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थायराइड विकारों के 10 अंतर्निहित कारण

ली सिएर्जिविच, ND द्वारा

इस लेख में:


‌‌‌‌थायराइड ग्रंथि क्या है?

थायरॉयड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है जो आपकी गर्दन के सामने स्थित होती है। यह चयापचय को विनियमित करने की प्रभारी होती है साथ ही इसमें हार्मोन होते हैं जो शरीर में हर कोशिका को प्रभावित करते हैं।

‌‌‌‌थायराइड रोग के सामान्य लक्षण क्या हैं?

थायराइड रोग के लक्षण आम होते हैं और अक्सर गैर-विशिष्ट लगते हैं इसलिए यदि आपके लक्षण थायरॉयड रोग के कारण हैं तो इसे जाँचने के लिए रक्त परीक्षण करना महत्वपूर्ण है।

थायराइड रोगियों की कुछ सबसे आम शिकायतों में शामिल हैं:

  • बालों का झड़ना
  • स्मरण शक्ति की क्षति
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी
  • थकान
  • पाचन संबंधी समस्याएं
  • मासिक धर्म की अनियमितता
  • बांझपन
  • ठंड की असहिष्णुता
  • दिल की घबराहट
  • बिना किसी कारण वजन में परिवर्तन

थायराइड रोग महिलाओं को अनुपातहीन रूप से प्रभावित करते हैं, लेकिन वे किसी भी लिंग या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकते हैं। बच्चों में थायराइड रोग होने पर इसका इलाज किया जाना चाहिए, क्योंकि उचित वृद्धि और विकास के लिए थायराइड की पर्याप्त कार्यशीलता आवश्यक है।

‌‌हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म के बीच अंतर क्या है?

हाइपोथायरायडिज्म, जिसमें थायरॉयड ग्रंथि बहुत धीमी गति से कार्य करती है, से संबंधित समस्याएं हाइपरथायरायडिज्म की तुलना में अधिक आम हैं, जिसमें थायरॉयड ग्रंथि बहुत तेजी से कार्य करती है।

हाशिमोटो थायरोडिटिस सबसे आम प्रकार का हाइपोथायरायडिज्म है ग्रैव रोग हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम प्रकार है और खतरनाक हो सकता है। ये दोनों ऑटोइम्यून रोग हैं और लैब परीक्षण इनकी जाँच करते समय थायराइड पेरोक्सीडेज (एंटी-TPO) एंटीबॉडी और एंटी-थायरोग्लोबुलिन एंटीबॉडी की तलाश करते हैं।

‌‌3 थायराइड हार्मोन क्या हैं?

सबसे अधिक प्रासंगिक थायराइड हार्मोन थायरॉयड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (TSH), ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3), और टेट्राआयोडोथायरोनिन (T4) हैं। T4 बनाने हेतु थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए मस्तिष्क से TSH का स्राव होता है , जिसे रक्त में T3 में बदल दिया जाता है। T3 सबसे सक्रिय, उपयोगी थायराइड हार्मोन है। थायराइड हार्मोन प्रतिस्थापन थायराइड रोग के लिए सबसे आम पारंपरिक उपचार है।

थायराइड रोग और विकारों के 10 अंतर्निहित कारण

‌‌‌‌1. आयोडीन की कमी और घेंघा

ऐतिहासिक रूप से, आयोडीन की कमी अक्सर थायरॉयड ग्रंथि में सूजन का कारण रही है, जिसे गण्डमाला या घेंघा कहा जाता है। यही कारण है कि नमक में अक्सर आयोडीन मिलाया जाता है, और जब 1920 के दशक से, आयोडीन युक्त नमक आम हो गया, तब से गण्डमाला की घटनाओं में कमी देखी गई है।

हालांकि, कुछ शोधों में पाया गया है कि दुनिया के कई हिस्सों में उपनैदानिक आयोडीन की कमी या अपर्याप्तता अभी भी आम है। इथियोपिया में 378 गर्भवती महिलाओं के 2017 के एक अध्ययन में पाया गया कि उनमें से दो-तिहाई में आयोडीन की अपर्याप्तता थी। गर्भावस्था के दौरान अनुपचारित हाइपोथायरायडिज्म या आयोडीन की कमी से शिशुओं में बौद्धिक विकलांगता और विकास की समस्याएं जैसे गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

नेपाल में एक 2018 के अध्ययन में सामान्य थायरॉयड, उपनैदानिक-हाइपोथायरायडिज्म और अपरोक्ष हाइपोथायरायडिज्म के साथ प्रतिभागियों में आयोडीन के स्तर का परीक्षण किया गया। आयोडीन के अत्यधिक स्तर को हाइपोथायरायडिज्म के साथ सहसंबद्धित पाया गया और सामान्य थायरॉयड वाले अधिकांश रोगियों में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन का सेवन होता था।

आयोडीन की उचित खुराक के लिए कृपया अपने चिकित्सा प्रदाता से परामर्श करें। उचित मात्रा में कई असंगत साक्ष्य उपलब्ध हैं जिसके मुताबिक बड़ी मात्रा में खुराक बड़ी हानि के साथ-साथ कई प्रकार के लक्षण पैदा कर सकती है।

‌‌‌‌2. खाद्य असहिष्णुता और ऑटोइम्यून थायरॉयड रोग

यह अक्सर अध्ययनों में दिखाया गया है कि आंतों की समस्याएं ऑटोइम्यून थायरॉयड रोग का कारण हो सकती हैं।

गैर-सीलिएक ग्लूटेन संवेदनशीलता उन रोगियों के लिए मूल कारण हो सकती है, जिनमें सीलिएक रोग के परीक्षण का नकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ है। अन्य खाद्य असहिष्णुता का मूल्यांकन व्यक्तिगत आधार पर किया जाना चाहिए। उन्मूलन आहार की मदद से खाद्य असहिष्णुता को उजागर करने के लिए आहार विशेषज्ञ या अन्य चिकित्सा प्रदाता से मिलें।

खाद्य असहिष्णुता भोजन को पचाने और ठीक से अवशोषित करने की क्षमता में गड़बड़ी पैदा करती है, जिसके परिणामस्वरूप नीचे चर्चा की गई कई कमियां पैदा हो सकती हैं।

‌‌‌‌3. पेट में एसिड की कमी और थायराइड रोग

पेट में भोजन के उचित रूप से विघटित होने और पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए एसिड बहुत महत्वपूर्ण है। हाइपोक्लोरहाइड्रिया या एक्लोरहाइड्रिया (पेट में एसिड का कम होना) पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है जो थायराइड की बीमारी को बढ़ाता है।

पेट के एसिड के कम या न होने की स्थिति में उचित निदान और उपचार के बारे में अपने चिकित्सा प्रदाता से बात करें।

‌‌‌‌4. ज़िंक की कमी और थायराइड कार्यशीलता

जिन रोगियों में ज़िंक की कमी होती है उनमें असामान्य थायराइड कार्यशीलता होने की संभावना अधिक होती है। थायराइड ज़िंक के सामान्य उत्सर्जन और अवशोषण को प्रभावित करता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि ज़िंक T4 को T3 में बदलने में मदद कर सकता है, जिससे शरीर में तेजी से ज़िंक के सीमित भंडार का उपयोग होता है।.

‌‌‌‌5. सिलीनियम की कमी और थायराइड हार्मोन

सिलीनियम एक महत्वपूर्ण अल्प-मात्रा में आवश्यक खनिज एंटीऑक्सिडेंट है जो T4 को T3 में बदलने में मदद कर सकता है।

ऑटोइम्यून थायराइड रोग से ग्रसित प्रतिभागियों के एक जर्मन अध्ययन में पाया गया कि, सिलीनियम के 200 माइक्रोग्राम लेने से एंटी-TPO एंटीबॉडी स्तर में काफी कमी आई और अल्ट्रासाउंड छवियों में सुधार हुआ। 6 महीने के बाद, अध्ययन में एक समूह ने सिलीनियम लेना जारी रखा, और उनमें सुधार दिखाई देना भी जारी रहा। वह समूह जिसने सिलीनियम को बंद कर दिया, उसकी स्थिति फिर से खराब हो गई। इसी तरह के परिणाम दोहराए गए अध्ययनों में भी देखे गए हैं।

2003 में, पारंपरिक दवा उपचार से गुजरने वाले हाइपरथायराइड के रोगियों पर सिलीनियम पूरक के साथ अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन में पाया गया कि अतिरिक्त रूप से एंटीऑक्सिडेंट सिलीनियम के साथ दवा उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है।

12 सप्ताह के गर्भ में पूरक के रूप में सिलीनियम लेना शुरू करने वाली और 12 महीने के प्रसवोत्तर तक इसे लेना जारी रखने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनमे एंटी-TPO के एंटीबॉडी पाए गए थे, पर वर्ष 2007 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि पर्याप्त मात्रा में इस पूरक का सेवन करने से प्रसवोत्तर थायरॉयड शिथिलता, और स्थायी हाइपोथायरायडिज्म की घटनाएं काफी कम हो गई थीं।

लाभदायक चीज़ की बहुत ज्यादा मात्रा हानि का संभावित कारण है जैसा कि आयोडीन के साथ, बहुत अधिक सिलीनियम बालों के झड़ने, अवसाद और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं सहित अधिक परेशनियाँ पैदा कर सकता है। उचित खुराक के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

‌‌‌‌6. ग्रैव रोग और हाइपरथायरायडिज्म

सबसे व्यापक पोषण चिकित्सा पुस्तकों में से एक एलन गेबी, एमडी द्वारा लिखित न्यूट्रीशनल मेडिसिन के अनुसार ग्रैव रोग को हाइपरथायरायडिज्म के साथ कई कमियाँ से जुड़ा हुआ पाया गया।

इनमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, एल-कार्निटाइन, बी विटामिन - विशेष रूप से बी12 और बी6, कोलीन, विटामिन ए, विटामिन डी, कोएंजाइम q10, आवश्यक फैटी एसिड, और विटामिन सी शामिल हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाइपरथायरायडिज्म चयापचय में वृद्धि का कारण बनता है, जिसकी वजह से शरीर में इन पोषक तत्वों के उपयोग में वृद्धि होती है। गैबी इन रोगियों के लिए मल्टीविटामिन की सिफारिश करती हैं, लेकिन कृपया पोषक तत्वों की कमी के परीक्षण और उपचार पर अपने चिकित्सा प्रदाता के साथ चर्चा करें।

‌‌‌‌7. सीलिएक रोग और ऑटोइम्यून थायराइडिटिस

एक अध्ययन के अनुसार, ऑटोइम्यून थायराइड रोग वाले 62 में से 1 रोगियों में बायोप्सी करने पर सीलिएक रोग भी पाया गया है। यह सीलिएक रोग के वैश्विक प्रसार की तुलना में लगभग 1% है, हालांकि काकेशियान आबादी में इसकी व्यापकता अधिक है।

2018 की समीक्षा में पाया गया कि ऑटोइम्यून थायराइडिटिस उन रोगियों में तीन गुना अधिक आम है जिन्हें सीलिएक रोग भी है।

यह अध्ययनों में दिखाया गया है, कि जाँच करने पर जिनमें सीलिएक रोग पाया गया है उनमे सख़्ती के साथ ग्लूटेन-रहित आहार नियम समय के साथ पूरी तरह से ऑटोइम्यून थायरॉयड एंटीबॉडी को पलट देता है। यदि जाँच करने पर पाया गया है कि आपको ऑटोइम्यून थायराइडिटिस है, तो सीलिएक रोग की स्क्रीनिंग जाँच के बारे में अपने डॉक्टर से पूछें।

‌‌‌‌8. टोक्सोप्लाज़मोसिज़ संक्रमण और ऑटोइम्यून थायराइडाइटिस

टोक्सोप्लाज़मोसिज़, या टी. गोंडी, दुनिया में सबसे आम ज़ूनोटिक संक्रमणों में से एक है। इसका असर स्वस्थ लोगों में बहुत हल्का या अज्ञात हो सकता है या उन लोगों में बहुत गंभीर हो सकता है जिनकी प्रतिरक्षा क्षमता कमज़ोर है। टोक्सोप्लाज़मोसिज़ का संक्रमण मुख्य रूप से अधपके मांस को खाने से होता है। यह ऑटोइम्यून थायराइडाइटिस के विकास के जोखिम को बढ़ाता है।

चेक गणराज्य में गर्भवती महिलाओं के 2014 के एक अध्ययन में अव्यक्त टोक्सोप्लाज़मोसिज़ संक्रमण और कम TSH, उच्च T4, के बीच संबंध पाया गया। और इससे थायराइड ऑटोएंटिबॉडी का खतरा बढ़ गया।

‌‌‌‌9. यीस्ट संक्रमण और थायराइड रोग

योनि, मौखिक, या आंतों में कैंडिडा से बार-बार होने वाले यीस्ट संक्रमण को थायराइड रोग के संभावित कारण के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए। एलन गेबी, एमडी के अनुसार, कैंडिडा अल्बिकन्स के प्रतिजनों के उत्पादन से एंटीबॉडीज का निर्माण होता है जो संवेदनशील लोगों में थायरॉयड ग्रंथि के साथ प्रतिक्रिया करता है।

‌‌‌‌10. ऑक्सीडेटिव तनाव और थायराइड रोग

2016 के एक पेपर में ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन, और थायरॉयड रोग के बीच संबंध पर चर्चा की गई। मोटापा और हृदय रोग सामान्य स्थितियां हैं जो अक्सर स्वाभाविक रूप से थायरॉयड रोग से जुड़ी होती हैं, और ये दोनों दृढ़ता से ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन से जुड़े होते हैं।

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, सिलीनियम एक एंटीऑक्सिडेंट है जिसे अध्ययनों के अनुसार पाया गया है कि यह थायरॉयड रोग वाले लोगों को लाभ प्रदान कर सकता है। सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक ताजा, सम्पूर्ण, असंसाधित खाद्य पदार्थों के साथ विविध आहार का सेवन करना है। संसाधित, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ जिनमें अक्सर पोषण कम मात्रा में होता है उनकी तुलना में ताजा खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा काफी अधिक होती है।

थायराइड विकार जटिल होते हैं और उपचार में रोगी के इतिहास का एक व्यापक मूल्यांकन शामिल होना चाहिए। अक्सर, एक समस्या दूसरी में बदल जाती है, जैसे खाद्य असहिष्णुता, पेट में एसिड की कमी, और आंतों के विकार पोषक तत्वों की कमी में योगदान करते हैं, जो इन स्थितियों को बढ़ा देता है। कृपया एक योग्य, लाइसेंस प्राप्त चिकित्सा प्रदाता से मिलें, जैसे कोई प्राकृतिक चिकित्सक या कार्यात्मक चिकित्सक जो आपकी व्यक्तिगत उपचार योजना के लिए आपकी सभी विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखता है।

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