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अधिक अवसाद का अनुभव कर रहें है? पेश हैं इससे लड़ने के 5 प्राकृतिक तरीके

मेलिसा एंज़ेलोन, एनडी द्वारा

इस लेख में:


अवसादग्रस्तता मनोदशा का विकार है जहां लोग लंबे समय तक उदासी, अकेलेपन और रुचि कम होने का अनुभव करते हैं। दुनिया में, 10 में से 1 व्यक्ति अवसाद या अवसादग्रस्तता के लक्षणों से पीड़ित पाया जाता है।

‌‌अवसाद के लक्षण

अवसाद के कई लक्षण हो सकते हैं:

  • सामान्य कार्यों में रुचि कम होना 
  • दु:खी महसूस करना
  • भूख में परिवर्तन
  • अपराध बोध अनुभव करना
  • दैनिक कार्यों को करने में "अधिक प्रयास लगना" 
  • व्याकुलता
  • बेचैनी
  • नींद में कठिनाई
  • बहुत अधिक नींद आना 
  • असामान्य प्रतिक्रियाएँ 
  • बहुत क्रोध आना
  • ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने में कठिनाई
  • अकारण (गैर-शारीरिक) दर्द

‌‌अवसाद के कारण क्या है?

अवसाद के कई योगदान कारक हैं। अवसादग्रस्त लक्षणों वाले कुछ लोगों के मस्तिष्क में भौतिक परिवर्तन हो सकते हैं, जिसका कारण संभवतः कोई स्ट्रोक, लंबे समय तक शराब का उपयोग, या किसी दुर्घटना से मस्तिष्क की दर्दनाक चोट हो सकता है।

हार्मोन में परिवर्तन भी अवसाद के लक्षणों में वृद्धि कर सकता है, थायरॉयड हार्मोन की वृद्धि या कमी, सेक्स हार्मोन, हमारे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल जैसे ग्लूकोकॉर्टीकॉइड्स, या इंसुलिन/ग्लूकागॉन—वे हार्मोन जो इस बात का प्रबंधन करते हैं कि हम अपने लिए उर्जा का विखंडन किस प्रकार करते हैं।

जीवन में परिवर्तन भी अवसाद को ट्रिगर कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी प्रियजन की मृत्यु, किसी रिश्ते का ख़त्म होना, वित्तीय तनाव या आघात सभी सामान्य घटनाएं हैं जो इन लक्षणों को ट्रिगर करते हैं। यदि किसी करीबी रिश्तेदार में अवसादग्रस्तता का इतिहास है, तो आप अनुवांशिक रूप से अवसादग्रस्तता विकसित कर सकते है।

इसका एक कारण रासायनिक असंतुलन भी हो सकता है। आपके मस्तिष्क के कार्य को न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में जाने वाले रसायनों के संतुलन द्वारा सावधानीपूर्वक नियंत्रित किया जाता है। ये रसायन संकेतों को आपके मस्तिष्क से आपके शरीर में प्रवाहित करते हैं। यदि इन रसायनों का स्तर बदलता है, तो अवसाद के लक्षण हो सकते हैं।

अवसाद के लिए प्राकृतिक दृष्टिकोण

शोधकर्ताओं ने यह निर्धारित करने के लिए कई जड़ी-बूटियों, पूरक और विटामिनों का अध्ययन किया कि क्या वे अवसाद से पीड़ित लोगों को लाभ प्रदान कर सकते हैं।

1. सेंट जॉन्स वोर्ट और अवसाद प्रबंधन

हाइपेरिकम पेरफोराटम   (सेंट जॉन्स वोर्ट) पीले फूलों वाली झाड़ीदार जड़ी बूटी होती है। यह पूरे यूरोप के अलावा एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों और पश्चिमी अमेरिका के जंगलों में पायी जाती है। सेंट जॉन्स वोर्ट को बहुत पुराने समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है और अवसादग्रस्त लक्षणों के प्रबंधन सहित कई विभिन्न प्रकार के रोगों में सहायक हो सकता है।

सेंट जॉन्स वॉर्ट की रासायनिक संरचना का अच्छी तरह से अध्ययन किया गया है। मौजूदा शोधकार्य पौधे के पारंपरिक इस्तेमाल का समर्थन करता है। इस वनस्पति के गुणों में अवसादरोधी, वायरसरोधी, और जीवाणुरोधी प्रभाव शामिल हो सकते हैं।

ये गुण इसमें मौजूद हाइपेरिसिन और फ्लेवोनॉइड जैसे रासायनिक कंपाउंड की वजह से आते हैं। हाइपरफोरिन सेंट जॉन्स वोर्ट   का घटक है जो अवसादरोधी कार्य के लिए जिम्मेदार हो सकता है। हाइपरफोरिन को 5-HT, डोपामाइन, नॉरपेनेफ्रिन, GABA जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के तेज अवरोधक के रूप में दिखाया गया है। यह मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन को बनाये रखता है, और अवसाद के कई लक्षणों में से एक को ठीक करने में मदद करता है।

फूलों का उपयोग पूरक बनाने के लिए किया जाता है, और यह अक्सर चाय, टैबलेट और कैप्सूल के रूप में आता है।

2. SAM-e और रासायनिक संतुलन

एस-एडेनोसिल-एल-मेथियोनीन (SAM-e) शरीर द्वारा स्वाभाविक रूप से बनाया गया एक यौगिक है जो कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाता है। मस्तिष्क में SAM-e न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन, मेलाटोनिन और डोपामाइन का उत्पादन करने में मदद करता है। सेरेटोनिन एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड, खुशी और व्याकुलता को विनियमित करने में मदद कर सकता है।

यह यौगिक शरीर की प्रत्येक जीवित कोशिका में पाया जाता है और एक आवश्यक अमीनो एसिड या प्रोटीन निर्माण ब्लॉक, मेथियोनीन और एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट से बनता है। SAM-e मिथाइलेशन सहित कई कार्य करता है, और इस तरह यह न्यूरोट्रांसमीटर के संश्लेषण को नियंत्रित करता है।

शरीर में मिथाइलेशन एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कार्बन और तीन हाइड्रोजन अणुओं से युक्त एक रासायनिक समूह को एक अन्य रासायनिक समूह से जोड़ा जाता है। SAM-e उस मिथाइल समूह का दाता है। कल्पना कीजिए कि SAM-e अपने बच्चे (मिथाइल समूह) को रासायनिक यौगिक (बस) में छोड़ने वाला अभिभावक है। जब मिथाइल समूह को हटा दिया जाता है, यह एक रासायनिक यौगिक से जुड़ा हुआ होता है जो एक न्यूरोट्रांसमीटर बन जाता है, या यह न्यूरोट्रांसमीटर को निष्क्रिय कर सकता है। ये SAM-e-आश्रित मिथाइलेशन की प्रतिक्रियाएं न्यूरोट्रांसमीटरों (जैसे कि नॉरएड्रेनालाईन, एड्रेनालाईन, डोपामाइन, सेरोटोनिन और हिस्टामाइन) के संश्लेषण और निष्क्रियण के लिए भी आवश्यक होती हैं।

दूसरे शब्दों में, SAM-e मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन को बनाए रख सकता है।

‌‌3. 5-HTP और ब्रेन सेरोटोनिन स्तर

5-हाइड्रोऑक्सीट्रिप्टोफैन (5-HTP) एक रसायन है जिसे शरीर ट्रिप्टोफैन, एक अन्य अमीनो एसिड या प्रोटीन बिल्डिंग ब्लॉक से बनाता है। ट्रिप्टोफैन प्राकृतिक रूप से कुछ खाद्य पदार्थों में पाया जाता है जैसे टर्की, चिकन, दूध, समुद्री शैवाल, सूरजमुखी के बीज, शलजम और साग, आलू और कद्दू। शरीर भोजन से इस अमीनो एसिड को ग्रहण करता है और इसे 5-HTP में बदल देता है।

5-HTP आवश्यक अमीनो एसिड एल-ट्रिप्टोफैन का अग्रदूत है, जो सेरोटोनिन के संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है। एंजाइम ट्रिप्टोफैन हाइड्रॉक्सिलस एल-ट्रिप्टोफैन को 5-HTP में परिवर्तित करता है। तनाव, अनुचित शर्करा विनियमन और विटामिन बी6 या मैग्नीशियम की कमी सहित कई कारक ट्रिप्टोफैन हाइड्रॉक्सिलेस को अवरुद्ध कर सकते हैं।

इसलिए यदि इनमें से कोई भी कारक मौजूद है, तो शरीर में सेरोटोनिन बनाने में कठिनाई हो सकती है। सेरोटोनिन के स्तर में कमी, या मस्तिष्क के रसायनों में असंतुलन से अवसाद हो सकता है।

5-HTP आपके मस्तिष्क के सेरोटोनिन स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकता है, मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन का समर्थन करने में मदद करता है। 5-HTP भी एक अफ्रीकी पौधे ग्रिफोनिया सिंपिसिफोलिया के बीज से बने पूरक के रूप में भी उपलब्ध है।

4. ओमेगा -3 फैटी एसिड और ऊर्जा

ओमेगा -3 फैटी एसिड पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होते हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें एक से अधिक दोहरे रासायनिक बांड होते हैं।

अधिकांश आहारों में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा बहुत कम होती है। पालतू जानवरों के पशु पालन केंद्र (मछली सहित) ने पशु आहार संरचना में बदलाव लाए हैं, जो पहले की तुलना में कम ओमेगा -3 फैटी एसिड सामग्री वाले उत्पाद बनाते हैं।

ओमेगा -3 फैटी एसिड स्वस्थ चयापचय या ऊर्जा के लिए हमारे भोजन के उचित भंजन के लिए आवश्यक माना जाता है। ओमेगा -3 के अलावा ओमेगा -6 जैसे अन्य प्रकार के फैटी एसिड होते हैं। आदर्श कार्य के लिए, ओमेगा -6 से ओमेगा -3 वसा अनुपात 4:1 होना चाहिए। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में उच्च आहार, व्यक्ति के ओमेगा -6 के सेवन को बढ़ा सकता है, अनुपात को 10:1, या यहां तक कि 50:1 तक बढ़ा सकता है। यह मस्तिष्क के रासायनिक संतुलन और सामान्य कार्य को प्रभावित कर सकता है।

ओमेगा -3 फैटी एसिड की खुराक पौधे या पशु स्रोतों से प्राप्त हो सकती है। जब ओमेगा -3 फैटी एसिड मछली से प्राप्त किया जाता है, तो उन्हें इकोसापेंटेनोइक एसिड (EPA) और डोकोसाहेक्सैनोइक एसिड (DHA) कहा जाता है। पौधों के स्रोतों से प्राप्त ओमेगा -3 फैटी एसिड को अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) कहा जाता है। EPA और DHA ओमेगा -3 फैटी एसिड सबसे अधिक अवसाद वाले लोगों के लिए अनुशंसित हैं।

5. विटामिन डी और अवसादग्रस्तता के लक्षण

विटामिन डी को कई स्वास्थ्य लाभों से जोड़ा गया है, जिसमें हड्डी, प्रतिरक्षा और हृदय स्वास्थ्य शामिल हैं। आपका शरीर विटामिन डी तब बनाता है जब आपकी त्वचा यूवी प्रकाश के संपर्क में होती है। अधिकांश लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है क्योंकि प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर-केंद्रित नौकरियां और गतिविधियां उन्हें घर के अंदर रखती हैं।

आप डेयरी उत्पाद, सार्डिन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों से भी विटामिन डी प्राप्त कर सकते हैं। विटामिन डी के पूरक से यह आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त किया जा सकता है। विटामिन डी के निम्न स्तर और अवसादग्रस्तता लक्षणों का सहसंबंध देखा गया है।

मस्तिष्क में रसायनों के असंतुलन को मस्तिष्क के न्यूरॉन्स के अंदर कैल्शियम आयनों (आवेशित कणों) में वृद्धि के साथ सहसंबद्ध किया जाता है। जब कैल्शियम आयन अधिक होते हैं, तो यह कुछ न्यूरोट्रांसमीटर की रिलीज़ को रोकता है। सिद्धांततः विटामिन डी कैल्शियम के आयनों की संख्या को कम करता है, जिससे न्यूरोट्रांसमीटरों के स्तर को पुनः संतुलित करने में मदद मिलती है।

अवसाद दुनिया भर में आम हैं, भाग्यवश हम एक स्वस्थ, प्राकृतिक तरीके से इससे प्रभावित लोगों की सहायता कर सकते हैं।

संदर्भ:

  1. मैककार्टर, टी. डिप्रेशन ओवरव्यू। Am Health Drug Benefits. 2008 अप्रैल; 1(3): 44-51.
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