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Wellness

आयुर्वेदिक चिकित्सा से स्वस्थ रहना

23 अगस्त 2019

एलेन एल्बर्टसन, पीएचडी, आरडीएन, एनबीसी-एचडबल्यूसी द्वारा

हममें से अधिकतर लोग अपने स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को इष्टतम करना चाहते हैं ताकि हम शानदार दिखें और महसूस करें, अनवरत ऊर्जा से युक्त हों और लंबे समय तक जियें। तंदुरुस्ती का यह ऊंचा स्तर हासिल करने के लिए केवल बीमारी से बचना या उसका उपचार करना ही काफी नहीं है। संतुलन इसकी कुंजी है। आयुर्वेद वह संतुलन पाने और अपने शरीर को बेहतर समझने में मदद कर सकता है ताकि आप एक लंबा, स्वस्थ और प्रसन्न जीवन जियें।

आयुर्वेदिक चिकित्सा क्या है?

आयुर्वेदिक चिकित्सा (जिसे आयुर्वेद भी कहते हैं) भारत में हजारों साल पहले विकसित एक प्राकृतिक, संपूर्णतावादी उपचार प्रणाली है। आयुर्वेद शब्द दो संस्कृत शब्दों के मेल से बना है: आयुर यानी जीवन और वेद यानी ज्ञान या विज्ञान और आम तौर पर इसका अनुवाद “जीवन और लंबी आयु के विज्ञान” के रूप में किया जाता है। 

आयुर्वेद, जो एक प्रकार की अनुपूरक और वैकल्पिक चिकित्सा है, रोग से लड़ने की बजाय जीवंत स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और उसके साथ जीने पर ध्यान केंद्रित करता है। इस प्रणाली में पाचन, चयापचय और प्रतिरक्षा गतिविधि में सुधार से लेकर व्यग्रता, अवसाद और तनाव को कम करने तक असंख्य स्वास्थ्य लाभ हैं।

आयुर्वेद पारंपरिक चिकित्सा से कैसे भिन्न है

आयुर्वेद पारंपरिक चिकित्सा का एक अद्भुत अनुपूरक है, लेकिन यह उससे असंख्य तरीकों से अलग है। पारंपरिक चिकित्सा रोगों के बीच अंतर पर ध्यान देती है। इसके विपरीत, आयुर्वेद लोगों के बीच अंतर पर जोर देता है। विशिष्ट रूप से, यह रोगी की जैव-उपलब्धता पर विचार करता है—वह कौन है, और इस पर नहीं कि उसे क्या तकलीफ है। 

जबकि पारंपरिक चिकित्सा शारीरिक बातों पर जोर देती है, आयुर्वेद शरीर, मन और आत्मा के बीच संबंध; रोग के अंतर्निहित कारणों और कि बीमारी रोगी के विचारों, मान्यताओं और जीवनशैली से कैसे प्रभावित होती है, पर नज़र डालता है। अंत में, दवाईयों या ऑपरेशन की सिफारिश करने की बजाय, आयुर्वेदिक उपचार में आहार के परिवर्तन, योग का अभ्यास, ध्यान, सुगंधित तेल, उपचार करने वाली जड़ी-बूटियाँ, पूरक और/या तनाव प्रबंधन शामिल हो सकते हैं। 

तीन दोष 

आयुर्वेद के अनुसार, हर व्यक्ति पाँच सार्वभौम तत्वों से बना है: वायु, अग्नि, जल, मिट्टी और अंतरिक्ष। इनमें से प्रत्येक तत्व भौतिक या ऊर्जा प्रकारों को परिभाषित करने वाले संयोजनों जिन्हें दोष कहते हैं, में पाया जाता है। 

इसमें तीन दोषों की गणना होती है: वात (वायु और अंतरिक्ष), पित्त (अग्नि और जल) और कफ (मिट्टी और जल)। हर व्यक्ति में दोषों का अनोखा मिश्रण होता है और उनमें से एक आम तौर पर अधिक प्रभावशाली होता है। 

आप एक छोटा सी ऑनलाइन परीक्षा देकर या किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास जाकर अपने दोष को निर्धारित कर सकते हैं। अपने दोष को समझने से आपको अपने शरीर और स्वयं को समझने और यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आहार, जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में परिवर्तन के साथ संतुलन में कैसे रहा जा सकता है। 

वात को संतुलन में कैसे रखें

वात वाले लोग सृजनशील, ऊर्जावान और दुबले-पतले होते हैं। संतुलित होने पर वे हल्के, संतुष्ट और ऊर्जावान महसूस करते हैं और अच्छी पाचनशक्ति और नींद से युक्त होते हैं। संतुलन से बाहर होने पर, वात क्लांत, अकेंद्रित और संधि-शोथ, व्यग्रता, दमे और हृदय रोग से ग्रस्त हो सकते हैं। 

  • जीवनशैली: मंद हो जाना, गर्म रहना, नियमित दिनचर्या का पालन करना और पर्याप्त विश्राम करना वात वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। योग, प्राणायाम (श्वास के व्यायाम), तिल के तेल की मालिश, तनाव में कमी और उत्तेजकों और शराब से परहेज करने की अनुशंसा की जाती है।
  • आहार: वात वालों को नियमित भोजन और स्नैक तथा शांतिदायक, गर्म, नम खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जैसे सूप और खिचड़ी। गर्म करने वाले मसालों जैसे अदरक, दालचीनी, सौंफ और इलायची भी वात वालों के लिए उपयोगी हैं। विश्रामित महसूस करने के लिए, वात वाले लोगों को हर्बल चाय से लाभ मिलता है, जो चिकरी की जड़, लेमनग्रास, संतरे के छिलके और मुलैठी से युक्त होती है। 
  • सर्वश्रेष्ठ सुगंधित तेल: गर्म, मीठे तेल जैसे मीठा संरा, सौंफ, पवित्र तुलसी, मरुवा, गुलाब, इलैंग-इलैंग, लोबान और नारंगी सर्वश्रेष्ठ होते हैं।

पित्त को संतुलन में कैसे रखें

पित्त प्रकार के लोगों का शरीर हट्टा-कट्टा होता है, दिमाग तेज होता है और वे पूर्णतावादी और मेहनती हो सकते हैं। संतुलित पित्त वाले लोग शांत और प्रसन्न महसूस करते हैं और मजबूत पाचनशक्ति, चमकती त्वचा और अच्छी नींद के स्वामी होते हैं। असंतुलित होने पर, वे शोथ, मुहांसों, छाती में जलन, स्व-आलोचना और तनाव के कारण हृदय रोग के शिकार हो सकते हैं।

  • जीवनशैली: चूंकि उनमें एक आंतरिक प्रेरणा होती है, पित्त वाले लोग हल्की-फुल्की बातों और अधिक चपलता से लाभान्वित होते हैं। खास तौर पर शाम के समय विश्राम करने के लिए ध्यान करना, मित्रों और परिवार के साथ समय बिताना, प्रकृति में चहलकदमी करना और तैरना पनपने में उनके मददगार हो सकते हैं।
  • आहार: पित्त वाले लोगों के लिए सर्वोत्तम आहार में ऐसे खाने शामिल हैं जो मसालेदार, खट्टे या नमकीन होने की बजाय ठंडे (खास तौर पर, गर्मियों में) और मीठे होते हैं। उन्हें मध्यम आकार का भोजन दिन में तीन बार खाना चाहिए और शराब और अधिक खाने से बचना चाहिए। मसालेदार खानों से बचना चाहिए, लेकिन छोटी मात्रा में मीठे, कड़वे मसाले जैसे इलायची, पुदीना और केसर स्वीकार्य हैं। पित्त वाले लोगों को ऐसी चायों से लाभ मिलता है जो पत्तागोभीगुलाब, इलायची, मुलैठी और अदरक से बनी होती हैं। 
  • सर्वश्रेष्ठ सुगंधित तेल: शांति और ध्यान केंद्रित करने को बढ़ावा देने वाले मिश्रणों को चुनें। अच्छे विकल्पों में शामिल हैं, सौंफ, चंदन और गुलाब। थोड़ी मात्रा में इलैंग-इलैंग और लोबान तथा जरा सा नींबू या पेपरमिंट जो उल्लास की अनुभूति देते हैं, पित्त वाले लोगों को संतुलित कर सकते हैं। 

कफ को कैसे संतुलन में रखें 

कफ वाले लोग स्थूलकाय तथा मंद, स्थिर और आरामतलब होते हैं। संतुलित रहने पर वे स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली और ढेर सारी सहन-शक्ति से युक्त होते हैं तथा उन्हें अच्छी नींद आती है। संतुलन बिगड़ने पर कफ वाले लोगों का वज़न तेजी से बढ़ता है, वे मंद पड़ जाते हैं और उन्हें मोटापा, छाती की सर्दी, अवसाद, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, दमा और एलर्जी होने की संभावना होती है

  • जीवनशैली: कफ वाले लोगों को उत्तेजक गतिविधियों, कुछ नया सीखने, ताज़ी हवा और दैनिक, जोरदार व्यायाम से लाभ मिलता है। सकारात्मक मित्रों के साथ समय बिताना और उल्लसित करने वाला संगीत सुनना भी संतुलन में रहने में उनकी मदद कर सकता है। 
  • आहार: चूंकि उनका वज़न आसानी से बढ़ सकता है, कफ वाले लोगों को हल्का आहार खाना चाहिए और मिठाई, नमक और अधिक खाने से—खास तौर पर रात के समय, बचना चाहिए। उन्हें गर्म, हल्के भोजन और चायों से लाभ होता है जो अदरक, लौंग, इलायची, हल्दी और केसर से युक्त होती हैं। पाचनशक्ति को सुधारने के लिए, कफ वाले लोगों को गर्म अदरक की चाय भोजन के साथ पीनी चाहिए और भोजन के बाद सौंफ चबानी चाहिए।
  • सर्वश्रेष्ठ सुगंधित तेल: चूंकि कफ वाले लोग भारी और मंद महसूस कर सकते हैं, इसलिए वे गर्म, मसालेदार, ऊर्जादायक तेलों से लाभान्वित होते हैं जैसे नीलगिरी, पेपरमिंट, तुलसी और मेहंदी। 

आपका प्रकार चाहे कुछ भी हो, आयुर्वेद आपको अपने शरीर, मन, आत्मा और वातावरण के बीच संतुलन कायम रखने की शक्ति दे सकता है ताकि आप सर्वश्रेष्ठ महसूस कर सकें और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ा सकें। 

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