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तंदुरुस्ती

कोलोस्ट्रम (नवदुग्ध) - यह सुपरफूड केवल शिशुओं के लिए ही नहीं है

2 दिसंबर 2019

एरिक मैड्रिड, एमडी द्वारा

इस लेख में:


कुछ लोग ही इस बात से इंकार करेंगे कि मानव दूध नवजात शिशु के लिए पोषण का पसंदीदा स्रोत है। सभी मादा स्तनपायी दूध का निर्माण करते हैं, जिसमें जीवन के सबसे महत्वपूर्ण चरण में स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक सबसे सही घटक होते हैं। मां के दूध को पौष्टिक मूल्य प्रदान करने वाली चीजों का एक अंश होता है, कोलोस्ट्रम नामक एक पदार्थ, जिसका स्राव जन्म देने के बाद के पहले 48 घंटों में सभी मादा स्तनपायी करते हैं। कुछ लोग कोलोस्ट्रम को "जीवन का अमृत" कहकर बुलाते हैं।

कोलोस्ट्रम तीन मुख्य पदार्थों से बना होता है:

  • इम्यूनोग्लॉब्युलिन: प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन करते हैं और जीवाणुओं, वायरसों, तथा खतरनाक कवकों से संक्रमणों के विरुद्ध सुरक्षित होने में मदद करते हैं। वे एलर्जी के लक्षणों को कम करने में भी मदद कर सकते हैं।
  • लैक्टोफेरिन: एक लौह-बंधनकारी प्रोटीन जो पेट में लौह के अवशोषण को सुगम करता है। इसके अलावा, लैक्टोफेरिन में सूक्ष्मजीवीरोधी गुण होते हैं जो पेट में शोथ होने पर ठीक होने में उसकी मदद कर सकते हैं। 
  • प्रोलीन से प्रचुर पॉलीपेप्टाइड: प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं और अलज़ाइमर्स रोग (एक मानसिक रोग) से ग्रस्त लोगों में लाभदायक हो सकते हैं।

कोलोस्ट्रम के सूक्ष्मजीवीरोधी और जीवाणुरोधी प्रभाव

इम्यूनोग्लॉब्युलिन और विकास कारकों के अलावा, कोलोस्ट्रम में सूक्ष्मजीवीरोधी पेप्टाइड, विशिष्ट रूप से, ह्युमन बीटाडिफेंसिन-2 (hBD-2) भी होते हैं। ये जीवाणुरोधी प्रोटीन शिशु की खतरनाक संक्रमणों, जैसे साल्मोनेला और ई. कोलाई, से सुरक्षा करते हैं जो यदि प्रारंभिक जीवन में हो जाते हैं तो जीवन-घातक सिद्ध हो सकते हैं। हालांकि स्तन के दूध में भी सूक्ष्मजीवीरोधी गुण होते हैं, कोलोस्ट्रम में hBD-2 अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होता है। 

वैज्ञानिकों को पता चला है कि कोलोस्ट्रम स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन करने में मदद करने वाला एक प्रमुख घटक है, और यह रोग से लड़ने वाली कोशिकाओं की संख्या में विशेष रूप से वृद्धि करता है, जिन्हें "natural killer" या NK कोशिकाओं का उपयुक्त नाम दिया गया है। 2014 में Nutrition Research में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि कोलोस्ट्रम ऊपरी श्वसन-तंत्र में संक्रमण पैदा करने वाले अन्य वायरसों के अलावा इनफ्लुएंज़ा वायरस का मुकाबला करने में NK कोशिकाओं की मदद कर सकता है।. 

अध्ययन यह भी दर्शाते हैं कि लैक्टोफेरिन ई. कोलाई जैसे ग्राम-निगेटिव जीवाणुओं द्वारा स्रवित विषाक्त पदार्थों से बंध सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि जीवाणुओं से इन विषाक्त पदार्थों का स्राव सेप्सिस (पूतिता) पैदा करता है, जो कि एक रक्त संक्रमण है और गहन देखभाल इकाई में भर्ती होने वाले लोगों में मृत्यु का अग्रणी कारण है। 

सौभाग्य से, वैज्ञानिक गाय के दूध से कोलोस्ट्रम को अलग करने और एक आहार संबंधी पूरक के रूप में उसका उपयोग करने में सक्षम हो गए हैं। इससे मां का दूध छुड़ाने की अवधि के बाद भी बच्चे इसके स्वास्थ्य संबंधी लाभ ले सकते हैं।

नोट: जिन लोगों को डेयरी पदार्थों से सच्ची एलर्जी है उन्हें कोलोस्ट्रम का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। लैक्टोज़ से संवेदनशीलता वाले अधिकांश लोगों को कोलोस्ट्रम का उपभोग करते समय समस्या नहीं होती है।

कोलोस्ट्रम निम्नलिखित अवस्थाओं में लाभदायक हो सकता है। 

पेट का स्वास्थ्य 

2,200 से अधिक वर्ष पहले, आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के पिता, हिप्पोक्रेट्स ने महसूस किया कि "सभी रोग पेट में शुरू होते हैं"। आज हम अंततोगत्वा पेट के स्वास्थ्य के महत्व और शरीर के स्वास्थ्य में उसकी भूमिका को समझ रहे हैं। तीन वर्ष की उम्र तक, मनुष्य के पेट में वयस्कों के समतुल्य जैवविविधता कायम हो जाती है। जब वह इष्टतम नहीं होती है, तब आपको संधिवात गठिया, लूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे स्वप्रतिरक्षी रोग होने का जोखिम बढ़ जाताहै। 

व्यग्रता, अवसाद, फाइब्रोमायल्जिया, और दीर्घावधि थकान रोगसमूह से ग्रस्त लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं होने की अधिक संभावना होती है। आंतों के स्वास्थ्य को इष्टतम बनाना समग्र स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती हासिल करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। आदर्श रूप से, पेट के स्वास्थ्य की प्राप्ति आहार के माध्यम से संभव करनी चाहिए जिसके लिए आप सब्ज़ियों और प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक गुणों वाले आहार का सेवन कर सकते हैं। कई बार, पूरकों की भी जरूरत पड़ती है। प्रोबायोटिक्स पूरकों और एल-ग्लूटामाइन के अलावा, कोलोस्ट्रम भी पेट के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक प्रतीत होता है। 

आंतों की पारगम्यता के बढ़ जाने पर पैदा होने वाली लीकी गट (रिसने वाला पेट) खास तौर पर इरिटेबल बॉवेल रोगसमूह या आईबीएस से ग्रस्त लोगों की आम समस्या है। 2017 में Nutrients में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि कोलोस्ट्रम आंतों की इस महत्वपूर्ण बाधा की मरम्मत करने में मदद कर सकता है, जिससे पेट की रिसने वाली झिल्ली के ठीक होने में मदद मिलती है। इसके अलावा, कोलोस्ट्रम NF-kappa B पथमार्ग, जो आंतों के शोथ का मुख्य कारण है, को अवरुद्ध करके पेट में शोथ को कम करने में मदद कर सकता है।

संक्रामक दस्त

1995 में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि कोलोस्ट्रम बच्चों को रोटावायरस, जो विश्व भर में बच्चों के दस्तों का आम कारण है, से सुरक्षित करने में लाभदायक हो सकता है। 

यही नहीं, 2008 में हुए एक अध्ययन के अनुसार कोलोस्ट्रम वयस्कों में क्लॉस्ट्रीडियम डिफिसाइल से उत्पन्न दस्तों के उपचार में सहायक है। इस रोग के कारण लोगों को अक्सर अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। 2015 में Journal of Infectious Disease में प्रकाशित एक अतिरिक्त अध्ययन ने भी सी. डिफिसाइल संक्रमण के उपचार में कोलोस्ट्रम का लाभ प्रदर्शित किया।

आमाशय और बड़ी आंत का शोथ

आमाशय के छाले या अल्सर विश्व भर में 60 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करते हैं। इसका एक आम कारण है एस्पिरिन और नॉन-स्टीरॉयडल दवाईयों यानी NSAIDs का नियमित रूप से सेवन करना ( इनमें इबुप्रोफेन, नैप्रॉक्सेन, मेलॉक्सिकैम, डाइक्लोफेनेक, आदि शामिल हैं)। यूं तो ये दवाईयाँ दीर्घकालिक दर्द और संधिशोथ से ग्रस्त कई लोगों की मदद करती हैं, वे रक्तस्राव करने वाले छालों का जोखिम भी बढ़ाती हैं। नुस्खे पर मिलने वाले एसिड रेड्यूसर भी लाभदायक हैं लेकिन वे भी कुछ दुष्प्रभाव पैदा करते हैं। शोध ने दर्शाया है कि कोलोस्ट्रम, रोजाना लिए जाने पर, आमाशय के छालों में लाभदायक हो सकता है। 

कैंसर के उपचार के लिए कीमोथेरेपी करवाने वाले लोगों में अक्सर बड़ी आंत का शोथ होता है जिसके कारण दस्त होने लगते हैं। कोलोस्ट्रम इसमें उपयोगी हो सकता है और पशु अध्ययनों में उसे लाभदायक दर्शाया गया है। 

अंत में, 2000 में American Journal of Clinical Nutrition में प्रकाशित एक अध्ययन में क्रोन्स रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसे इनफ्लेमेटरी बॉवेल रोग (IBD) से ग्रस्त लोगों का उपचार करने में कोलोस्ट्रम के लाभ की चर्चा की गई। यहाँ भी, शोथग्रस्त रिसने वाले पेट की मरम्मत को ही संभावित प्रक्रिया माना जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण रूप से, गोजातीय कोलोस्ट्रम में पौष्टिक गुण होते हैं जो पेट के स्वास्थ्य को इष्टतम बनाने और आंतों की सूक्ष्मजीवी विविधता को प्रोत्साहित करने में मदद करते हैं। 

स्नायु और मांसपेशी का स्वास्थ्य 

स्नायु वे ऊतक हैं जो हमारी हड्डियों को एक साथ थामे रखते हैं जबकि मांसपेशियाँ गतिविधि के लिए जिम्मेदार अवयव हैं। तथापि, हम इन प्रणालियों के सुचारु रूप से काम करने के लिए जरूरी पोषक तत्व सुनिश्चित करने पर दुर्लभ रूप से ही ध्यान देते हैं। उम्र के बढ़ने के साथ, शरीर की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता कम होने लगती है। जब हम इस बात को इस तथ्य के साथ संयोजित करते हैं कि हमारे कई आहारों में पोषक तत्वों की कमी होती है, तब हमें रोग होने या चोट लगने का जोखिम बढ़ जाता है। धावकों को चोट लगने का अधिक जोखिम होता है क्योंकि वे अपने शरीर से कड़ी मेहनत करवाते हैं। 

कोलोस्ट्रम में विकास कारक होते हैं जो कोशिकाओं की मरम्मत प्रेरित करने में और मांसपेशियों और कँडराओं की मरम्मत को इष्टतम बनाने में मदद कर सकते हैं। 

धावक प्रतिस्पर्धात्मक रूप से आगे बने रहने के लिए अक्सर कोलोस्ट्रम लेते हैं। एक अध्ययन ने दर्शाया कि धावकों में स्ट्रेंथ और स्पीड ट्रेनिंग के दौरान IGF-1 की मात्रा बढ़ जाती है। IGF-1 शरीर की मरम्मत और नवीकरण में मदद करता है। वास्तव में, NCAA (National Collegiate Athletic Association) कॉलेज में पढ़ने वाले धावकों को कोलोस्ट्रम का सेवन करने की अनुमति नहीं देता है जबकि World Anti-Doping Agency उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले लोगों को इसका उपयोग करने से मना करती है। 

2002 में धावकों में किए गए एक अध्ययन ने IGF-1 में वृद्धि नहीं दर्शाई लेकिन अंततोगत्वा यह बात नोट की कि आठ सप्ताह के अनुपूरण के बाद कसरत करने की क्षमता में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2001 में Nutrition में प्रकाशित एक अध्ययन ने दर्शाया कि कसरत की ट्रेनिंग के साथ संयोजन में कोलोस्ट्रम की अधिक खुराक (20 ग्राम/दिन) का अनुपूरण लेने वाले पुरुषों और महिलाओं में बिना चर्बी के शारीरिक द्रव्यमान (lean body mass) में वृद्धि हुई।

प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन करता है 

समग्र स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली महत्वपूर्ण है। प्रतिरक्षा प्रणाली न केवल जीवाणुओं, वायरसों, और कवकों के संक्रमण से सुरक्षित करने के लिए जिम्मेदार है बल्कि यह ऐसी असामान्य कोशिकाओं का पता लगा कर उन्हें नष्ट भी करती है जो कैंसर पैदा कर सकती हैं। 

व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली खराब पोषण और/या वातावरण के विषाक्त पदार्थों और तनावकारकों के कारण कमजोर हो सकती है। जस्ते, बी-विटामिनों, विटामिन डी, विटामिन सी, और अन्य पोषक तत्वों की कमी से प्रतिरक्षा शक्ति कम हो सकती है, और व्यक्ति को तीव्र संक्रमण और दीर्घकालिक बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। 

चूंकि दीर्घकालिक तनाव भी संक्रमणों से लड़ने की क्षमता को दबा सकता है, इसलिए जीवन की चुनौतियों को नियंत्रित करने के स्वस्थ तरीके खोजना भी महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम एक साधन है जो इस लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकता है।

2007 में किए गए एक अध्ययन ने वयस्कों के दो समूहों की तुलना की। दोनों को इनफ्लुएंज़ा का टीका दिया गया, जिसके बाद एक समूह को कोलोस्ट्रम पूरक दिया गया तथा दूसरे को प्लेसिबो लेने को कहा गया। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि केवल टीकाकरण करने की तुलना में कोलोस्ट्रम को टीकाकरण के साथ संयोजित करने से फ्लू की रोकथाम में तीन गुना अधिक वृद्धि हुई। 

कोलोस्ट्रम को अनेक अध्ययनों में ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमणों की घटनाओं को भी कम करते दर्शाया गया है। 2016 में धावकों के एक अध्ययन में भी ऐसे ही लाभ दर्शाए गए। 

चयापचयी रूपरेखा

उच्च कोलेस्ट्रॉल और फैटी लीवर आम अवस्थाएं हैं जो कोरोनरी हृदय रोग और मस्तिष्काघात के जोखिम को बढ़ाती हैं। 2012 में पशु मॉडल का उपयोग करके किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि मौखिक कोलोस्ट्रम फैटी लीवर में देखे गए शोथ को कम करने और ट्राईग्लिसराइड्स को कम करने में मदद कर सकता है। ये दोनों हृदयवाहिकीय रोग के अग्रणी जोखिम कारक हैं। तथापि मानव परीक्षण अभी तक संतोषजनक नहीं पाए गए हैं। 

दीर्घकालिक थकान

दीर्घकालिक थकान एक आम समस्या है जो जीवन को पूरी तरह से जीने की क्षमता को सीमित करती है। इसके अंतर्निहित कारण का पता लगाना और दूर करना महत्वपूर्ण है। कई लोग अतिरिक्त ऊर्जा पाने के लिए विटामिन बी-12, कोएंज़ाइम क्यू10 और डी-राइबोज़ जैसे पूरकों का सहारा लेते हैं। कोलोस्ट्रम को भी उस सूची में शामिल किया जा सकता है क्योंकि 2015 में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि कोलोस्ट्रम दीर्घावधि थकान के लक्षणों से ग्रस्त लोगों में लाभदायक हो सकता है। इस पर अधिक अध्ययनों की अभी भी जरूरत है। 

एलर्जीरोधी 

कई दशकों से, वैज्ञानिकों ने देखा है कि खेतों पर पलने-बढ़ने वाले बच्चों को दमा और एलर्जी के लक्षण होने की संभावना उन बच्चों की तुलना में कम होती है जो खेत पर नहीं रहते हैं। अब यह माना जाता है कि इसका एक कारण यह है कि ये बच्चे अपास्चरीकृत दूध और उसमें मौजूद घटकों के संपर्क में आते हैं। 

2016 में किए गए एक यादृच्छिकृत दोहरे-अज्ञात प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन में दमे और एलर्जी से ग्रस्त 38 बच्चों का मूल्यांकन किया गया। उन्नीस बच्चों को गोजातीय कोलोस्ट्रम और शेष 19 को एक प्लेसिबो दिया गया। तीन महीने बाद, शोधकर्ताओं ने नाक की एलर्जी के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी और फेफड़ों के प्रकार्य में सुधार देखा। 

पालतू जानवरों के लिए कोलोस्ट्रम

पालतू जानवरों के मालिक अपने कुत्तों को अक्सर कोलोस्ट्रम और अन्य विटामिन देकर यह सुनिश्चित करते हैं कि उनका स्वास्थ्य इष्टतम बना रहे। पालतू जानवरों को कोलोस्ट्रम देने के मुख्य कारणों में एलर्जी, पाचन संबंधी स्वास्थ्य, मौखिक स्वास्थ्य, जल्दी वृद्ध होने से रोकना, स्व-प्रतिरक्षी अवस्थाएं और साथ ही जोड़ों का स्वास्थ्य भी शामिल हैं। कई लोग इसके परिणामस्वरूप अपने कुत्ते के स्वास्थ्य में सुधार की सूचना देते हैं। 

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