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एसिटाइल-एल-कार्निटीन – रखरखाव, सुरक्षा, और मरम्मत के लिए अनिवार्य

7 जून 2019

लेखक: पैट्रिशिया एल. जेरबर्ग, एमडी और रिचर्ड पी. ब्राउन, एमडी

इस लेख में:

एसिटाइल-एल-कारनिटीन (ALC या ALCAR) का अध्ययन अवसाद, संज्ञानात्मक दोष, अल्ज़ीमर्स रोग, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी विकार (एडीएचडी), शोर से होने वाले बहरेपन, एसिटअमीनोफेन (जैसे, टाइलिनॉल) के ओवरडोज़, हिपेटिक एनसेफैलोपैथी, और अन्य रोगों के लिए एक नए उपचार के रूप में किया गया है।

एसिटाइल-एल-कार्निटीन – बड़े काम का छोटा अणु

एल-कार्निटीन एक अमीनो एसिड है जो मुख्यतः मांस और दूध के उत्पादों में पाया जाता है। पचने के बाद, एल-कार्निटीन को एसिटाइल-एल-कार्निटीन (ऐलकार) में बदला जा सकता है, जो शरीर के सब भागों में जाता है और रक्त-मस्तिष्क अवरोध को आसानी से पार करके महत्वपूर्ण कोशिकीय कार्य करता है। उदाहरण के लिए, ऐलकार कोशिका झिल्ली प्रकार्यों, न्यूरोट्रांसमिशन, एसेंशियल वसा अम्ल चयापचय, ऊर्जा चयापचय, और एंटीऑक्सीडैंट  सुरक्षा के लिए आवश्यक है (Pettegrew et al., 2000) पूर्वनैदानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि ऐलकार हिप्पोकैंपस (जहाँ भावनात्मक स्मृति भंडारित होती है) और प्रीफ्रॉंटल कोर्टेक्स (उच्चतर स्तर की सोच और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का मॉड्युलेशन) में न्यूरोप्लास्टिसिटी (तंत्रिका कोशिकाओं की नए कनेक्शन बनाने की क्षमता) और न्यूरोजेनेसिस (नई मस्तिष्क कोशिकाओं में वृद्धि) को बढ़ा सकता है (Wang and Pae 2017)

ऐलकार सुरक्षित हैलेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव हैं

हालांकि संज्ञानात्मक दोष के उपचार के लिए प्रयुक्त नुस्खे पर उपलब्ध अवसाद-रोधियों और दवाईयों की तुलना में कुल मिलाकर ऐलकार सुरक्षित और कम दुप्रभाव पैदा करता है, इसके कुछ नुकसान भी हैं। पहला यह है कि ऐलकार का असर धीरे-धीरे शुरू होता है। हो सकता है कि दो से चार महीनों तक लाभ नज़र न आएं। दूसरा यह कि अधिकांश रोगियों को कई गोलियाँ, औसतन, तीन 500 मिग्रा गोलियाँ दिन में एक या दो बार लेनी पड़ती हैं। तीसरा यह है कि ऐलकार से निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं: दस्त, बदबूदार पेशाब, कब्ज, मतली और अपच (बदहजमी या पेट में दर्द)। कम आम दुष्प्रभावों में अनिद्रा, व्याकुलता, और अधिक भूख लगना शामिल हैं।

अवसाद के लिए ऐलकारअवसाद के प्रकार पर निर्भर करता है

हालांकि अवसाद के लिए ऐलकार के 10 दोहरे अज्ञात, यादृच्छिकृत, प्लेसिबो-नियंत्रित (DBRPC) अध्ययन किए गए हैं, उल्लेखनीय लाभ दर्शाने वाले अध्ययन मुख्यतः वृद्ध रोगियों, डिसथाइमिया (दीर्घकालिक सौम्य से मध्यम अवसाद) के रोगियों, और फाइब्रोमायल्जिया या कैंसर वाले मरीजों में किए गए हैं (Wang et al. 2014)। कई पुराने अध्ययनों में अप्रचलित पद्धियों का उपयोग किया गया था जिन्हें आज के मानकों के अनुसार उच्च गुणवत्ता का नहीं माना जा सकता है।

फिर भी, ऐलकार अवसाद वाले कई रोगियों को लाभ पहुंचाता है। इसका श्रेय कोशिका प्रकार्यों, ऊर्जा चयापचय, और न्यूरोट्रांसमिशन पर इसके समग्र सकारात्मक प्रभावों को दिया जा सकता है। साथ ही, वृद्ध रोगियों में वाहिकीय अवसाद नामक एक रोग हो सकता है, जिसका मतलब है मूड या मूड से संबंधित प्रकार्यों में लगे मस्तिष्क के क्षेत्रों को रक्त आपूर्ति की कमी से संबंधित अवसाद। ऐसे मामलों में, मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति या परफ्यूजन में सुधार करने से मूड, दिक् विन्यास, संज्ञानात्मक प्रकार्यों, याददाश्त, और बर्ताव में सुधार हो सकता है।

हालांकि ऐलकार तीव्र अवसाद के लिए मुख्य उपचार नहीं है, डिसथाइमिया, संभावित मस्तिष्क-वाहिकीय अपर्याप्तता, फाइब्रोमायल्जिया, या नुस्खे पर उपलब्ध अवसाद-रोधी दवाईयों को सहन करने में अक्षम रोगियों के लिए इसे ध्यान में रखना चाहिए।

ऐलकार संज्ञानात्मक दोष और मनोभ्रंश के लिए क्या करता है?

1980 के दशक से अनुसंधानों ने आयु से संबंधित संज्ञानात्मक ह्रास, सौम्य संज्ञानात्मक दोष, वाहिकीय मनोभ्रंश और अल्ज़ीमर रोग सहित, न्यूरोडीजेनरेटिव रोग के उपचार में ऐलकार  के उपयोग का अन्वेषण किया है। इन अध्ययनों से, उन व्यक्तियों के प्रकारों की पहचान करना संभव है जिन्हें ऐलकार से लाभ होने की अधिक संभावना है।

संज्ञानात्मक दोष और मनोभ्रंश के अध्ययनों में पाया गया कि ऐलकार ऐसे रोगियों में सबसे कारगर था जिनमें मस्तिष्क-वाहिकीय अपर्याप्तता मानसिक क्षमताओं के ह्रास में योगदान कर रही थी। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, सबसे छोटी केशिकाओं में से रक्त प्रवाह कम होने लगता है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से वंचित रह जाती हैं। जैसे-जैसे कोशिकाएं कमज़ोर होती जाती हैं, वे परफ्यूजन में छोटी सी कमी से भी क्षति या ऐपोटोसिस (कोशिका मृत्यु) के प्रति अधिक अरक्षित हो जाती हैं, जो कि व्यक्ति के डीहाइड्रेटेड या ओवरहीटेड होने, सर्जरी करवाने, रक्त चाप के गिरने, अत्यधिक शारीरिक गतिविधि करने, अनुपचारित स्लीप ऐप्निया के कारण, या चोट के कारण होने वाले आघात से ग्रस्त होने से हो सकता है।

संभावित मस्तिष्क-वाहिकीय अपर्याप्तता के संकेत

चक्कर आना, सिर का हल्कापन, अस्थायी भ्रम, बोलने या याद रखने में कठिनाई, दिमागी धीमापन, निष्पादात्मक प्रकार्यों में समस्याएं (नियोजन, संयोजन, और काम संपन्न करवाना), अचानक कमज़ोरी, या गिरना वाहिकीय अपर्याप्तता के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा, मस्तिष्क-वाहिकीय अपर्याप्तता बर्ताव में परिवर्तन, जैसे उदासीनता (दिलचस्पी में कमी), बेचैनी, या अवसाद से संबद्ध हो सकती है। मधुमेह, एथेरोस्कलेरोसिस, और दिल की बीमारी का होना अतिरिक्त जोखिम कारक हैं।  

वृद्ध रोगी के मस्तिष्क पर व्यापक वाहिकीय अपर्याप्तता के सबूत का पाया जाना इतना आम है कि इसे अक्सर उम्र के लिए सामान्य माना जाता है। परिणामस्वरूप, चिकित्सक अक्सर ऐसे रोगियों से कह देते हैं कि उनका स्कैन सामान्य है। तथापि, जब यह बात वाहिकीय अपर्याप्तता से संबद्ध हो सकने वाले लक्षणों वाले किसी रोगी में पाई जाती है, उस परिस्थिति और मस्तिष्क के स्कैन का पुनः मूल्यांकन करना चाहिए। जब तंत्रिका कोशिकाएं जीवित रहने के लिए संघर्ष करती हैं, तब अधिक नुकसान होने से रोकने, और कुछ मामलों में, कोशिकाओं को ठीक होने में मदद करने के लिए उन्हें ऑक्सीजन और जीवनोपयोगी पोषक तत्व प्रदान करना उपयोगी हो सकता है। थोड़ा अधिक एंटीऑक्सीडैंट संरक्षण भी मददगार हो सकता है। ऐलकार, नूट्रोपिक्स, सेरेब्रोवैसोडाइलेटर्स (रक्त वाहिकाओं को अधिक चौड़ा खुलने में मदद करने वाले यौगिक), पोषक तत्व, और एडाप्टोजेनिक जड़ी-बूटियाँ माइटोकॉंड्रियल प्रकार्य को सुधारने, कोशिकीय प्रतिरक्षाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्यलाभ को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

मनोभ्रंश के निदान वाले रोगियों में वाहिकीय रोग

केवल लगभग 10% या उससे कम मनोभ्रंश के रोगियों में शुद्ध वाहिकीय मनोभ्रंश होता है। फिर भी, मनोभ्रंश के रोगियों में से 75% में वाहिकीय रोग का प्रमाण पाया जाता है। बहुधा, जब किसी रोगी का मनोभ्रंश या अल्ज़ीमर रोग से निदान होता है, तो न्यूरोलॉजिकल जाँच और उपचार के प्रयास रुक जाते हैं। तथापि, ऐसे रोगी अक्सर वृद्ध होते हैं और इसलिए उनमें वाहिकीय अपर्याप्तता के होने की कुछ संभावना तो होती ही है, जो मस्तिष्क का स्कैन करने से दिख सकती है। वाहिकीय अपर्याप्तता का उपचार ऐलकार से करने में कोई हर्ज नहीं है, भले ही प्राथमिक निदान मनोभ्रंश हो क्योंकि आंशिक सुधार भी रोगी, परिवार और देखभालप्रदाताओं के जीवन की गुणवत्ता में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।

ऐलकार वाहिकीय संज्ञानात्मक दोष (VCI) के उपचार में उपयोगी है जैसा कि हाल के एक DBRPCT में दर्शाया गया था (Young et al. 2018)। इस परीक्षण में, वाहिकीय संज्ञानात्मक दोष वाले 56 रोगियों को, जो पहले से डोनेपेज़िल (ऐरिसेप्ट) ले रहे थे, 18 सप्ताह के लिए 1,500 मिग्रा एएलसी या प्लेसिबो प्रतिदिन दिया गया। ऐलकार लेने वाले समूह में, मॉंट्रियल कॉग्निटिव एसेसमेंट के स्कोर में प्लेसिबो की तुलना में उल्लेखनीय रूप से सुधार हुआ, तथापि, मस्तिष्क प्रकार्य की अन्य परीक्षाओं के स्कोरों में कोई अंतर नहीं आया। ऐलकार ने ध्यान और भाषा संबंधी प्रकार्यों में सबसे अधिक सुधार उत्पन्न किया।

ऐलकार अन्य पूरकों के साथ बेहतर काम करता है

जीव जन्तु इतने जटिल होते हैं कि हमें यह जानकर अचरज नहीं होना चाहिए कि उम्र में बढ़ती कोशिकाएं उनकी जटिल कोशिकीय मशीनरी को सक्रिय बनाने के लिए एकाधिक पोषक तत्व देने पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं। “NF” नामक एक उत्कृष्ट विटामिन और न्यूट्रासिटिकल फार्मूले ने संज्ञानात्मक लक्षणों और मस्तिष्क के अन्य प्रकार्यों में सुधार किया। NF में फोलिक एसिड, बी12, विटामिन ई, एस-एडिनोसिलमेथियोनीन, एन-एसिटाइल सिस्टीन और एसिटाइल-एल-कार्निटीन हैं। प्रारंभिक चरण, मध्य चरण और बाद के चरण के अलज़ीमर रोग के रोगों के अध्ययनों में, जिन लोगों को NF दिया गया था, उन्होंने स्मृति और संज्ञानात्मक परीक्षाओं सहित न्यूरोसाइकियाट्रिक मापों में उल्लेखनीय रूप से बेहतर स्कोर प्राप्त किए (Chan et al. 2008; Remington et al. 2009, 2015)। इन अध्ययनों में रोगियों ने फार्मूले के प्रति अच्छी सहिष्णुता दर्शाई। किसी भी दुष्प्रभाव की कोई रिपोर्ट नहीं की गई। इन प्रोत्साहक निष्कर्षों की पुष्टि करने के लिए अधिक अध्ययनों की जरूरत है। इस फार्मूले के प्रत्येक घटक के अपने स्वास्थ्य लाभ हैं और दुष्प्रभाव कम देखे गए हैं। मस्तिष्क-वाहिकीय अपर्याप्तता वाले लोगों में, कोई सेरेब्रोवैसोडाइलेटर, जैसे पिकामिलॉन, अतिरिक्त परफ्यूजन प्रदान कर सकता है।

शोर से होने वाले बहरेपन के लिए ऐलकार

ठीक जैसे धूप से अत्यधिक अरक्षितता से आँखों के लेंस और रेटिना को ऑक्सिडेटिव क्षति पहुंच सकती है, वैसे ही अत्यधिक शोर में रहने से आंतरिक कान को ऑक्सिडेटिव क्षति हो सकती है जिससे बहरापन उत्पन्न होता है। अध्ययनों ने दर्शाया है कि एंटीऑक्सिडैंट्स के कतिपय संयोजन शोर से अरक्षिततता से स्थायी क्षति से रक्षा कर सकते हैं (Choi and Choi 2015)। प्रत्येक एंटीऑक्सिडैंट उन कोशिकाओं के अलग-अलग भागों की रक्षा करता है जो हमें सुनने में सक्षम बनाती हैं। संयोजन में, ये एंटाऑक्सिडैंट सहक्रियाशील प्रभाव पैदा करते हैं, यानी, वे एक दूसरे की कारगरता को बढ़ाते हैं। एक संयोजन, ऐलकार और फोलेट तथा विटामिन ई ने कोशिका क्षति और बहरेपन को उल्लेखनीय रूप से कम किया (Dhitavat, et al. 2005)। मैगनीशियम और विटामिन ए भी फायदेमंद थे। एंटीऑक्सिडैंट सबसे अधिक कारगर तब होते हैं जब उन्हें शोर में जाने से पहले या अरक्षितता के बाद 4 घंटे के अंदर दिया जाता है और अरक्षितता के बाद 9 दिनों तक जारी रखा जाता है।

अटेंशन डेफिसिट विकार के लिए ऐलकार

एडीएचडी के लिए ऐलकार के अध्ययनों ने मिश्रित और अनिर्णायक परिणाम दर्शाए हैं। इन विसंगतियों से संकेत मिलता है कि यह समग्र एडीएचडी की बजाय, उसके उपप्रकारों में अधिक फायदेमंद है। उदाहरण के लिए, एडीएचडी वाले 112 बच्चों के एक 16 सप्ताह के BDRPC अध्ययन के नकारात्मक परिणामों के पुनः विश्लेषण में उन लोगों में उल्लेखनीय लाभ पाए गए जिन्हें एडीएचडी के हाइपरऐक्टिव या मिश्रित प्रकारों की तुलना में इनअटेंटिव प्रकार का एडीएचडी था (Arnold et al. 2007)। इसके अलावा, कई एडीएचडी अध्ययन केवल छह सप्ताहों तक चले थे, जो संभव है कि ऐलकार के प्रभाव का पता लगाने के लिए शायद पर्याप्त समय नहीं है।

प्रमाणित और संभावित लाभ

एसिटाइल-एल-कार्निटीन (ALC या ALCAR) शोधकर्ताओं के लिए अत्यधिक दिलचस्पी का अणु बना हुआ है क्योंकि पूर्वनैदानिक शोध में कई महत्वपूर्ण प्रकार्य पहचाने गए हैं। जीन सक्रियीकरण, ट्रांसक्रिप्शन, मेथाइलेशन में शामिल जीन्स का संरक्षण, और असंख्य अन्य प्रयास चिकित्सा संबंधी संभावनाओं के एक लुभावने मेन्यू का संकेत देते हैं। संपूर्ण शरीर में कोशिकाओं के परिष्कार और संरक्षण के लिए ऐलकार और अन्य पूरकों के रणनीतिक संयोजनों को लगातार अध्ययनों की जरूरत पड़ेगी।

संदर्भ:

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