नींद मूल रूप से वह समय है जब शरीर किसी भी हानिकारक सामग्री को बाहर निकाल देता है, जिसमें मुक्त कण भी शामिल हैं। इसके अलावा, अशांत नींद हमारे कोर्टिसोल को बढ़ा सकती है, और अधिक तनाव का कारण बन सकती है।

ध्यान और मालिश को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुँचाने वाले मुक्त कणों के निर्माण को भी कम किया जा सकता है। यह विश्राम का समय हमारे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में भी मदद कर सकता है, जो शरीर में सूजन को बढ़ा सकता है और अंततः हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुँचा सकता है।3

5. सूर्य का प्रकाश

सिमित रूप से सूर्यप्रकाश की सुरक्षित मात्रा का अपने शरीर पर निरावरण माइटोकॉन्ड्रिया उत्पादन को बढ़ाने का एक प्राकृतिक तरीका है। अपने आप को ठंड के संपर्क में लाने से भी माइटोकॉन्ड्रिया उत्पादन को उत्तेजित किया जा सकता है। ठंडे तापमान वाला एक त्वरित स्नान या सर्दियों के मौसम के दौरान 30 सेकंड में माइटोकॉन्ड्रिया का उच्च दर में उत्पादन शुरू हो सकता है।

‌‌‌‌माइटोकॉन्ड्रिया के स्वास्थ्य के लिए 5 पूरक

मैग्नीशियम, ग्लूटाथियोन, एल्फा-लाइपोइक एसिड, एल-कार्निटाइन और फिश ऑयल सहित कई पूरक माइटोकॉन्ड्रिया के स्वस्थ के लिए सहायक हैं।

1. मैग्नीशियम

मैग्नीशियम एक आवश्यक तत्व है और शरीर में पाए जाने वाला चौथा सबसे आम खनिज है। यह तत्व आपके शरीर की कोशिकाओं और संयोजी ऊतकों में पाया जाता है, जिनमें हड्डी, माँसपेशियों और रक्तोद शामिल हैं। मैग्नीशियम शरीर में कई विभिन्न प्रक्रियाओं में शामिल होने वाला एक आवश्यक पदार्थ है, जिसमें 300 से अधिक एंजाइमिक प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

अनुसंधान से पता चला है कि मैग्नीशियम ऊर्जा उत्पादन जैसी प्रक्रियाओं में शामिल हो सकता है। एंजाइमों के लिए एक आवश्यक सहायक कारक के रूप में इसकी प्रस्तावित भूमिका, जिसके द्वारा हमारे ऊर्जा अणु ATP का निर्माण होता है, यह ज़ाहिर करती है कि हमारा माइटोकॉन्ड्रिया इस खनिज के बिना क्यों नहीं रह सकता है।4

मैग्नीशियम के खाद्य स्रोतों में सूखे मेवे और बीज, साबुत अनाज, मछली, समुद्री भोजन, फलियाँ और गहरी हरी पत्तेदार सब्जियाँ शामिल हैं।

2. ग्लूटाथियोन

ग्लूटाथियोन एक एंटीऑक्सिडेंट है जो अमीनो एसिड (छोटे प्रोटीन) सिस्टीन, ग्लूटामेट और ग्लाइसिन से बना है। यह यौगिक पौधों, जानवरों, कवक और कुछ बैक्टीरिया में पाया जाता है। असल में, एंटीऑक्सिडेंट हमारी कोशिकाओं को किसी भी हानिकारक अणुओं जैसे कि मुक्त कणों से बचाने में मदद करता है।

ग्लूटाथियोन हमारे माइटोकॉन्ड्रिया में भी मौजूद होता है। यह हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को स्वस्थ रखने में मुख्य भूमिका निभाता है, क्योंकि यह एक द्वारपाल की तरह नुकसान पहुँचाने वाले अणुओं को माइटोकॉन्ड्रिया के बाहर रोकने और इन आवश्यक कोशिकांग को हुए किसी भी नुकसान की मरम्मत करने के लिए कार्य करता है।

ग्लूटाथियोन कई प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है।

3. एल्फा लाइपोइक एसिड (ALA)

एल्फा-लाइपोइक एसिड हर मानव कोशिका में पाया जाने वाला एक यौगिक है। दरअसल, इसकी स्थिति आश्चर्यजनक लग सकती है। यह वास्तव में माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर बनाया जाता है।

यह पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलने का एक प्रमुख तत्व है, और इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गुण भी होते हैं।

एल्फा-लाइपोइक एसिड को एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो कोशिकाओं को नुकसान से बचा सकता है और एक स्वस्थ चयापचय के लिए सहायक हो सकता है। शरीर एल्फा-लाइपोइक एसिड बना सकता है, लेकिन केवल थोड़ी मात्रा में। तो, अधिकांश लोग इस आवश्यक पोषक तत्व को प्राप्त करने के लिए खाद्य पदार्थों या पूरक आहार की ओर रुख करते हैं।6

एल्फा-लाइपोइक एसिड के कई खाद्य स्रोत हैं। लाल माँस और अंग माँस जिगर जैसे अच्छे पशु स्रोत हैं। पौधों में भी एल्फा-लाइपोइक एसिड होता है। कुछ अच्छे स्रोत ब्रोकली, टमाटर, पालक और ब्रसल स्प्राउट हैं

4. एल-कार्निटाइन

एल-कार्निटाइन एक पोषक तत्व और आहार पूरक है जो आपके शरीर में ऊर्जा के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह यौगिक अमीनो एसिड लाइसिन और मेथियोनीन से बनाया गया है। इसकी भूमिका भोजन से प्राप्त फैटी एसिड को आपकी कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया तक पहुँचाना है।7

जब फैटी एसिड माइटोकॉन्ड्रिया में ले जाया जाता है, तो उन्हें ऊर्जा में बदल दिया जा सकता है। आपका शरीर एल-कार्निटाइन बना सकता है, लेकिन इसे पर्याप्त मात्रा में बनाने के लिए विटामिन सी की भी बहुत आवश्यकता होती है।

आपके शरीर में उत्पादित एल-कार्निटाइन के अलावा, आप माँस या मछली जैसे पशु उत्पादों को पूरक के रूप में खाकर इसकी थोड़ी मात्रा भी प्राप्त कर सकते हैं।

5. फिश ऑयल

फिश ऑयल मूल रूप से मछली से प्राप्त तरल वसा है। फिश ऑयल सभी मछलियों से उत्पन्न नहीं होता है बल्कि प्राकृतिक रूप से बहुत तैलीय मछलियाँ जैसे ट्यूना या एंकोवी से ही प्राप्त किया जाता है। फिश ऑयल में ओमेगा 3 फैटी एसिड “सर्वोत्कृष्ट पदार्थ” होता है। ये फैटी एसिड दो रूपों में आते हैं: EPA और DHA। अनुसंधान से पता चला है कि दोनों रूपों में आपके माइटोकॉन्ड्रिया के स्वास्थ्य को बनाए रखने सहित स्वास्थ्य से जुड़े लाभ शामिल हैं।

हमारे माइटोकॉन्ड्रिया की झिल्ली या बाहरी परत वसा से बनी होती है। अनुसंधान से पता चला है कि पूरक के रूप में ओमेगा 3 फैटी एसिड इस झिल्ली की संरचना में सहायक होते हैं, सैद्धांतिक रूप से जब माइटोकॉन्ड्रिया की बाहरी सुरक्षात्मक झिल्ली मजबूत होती है तो इसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना कम हो जाती है। ये फैटी एसिड माइटोकॉन्ड्रिया को अधिक कुशलता से ऊर्जा का उत्पादन करने में मदद कर सकते हैं।8

माइटोकॉन्ड्रियन मानव शरीर के प्रत्येक कोशिका में पाया जाने वाला एक आवश्यक कोशिकांग है। यह शरीर को गतिमान रखने के लिए आवश्यक ऊर्जा का उत्पादन करने का महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। शुक्र है, बीच-बचाव के लिए उचित जीवनशैली और पूरक उपलब्ध हैं जिनका उपयोग हम अपने माइटोकॉन्ड्रिया को स्वस्थ रखने के लिए कर सकते हैं।

संदर्भ:

  1. फ्राइडमैन, जे.आर. नुन्नारी, जे.(2014). माइटोकॉन्ड्रियल फॉर्म एंड फंक्शन नेचर, 505(7483), 335-343.
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