beauty2 heart-circle sports-fitness food-nutrition herbs-supplements

जिंक: प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य का द्वारपाल

डॉ. माइकल मरे द्वारा

एरिक मैड्रिड के द्वारा


इसेन्शल ट्रेस मिनरलों की कमी जिंक इस बारे में हमें स्पष्ट समझ प्रदान करता है कि किस प्रकार एक पोषक तत्व हमारे प्रतिरक्षा तंत्र के कार्यों को प्रभावित कर सकता है। पर्याप्त मात्रा में जिंक का सेवन नहीं करने से, हम विषाणुओं से लड़कर उन्हें बाहर निकालने के साथ-साथ सूजन का कारण सामान्य से अधिक सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने की क्षमता को खो सकता है।1 विशेष रूप से बच्चों और वृद्ध लोगों में जिंक की मात्रा के स्तर का काम होना आम बात है। यहाँ तक कि विकसित देशों में भी, वृद्धों की आबादी में से 30% लोगों को जिंक की कमी से ग्रस्त माना जाता है। शाकाहारी या वीगन, गुर्दों के विकारों या दीर्घकालिक दस्त से ग्रसित, लोग में भी अक्सर जिंक की कमी पाई जाती है। जिंक के स्वास्थ्य से संबंधित सामान्य लाभों विशिष्ट स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में लाभों के बारे में जानने के लिए पढ़े मेरी पुस्तक क्विक गाइड टू जिंक। इस लेख में, प्रतिरक्षा में जिंक की मुख्य भोमिकाओं पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।

ध्यान दें: जिंक और COVID-19 या SARs-CoV2 वायरस के संबध में कोई वर्तमान अध्ययन उपलब्ध नहीं है। नीचे की गई परिचर्चा वायरस और वायरल संक्रमणों के संबंध में जिंक के सामान्य प्रभावों पर प्रकाश डालती है। अगर आप ऐसे लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं जो COVID-19 या अन्य प्रकार के संक्रमण के होने का संकेत करते हैं, तो कृपया तत्काल किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें।

जिंक और प्रतिरक्षा संबंधी 3 महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं

जिंक प्रतिरक्षा तंत्र की कई प्रतिक्रियाओं में एक अहम भूमिका निभाता है। यह वास्तव में प्रतिरक्षा के प्रत्येक पहलू में शामिल होता है, लेकिन यह निम्नलिखित तीन प्रक्रियाओं में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है: 

  • थाइमस के कार्य और हॉर्मोन
  • व्हाइट ब्लड सेल के कार्य और सिग्नलिंग
  • “सहजात प्रतिरक्षा तंत्र”2

किसी एक पोषक तत्व और प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य के बारे में बात करते समय एक महत्वपूर्ण विचार है। हमारा प्रतिरक्षा तंत्र कई विभिन्न प्रकार के कारकों की जटिल पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करती है। किसी एक पोषक तत्व की कमी तंत्र को अस्त-व्यस्त कर सकती है। उदाहरण के लिए, जिंक विटामिन ए और डीसिलीनियम, और कई अन्य पोषक तत्वों के साथ मिलकर कार्य करता है। इनमे से किसी भी पोषक तत्व की कमी से जिंक के लाभ कम हो जाते हैं।

जिंक और थाइमस ग्रंथि

एक मुख्य तरीका जिसके जरिये जिंक प्रतिरक्षा तंत्र को स्वस्थ बनाने में मदद करता है वह है इसके द्वारा थाइमस के कार्य में निभाई जाने वाली भूमिका। थाइमस प्रतिरक्षा तंत्र की एक सबसे प्रमुख ग्रंथि होती है। इसमें थाइरोइड ग्रंथि के ठीक नीचे और हृदय के ऊपर बिब जैसे आकार में स्थित दो मुलायल गुलाबी-ग्रे लोब शामिल होते हैं। बहुत हद तक, थाइमस का स्वास्थ्य प्रतिरक्षा तंत्र के स्वास्थ्य की निर्धारित करता है।

थाइमस टी लिम्फोसाइट्स, "सेल-मीडीएटेड प्रतिरक्षा" के लिए जिम्मेदार एक प्रकार का व्हाइट ब्लड सेल, के उत्पादन सहित प्रतिरक्षा तंत्र के कई कार्यों के लिए जिम्मेदार होती है। सेल-मीडीएटेड प्रतिरक्षा का तात्पर्य होता है प्रतिरक्षा संबंधी ऐसी प्रक्रियाएं जिनको ऐन्टिबॉडीज़ द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है या जिनमे ऐन्टिबॉडज़ द्वारा मध्यस्थता नही की जाती है। सेल-मीडीएटेड प्रतिरक्षा फफूँद जैसे जीवाणु, यीस्ट (कैंडीडा एल्बीकंस सहित), फफूँद, परजीवियों, और विषाणुओं (हर्पीज़ सिम्पलेक्स, एप्स्टाइन-बार, और हेपेटाइटिस करने वाले विषाणुओं सहित) के कारण होने वाले संक्रमण को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जिंक के न्यून स्तरों की वज़ह से संपूर्ण रूप से थाइमस पर प्रभाव के साथ-साथ व्हाइट ब्लड सेल्स के भीतर होने वाले प्रभाव सहित कई कारणों से सेल-मीडीएटेड प्रतिरक्षा की क्षमता क्षीण हो जाती है। और इसके कारण ना केवल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि एलर्जी, ऑटोइम्यून रोग, और सूजन भी होने का खतरा बढ़ जाता है। भाग्यवश, कई अध्ययनों में पाया गया है कि जिंक के रूप में पूरक आहार वृद्ध रोगियों तक में सेल-मीडीएटेड प्रतिरक्षा के संबंध में जिंक के अपर्याप्त स्तरों के कारण होने वाली समस्याओं को ठीक करने में सहायता करता है।3,4

थाइमस ऐसे कई हॉर्मोन का स्राव भी करती है जो मुख्य रूप से जिंक पर निर्भर करते हैं, इसलिए जिंक के पर्याप्त स्तरों के बिना, ये हॉर्मोन सक्रिय नहीं हो पाते हैं। थाइमस से व्युत्पन्न हॉर्मोन पूरे शरीर में व्हाइट ब्लड सेल के कार्यों में शक्तिशाली ढंग से वृद्धि करते है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि, रक्त में इन हॉर्मोन के न्यून स्तरों का होना कमज़ोर प्रतिरक्षा और संक्रमण के होने के साथ जुड़ा हुआ है। 

जिंक और व्हाइट ब्लड सेल के कार्य

सभी व्हाइट ब्लड सेल अपने विशेष कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में जिंक का उपयोग करते हैं। सेल-मीडीएटेड प्रतिरक्षा में शामिल टी कोशिकाओं के अतिरिक्त, मोनोसाइट्स कहलाने वाले व्हाइट ब्लड सेल्स पर भी जिंक के स्तरों का बहुत प्रभाव पड़ता है। मोनोसाइट्स शरीर के "कचरा एकत्रित करने वाले" होते हैं। यकृत, स्प्लीन, और लिम्फ नोड्स जैसे विशिष्ट उत्तकों में स्थित मोनोसाइट्स मैक्रोफैज कहलाते हैं। मोनोसाइट्स और मैक्रोफैज जीवाणुओं, विषाणुओं, और कोशिकाओं के टूटे हुए टुकड़ों सहित बाह्य कणों को खा या निगल जाते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं। मैक्रोफैज सूक्ष्मजीवों के द्वारा आक्रमण के विरुद्ध रक्षा करने के साथ-साथ प्रतिरक्षा तंत्र की अन्य कोशिकाओं को संदेश भेज सकें इसके लिए क्या खतरा है यह भाँपने के लिए अत्यावश्यक होते हैं मोनोसाइट्स और मैक्रोफैज की ये सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं जिंक पर निर्भर करती हैं। जिंक के इष्टतम स्तर से बिलकुल भी कम स्तर होने का तात्पर्य है ये प्रक्रियाएं सर्वोत्कृष्ट रूप से काम रही हैं।5

एक अन्य प्रकार का व्हाइट ब्लड सेल नेचुरल किलर सेल या NK सेल होता है। इन कोशिकाओं को अपना नाम कैंसरकारक या विषाणुओं से संक्रमित हो चुकी कोशिकाओं को नष्ट करने की अपनी क्षमता के कारण मिला है। जिंक NK कोशिक को उसके कार्य का संपादन करने के लिए सिग्नल करने में शामिल होता है। इसलिए, जब जिंक के स्तर कम होते हैं, तब NK कोशिकाओं को अपना कार्य करने के लिए सिग्नल नहीं प्राप्त होता है।3 यह विफलता सक्रिय वायरल संक्रमण के दौरान एक बहतु बुरी स्थति हो सकती है और यह दूसरा कारण है जिसकी वजह से व्यक्ति के आहार में हर समय जिंक के पर्याप्त स्तरों को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है।

जिंक और सहजात प्रतिरक्षा तंत्र

संक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने वाले प्रतिरक्षा तंत्र पर इसके प्रभावों के अतिरिक्त, अकेला जिंक अपनी आइकोनिक स्टेट में वायरल संक्रमण के विरुद्ध गतिविधि करता है। जिंक कोइ एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दावा नहीं है, बल्कि यह एक पोषक तत्व है जो जीवों के विरुद्ध शरीर की लड़ाई का हिस्सा होता है। जिंक हमारे "सहजात प्रतिरक्षा तंत्र" का एक बहुमूल्य संघटक है। इस शब्दावली का प्रयोग उन सुरक्षा प्रक्रियाओं वर्णन करने के लिए किया जाता जो शरीर में प्राकृतिक रूप से उपस्थित हैं और जो प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय करने के कारण नहीं हैं। हमारे सहजात प्रतिरक्षा तंत्र के लिए जिंक का महत्त्व एक अन्य कारण है जिसकी वजह से इसे "प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य का द्वारपाल" कहा जाता है। जिंक, विटामिन ए और डी जैसे कई अन्य पोषक तत्वों के साथ, हमारी त्वचा और श्वसन और जठरांत्र के मार्ग की परतों में संक्रमण के प्रति हमारे अवरोधों के कार्य करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।

अपनी मुक्त, आयनिक अवस्था में जिंक कई विषाणुओं की वृद्धि को सीधे तौर पर रोककर संक्रमण के विरुद्ध हमारे सहजात प्रतिरक्षा तंत्र की लड़ाई का एक शक्तिशाली संघटक होता है।6 जब कोई विषाणु किसी कोशिका को संक्रमित कर देता है, तब वह अपने आनुवांशिक कोड के एक हिस्से और अक्सर रेप्लीकेस कहलाने वाले एक एंज़ाइम को कोशिका में प्रविष्ट करवा देता है ताकि विषाणु की अपनी प्रतिकृति बनाने में मदद कर सके। जिंक, हमारे सहजात प्रतिरक्षा तंत्र के हिस्से के रूप में, रेप्लीकेस एंज़ाइम को अवरुद्ध कर सकता है और, इसलिए, विषाणु की प्रतिकृति के निर्माण या प्रसार को अवरुद्ध कर सकता है। जिंक के पास यह प्रभाव हो इसके लिए, यद्यपि, ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक खुले "आयनोफॉर" पर निर्भर करता है - जोकि कोशिका की मेम्ब्रेन का एक विशेष पोर्टल है जो आयन की कोशिका में प्रवेश करने में मदद करता है। ऐसे कई प्राकृतिक यौगिक हैं जो आयनिक जिंक के अन्तः-कोशिकीय स्तरों को बढ़ाने के लिए जिंक के आयनोफॉर्स के रूप में कार्य कर कर सकते हैं, सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्वर्सिटिन जैसे और ग्रीन टी में पाए जाने वाले फ्लेवनोयड हैं।7 ये यौगिक अन्तः-कोशिकीय स्तरों को बढ़ाने में सहायता कर सकते हैं।

जिंक की खुराक हेतु सुझाव

वयस्कों में, सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए और गर्भावस्था या दूध पिलाने के दौरान जिंक के पूरक की खुराक की सीमा 15 से 20 मि.ग्रा. है। बच्चों के लिए, खुराक की सीमा 5 से 10 मि.ग्रा. है। जब जिंक के आहार पूरक का प्रयोग बढ़ी हुई आवश्यकता को पूरा करने या होस्ट की सुरक्षा प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए किया जा रहा हो, तब पुरुषों के लिए खुराक 30 से 45 मि.ग्रा. है; महिलाओं के लिए 20 से 30 मि.ग्रा. है। 

सामान्य सर्दी-जुकाम के दौरान जिंक के स्तरों को बढ़ाने के लिए अक्सर जिंक की लॉज़िन्ज लेने का सुझाव दिया जाता है। विशेष रूप से तात्विक जिंक की 15 से 25 मि.ग्रा. की आपूर्ति करने वाली लॉज़िन्ज के लिए सुझाई गई खुराक को शुरूआती दोगुनी खुराक के बाद जगने के हर दो घंटों में मुँह में चूस कर लेना होता है। इस खुराक को सात दिनों तक जारी रखा जा सकता है। 

जिंक के उपलब्ध स्वरूप

आहार पूरक के रूप में चयन करने के लिए जिंक कई स्वरूपों में उपलब्ध है जहाँ कई क्लिनिकल अध्ययनों में जिंक सल्फेट का प्रयोग किया गया है, इस स्वरूप में यह ढंग से अवशोषित नहीं होता है। बेहतर स्वरूपों में शामिल हैं जिंक पिकोलिनेट, एसीटेट, सिट्रेट, बिसग्लायसिनेट, ऑक्साइड या मोनोमिथायओनिन। अच्छे ढंग से अवशोषित होने और स्वास्थ्य संबंधी लाभ पहुँचा सकने के संबंध में इनमे से हर एक स्वरूप का समर्थन करने के लिए डेटा मौजूद है। अधिकतर लॉज़िन्ज का निर्माण जिंक ग्लूकोनेट से किया जाता है, जो इस हेतु प्रयोग में लेने के लिए एक प्रभावी स्वरूप प्रतीत हो रहा है।

जिंक के संभावित दुष्प्रभाव

अगर खाली पेट लिया जाता है, तो जिंक के आहार पोरक को लेने से जठरांत्र में गड़बड़ी हो सकती है (विशेषकर तब जब आप जिंक सल्फेट लेता हैं) और मिचिलाई आ सकती है। लंबे समय तक प्रतिदिन 150 मि.ग्रा. से अधिक के स्तर के कारण रक्त की कमी, HDL-कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी, और तांबे के अवशोषण में व्यवधान के जरिये प्रतिरक्षा तंत्र की कार्य करने की क्षमता में कमी आ सकती है।

दवाओं का पारस्परिक प्रभाव: जिंक के कारण टेट्रासाइक्लीन और सिप्रोफ्लोक्सेसिन के अवशोषण में कमी आ सकती है। इन एंटीबायोटिक्स को लेने से कम से कम 2 घंटे पहले या बाद में कोई भी जिंक का आहार पूरक लें।

निम्नलिखित दवाओं के कारण शरीर से जिंक की हानि में वृद्धि होती है या ये दवाएं जिंक के अवशोषण में बाधा उत्पन्न करती हैं: एस्पिरिन; AZT (एज़ीडोथायमिडीन); केप्टोपरिल; एनेलाप्रिल; एस्ट्रोजेन्स (मुँह से लिए जाने वाली गर्भनिरोधक दवाएं और Premarin®); पेनीसिलीनअमीन; और डायुरेटिक्स की थायअज़ाइड की क्लास। इन दवाओं को लेने वाले लोगों में जिंक की स्थिति को बनाए रखने के लिए आहार-पोरक की आवश्यकता पड़ सकती है

संदर्भ:

  1. गमोह एनज़ेड, रिंक एल। जिंक इन इन्फेक्शन एंड इन्फ्लेमेशन। न्यूट्रीएंट्स। 17 जून 2017;9(6). pii: E624
  2. वेसल्स I, मेवाल्ड एम, रिंक एल। जिंक एज़ ए गेटकीपर ऑफ इम्यून फंक्शन। न्यूट्रीएंट्स। 25 नवम्बर 2017 25;9(12). pii: E1286। 
  3. मोकचेगिएनी ई, रोमियो जे, मलावोल्टा एम, और अन्य। जिंक: डाइटरी इन्टेक एंड इम्पैक्ट ऑफ सप्लीमेंटेशन ऑन इम्यून फंक्शन इन एल्डरली। एज (Dordr)। जून 2013;35(3):839-60। 
  4. बार्नेट जेबी, डाओ एमसी, हैमर डीएच, और अन्य। इफ़ेक्ट ऑफ जिंक सप्लीमेंटेशन ऑन सीरम जिंक कंसंट्रेशन एंड टी सेल प्रोलिफेरेशन इन नर्सिंग होम एल्डरली: ए रैंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड, प्लसीबो-कंट्रोल्ड ट्रायल। Am J Clin Nutr। मार्च 2016;103(3):942-51।
  5. प्रसाद एएस। जिंक इन ह्यूमन हेल्थ: इफ़ेक्ट ऑफ़ जिंक ओं इम्यून सेल्स। Mol Med। मई-जून 2008;14(5-6):353-7। 
  6. हुलिस्ज़ डी। एफिकैसी ऑफ जिंक अगेंस्ट कॉमन कोल्ड वायरसेज़: एन ओवरव्यू। J Am Pharm Assoc (2003)। सितम्बर-अक्टूबर 2004;44(5):594-603.
  7. दबाग-बज़रबाची एच, और अन्य। जिंक आयनोफॉर एक्टिविटी ऑफ क्वर्सिटिन एंड एपीगेलोकेटाकिन-गैलेट: फ्रॉम हेपा 1-6 सेल्स टू अ लिपोसम मॉडल। J Agric Food Chem. 13 अगस्त 2014 ;62(32):8085-93.

संबंधित लेख

सभी देखें

तंदुरुस्ती

24 घंटे में प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाने में मदद करने के लिए 3 सुझाव

तंदुरुस्ती

एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी) क्या है? लाभ, सप्लीमेंट्स और बहुत कुछ

तंदुरुस्ती

सेब के सिरके का स्वाद पसंद नहीं? एसीवी पूरक आज़माने के 6 कारण