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प्राकृतिक जड़ी बूटियां और संवहनी मनोभ्रंश

15 जुलाई 2019

जेम्स लेक, एमडी के द्वारा

इस लेख में:

पारंपरिक उपचारों की सीमाएं जड़ी-बूटियों पर शोध को आमंत्रित करती हैं

एडी के कुछ मामलों में चोलिनिस्टरेज़ इनहिबिटर्स और ग्लूटामेट रिसेप्टर प्रतिपक्षी जैसे उपलब्ध भेषजगुणविज्ञानीय तत्व सहायक होते हैं लेकिन वीएडी के खिलाफ सीमित प्रभावकारिता रखते हैं। इसका यह परिणाम हुआ है कि वीएडी से ग्रसित कई रोगी जड़ी-बूटियों और अन्य पूरक और एक्यूपंक्चर, न्यूट्रास्यूटिकल्स, योग, ताई ची, और म्यूजिक थेरेपी जैसी वैकल्पिक (सीएएम) पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं। 

चीनी चिकित्सा में प्रयोग की जाने वाली कई जड़ी-बूटियों की एकाकी रूप से और अलग-अलग संयोजनों में एडी और वीएडी के लक्षणों पर उनके संभावित लाभकारी प्रभावों के लिए जांच की गई है, जिनमें जिन्को बाइलोबा, हपरज़िया सेराटाकर्क्यूमा लोंगापैनेक्स जिनसेंग, पैनेक्स नोटोजिनसेंग, बकोपा मोननेरी, सैल्विया मिलटियोरिज़ा, क्रोकस सैटिवस, और कैमेलिया साइनेंसिस। उन एकल चीनी जड़ी बूटियों और जटिल चीनी जड़ी बूटी के सूत्रों पर अध्ययन की संक्षिप्त समीक्षा नीचे दी गई है, जो स्वस्थ वयस्कों और मनोभ्रंश से ग्रसित व्यक्तियों में अपने संभावित संज्ञानात्मक लाभों के लिए परखी जा जा रही है।  

एकल जड़ी बूटियां लाभकारी हैं किन्तु सीमित हैं

हालिया निष्कर्षों से पता चलता है कि जिन्को बाइलोबा अर्क वीएडी के पशु मॉडल में सीखने और याददाश्त में सुधार करते हैं। कठोरता से सख्त समावेश मानदंडों को पूरा करने वाले बड़े प्लेसबो-नियंत्रित अध्ययन और अध्ध्यनों के विश्लेषण इस बात का समर्थन करते हैं कि जी. बाइलोबा के अर्क से एडी और वीडी के निदान वाले व्यक्तियों में अनुभूति, कार्यकारी कामकाज और व्यवहार में गिरावट की दर धीमी हो जाती है। मस्तिष्क के कार्यक्रम में जी. बाइलोबा के द्वारा वृद्धि और परिणामस्वरूप याददाश्त और संज्ञानात्मक कार्य में सुधार करने वाली प्रस्तावित पद्धतियों में शोथज बृहतभक्षककोशिकाओं की गतिविधि में कमी, रक्त प्रवाह में सुधार, बिंबाणु-सक्रियण कारक की गतिविधि में कमी (जो स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है), कॉर्टिकोस्टेरॉइड के उत्पादन में कमी और ग्लूकोज में वृद्धि, तंत्रिक स्टेम सेल के प्रसार में वृद्धि, मस्तिष्क की चोट के बाद सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी में तेज़ी, मुक्त कोलेस्ट्रॉल में कमी, और मस्तिष्क में अमाइलॉइड अग्रदूत प्रोटीन के उत्पादन में कमी शामिल हैं।

कर्क्यूमा लोंगा (हल्दी) का उपयोग चीनी, हिंदू और आयुर्वेदिक चिकित्सा में सदियों से अग्नाशयशोथ, गठिया, कैंसर और सूजन, न्यूरोडीजेनेरेटिव, और पाचन विकारों सहित कई चिकित्सा विकारों के लिए किया जाता रहा है। पशु और इन विट्रो अध्ययन से यह पता चलता है कि कर्क्यूमिन के संज्ञानात्मक लाभ लिपिड पेरॉक्सिडेशन के अवरोधन, प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस), और प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन प्रजातियों के अपमार्जन, एनएफ-केबी सक्रियण के अवरोधन और इसके प्रज्वलनरोधी कार्यों सहित कामकाज की कई पद्धतियों पर आधारित होते हैं। करक्यूमिन सीधे एकत्रीकरण को रोकने और तंतुमय स्पर्शरेखा के गठन के लिए छोटे बीटा-एमिलॉइड की प्रजातियों को बांध सकता है। 24 महीने के यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण में हल्के से मध्यम एडी वाले 36 रोगियों को प्लेसबो के स्थान पर करक्यूमिन (2 और 4 ग्राम / दिन) दिया गया, जिन्होंने अनुभूति और स्मृति में बराबर गैर-महत्वपूर्ण बदलाव का अनुभव किया। ये निष्कर्ष आंशिक रूप से अध्ययन में उपयोग की जाने वाली कर्क्यूमिन की सामग्री की कम जैव उपलब्धता के कारण हो सकते हैं। 

जानवरों के अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि पैनेक्स जिनसेंग के जैवसक्रिय घटक मनोभ्रंश के रोगियों में अनुभूति और याददाश्त में सुधार कर सकते हैं। जिनसेनोसाइड आरजी5 अमाइलॉइड-β और कोलीनस्टेरेज़ की गतिविधि को कम करता है, और जिनसेनोसाइड आरजी3  β-आनुवंशिक अभिव्यक्ति की वृद्धि के माध्यम से अमाइलॉइड पेप्टाइड के क्षरण को बढ़ावा देता है। पैनेक्स जिनसेंग रक्तचाप को भी कम कर सकता है और वासोडिलेशन को बढ़ाकर रक्त परिसंचरण में सुधार कर सकता है। 12-सप्ताह लंबे दो खुले परीक्षणों से यह पता चलता है कि जिनसेंग एडी से निदान किए गए व्यक्तियों में अनुभूति में सुधार कर सकता है। हाल ही में दो छोटे खुले परीक्षणों में एडी के निदान वाले जिन व्यक्तियों ने प्रति दिन 4.5 और 9 ग्राम की खुराक में जिनसेंग का सेवन किया, उन्होंने अनुभूति और स्मृति में महत्वपूर्ण सुधार का अनुभव किया। दो छोटे प्लेसबो-नियंत्रित परीक्षणों से यह पता चलता है कि पैनेक्स नोटो जिनसेंग मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में सुधार करता है और वीएडी से ग्रसित व्यक्तियों में याददाश्त को बढ़ाता है।  

बकोपा मोननेरी (ब्राह्मी) में न्यूरोप्रोटेक्टिव और प्रतिउपचायक प्रभाव होते हैं, यह एक मुक्त रेडिकल अपमार्जक के रूप में कार्य करता है और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बढ़ा सकता है। याददाश्त संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा में हर्बल का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। वर्तमान में स्वस्थ वयस्कों और एडी के निदान वाले व्यक्तियों में जड़ी बूटियों के संज्ञानात्मक लाभों पर अध्ययन जारी हैं। 

केसर (क्रोकस सैटाइवस) का उपयोग चीनी दवा में अवसादरोधी, उद्वेष्टरोधी और प्रतिश्यायरोधी कर्मक के रूप में किया जाता है। क्रोकिन युक्त अर्क में प्रतिउपचायक और एंटीप्लेटलेट गुण होते हैं और मनोभ्रंश के पशु मॉडल में सीखने और याददाश्त में सुधार करने के लिए इन्हें दर्शाया जाता है। एक 22-सप्ताह में डबल-ब्लाइंड यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण के दौरान एडी के रोगियों को 30 मिलीग्राम / दिन की मात्रा में केसर दी गयी और कोलेलिनेस्टरेज़ इनहिबिटर डोनेपेजिल ने 10 मिलीग्राम / दिन की मात्रा में अनुभूति में तुलनीय सुधार दिखाया, जबकि केसर को बेहतरीन रूप से सहन किया गया था। 16 सप्ताह के डबल-ब्लाइंड परीक्षण में केसर का सेवन करने वाले एडी रोगियों ने प्लेसबो समूह की तुलना में काफी बेहतर प्रतिक्रिया दी।

चाय (कैमेलिया साइनेंसिस) का सेवन व्यापक रूप से स्वास्थ्य के लिए किया जाता है, इसमें एपिगैलोकैटेचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी) होता है जिसमें प्रज्वलनरोधी प्रभाव, मुक्त रेडिकल अपमार्जक के रूप में इसकी भूमिका व अन्य के द्वारा दिए गए न्यूरोप्रोटेक्टिव लाभ होते हैं। जो व्यक्ति अक्सर चाय पीते हैं उनमें एडी विकसित होने का जोखिम कम हो सकता है। दो संभावित अध्ययनों में यह देखा गया है कि बुजुर्गों में ग्रीन टी का नियमित सेवन संज्ञानात्मक हानि और मनोभ्रंश के अपेक्षाकृत कम जोखिम से जुड़ा है। 

मनोभ्रंश में एकल जड़ी बूटियों पर अध्ययन के निष्कर्ष व्यक्तिगत नैदानिक परीक्षणों के नमूने के छोटे आकार, खराब कार्यप्रणाली और लघु अध्ययन अवधि तक सीमित हैं। इसके अलावा, कई एकल जड़ी बूटियों के जैवसक्रिय घटकों के प्लाज्मा संकेंद्रण लाभकारी प्रभाव के लिए बहुत कम हो सकते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि अनुभूति में देखे गए सुधार दो या अधिक जैव सक्रिय घटकों के बीच सहक्रियात्मक सहभागिता से संबंधित हो सकते हैं। चीनी चिकित्सा और चिकित्सा की अन्य एशियाई पद्धतियां अक्सर जड़ी-बूटियों के संयोजन का उपयोग करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप असतत बायोएक्टिव घटकों के बीच सहक्रियात्मक परस्पर क्रिया होती है जो कि एडी और वीएडी जैसे जटिल हैतुकी के साथ रोगों को अधिक प्रभावी ढंग से लक्षित कर सकती है। एक नई शोध पद्धति जिसे सिस्टम-टू-सिस्टम विश्लेषण कहा जाता है, को हाल ही में जड़ी बूटी के सूत्रों में जटिल सहक्रियात्मक अनुयोजन के अध्ययन के लिए लागू किया गया है। 

जटिल जड़ी बूटी के सूत्रों का वादा

जटिल जड़ी बूटी के सूत्रों पर वीएडी में केवल कुछ अध्ययन ही किए गए हैं। जबकि कुछ ने सकारात्मक निष्कर्षों की जानकारी दी है, लेकिन निष्कर्षों का महत्व छोटे अध्ययन आकार और पद्धतिगत दोषों द्वारा सीमित है। वीएडी में जटिल जड़ी बूटियों के सूत्रों पर अध्ययनों की 2012 की व्यवस्थित समीक्षा से यह पता चला कि जिन बहुसंख्यक सूत्रों की जांच की गई, उनके परिणामस्वरूप पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली दवाओं या प्लेसेबो की तुलना में संज्ञानात्मक कार्यों में काफी सुधार हुआ। 4 अध्ययन जिनमें हर्बल दवाओं को पारंपरिक दवाओं के साथ जोड़ा गया था, उन्होंने अकेले पारंपरिक दवाओं की तुलना में बेहतर संज्ञानात्मक कामकाज दिखाया, हालाँकि, इन निष्कर्षों का महत्व गंभीर कार्यप्रणाली दोषों द्वारा सीमित है। एक अन्य हालिया मेटा-विश्लेषण में 24 यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण (सभी चीन में आयोजित किए गए) शामिल हैं, जो कि वीएडी के निदान वाले व्यक्तियों पर आधारित हैं। एक उपसमूह विश्लेषण में, जटिल चीनी हर्बल हस्तक्षेप के कारण पिरिकेटम (10 अध्ययनों में) या प्लेसबो (3 अध्ययनों में) की तुलना में संज्ञानात्मक कार्य में काफी वृद्धि हुई। हर्बल दवा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने पीराकैटम से उपचारित लोगों की तुलना में दैनिक जीवन की गतिविधियों में अधिक सुधार का अनुभव किया। हालांकि, निष्कर्षों का महत्व पद्धतिगत दोषों द्वारा सीमित था, जैसा कि उपरोक्त अध्ययनों में दिखाया गया है।  

संवहनी मनोभ्रंश के लिए एक जटिल हर्बल फॉर्मूला विकसित करने के प्रयास जारी

एक दशक से अधिक समय तक उपरोक्त चुनौतियों के जवाब में वीएडी के उपचार के लिए मानकीकृत जटिल हर्बल सूत्रीकरण विकसित करने के लिए चीनी चिकित्सा विज्ञान अकादमी और पश्चिमी सिडनी विश्वविद्यालय के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास जारी है। एसएलटी नामक सूत्र में जिन्को बाइलोबा (जिन्कगो)पैनेक्स जिनसेंग (जिनसेंग), और क्रोकस सैटिवस (केसर) के अर्क की मानकीकृत सामग्री शामिल है। 

जैवसक्रिय घटकों के इष्टतम अनुपात और एसएलटी की इष्टतम खुराक पशुओं के अध्ययन की एक श्रृंखला के माध्यम से निर्धारित की गई थी। प्रीक्लिनिकल परीक्षणों ने सीखने और याददाश्त में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया और मनोभ्रंश के पशु मॉडल में न्यूरोपैथोलॉजी और प्रतिउपचायक गतिविधि के मार्कर। इस लेख को लिखने के समय वीएडी के निदान वाले व्यक्तियों में प्रभावकारिता स्थापित करने के लिए तीसरे चरण का अध्ययन जारी है। प्रीक्लिनिकल परीक्षणों से संचयी निष्कर्षों ने फोकल सेरेब्रल इस्किमिया / रेपरफ्यूजन चोट के क्षेत्र में कमी, प्लेटलेट एकत्रीकरण में कमी और मुक्त रेडिकल अपमार्जन गतिविधि में वृद्धि समेत एसएलटी के कई सेरेब्रोवास्कुलर लाभ दिखाए हैं। 

एसएलटी या प्लेसिबो का इलाज किए गए व्यक्तियों में प्रतिकूल प्रभाव का एक जैसा ही जोखिम होता है। 16 स्वस्थ वयस्कों ने एक छोटे से 1-सप्ताह के आरसीटी में एसएलटी के लिए यादृच्छिक रूप से काम की स्मृति में सुधार किया। एक छोटे चरण II के अध्ययन में यह पाया गया कि जिन व्यक्तियों का संभावित वीडी के साथ निदान किया गया था, उन्हें एसएलटी दिए जाने पर संज्ञानात्मक कार्यों में काफी सुधार देखा गया, और उनमें से कुछ के स्मृति, श्रवण और वाक प्रसंस्करण से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्रों में रक्त के प्रवाह में वृद्धि दिखाई दी। संभावित वीएसडी वाले 325 व्यक्तियों पर आधारित एक दूसरे 12 महीने के लंबे चरण II अध्ययन में समान संज्ञानात्मक सुधार पाए गए, या तो चरण II अध्ययन ने एसएलटी से संबंधित गंभीर प्रतिकूल घटनाओं की जानकारी दी। लेखन के समय, दो बहुस्तरीय चरण III परीक्षण जारी हैं। चरण III के निष्कर्षों की पुष्टि लंबित है, किन्तु एसएलटी वीएसडी के साक्ष्य-आधारित हर्बल उपचार के रूप में उभर सकता है, जो कि एक न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है जिसके लिए वर्तमान में कोई प्रभावी उपचार नहीं है।

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