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क्या गले में खराश है? ये विज्ञान-समर्थित प्राकृतिक उपचार आजमाएं

एरिक मैड्रिड एमडी के द्वारा 

इस लेख में:


गले में खराश एक आम बीमारी है जो कभी ना कभी हर किसी को होती है। गले में खराश के मुख्य कारणों में से, केवल एक में एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है। गले में खराश के अधिकांश मामलों के लिए लक्षणों की रोकथाम और उपचार के लिए प्राकृतिक पद्धति अपनाई जा सकती हैं। 

गले में खराश के मुख्य कारण:

  • वायरस की वजह से गले में खराश (संक्रामक)
  • बैक्टीरिया की वजह से गले में खराश (संक्रामक)
  • फंगस की वजह से गले में खराश (संक्रामक)
  • एलर्जी संबंधी (गैर-संक्रामक)
  • एसिड-रिफ्लक्स संबंधी (गैर-संक्रामक)

गले में खराश के कारण का पता लगाना महत्वपूर्ण है सबसे आम संक्रामक कारण वायरल संक्रमण है। कभी-कभी, हालांकि, बैक्टीरियल संक्रमण, या यहां तक ​​कि फंगल संक्रमण भी गले में खराश पैदा कर सकता है जो संक्रामक हो सकते हैं। दो सामान्य गैर-संक्रामक कारण भी हैं: नाक में अत्यधिक श्लेषम उत्पन्न होना (आमतौर पर एलर्जी या खाद्य संवेदनशीलता के कारण), और एसिड रिफ्लक्स से उत्पन्न जलन और दर्द। 

गले में खराश के सामान्य लक्षण

निम्नलिखित लक्षण सभी पांच प्रकार की गले में खराश में आम हो सकते हैं।

  • लालिमा
  • सूजन
  • जलन  
  • खुरदरापन 

दर्द आमतौर पर तब और ज्यादा हो जाती है जब भोजन, तरल और यहां तक ​​कि लार को निगला जाता है। 

अगर गले में खराश संक्रामक है, तो निम्नलिखित अन्य लक्षण मौजूद हो सकते हैं: 

  • बुखार
  • सिरदर्द 
  • सूजी हुई लसीका ग्रंथियां
  • टॉन्सिल पर सफेद धब्बे
  • त्वचा के लाल चकत्ते
  • मांसपेशियों में दर्द
  • जोड़ों में दर्द 
  • पेट में दर्द (आमतौर पर केवल बच्चों में देखी जाती है)
  • उलटी आना (आमतौर पर केवल बच्चों में देखी जाती है)

गले में खराश का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है 

वायरस की वजह से गले में खराश (संक्रामक)

वायरस की वजह से गले में खराश आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि, यदि दर्द गंभीर है या लगातार बना रहता है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टर को दिखाया जाना चाहिए कि लक्षण बैक्टीरिया की वजह से तो नहीं हैं। गले में खराश सर्दी (ऊपरी श्वसन संक्रमण) या इन्फ्लूएंजा के दौरान भी हो सकती है और संभवतः इसके साथ खांसी और श्लेष्म का संचय हो सकता है। 

विशेष रूप से किशोर एपस्टीन-बार नामक वायरस, जिन्हें मोनोन्यूक्लिओसिस या "मोनो" के रूप में भी जाना जाता है, के कारण गले में खराश के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। एक गंभीर वायरल संक्रमण की वजह से जोड़ों में दर्द, पूरे शरीर पर चकते, बुखार, प्लीहा वृद्धि और गंभीर थकान हो सकती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गले में खराश का कारण वायरल होने पर एंटीबायोटिक्स सहायक नहीं होते हैं — अगर मोनोन्यूक्लिओसिस से संक्रमित व्यक्ति को एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, तो साइड इफेक्ट के रूप में अक्सर उन्हें अनूठे चकते उत्पन्न होने की संभावना बनी रहेगी। मोनोन्यूक्लिओसिस के लक्षण पूरी तरह से ठीक होने से पहले चार सप्ताह तक रह सकते हैं।

बैक्टीरिया की वजह से गले में खराश

बैक्टीरिया की वजह से गले में खराश का सबसे आम कारण स्ट्रेप्टोकोकस प्योजिंस है, जिसे अक्सर स्ट्रेप थ्रोट कहा जाता है। गोनोरिया और क्लैमाइडिया, जो दोनों यौन संचारित संक्रमण हैं, गले में खराश और टॉन्सिलिटिस का कारण भी बन सकते हैं। डॉक्टर अक्सर बैक्टीरिया की वजह से गले में खराश का निदान करने में मदद करने के लिए प्रमुख विशेषताओं पर भरोसा करते हैं। स्ट्रेप थ्रोट आमतौर पर निम्नलिखित के साथ जुड़ा हुआ है:

  • 101 डिग्री फ़ारेनहाइट (38.3 सेल्सियस) से ऊपर का बुखार
  • खांसी ना होना
  • गले की पिछले हिस्से में सफेद मवाद पॉकेट या घाव होना 
  • संवेदनशील लसीका ग्रंथियां

बैक्टीरियल संक्रमण के उपचार में एंटीबायोटिक शामिल हैं (फिर से, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एंटीबायोटिक्स वायरल या फंगल संक्रमण में मदद नहीं करती हैं)। शायद ही, टॉन्सिल में फोड़ा स्ट्रेप्टोकोकस या अन्य बैक्टीरिया के कारण विकसित हो सकता है। जब यह होता है, फोड़े को निकालने के लिए माइनर सर्जिकल प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।

फंगस की वजह से गले में खराश

गले का फंगल संक्रमण मधुमेह (फंगस-जैसे अतिरिक्त शर्करा) और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में हो सकता है। यह एंटीबायोटिक दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में भी हो सकता है, जिससे मुंह और गले में स्वस्थ बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं। इस प्रकार के संक्रमण को आमतौर पर थ्रश कहा जाता है ज्यादातर समय, कारण का उपचार करने और/या ऐंटिफंगल दवा लेने की सलाह दी जाती है। 

एलर्जी से संबंधित गले में खराश

जिन लोगों को पुरानी एलर्जी के लक्षण होते हैं उनमें अक्सर नाक में अत्यधिक श्लेषम उत्पन्न होता है, गले के पिछले हिस्से में लंबे समय तक श्लेष्म बहता रहता है। इससे अक्सर जलन और सूजन हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप दर्द या असुविधा हो सकती है। एलर्जी की प्रतिक्रिया पैदा करने वाले घटक का पता लगाना महत्वपूर्ण है, और अगर स्रोत अज्ञात है, तो एक एलर्जी विशेषज्ञ से परामर्श किया जा सकता है। एंटी-एलर्जी उपचार और साइनस साफ करना परेशान करने वाले लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

एसिड-रिफ्लक्स की वजह से गले में खराश

लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स से आवाज में कर्कश और कभी-कभी गले में खराश पैदा हो सकती है। खाने में बदलाव और थोड़े-थोड़े अंतराल पर थोड़ा खाना खाना कई लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। अगर एसिड-रिफ्लक्स के लक्षण दो हफ्तों से ज्यादा रहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। कभी-कभी डॉक्टर द्वारा लिखी दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है। पिछले लेख में, मैंने पाचन चिंताओं में सहायता के लिए प्राकृतिक पद्धतियां की चर्चा की थी। 

गले में खराश के इलाज के लिए पारंपरिक पद्धतियां

गले में खराश के कारण की पहचान करने के बाद, निम्नलिखित उपचार अपनाए जा सकते हैं:

  • पर्ची के बिना मिलने वाली दर्द निवारक दवाएं (पेरासिटामोल, एसिटामिनोफेन, आइबुप्रोफेन, आदि।)
  • नमक के गर्म पानी से गरारे करना (गर्म पानी में 1/2 छोटा चम्मच नमक। सावधानी: इसे निगले नहीं)
  • ह्यूमिडिफायर का उपयोग करना
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना
  • अम्लीय खाद्य पदार्थों से परहेज
  • तंबाकू के धुएं से बचना

गले में खराश के लिए प्राकृतिक पद्धतियां 

प्राकृतिक पद्धतियां भी अपनाए जा सकती हैं। ध्यान दें: बैक्टीरिया या फंगल संक्रमण वाले लोगों के लिए उपचार के रूप में इन अभ्यासों की सिफारिश नही की गई है। उन मामलों में डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। हालांकि, निम्नलिखित उपचार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करने में लाभदायक हो सकते हैं। 

निम्नलिखित उपचार मुख्य रूप से वायरल संक्रमण वाले लोगों के लिए हैं। ये सिफारिशें बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण के लक्षणों में भी मदद कर सकती हैं, लेकिन फिर से, इन स्थितियों का सबसे अच्छा इलाज एक चिकित्सक द्वारा किया जाता है। 

इकिनेशिया

इकिनेशिया पुर्पुरेया एक बारहमासी जड़ी बूटी है जिसका उपयोग लगभग 2,000 वर्षों से किया जा रहा है, जिसके उपयोग के संकेत उत्तरी अमेरिका के स्वदेशी लोगों में पाए गए हैं। इसका इस्तेमाल श्वसन संक्रमण और गले में खराश के इलाज के लिए किया गया है। 

JAMA में वर्ष 2015 के एक अध्ययन से पता चला है कि इससे सर्दी की रोकथाम में कोई लाभ नहीं हुआ था, लेकिन इसका उपयोग बीमारी की अवधि को कम कर सकता है। विस्तार से, गले में खराश सहित सर्दी के लक्षण भी कम हो सकते हैं। 

होलिस्टिक नर्स प्रैक्टिशनर में प्रकाशित वर्ष 2016 के एक अध्ययन में दर्शाया गया कि इकिनेशिया सामान्य सर्दी, जिसके चलते, गले में खराश के लक्षणों को रोकने में मदद मिल सकती है। अन्य अध्ययनों ने इसी तरह के निष्कर्ष दिखाए हैं। इकिनेशिया का सेवन अक्सर चाय, सत्त, या पूरक के रूप में किया जाता है।  

एल्डरबेरी

एल्डरबेरी, एक फूलों का पौधा, जिसका उपयोग दुनिया भर में देशी आबादी द्वारा सैकड़ों वर्षों से औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है। हाल के वर्षों में, एल्डरबेरी की लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। 

पारंपरिक चिकित्सा के भीतर, एल्डरबेरी का उपयोग गठिया से संबंधित दर्द के इलाज के लिए किया गया है। कई लोगों द्वारा इसका उपयोग सर्दी के लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए भी किया गया है। औषधीय प्रयोजनों के लिए एल्डरबेर का उपयोग दक्षिण अमेरिका में कई पीढ़ियों से किया जा रहा है। स्वदेशी अमेरिकियों ने विभिन्न संक्रमणों और बुखार के लिए उपचार के रूप में एल्डरबेरी का उपयोग किया है, जबकि यूरोप में औषधीय प्रयोजनों के लिए एल्डरबेरी के फलों से सिरप बनाया गया है। 

ORAC (ऑक्सीजन रेडिकलअवशोषण क्षमता) वैल्यू को मापने वाले अध्ययन दर्शाते हैं कि एल्डरबेरी में ब्लूबेरी और क्रैनबेरी, जिन्हें एंटीऑक्सिडेंट के उच्च स्तर और स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है, की तुलना में  एंटीऑक्सीडेंट के उच्च स्तर होते हैं। 

वर्ष 2016 के एक अधयन्न ने दर्शाया कि एल्डरबेरी हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों में सर्दी के लक्षणों की अवधि को कम कर सकती है, जबकि फायटोकेमिस्ट्री में वर्ष 2009 के एक अध्ययन में दर्शाया गया कि एल्डरबेरी लोकप्रिय इन्फ्लूएंजा-रोधी दवा ओसेल्टामिविर (Tamiflu) और अमानटाडाइन के समान प्रदर्शन कर सकती है। इसी तरह, वर्ष 2014 के एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि एल्डरबेरी इन्फ्लूएंजा वायरस के लिए एक प्रभावी उपचार हो सकती है। फ्लू वायरस वाले लोगों में गले में खराश एक सामान्य लक्षण है। 

अदरक की जड़

 अदरक का वैज्ञानिक नाम जिंजिबर ऑफ़िसिनाले है इसकी जड़ को जिंजीबेरिस राहीजोमा के रूप में जाना जाता है। अदरक एक फूल वाला पौधा है जो मूल रूप से दक्षिण पूर्व एशिया से है, लेकिन चीन, भारत, पोलिनेशिया और अफ्रीका की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसकी मोटी जड़ों का भी उपयोग किया गया है। यह एक लोकप्रिय मसाला भी है जिसका उपयोग खाना बनाने में होता है। 

 आयुर्वेदिक और पारंपरिक चीनी  दवाओं (TCM) में, अदरक को इसके रोग हरने वाले और औषधीय गुणों के लिए अच्छी तरह से माना जाता है। इसके सक्रिय संघटकों में जिंजीरोल और शोगाओल हैं।

पारंपरिक चिकित्सा में, अदरक को ऊपरी श्वसन के वायरल संक्रमण के उपचार के रूप में बहुत उपयोगी माना जाता है। अनेक अध्ययनों ने इसे COX-2 इन्हिबिटर बताया है, जो इसे वही भूमिका निभाने देता है जो NSAID दवाएं (आइबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन, इंडोमेथेसिन) निभाती हैं और यह बुखार तथा गले में खराश को कम कर सकता है। 

इसके अतिरिक्त, अदरक को श्वसन पथ के भीतर एंटीकोलिनर्जिक गतिविधि का उत्पादन करने के लिए दर्शाया गया है। इसका यह गुण छाती के भीतर श्लेष्म के संचय को कम करता है और खांसी के लक्षणों को कम करता है जो अदरक को छाती की ठंड और इन्फ्लूएंजा संक्रमण के लक्षणों का इलाज करने में मदद करने के लिए एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प बनाता है। यह गले में खराश संबंधी दर्द को भी कम कर सकता है। 

ग्रीन टी

चाय से संबंधित पेय पदार्थों में ग्रीन टी का सेवन दुनिया में सबसे अधिक किया जाता है जो विश्व स्तर पर पानी के बाद सबसे अधिक सेवन किया जाने वाला दूसरा पेय पदार्थ है। बड़ी सर्जरी के बाद, सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली ब्रीदिंग ट्यूब के कारण गले में खराश होना आम है।  

एनेस्थीसिया पेन मेडिसिन के वर्ष 2016 अध्ययन ने दर्शाया कि ओपन-हार्ट बाईपास सर्जरी वाले उन रोगियों के गले में खराश के लक्षणों में सुधार था जिन्होनें प्लेसिबो की तुलना में सर्जरी के बाद हर छह घंटे में ग्रीन टी से गरारे किए थे। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि ग्रीन टी के प्रदाह रोधी प्रभाव गले में दर्द को कम करने में मदद करते हैं। कुछ अन्य अध्ययनों ने इसी तरह के परिणाम दिखाए हैं। 

शहद

लंबे समय से दुनिया भर में खांसी और गले से संबंधित अन्य लक्षणों में मदद करने के लिएशहद की सिफारिश की गई है। वर्ष 2015 के अध्ययन ने टॉन्सिल्लेक्टोमी, टॉन्सिल को हटाने के लिए एक सर्जिकल प्रक्रिया, के बाद दर्द कम करने में शहद के लाभ का मूल्यांकन किया। परिणाम से पता चला है कि शहद समग्र दर्द के लक्षणों को कम करने में फायदेमंद हो सकती है।

मुलैठी की जड़

एनेस्थीसिया एंड अनालजिसिया के वर्ष 2013 के अध्ययन ने उन रोगियों का मूल्यांकन किया जिनकी सर्जरी के दौरान ब्रीदिंग ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था। इस अध्ययन नें 236 रोगियों का मूल्यांकन किया। आधे लोगों नें चीनी और पानी से गरारे किए जबकि अन्य आधे लोगों ने मुलैठी के सत्त और पानी के घोल से गरारे किए। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला, "मुलैठी के घोले से किए गरारों ने गले में खराश की घटना को आधा कर दिया। लक्षण उत्पन्न होने से पहले मुलैठी के गरारे करना एक आम और परेशान जटिलता को रोकने के लिए एक सरल तरीका प्रतीत होता है।” 

मार्शमैलो की जड़

मार्शमैलो की जड़ (एल्थिया ऑफ़िसिनालिस) पश्चिमी एशिया, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप की देशी जड़ी-बूटी है। सदियों से इसका इस्तेमाल औषधीय कारणों से पाचन और श्वसन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता रहा है। वर्ष 2018 के अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि सूखी खांसी वाले लोगों में मार्शमैलो की जड़ लाभदायक हो सकती है। प्रतिभागियों के गले में खराश भी थी। मार्शमैलो का सेवन ना केवल पूरक के रूप में किया जा सकता है बल्कि चाय के रूप में भी किया जा सकता है।  

पीपरमिंट 

पीपरमिंट एक जानी-मानी जड़ी-बूटी है, जिसे आवश्यक तेल के रूप में भी जाना जाता है। पीपरमिंट वाटरमिंट और स्पीयरमिंट का मिश्रण है, इसके पौधों के पत्ते और तने हल्के फजी हैं, और नम छायादार क्षेत्रों में सबसे अच्छे से विकसित होते हैं। पीपरमिंट यूरोप की पैदाइश है और इसके अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं। जब चाय के रूप में इसका सेवन किया जाता है तब यह गले के लिए आरामदेह हो सकता है। इसे सूंघने से जमे हुए साइनस मार्गों को खोलने में भी मदद मिल सकती है। सुझावित खुराक: चाय के रूप में पिएं या डिफ्यूजर में आवश्यक तेल के रूप में उपयोग करें। 

गले को आराम देने वाली गोलियां

गले को आराम देने वाली गोलियां कई फ़ॉर्मूलों में आती हैं और खांसी के लक्षणों को कम कर सकती हैं और गले में खराश को आराम पहुंचा सकती हैं। हालांकि, कई लोग इनके समृद्ध स्वादों के कारण बिना किन्हीं लक्षणों के भी इनका सेवन करते हैं। सामान्य स्वादों में शहद, नीलगिरी, मेन्थॉल, ग्रीन टी, इकेनेशिया, मोटी सौंफ़, चेरी और बहुत कुछ शामिल हैं। 

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