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मछली का तेल बनाम क्रिल का तेल: आपके लिए सबसे अच्छा कौन सा है?

8 जुलाई 2019

एरिक मैड्रिड एमडी

इस लेख में:

मछली के तेल और क्रिल के तेल के स्वास्थ्य लाभों के बारे में ढेर सारा भ्रम है। कई लोग सोचते हैं कि क्या दोनों के बीच उल्लेखनीय अंतर है और क्या एक तेल की बनिस्बत दूसरा अधिक फायदेमंद है।

मछली के तेल और क्रिल के तेल, दोनों में ओमेगा-3 वसा अम्ल, विशिष्ट तौर पर, डोकोसाहेक्सेनोइक अम्ल (DHA) और आइकोसापेंटेनोइक अम्ल (EPA). होते हैं। ये अनिवार्य वसा अम्ल ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने और संधिशोथ से ग्रस्त लोगों में दर्द और शोथ को कम करने में मदद कर सकते हैं।

  • डोकोसाहेक्सेनोइक अम्ल (DHA) एक ओमेगा-3 वसा अम्ल;that’s है जो मानव मस्तिष्क, त्वचा, और आँख का एक महत्वपूर्ण घटक है। महत्वपूर्ण होने पर भी, इसे “अनिवार्य” नहीं माना जाता है क्योंकि यदि आहार में अम्ल (ALA) का उपभोग किया जाए तो इसका निर्माण शरीर में किया जा सकता है।
  • आइकोसापेंटेनोइक अम्ल (EPA; या इकोसापेंटेनोइक अम्ल) मछली के तेल, क्रिल के तेल, और अंडों (यह मानते हुए कि मुर्गियों को EPA खिलाया गया था) में आम तौर पर पाया जाता है।

2016 में हुए एक अध्ययन में 4 सप्ताह की अवधि में प्रयोगाधीन व्यक्तियों को मछली के तेल और क्रिल के तेल की समतुल्य खुराकें देने के बाद रक्त में DHA/EPA के एक समान स्तर देखे गए।

DHA और EPA के स्रोत

मछली का तेल स्पष्ट है कि मछली से आता है। आम तौर पर, वाणिज्यिक मछली का तेल तुना, हेरिंग, और सार्डीन्स से आता है। निकाले जाने पर, मछली का तेल सामान्य तौर पर सफेद या पीले रंग का होता है। समग्र तौर पर, इसमें एंटीऑक्सीडैंट गुणों की कमी होती है, यानी यह एंटीऑक्सीडैंट के रूप में अच्छा काम नहीं करता है। सेवन करने पर, यह शरीर में एक ट्रयासिलग्लिसराइड (TAG) के रूप में वितरित किया जाता है। वाणिज्यिक गुणवत्ता के मछली के तेल को अतिरिक्त शुद्धीकरण प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है ताकि इसमें मौजूद भारी धातुओं को हटाया जा सके।

इसी प्रकार, क्रिल का तेल क्रिल, यानी अंटार्कटिक क्षेत्र से पकड़े गए क्रूस्टेशियन्स से आता है। क्रिल पादप प्लवक और समुद्री शैवाल खाते हैं और इन्हें खाद्य शृंखला के तल में रखा गया है। परिणामस्वरूप, क्रिल को उनके प्राकृतिक आवास में बहुत थोड़े से लेकर शून्य धातु से संपर्क का सामना करना पड़ता है, इसलिए अतिरिक्त शुद्धीकरण की जरूरत नहीं पड़ती है।

क्रिल एक छोटा, लाल, केकड़े जैसा जीव होता है जो दक्षिणी अटलांटिक महासागर में पाया जाता है। क्रिल का तेल एक अनिवार्य वसा अम्ल है जो एक विशिष्ट लाल रंग का होता है। यह मछली के तेल से अधिक महंगा होता है। सेवन करने पर, यह शरीर में फॉस्फोलिपिड्स के रूप में वितरित होता है।

विश्व भर में, क्रिल, मछलियों की अपेक्षा अधिक बहुतायत से मिलते हैं, इसलिए कुल मिलाकर, क्रिल से पर्याप्त मात्रा में DHA/EPA निकालना मछली से इन तेलों को निकालने की तुलना में अधिक दीर्घावधि संधारणीयता की क्षमता से युक्त है।

क्या समुद्री खाद्य पदार्थ खाना एक अच्छा विकल्प है?

आदर्श रूप से, हमें ये सभी विटामिन, खनिज, और अनिवार्य वसा अम्ल खाद्य पदार्थों से प्राप्त होने चाहिए। मैं अपने मरीज़ों को यही सलाह देता हूँ, लेकिन मैं जानता हूँ यह हमेशा संभव नहीं होता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हर सप्ताह कम से कम दो बार मछली के नियमित सेवन की अनुशंसा करता है। जो लोग शाकाहारी विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं, कतिपय खाद्य पदार्थों का सेवन अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल (ALA), का अच्छा स्रोत हो सकता है, जिसे DHA में बदला जा सकता है। ALA को अलसी के बीज, अखरोट, सोया, चिया के बीजों, और भांग के बीजों जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।

यदि आप केवल भोजन पर निर्भर हैं, तो पशु स्रोतों से DHA और EPA का पर्याप्त मात्रा में सेवन हमारे समुद्रों के प्रदूषण के कारण चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मिसाल के तौर पर, मैकरेल, स्वोर्डफिश, बैस, शार्क, और तुना जैसी मछलियों में पारे की मात्रा औसत से अधिक होती है और उन्हें कम मात्रा में खाना चाहिए। सामन, कैटफिश, एंकोवी, सार्डीन, हेरिंग, ट्राउट, और तिलापिया जैसी मछलियों में पारे के स्तर कम होते हैं, लेकिन प्रति सप्ताह दो या तीन से अधिक बार खाने पर ये स्तर बढ़ सकते हैं।

मछली का तेल और क्रिल का तेल निम्नलिखित स्वास्थ्य अवस्थाओं पर प्रभाव डाल सकता है।

जोड़ों का शोथ

ऑस्टियोआर्थ्राइटिस आम तौर पर जोड़ों के सामान्य रूप से घिसने का परिणाम होता है। यह कार्टिलेज के नष्ट होने से होता है. जो हड्डी को ढंकने वाले गद्दे का काम करती है। ऑस्टियोआर्थ्राइटिस के आरंभिक संकेत लगभग 40 वर्ष की आयु में शुरू हो सकते हैं और उम्र के बढ़ने के साथ बढ़ सकते हैं। लक्षणों में जोड़ों का दर्द, सूजन, अकड़न और जोड़ की गतिविधि में कमी शामिल हो सकते हैं। कई लोग लक्षणों से राहत पाने के लिए प्राकृतिक विकल्पों का सहारा लेते हैं। सामान्य तौर पर, डॉक्टर इबुप्रोफेन, नैप्रॉक्सेन, और इंडोमेथेसिन जैसी गैर-स्टीरॉयडल शोथ-रोधी दवाईयाँ (NSAIDS) लेने को कहते हैं।

मछली का तेल

अध्ययन दर्शाते हैं कि अनिवार्य वसा अम्ल जोड़ के दर्द में सुधार और NSAIDs के उपयोग को कम करनें में मदद कर सकते हैं। अध्ययनों में तब जोड़ों की अकड़न में कमी भी दर्शाई गई है जब मछली के तेल को न्यूनतम 500 मिग्रा प्रति दिन से लेकर 2,000 मिग्रा प्रतिदिन तक की मात्रा में रोजाना लिया जाता है।  

क्रिल का तेल

2007 में American Journal of Clinical Nutrition में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि 300 मिग्रा क्रिल का तेल “7 और 14 दिनों की छोटी सी उपचार अवधि के भीतर शोथ में उल्लेखनीय कमी लाता है और जोड़ के शोथ के लक्षणों को कम करता है”। 2016 में आयोजित घुटने के हल्के दर्द के मरीज़ों के एक दोहरे-अज्ञात, प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन ने दर्शाया कि क्रिल का तेल 2,000 मिग्रा प्रति दिन की दैनिक खुराकों पर दर्द को कम कर सकता है।

वाहिकीय स्वास्थ्य

हृदयवाहिकीय रोग विश्व भर में लोगों की मौत का प्रमुख कारण है। हृदय और वाहिकीय रोग के बढ़े हुए जोखिम में कई जोखिम कारकों का योगदान होता है। ओमेगा-3 वसा अम्ल फायदेमंद हो सकते हैं।

मछली का तेल

ओमेगा-3 वसा अम्लों का नियमित सेवन हृदय और वाहिकीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। 2017 के एक अध्ययन ने दर्शाया कि यह एथेरोस्क्लेरोसिस, यानी धमनियों के कड़ेपन को रोकने में मदद कर सकता है, जबकि Journal of the American Heart Association में 2013 के एक अध्ययन ने दर्शाया कि रक्त में DHA/EPA के उच्च स्तर हृदयवाहिकीय रोग के जोखिम में कमी से संबद्ध थे।

क्रिल का तेल

2015 में British Medical Journal में प्रकाशित एक अध्ययन का निष्कर्ष यह था: “क्रिल का तेल टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में हृदयवाहिकीय जोखिमों, खास तौर पर एंडोथीलियल गतिविधि के विकार, और एचडीएल में मध्यम सुधार ला सकता है।” तथापि, ये फायदे उन लोगों पर भी लागू हो सकते हैं, जिन्हें मधुमेह नहीं है। 2017 में Nutrition Reviews में प्रकाशित एक अध्ययन ने यह भी दर्शाया कि क्रिल का तेल बुरे (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड्स को कम करके हृदय को फायदा पहुंचा सकता है क्योंकि इन दोनों के बढ़े हुए रक्त स्तर हृदय रोग के लिए जोखिम कारक हैं।

शोथ

शोथ तब होता है जब शरीर में असंतुलन होता है—यानी, शरीर आंतरिक रूप से “जल रहा होता है”। तनाव की स्थितियों में, शरीर कॉर्टिसॉल नामक एक स्टीरॉयड हारमोन का अत्यधिक उत्पादन करता है।  जब कॉर्टिसॉल के स्तर अधिक होते हैं, तब शरीर प्रॉस्टाग्लैंडिन्स नामक शोथकारक रसायन बनाता है। शोथ का मूल्यांकन रक्त में सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) के स्तरों को माप कर भी किया जा सकता है।

2017 में Journal of the American College of Nutrition में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, CRP के स्तरों में वृद्धि से कैंसर और हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है। 2008 में, जुपिटर अध्ययन ने दर्शाया कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टैटिन दवाईयाँ शोथ को कम कर सकती हैं। क्रिल का तेल और मछली का तेल भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

मछली का तेल

मछली का तेल CRP के स्तरों को कम करने में मदद करने के लिए विख्यात है। 2016 में किए गए एक अध्ययन ने यह बात सिद्ध की लेकिन यह भी दर्शाया कि क्रिल का तेल 2,000 मिग्रा मछली के तेल से अधिक कारगर था। हालांकि, 2016 में Journal of Internal Medicine में प्रकाशित एक और अध्ययन ने दर्शाया कि जब 1,400 मिग्रा मछली के तेल का सेवन किया गया, तो CRP के स्तर में कमी नहीं हुई। इसके आधार पर, मैं CRP स्तरों को कम करने के लिए ओमेगा 3 मछली के तेल की कम से कम 2,000 मिग्रा दिन में दो बार की खुराक लेने की अनुशंसा करूँगा।

क्रिल का तेल

2016 के एक अध्ययन ने दर्शाया कि क्रिल के तेल की 500 मिग्रा प्रति दिन दो बार की खुराक मछली के तेल की 2,000 मिग्रा प्रति दिन दो बार की खुराक की तुलना में CRP के स्तरों में अधिक कमी करने में मदद कर सकती है। 2007 में Journal of the American College of Nutrition में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि क्रिल का तेल 300 मिग्रा प्रति दिन की खुराक में CRP के स्तरों को लगभग 20 प्रतिशत तक कम कर सकता है।

याददाश्त

आबादियों की उम्र के बढ़ने के साथ-साथ, याददाश्त से संबंधित चिंताएं अधिक आम हो जाती हैं। अलज़ाइमर्स रोग, जो मनोभ्रंश का सबसे आम प्रकार है, का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है और रोगी और देखभाल करने वालों, दोनों के लिए अत्यधिक कुंठा और चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है। प्रारंभिक चरणों में नाम भूल जाना और भ्रम जैसे लक्षण देखे जाते हैं, जबकि अलज़ाइमर्स के बाद के चरणों में अधिक गंभीर समस्याएं, जैसे मानसिक उन्माद और अनुचित बर्ताव जैसी बातें दिखाई दे सकती हैं। 65 की उम्र के पहले अलज़ाइमर्स रोग के एक प्रतिशत से कम मामले होते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 65 वर्ष के हो जाने के बाद, नौ में से एक व्यक्ति को इसका जोखिम होता है। DHA और EPA के साथ, हल्दी और बोसवेलिया जैसे प्राकृतिक उपचार मददगार प्रतीत होते हैं।

मछली का तेल

2016 में याददाश्त की समस्याओं वाले 44 मरीज़ों का अध्ययन किया गया, जिनमें से 22 को मछली का तेल, और 22 लोगों को प्लेसिबो दिया गया। शोधकर्ताओं ने देखा कि मछली का तेल लेने वाले लोगों की याददाश्त बेहतर थी। अन्य अध्ययनों ने भी ऐसी ही निष्कर्ष दर्शाए हैं।

क्रिल का तेल

2017 में International Journal of Molecular Sciences में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि क्रिल का तेल मस्तिष्क में ऑक्सीडेटिव तनाव को घटाने में मदद कर सकता है और बीटा-एमिलॉइड संग्रहों को कम करता है, जिसे अल्ज़ाइमर्स रोग का कारण माना जाता है। इस पर अभी और शोध जारी है।

ट्राईग्लिसराइड्स की अधिकता

ट्राईग्लिसराइड्स एक प्रकार के वसा हैं जो रक्त में संचारित होता है। इनके आदर्श स्तर 150 मिग्रा/डीएल (या 1.7 मिलीमॉल/ली से कम होने चाहिए)। इनके बढ़े हुए स्तर दिल के दौरे और मस्तिष्काघात (स्ट्रोक) के लिए जोखिम कारक हैं। शर्करा और सरल कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा वाले आहार का सेवन करके उन्हें कम करना भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कभी-कभी यही काफी नहीं होता। EPA/DHA पूरक पर विचार किया जा सकता है।

मछली का तेल

आरोप है कि दवाई बनाने वाली कंपनियों ने ट्राईग्लिसराइड्स को कम करने के लाभ को समझ लिया है, और इसलिए, फार्मास्युटिकल ग्रेड का मछली का तेल विकसित किया है। तथापि, इसकी ऊंची लागत के कारण, कई लोग इसे खरीदने में असमर्थ हैं।

2016 में Lipids in Health and Disease में प्रकाशित एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि ओमेगा-3 वसा अम्ल ट्राईग्लिसराइड्स को कम करने में उपयोगी हैं। इसी प्रकार, 2017 में Atherosclerosis में प्रकाशित एक अधि-विश्लेषण अध्ययन, जिसमें 1,738 लोगों का अध्ययन किया गया, ने दर्शाया कि तैलीय मछली के सेवन से एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) में वृद्धि के साथ-साथ ट्राईग्लिसराइड्स को कम करने में मदद मिली। ये दोनों हृदयवाहिकीय रोग के महत्वपूर्ण बायोमार्कर हैं।

क्रिल का तेल

2014 में किए गए एक अध्ययन ने क्रिल का तेल लेने पर ट्राईग्लिसराइड्स के स्तरों में 10 प्रतिशत की कमी दर्शाई। 2017 में Nutrition Reviews में प्रकाशित 662 मरीज़ों के एक अध्ययन ने क्रिल के तेल का सेवन करने वालों में ऐसे ही परिणाम दर्शाए। अन्य अध्ययनों ने इन निष्कर्षों का समर्थन किया है।

सावधानियाँ:

मछली या शेलफिश से एलर्जी वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि उन्हें एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। यदि आपके पास कोई प्रश्न हैं तो पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

मछली का तेल द्रव, कैप्सूल और चिपचिपे फॉर्मुलेशनों में उपलब्ध है। क्रिल का तेल सामान्य तौर पर कैप्सूल या सॉफ्ट जेल फॉर्मुलेशनों में उपलब्ध है।

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