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हाशिमोटो रोग में देखभाल संबंधी 6 प्राकृतिक तरीके

वीनस रामोस, एमडी द्वारा

इस लेख में:


 यदि आप थकान या अप्रत्याशित वजन बढ़ने से जूझ रहे हैं, तो हो सकता है कि आपको थायरायड की समस्या हो। असल में, ये कुछ लक्षण हैं जो आप हाइपोथायरायड होने पर अनुभव कर सकते हैं, जिसका अर्थ है कि आपका थायरायड कम है।

लेकिन संभव है आपका थायरायड आपके लक्षणों का मूल कारण न हो। यह अनुमान लगाया जाता है कि पारंपरिक रूप से पहचाने गए हाइपोथायरायडिज्म वाले 90% लोगों को वास्तव में हाशिमोटो रोग है, जिसे क्रोनिक लिम्फोसाइटिक थायरायडिटिस के रूप में भी जाना जाता है। यह एक स्वप्रतिरक्षी रोग है, जिसका अर्थ है कि शरीर गलती से अपने ही ऊतकों पर हमला करता है।

हाशिमोटो के थायरायडिटिस के मामले में, प्रतिरक्षा प्रणाली घुसपैठ करती है और गर्दन के आगे वाले हिस्‍से में छोटी तितली के आकार की ग्रंथि, यानी थायरायड ग्रंथि को नुकसान पहुंचाती है। विशेष रूप से, प्रतिरक्षा कोशिकाएं एंटीबॉडी नामक प्रोटीन पैदा करती हैं जो थायरायड हार्मोन के उत्पादन के लिए आवश्यक पदार्थों को कब्‍जा लेती हैं और बेअसर करती हैं। थायरायड हार्मोन के कम होने के परिणामस्वरूप बहुत सारे संभावित लक्षण दिखने लगते हैं।

हाशिमोटो रोग के संकेत और लक्षण

शुरू में लक्षण बहुत हल्के होते हैं और उन्‍हें पकड़ना मुश्किल हो सकता है। लेकिन समय के साथ, वे तेजी से स्पष्ट हो जाते हैं। आमतौर पर, रोग में थायरायड ग्रंथि का धीमे-धीमे क्षरण शामिल होता है। हालांकि, इसकी अवधि अनिरंतित हो सकती है, चूंकि बीच की अवधि में थायरायड काम करने लगता है, जिससे लक्षण बदल जाते हैं, यहां तक कि अस्थायी अतिसक्रिय थायराइड का भी कारण बन सकते हैं।

  • थकान और सुस्ती
  • बिना कारण वजन बढ़ना
  • सूजा हुआ चेहरा
  • अनिद्रा
  • विस्मृति
  • चिंता और अवसाद
  • उच्च रक्त चाप
  • पसीना आना, वजन कम होना और चिड़चिड़ापन
  • गले में खराश
  • जीभ का बढ़ना
  • निगलने में परेशानी
  • गर्दन के आगे वाले हिस्से में सूजन
  • मुँहासे
  • चकत्ते
  • सिर दर्द
  • सूजन
  • कब्ज
  • पीली, शुष्क त्वचा
  • नाज़ुक नाखून
  • बाल झड़ना
  • ठंड के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना
  • जोड़ों का दर्द और जकड़न
  • मांसपेशियों की ऐंठन
  • कठोर और कोमल मांसपेशियाँ
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल
  • महिलाओं में बांझपन
  • अत्यधिक या लंबे समय तक मासिकधर्म का रक्तस्राव

प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा थायराइड पर हमला करने का क्या कारण है?

जबकि सही कारण अभी भी अज्ञात है, आनुवंशिक कारक हाशिमोटो के रोग के बढ़ने में भूमिका निभाते हैं। उम्र, लिंग और अन्य स्वप्रतिरक्षी या अंतःस्रावी विकार जैसे कारकों का संयोजन भी योगदान कर सकता है। हालांकि आप अपने जीन को बदलने के लिए बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं, लेकिन ऐसी चीजें हैं जिनका इस्तेमाल आप स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया की संभावित रुकावटों को हटाने में कर सकते हैं। यह हाशिमोटो के थायरायडिटिस की उचित देखभाल करने की कुंजी है। 

हाशिमोटो रोग में देखभाल संबंधी 6 प्राकृतिक तरीके

पारंपरिक थायरायड दवा आपके थायरायड हार्मोन के स्तर को सुधार सकती है और आपके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन यह सही समस्या यानी कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली की शिथिलता - के कारणों से सीधे तौर पर जुड़ी हुई नहीं है। यदि आप यह तय कर सकते हैं कि स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया के लिए कौन से कारक जिम्मेदार हैं, तो आप प्राकृतिक रूप से इन रुकावटों को दूर करके रोग में देखभाल कर सकते हैं। 

ये वे 6 चीजें हैं, जिन पर आपको ध्यान देने की जरूरत है जब आप प्राकृतिक समाधानों से स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया को कम करना चाहेंगे:

1. पोषक तत्वों की कमी

ऐसे कई पोषक तत्व हैं जो थायरायड और प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य रूप से काम करने के लिए आवश्यक हैं। जब आपमें इन पोषक तत्वों की कमी होती है, तो आपके हाशिमोटो रोग जैसी स्वप्रतिरक्षी अवस्थाएं पैदा होने का खतरा हो सकता है।

  • सेलेनियम  टी4 (थायरायड हार्मोन का निष्क्रिय रूप) को टी3 (सक्रिय रूप) मेें बदलने के लिए जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में सेलेनियम के बिना, थायरायड हार्मोन निष्क्रिय रहता है और हाशिमोटो के लक्षण उभर सकते हैं। इसके अलावा, अध्ययनों से पता चला है कि हाशिमोटो के जिन रोगियों ने सेलेनियम लिया, उनमें थायरायड एंटीबॉडी का स्तर कम पाया गया। 200 एमसीजी आम शुरुआती खुराक है। लेकिन प्रभावी खुराक और विषाक्त खुराक के बीच मेंं बहुत बारीक सी ही रेखा है। तो आपके लिए बुद्धिमानी यही होगी कि खुराक की सही मात्रा के लिए किसी स्वास्थ्य सेवाप्रदाता से मार्गदर्शन लें।
  • जिंक: निम्न जिंक स्तर टी3 उत्पादन से समझौता करते हैं क्योंकि जिंक भी टी4 से टी3 के एंजाइम रूपांतरण में कारक होता है। पर्याप्त मात्रा में जिंक के बिना, आपके हाइपोथैलेमस को थायरायड हार्मोन के स्तर को मापने में कठिनाई होती है। स्तर कम होने पर यह थायरायड हार्मोन उत्पादन को उचित रूप से संकेत देने की आपकी क्षमता को बाधित करता है। आपको सलाह दी जाती है कि यदि आप स्वास्थ्य सेवाप्रदाता के निर्देशानुसार नहीं चल रहे हैं जोकि ज्यादा खुराक भी दे सकता है, तो आप प्रतिदिन 30 मिलीग्राम से अधिक जिंक न लें।
  • विटामिन डी इसकी कमी थायरायड के लिए एंटीबॉडी की उपस्थिति से जुड़ी है। सभी हाशिमोटो के रोगियों को अपने 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी के स्तर की वार्षिक जांच करा लेनी चाहिए। अध्ययन बताते हैं कि इष्टतम थायरायड और प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्यक्षम होने के लिए इसका स्तर 60-80 एनजी/एमएल होना चाहिए। पूरक के लिए, आपके विटामिन डी के स्तर में सुधार के लिए विटामिन डी3 विटामिन डी2 से बेहतर है। प्रारंभिक खुराक आम तौर पर 2000 से 5000 आईयू के बीच की सीमा में होती है, जैसा कि तीन महीने के बाद स्तर की जांच करके बताया जाता है।
  • आयर न थायरायड हार्मोन उत्पादन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह टी4 से टी3 के रूपांतरण के लिए भी आवश्यक है। आपमें वास्तव में आयरन की कमी का पता लगाने और पूरक की आवश्यकता का पता लगाने के लिए आपके निम्नलिखित लैब परीक्षण किए जाने चाहिए: फेरिटिन, सीरम आयरन, ट्रांसफ़रिन सैचुरेशन और कुल आयरन-बांइंडिंग कैपेसिटी। आपका स्वास्थ्य सेवाप्रदाता परिणामों को विस्तार से बताने और आयरन की खुराक से संबंधित सलाह देने में मदद कर सकता है। 

आयरन के पूरक को चुनते समय ध्यान दें कि फेरस बिस-ग्लाइकेट एक ऐसा रूप है जो आयरन की अन्य गोलियों की तुलना में अधिक शोषक और कम कब्ज करने वाला होता है। यदि आप थायरायड की दवा लेते हैं, तो इसे लेने के दो घंटे बाद तक आयरन के पूरक न लें, क्योंकि आयरन दवा के अवशोषण में बाधा डाल सकता है। 

आप लाल मीट, पोल्ट्री, फलियां, और गहरे हरे, पत्तेदार सब्जियां जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करके अपने आयरन के स्तर को बढ़ा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि पौधों के स्रोतों से आयरन उतना नहीं ‍मिलता, जितना कि मीट से। विटामिन सी इस मामले में आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में मदद कर सकता है।   

 2. दाहक-संबंधी खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें

शरीर में सूजन की मात्रा कम करना हाशिमोटो की उपचार योजना का लक्ष्य है। इसलिए यह बात पूरी तरह से समझ में आने वाली है कि अपने आहार से उन खाद्य पदार्थों को हटाया जाए जो सूजन पैदा कर सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता व्यक्तियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है, लेकिन निम्नलिखित खाद्य पदार्थ सबसे अधिक दाहक होते हैं:

  • ग्लूटेन
  • चीनी
  • संतृप्त वसा
  • कृत्रिम मिठास या संरक्षक
  • डेयरी की कुछ चीजें (जैसे लैक्टोज या ए1 बीटा-कैसिइन प्रोटीन)
  • सोया, मक्का, सूरजमुखी, बिनौले, कुसुम, और मिश्रित वनस्पति तेल

आपका स्वास्थ्य सेवाप्रदाता खाद्य एलर्जी के लिए ब्लड टेस्ट के लिए बोल सकता है। आप इस जानकारी का उपयोग उन खाद्य पदार्थों से दूर रहने के लिए कर सकते हैं जिनके प्रति आप संवेदनशील हैं। हालाँकि, अपने भोजन की संवेदनशीलता का पता आप अपने प्रतिबंधित आहार (ईपीडी) चार्ट से भी लगा सकते हैं। 

ईपीडी के लिए, आप तीन सप्ताह के लिए अपने आहार से एक खाद्य श्रेणी को निकाल सकते हैं। फिर आप अपनी प्रतिक्रिया का आकलन करते हुए तीन दिनों के लिए उस भोजन को वापस अपने आहार में शामिल करते हैं। भोजन के प्रति संवेदनशीलता के लिए किसी भी लक्षण पर ध्यान दें जैसे कि सूजन, थकान, सिरदर्द, जोड़ों का दर्द, पतला मल, कब्ज, अनिद्रा या त्वचा में कोई बदलाव। 

जिन खाद्य श्रेणियों का आप परीक्षण करना चाहते हैं, उनमें शामिल हैं:

  • ग्लूटेन
  • मक्का
  • अन्य ग्लूटेन-मुक्त अनाज
  • डेयरी
  • सोया
  • अंडे
  • नट्स
  • फलियां
  • शेलफिश
  • नाइटशेड (आम नाइटशेड सब्जियों में मिर्च, आलू, टमाटर और बैंगन शामिल हैं)

ईपीडी को लागू करने का एक तेज़ तरीका तीन हफ्तों के लिए अपने आहार से इन सभी खाद्य श्रेणियों को निकालना है। फिर, प्रत्येक 3 दिनों में एक बार में एक श्रेणी को फिर से आहार में शामिल करें। यदि आप किसी भोजन को फिर से शामिल करते हैं और कोई लक्षण नहीं दिखता, तो आप इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। यदि लक्षण दिखाई देते हैं, तो फिर अपने आहार से इसे हटा दें।

3. आंत स्वास्थ्य में सुधार

प्रतिरक्षा प्रणाली की लगभग 70-80% कोशिकाएं आंत में रहती हैं। इसलिए जब आप अपनी आंत की कार्य-प्रणाली को बेहतर बनाते हैं, तो आप अपनी प्रतिरक्षा कार्य-प्रणाली को भी बेहतर बना रहे होते हैं।

हाशिमोटो के अधिकांश रोगियों में पेट के अम्ल का स्तर कम होता है। आंतों में अम्ल का स्तर कम होने पर ही पोषक तत्व अवशोषित नहीं होते। बैक्टीरिया और अन्य रोगाणु भी कम अम्लीय वातावरण में पेट में से गुजरने पर अधिक आसानी से जीवित रहने में सक्षम होते हैं। इससे वे शरीर में कहीं और पकड़ में आ सकते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

बीटाइन एचसीएल (हाइड्रोक्लोराइड)  एक पूरक है जो आंतों के अम्‍ल को इष्टतम स्तर तक बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसे पाचक एंजाइम पेप्सिन केे साथ, प्रोटीनयुक्त भोजन के अंत में लिया जाना चाहिए। यह शरीर को प्रोटीन को पूरी तरह से तोड़ने में सहायता करता है ताकि वे एक प्रतिरक्षा बाधक के रूप में काम न करें।

कई हाशिमोटो के रोगियों की आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का असंतुलन होता है। यह आमतौर पर होता ही है क्योंकि थायरायड हार्मोन की कमी से आंतों की गतिशीलता कम हो जाती है। अच्छा प्रोबायोटिक लेने से, आप अच्छे बैक्टीरिया को एक स्तर तक बहाल कर सकते हैं जो खराब बैक्टीरिया को नियंत्रण में रखता है।

4. संक्रमण का ध्यान रखें कि

थायरायड पर हमला करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण संक्रमण कैसे हो सकता है, इसके दो संभावित कारण हैं:

  1. आणविक मिमिक्री में बैक्टीरिया या अन्य रोगाणुओं को शामिल किया जाता है जो थायरायड कोशिकाओं जैसे दिखते हैं। फिर जब प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रामक रोगाणुओं को खत्म करने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करती है, तो एंटीबॉडी भी समान दिखने वाली थायरायड कोशिकाओं पर हमला करते हैं।
  2. बाईस्टैंडर प्रभाव इस सिद्धांत का वर्णन करता है कि रोगाणु थायरायड कोशिकाओं में घुसपैठ करते हैं। रोगाणुओं को मारने की प्रक्रिया में, प्रतिरक्षा प्रणाली उन कोशिकाओं पर भी हमला करती है जो उन्हें घर देती हैं।

आमतौर पर हाशिमोटो से जुड़े संक्रमणों में कैंडिडा, माइकोप्लाज्मा और एपस्टीन-बार वायरस शामिल हैं। शरीर में कहीं भी संक्रमण की जांच करना और उनका सही से इलाज करना जरूरी है। 

5. एड्रेनल तनाव से छुटकारा

जब आप तनाव में होते हैं, तो आपकी अधिवृक्क ग्रंथियां कोर्टिसोल छोड़ती हैं, जो थायरायड हार्मोन उत्पादन में कमी का संकेत है। इसलिए हाशिमोटो रोग के लिए हर उपचार योजना में तनाव प्रबंधन गतिविधियां जैसे कि योग, ध्यान, या श्वास अभ्यास शामिल होने चाहिए।

एडेप्टोजन्स  प्राकृतिक पदार्थ हैं जो आपको तनाव से निपटने में उचित मदद कर सकते हैं। एडेप्टोजन कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के साथ-साथ एक अति सक्रिय प्रतिक्रिया को शांत करने की क्षमता भी रखता है। तो यह आपके शरीर के तनाव को उस तरीके से अनुकूलित करने में मदद करता है जो आपके शरीर के कार्य को सामान्य करने के लिए उपयुक्त है। एडेप्टोजन के उदाहरणों में शामिल हैं रीषीइलेयूथेरोशीसांद्रा, तथा अश्वगंधा

6. विषाक्त पदार्थों से बचें

वातावरण में कई जहरीले रसायन होते हैं जो आपके शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचा सकते हैं - सूजन पैदा करना, आपके हार्मोन को बाधित करना और स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया के लिए जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इन सबसे बचना मुश्किल है। लेकिन आपके थायरायड स्वास्थ्य पर इनके प्रभाव को कम करने के लिए कुछ चीजें की जा सकती हैं: 

  • हार्मोन को बाधित करने वाले रसायनों से बचें। इंवायरमेंटल वर्किंग ग्रुप (ईडब्‍ल्‍यूजी) ने उन रसायनों की एक सूची तैयार की है जो आपके अंतःस्रावी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे उत्पादों से बचें जिनमें ये शामिल हैं: सीसा, डाइऑक्सिन, एट्राजीन, फॉथलेट्स, परक्लोरेट, अग्निरोधी (पॉलीब्रोमिनेटेड डाइफिनाइल इथर), आर्सेनिक, मरकरी, ग्लाइकोल इथर, पेरफ्लुएंटेड केमिकल (पीएफसी), ऑर्गनोफॉस्फेट कीटनाशक, बिसफेनॉल ए (बीपीए, या बीपीएफ और बीपीएस जैसे बीपीए स्‍थानापन्‍न)। 
  • स्वच्छ व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों का उपयोग करें।  चेहरे और शरीर के कई उत्पादों में हानिकारक रसायन होते हैं जो आपकी अंत:स्रावी (हार्मोनल) प्रणाली को बाधित कर सकते हैं। अवयवों की सूची देखें और उन उत्पादों को अपनाएं जो यथासंभव प्राकृतिक हैं। उन रसायनों की ईडब्‍ल्‍यूजी की सूची को देखें, जिनसे आपको बचना है।
  • अपनी हवा को साफ करें, खासकर यदि आप औद्योगिक क्षेत्र में रहते हैं।  अपने घर और कार्यालय में एचईपीए (उच्च दक्षता कण वायु) फिल्टर लगाने पर विचार करें।
  • प्लास्टिक से बचें जो आप अपने भोजन या पेय के लिए इस्तेमाल में लाते हैं।  प्लास्टिक में अक्सर बीपीए या बीपीए के स्थानापन्न मौजूद होते हैं। डिब्बाबंद सामानों से भी सावधान रहें। डिब्बे में अक्सर ही बीपीए होता है (हालाँकि कुछ ऐसी कंपनियाँ हैं जो बीपीए-मुक्त डिब्बे के उपयोग के बारे में कहती हैं)।
  • अपना पानी साफ़ करें।  अपने पीने के पानी और अपने शॉवर हेड के लिए एक फ्लोराइड फ़िल्टर लगाएं। 
  • पसीना! पसीना आना आपके लिए सबसे अच्छी निराविषीकरण प्रक्रिया में से एक है। शारीरिक व्यायाम या यहां तक कि सॉना भी आपके पसीना आने की प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद कर सकता है। अपनी शारीरिक गतिविधियों को बदलने या सॉना आजमाने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवाप्रदाता की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है, खासकर अगर आपको दिल की कोई बीमारी है। 

हालांकि कुछ ऐसे व्यक्ति हैं जो थायरायड की अपनी दवा से पूरी तरह से मुक्ति नहीं पा सकते, लेकिन निश्चित रूप से हाशिमोटो रोग की देखभाल करने के लिए कई प्राकृतिक तरीके हैं जो आपकी दवा की खुराक को कम नहीं होने पर भी आपको बेहतर महसूस करने में मदद कर सकते हैं। जब भी संभव हो, थायरायड की अवस्‍थाओं के लिए प्राकृतिक उपचार और पारंपरिक चिकित्सा दोनों में विशेषज्ञता हासिल किसी स्वास्थ्य चिकित्सक काे खोजें। हमेशा अपनी दवा की खुराक बदलने या पूरक शा‍मिल करने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवाप्रदाता से परामर्श करें। 

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