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Wellness

एल-सेरीन: ALS, पार्किन्सन्स और अल्झाइमर्स के संबंध में एक पूर्णतया नया दृष्टिकोण

19 अगस्त 2019

डॉ. माइकल मरे द्वारा

इस लेख में:

एमायोट्रोफिक लेटरल स्कलरोसिस (ALS) या लू गेरिग्स रोग के उपचार के संबंध में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। इसको पर्याप्त बढ़ावा नहीं मिला है क्योंकि इसके पीछे कोई बड़ी दवा कंपनी नहीं है और उपचार पोषक योगिक से किया जाता है – the अमीनो एसिड एल-सेरीन के साथ. और, और भी ख़ुशी की ख़बर है क्योंकि इस महत्वपूर्ण खोज से पार्किन्सन्स और अल्झाइमर्स रोग सहित अन्य मस्तिष्क संबंधी विकृत विकारों में भी सहायता मिल सकती है।

हालांकि, यह सबकुछ ALS से शुरू होता है। ALS में माँसपेशियों की हरकत को शुरू और नियंत्रित करने वाली मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से विकृत होने लगती हैं। जिसके परिणामस्वरूप, इस रोग के कारण अंततया व्यक्ति लगभग या पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो जाता है। इस रोग में शुरुआत में स्वेच्छा से माँसपेशियों के हरकत करने की क्षमता के तेजी से प्रभावित होने के लक्षण दिखाई देते है, इस रोग के बाद के चरणों में रोगी पूर्णतया लकवाग्रस्त हो सकता है। यह एक अत्यंत कष्टदायी रोग है जो तेजी से या बहुत धीरे-धीरे बढ़ सकता है। 

इस रोग के बारे में पहली बार 1869 में पता चला था, लेकिन वर्ष 1939 में लू गेरिग ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रोग की तरफ ध्यान आकर्षित किया। आजतक के बेसबॉल के सबसे चहेते खिलाड़ी के कैरियर को समाप्त करने वाला यह रोग, उसके नाम से सबसे अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है। हांलाकि, युवा लोग 2014 में आई फिल्म के जरिये ALS से अधिक परिचित हो सकते हैं जिसका नामद थीअरी ऑफ एव्रीथिंग है जोकि सैधांतिक भौतिकीविद स्टीफेन हॉकिंग के बारे में है या कदाचित वे उनके कार्य से परिचित हैं। वर्ष 2018 में मृत्यु होने तक वे अपनी पीढ़ी के आइंस्टीन थे।

महत्वपूर्ण खोज

वर्ष 2002 में, कॉक्स और स्वर्गीय न्यूरोलॉजिस्ट (स्नायु विज्ञानी) और अवेकनिंग्स (रोबिन विलियम्स के साथ एक फिल्म भी की) और द मैन हू मिसटुक हिज़ वाइफ फॉर ए हैट के लेखक ऑलिवर सैक्स, ने जर्नल न्यूरोलॉजी में एक शोध पत्र प्रकाशित किया, जिसमे उनके मत का वर्णन किया गया है कि चमगादड़ों में अत्यधिक उच्च मात्रा में विषैला योगिक &बीटा;-मिथाइलअमीनो-एल-अलनीन (BMAA) पाया जाता है, जोकि मस्तिष्क की विकृति के लिए जिम्मेदार था। दुनियाभर की अन्य आबादियों, विशेषकर अमेरिका और फ्रांस, में भी पाया गया कि चमगादड़ों के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से आहार के रूप में प्राप्त होने वाले BMAA के उच्च स्तर भी ALS के लिए जिम्मेदार थे।  

आम भाजक, धरती के सबसे पुराने जीव, सायनोबैक्टीरिया के जरीये BMAA के संपर्क में आना है। गुआम में, चमगादड़ साइकैड के बीज खा रहे थे जिनकी जड़ों का असामान्य तंत्र सायनोबैक्टीरिया से भरपूर था। दुनिया के अन्य भागों में ALS के मामलों में असामान्य रूप से बड़ी वृद्धि का कारण सायनोबैक्टीरिया के अन्य स्रोत थे। इन बैक्टीरिया को अक्सर ब्लू-ग्रीन ऐल्गे कहा जाता है (ध्यान दें: सभी iHerb पर ब्रांड California Gold Nutrition के ब्लू-ग्रीन ऐल्गे के स्रोतों को BMAA से रहित होने के लिए जाँचा गया है)। सायनोबैक्टीरिया समुद्रों, झीलों, पोखरों, तालाबों और कुवैत से एरिज़ोना तक मरुस्थल के पृष्ठभाग के नीचे भी पाए जाते हैं। अक्सर सायनोबैक्टीरिया में BMAA बड़ी मात्र में पाया जाता है। बस इतनी ही बात है कि चमोरो लोग उस विष की अत्यधिक बड़ी खुराक ले रहे थे जिसके संपर्क में हम शेष लोग भी हर समय आते रहते हैं। 

सेरीन BMAA की विषाक्तता से कैसे बचाती है

BMAA मस्तिष्क के प्रोटीन्स के आकार को परिवर्तित करके अपने मस्तिष्क को नुकसान पहुँचाने वाले प्रभावों को उत्पन्न करने के लिए स्थान लेता है एल-सेरीन के साथ. मूल रूप से, मस्तिष्क की कोशिकाएं गलती से BMAA और इसके अधिक विषाक्त रूप नाइट्रोसो-BMAA को एल-सेरीन समझ लेती हैं और जब वे प्रोटीन्स में एल-सेरीन के स्थान पर BMAA को स्थापित करती है और फिर मस्तिष्क की कोशिकाओं की निर्माण प्रक्रिया के बाद एक ऐसा प्रोटीन प्राप्त होता है जिसका आकार वैसा नहीं होता है जैसा उसे होना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन विकृत हो जाता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं में विषाक्तता फैल जाती है। प्रोटीन्स को उचित रूप से मोड़ा नहीं जाता है। उन्हें या तो विचित्र तरीकों से मोड़ा जाता है या बिलकुल भी मोड़ा नहीं जाता है। अधिकतर आरंभिक अनुसंधान जैक्सन होल, योमिंग में कॉक्स की ब्रेन केमिस्ट्री की प्रयोगशालाओं में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के द्वारा किया गया था।

अल्झाइमर्स रोग में BMAA के संभावित प्रभाव

मस्तिष्क में, BMAA के कारण एक विष बीटा-कार्बोनेट का भी निर्माण हो सकता है। यह योगिक एन-मिथाइल-डी-एस्पार्टेट (NMDA) कहलाने वाले रिसेप्टरों सहित तंत्रिकासंचारकों (न्यूरोट्रांसमीटर्स) के स्थान पर मस्तिष्क की कोशिकाओं पर रिसेप्टरों के साथ बंध सकता है। परिणामस्वरूप, इसके कारण कई कारणों के कारण मस्तिष्क की कोशिका की मृत्यु हो सकती है जिसके कारण अंततया कोशिका को और भी अधिक नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है।

BMAA और एल-सेरीन का प्रायोगिक अध्ययन

क्लिनिकल जाँचों से पहले की जाने वाली जाँचों में, जब BMAA के संपर्क में लाई गई मस्तिष्क की कोशिकाओं को अन्य अमीनो एसिड एसेंशियल के भी संपर्क में लाया गया जिसका नाम है एल-सेरीन के साथ तो इससे गलत तरीके से मुड़े हुए या बिना मुड़े हुए प्रोटीन्स का निर्माण बंद होने लगा। इसके अतिरिक्त, एल-सेरीन ने BMAA के द्वारा प्रेरित मस्तिष्क की कोशिकाओं की मृत्यु के कारण एक एंज़ाईम के निर्माण में वृद्धि पर रोक लगाई। 

वर्ष 2016 में मियामी विश्वविद्यालय के एक अनुसंधानकर्ता के द्वारा किया गया एक अध्ययन मस्तिष्क की रक्षा करने में एल-सेरीन के महत्त्व की एक स्पष्ट तस्वीर प्रदान करता है। बंदर जिनमे मनुष्यों में अल्झाइमर्स रोग के खतरे में वृद्धि से संबंधित एक जीन होता है उन्हें BMAA, एल-सेरीन, या दोनों के मिश्रण से भरपूर केले खिलाए गए। जिन बंदरों को BMAA दिया गया था उनमे अल्झाइमर्स रोग को अभिलक्षित करने वाले प्लाक और उलझे हुए रेशे दोनों दिखाई दिए, लेकिन जिनको एल-सेरीन भी दिया गया था उनके मस्तिष्क की कोशिकाओं में इन उलझे हुए रेशों की संख्या 80% से 90% तक कम थी। 

ALS में एल-सेरीन के क्लिनिकल ट्रायल्स

ALS में एल-सेरीन के साथ किए गए क्लिनिकल से पूर्व के अनुसंधान में इतने अधिक आशाजनक परिणाम प्राप्त हुए कि अब इसका उपयोग मनुष्यों पर परिक्षण में यह निर्धारित करने के लिए किया जा रहा है कि यह इस दुर्बल करने वाले रोग में कितनी लाभकारी हो सकता है। पहला अध्ययन, चरण I क्लिनिकल ट्रायल, प्रतिदिन दो बार 0.5, 2.5, 7.5, और 15 ग्राम की खुराकों की सुरक्षा का आंकलन करने के लिए किया गया। जिन रोगियों को एल-सेरीन दी गई थी उनकी तुलना 5 अन्य ALS क्लिनिकल ट्रायल्स के प्लसीबो रोगियों के साथ की गई। प्राथमिक परिणाम में पता चला की सभी खुराकों में एल-सेरीन सुरक्षित थी। अध्ययन में ALS फंक्शनल रेटिंग स्केल-रिवाइज्ड ((ALSFRS-R) स्कोर्स के द्वारा मापी गई कार्यात्मकता की कमी में परिवर्तन की तुलना मिलान खाने वाले प्लसीबो समूहों के साथ भी की गई। 15 ग्राम की खुराक प्रतिदिन दो बार के परिणाम अविश्वसनीय थे। उस खुराक से 85% की बड़ी कमी आई। स्पष्ट रूप से, ये परिणाम अत्यधिक आशाजनक हैं। अब डार्टमाउथ- हिचकॉक सेंटर में चरण II के क्लिनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं। तथापि, एल-सेरीन की सुरक्षत्मकता और किसी प्रभावी चिकित्सीय उपचार के अभाव को देखते हुए, अब परीक्षण से गुजर रहे ALS के रोगियों को पूरक के रूप में एल-सेरीन देने में कोई खतरा नहीं है।

ओगिमी के निवासी

ओकिनावा द्वीप अपने निवासियों के द्वारा लंबा और स्वस्थ जीवन जीने के लिए मशहूर है। ओगिमी के पृथक गाँव को “दीर्घायु का गाँव” के आदर्श के रूप में माना जाता है और इस द्वीप के उत्तरी भाग में 4,000 लोग रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस छोटे से गाँव में प्रति व्यक्ति सबसे अधिक शतायु लोग रहते हैं। इनके स्वास्थ्य एवं इनकी दीर्घायु के कई संभावित कारक हैं, ना केवल आहार एवं व्यायाम बल्कि यह भी की यह संबंधों की बहुलता वाला एक अन्तरंग समुदाय है और यह एक मातृसत्तात्मक समाज है। किन्तु, यह एक रोचक तथ्य है कि ओगिमी लोगों का आहार भरपूर होता हैएल-सेरीन के साथ, इसकी मात्रा इनके आहार में प्रारूपिक अमेरिकी आहार के स्तर से चार गुना होती है।

एल-सेरीन विरुद्ध फॉस्फेटाइडलसेरीन

मस्तिष्क में, सेरीन मस्तिष्क में प्रमुख फोस्फोलिपिड बनाने के लिए फोस्फेटाइडलसेरीन तैयार करने के लिए फैटी एसिड्स और ग्लिसरोल से बंधा होता है। फोस्फेटाइडलसेरीन (PS) की खुराक कोशिका की झिल्लियों की अखंडता एवं तरलता को निर्धारित करने में एक मुख्य कारक होता है। सामान्यतया मस्तिष्क फोस्फेटाइडलसेरीन के पर्याप्त स्तरों का निर्माण कर सकता है, किन्तु इसके प्रमाण हैं कि बुजुर्गों में PS के अपर्याप्त स्तरों का संबंध तनाव और/या बुजुर्गों की क्षीण मानसिक कार्यात्मकता से हो सकता है। PS पूरक पर किए गए कई डबल-ब्लाइंड अध्ययनों में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। विशिष्ट रूप से, इन अध्ययनों में पाया गया है कि PS से अल्झाइमर्स रोग और पार्किन्सन्स रोग के शुरूआती चरणों वाले बुजुर्ग व्यक्तियों सहित बुजुर्ग व्यक्तियों की मानसिक कार्यात्मकता, मनोदशा, और व्यवहार में सुधार आता है। विशिष्ट अवसादरोधी दवाओं से भिन्न, फोस्फेटाइडलसेरीन तनाव के हॉर्मोन कॉर्टिसोल के स्राव में कमी जैसे कार्यों की अन्य कार्य-प्रणाली को सुझाने वाले सेरोटोनिन और अन्य तंत्रिकासंचारकों को प्रभावित नहीं करता है। PS की आमतौर पर दी जाने वाली खुराक 300 मि.ग्रा. प्रतिदिन है, लेकिन ऊपर वर्णित परिणामों के आधार पर, केवल एल-सेरीन के साथ दिया गया पूरक ही बहेतर परिणाम प्रदान कर सकता है।

एल-सेरीन के साथ दिए जाने वाले पूरक

चरण I के अध्ययन के आधार पर, पूरक को 15 ग्राम एल-सेरीन के साथ प्रतिदिन दो बार लेना सुरक्षित है और ALS और संभवतया अल्झाइमर्स रोग में सबसे प्रभावी खुराक प्रतीत होती है। एक वैकल्पिक सुझाव है प्रतिदिन 300 मि.ग्रा. कीफोस्फेटाइडलसेरीन (PS) की खुराक

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