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एल-थियानीन, स्वास्थ्य के लिए लाभ और संज्ञानात्मक प्रकार्य

7 अगस्त 2019

जेम्स लेक, एमडी के द्वारा

इस लेख में:

अमीनो एसिड एल-थियानीन (γ-एन-इथाइलग्लूटामीन), चाय की पत्तियों और खाने योग्य बे बोलिटीस मशरूम जीरोकोमस बैडियस में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। हरी चाय और काली चाय एक ही प्रकार के पौधों से बनाई जाती हैं। काली चाय किण्वन के माध्यम से बनाई जाती है लेकिन हरी चाय को किण्वित नहीं किया जाता है। हरी चाय 3 से अधिक सहस्राब्दियों से चीनी चिकित्सा शास्त्र का मुख्य हिस्सा रही है, और इसका उपयोग दवाई के रूप में अन्य बूटियों के साथ संयोजन में तथा सहनशीलता और एकाग्रता बढ़ाने के लिए एक सांद्र द्रव के रूप में अकेले, दोनों तरह से किया जाता है। एल-थियानीन की मात्रा चाय के पौधों के उगने के स्थान, उत्पादन की विधियों और फसल काटने के समय पर निर्भर करती है। चाय की विभिन्न प्रजातियाँ जैसे कैमेलिया साइनेन्सिवार में एल-थियानीन अधिक मात्रा में होता है जबकि अधिक परिचित सी. साइनेन्सिस में इसकी मात्रा कम होती है। एल-थियानीन (सनथियानीन™) का एक संश्लेषित प्रारूप भी उपलब्ध है। 

एल-थियानीन का उपयोग एशियाई देशों में विविध प्रकार की चिकित्सीय और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करने के लिए विस्तृत रूप से किया जाता है और यह पश्चिमी देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। चाय का अन्य प्रमुख घटक, कैफीन मस्तिष्क में एसिटिलकोलीन और डोपामीन के स्तरों को बढ़ाता है जिससे ध्यान, संज्ञान और मूड में सुधार होता है। कैफीन के लाभदायक संज्ञानात्मक प्रभाव एल-थियानीन के प्रभावों से अधिक तेजी से उत्पन्न होते हैं क्योंकि यह अधिक तेजी से अवशोषित होता है, और उपभोग के बाद यह अपने शीर्ष प्लाज्मा स्तरों पर 30 मिनट में पहुंच जाता है जबकि एल-थियानीन को शीर्ष प्लाज्मा स्तरों तक पहुँचने में 50 मिनट लगते हैं। एल-थियानीन और कैफीन के अलावा, चाय की पत्तियों में अन्य घटक मौजूद होते हैं जो विविध प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्रदान करते हैं, जैसे अमीनो एसिड ग्लूटामीन, आर्जिनीन, सेरीन और एलेनीन, और फेनॉलिक यौगिक एपिगैलोकैटेचिन, एपिकैटेचिन गैलेट, एपिकैटेचिन और एपिगैलोकैटेचिन-गैलेट (तथाकथित ‘कैटेचिन्स’). मैचा हरी चाय का एक विशेष उत्पाद है जिसमें सामान्य हरी चाय की तुलना में लाभदायक फाइटोकेमिकल्स अधिक मात्रा में होते हैं। 

पशु और मानव अध्ययन समर्थन करते हैं कि एल-थियानीन विषयपरक तनाव अनुक्रिया को कम करता है, संज्ञानात्मक प्रदर्शन को बढ़ाता है, नींद की गुणवत्ता को सुधारता है, और दीर्घकालिक रोग, हृदयवाहिकीय रोग, मोटापे और जुकाम के विरुद्ध सुरक्षात्मक प्रभाव से युक्त है। एल-थियानीन, कैफीन और कैटेचिन्स सहित हरी चाय के विभिन्न घटक मेटाबोलिक सिंड्रोंम और मोटापे की रोकथाम करने में मदद कर सकते हैं। एल-थियानीन प्रतिक्रियात्मक ऑक्सीजन प्रजातियों (यानी ‘फ्री रैडिकल्स’) द्वारा उत्पन्न जारणकारी क्षति को कम करता है, और यकृत में ग्लूटाथयोन की मात्रा बढ़ाता है जिससे यकृत के सुपरऑक्साइड डिस्मुटेज़ जैसे एंज़ाइम्स की रक्त से विषैले तत्वों को हटाने की क्षमता में वृद्धि होती है। शोध के निष्कर्ष सुझाते हैं कि एल-थियानीन में बुढ़ापे की प्रक्रिया को रोकने के लाभ होते हैं। हरी चाय के कैटेचिन्स लाभदायक सूक्ष्मजीवीरोधी और वाइरसरोधी गतिविधियों से युक्त हो सकते हैं। जठरांत्र पथ में हरी चाय को आंतर्कोशिक एंटीऑक्सीडैंट्स को सक्रिय करते और प्रोकार्सिनोजेन्स के निर्माण को रोकते हुए दर्शाया गया है। 

L-थियानीन और न्यूरोसाइकियाट्रिक विकार

एल-थियानीन को सीखने की क्रिया, याददाश्त और संज्ञानात्मक प्रकार्य को सुधारते, और मानसिक कार्यों के दौरान चयनात्मक ध्यान को बढ़ाते दर्शाया गया है। महामारी विज्ञान के अध्ययन इस बात का समर्थन करते हैं कि कैमेलिया साइनेन्सिस की पत्तियों से बनी चाय के नियमित सेवन से संज्ञानात्मक पतन की घटनाओं में कमी, मूड में सुधार और तनाव का सामना करने की क्षमता में वृद्धि होती है। एल-थियानीन स्किज़ोफ्रीनिया के लिए एक आशाजनक संवर्धन उपचार है, और मूड के विकारों, ध्यानाभाव और अतिसक्रियता विकार (एडीएचडी) और साथ ही घबड़ाहट संबंधी विकार, मनोग्रसित बाध्यता विकार (ओसीडी), और बाईपोलर विकार पर लाभदायक प्रभाव डाल सकता है।

प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययनों ने मूड और संज्ञानात्मक प्रदर्शन पर एल-थियानीन के अकेले या कैफीन के साथ संयोजन में प्रभावों का अन्वेषण किया है, जिससे निष्कर्ष मिला है कि संयोजित उपचार से संज्ञानात्मक प्रकार्य में वृद्धि होती है लेकिन अकेले एल-थियानीन से ऐसा नहीं होता। चाय के घटकों के मूड और संज्ञानात्मक प्रदर्शन पर तीव्र मनःप्रभावी प्रभावों पर मानव हस्तक्षेपों के दो मेटा-विश्लेषणों ने प्रमाण पाया है कि एल-थियानीन स्वयं-सूचित विश्राम अवस्था में सुधार करता है, तनाव की विषयपरक अनुभूतियों को कम करता है, और कि कैफीन महत्वपूर्ण संज्ञानात्मक कार्यों के प्रदर्शन में सुधार करता है और सतर्कता और जोश में वृद्धि करता है। 

पशु अध्ययन समर्थन करते हैं कि एल-थियानीन रक्त मस्तिष्क अवरोध को तेजी से पार करता है, मस्तिष्क में सेरोटोनिन, गाबा और डोपामीन की मात्रा को बढ़ाता है, ग्लूटामेट और एनएमडीए रिसेप्टर्स से जुड़ता है, और मस्तिष्क द्वारा व्युत्पन्न न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (बीडीएनएफ) के स्तरों को बढ़ा सकता है। एल-थियानीन का दीर्घावधि सेवन (यानी 3 से 4 सप्ताह तक) , तंत्रिकाओं के लिए सामान्य सुरक्षात्मक लाभ प्रदान कर सकता है जो कि हिप्पोकैम्पस, जो यादादश्त के समेकन में केंद्रीय भूमिका निभाने वाला मस्तिष्क का एक क्षेत्र है, में मस्तिष्क द्वारा व्युत्पन्न न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर के संश्लेषण में वृद्धि से उत्पन्न होते हैं। माना जाता है कि ये सभी प्रभाव व्यग्रता में कमी लाते हैं। 

चूंकि एल-थियानीन का सेवन आम तौर पर कैफीन और चाय के अन्य जैवसक्रिय घटकों के साथ किया जाता है, अधिकांश अध्ययनों ने मूड और संज्ञान पर एल-थियानीन और कैफीन के संयोजित प्रभावों का अन्वेषण किया है। 

एल-थियानीन, व्यग्रता और तनाव

एल-थियानीन के व्यग्रता-रोधी प्रभाव विभिन्न तरीकों से संभव होते हैं जिनमें शामिल है, अल्फा मस्तिष्क तरंग गतिविधि में वृद्धि, गाबा का अधिक संश्लेषण, और AMPA ग्लूटामेट रिसेप्टर्स के कमज़ोर प्रतिद्वंद्वी के रूप में इसकी भूमिका। एल-थियानीन के सामान्य शांतिदायक लाभ अल्फा फ्रीक्वेंसी रेंज (8 से 13 हर्ट्ज़) में मस्तिष्क की विद्युतीय गतिविधि की वृद्धि में नज़र आते हैं। इलेक्ट्रोएनसेफेलोग्राफी (ईईजी) द्वारा मापे गए विद्युतीय गतिविधि के परिवर्तन खुराक पर निर्भर होेते हैं, और ऑक्सिपिटल और पैराइटल क्षेत्रों में बढ़ी हुई अल्फा तरंगों सहित, चिंतन में देखे गए लाभदायक ईईजी परिवर्तनों के समान ही होते हैं। बढ़ी हुई अल्फा गतिविधि को एल-थियानीन की 200 मिग्रा खुराक देने के बाद 60 मिनट तक जारी रहते दर्शाया गया है, और यह प्रभाव व्यग्रता का अधिक प्रदर्शन करने वाले लोगों में अधिक उल्लेखनीय था। अंत में, अधिक एल-थियानीन की मात्रा वाली हरी चाय के सेवन को दीर्घकालिक तनाव के संपर्क में आने वाले मूषकों में एड्रीनल हाइपरट्रॉफी को कम करता पाया गया है। 

जो व्यक्ति तनाव या व्यग्रता के लिए हरी चाय पीते हैं उन्हें उत्तेजक प्रभावों की बनिस्बत शांत करने वाले प्रभावों का अधिक अनुभव हो सकता है जो कि चाय की विशिष्ट प्रजाति में एल-थियानीन और कैफीन की आपेक्षिक मात्राओं और उसे बनाने के तरीके पर निर्भर होता है। 50 से 200 मिग्रा खुराक में एल-थियानीन लेने के 30 से 40 मिनट के भीतर आम तौर पर एक साधारण शांतिदायक प्रभाव देखा जाता है, और आदर्श रूप से 8 से 10 घंटे तक बरकरार रहता है। व्यग्रता के सामान्य लक्षण अक्सर रोजाना 200 मिग्रा एक या दो बार की खुराक से ठीक हो जाते हैं। अधिक तीव्र व्यग्रता के लिए रोजाना 600 मिग्रा से 800 मिग्रा की खुराकों की जरूरत पड़ सकती है जिन्हें एक दिन के अंतराल पर खुराक को 100 मिग्रा से 200 मिग्रा तक बढ़ाकर लिया जाता है। बेंज़ोडायज़ेपाइन्स और अन्य नुस्खे की व्यग्रता-रोधी दवाईयों के विपरीत, एल-थियानीन के कारण उनींदापन , अनैच्छिक क्रियाओं का मंद पड़ना या एकाग्रता में कमी नहीं होती है, और सहनशीलता या निर्भरता का कोई जोखिम नहीं है। एल-थियानीन और अन्य मनःप्रभावी औषधियों या अन्य प्राकृतिक उत्पादों के बीच गंभीर दुष्प्रभावों या परस्पर क्रियाओं की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। 

व्यग्रता की अवस्था के लिए एल-थियानीन पर अध्ययनों के निष्कर्षों के बीच विसंगति है। परिणामों में अंतर संभावित रूप से जाँची गई विभिन्न रोगी आबादियों, और इस तथ्य से संबंधित है कि कुछ अध्ययनों मेें एल-थियानीन के साथ संयोजन में कैफीन का अन्वेषण किया गया था। एक प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण जिसमें एल-थियानीन 200 मिग्रा/दिन की तुलना बेंज़ोडायज़ेपीन एल्प्रैज़ोलैम से की गई थी, में सामान्य व्यग्रतारोधी प्रभाव का प्रमाण पाया गया लेकिन प्रायौगिक तौर पर प्रेरित व्यग्रता की अवस्था में कोई कमी नहीं हुई। इसके विपरीत, दो अन्य अध्ययनों ने एल-थियानीन की वही खुराक लेने पर विषयपरक तनाव के मापों, जैसे हृदय गति और रक्त चाप में कमी, जैसी उल्लेखनीय कमियों की रिपोर्ट की। एक 4 सप्ताह के प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण (N=30) में 200 मिग्रा/दिन एल-थियानीन के लिए यादृच्छीकृत बिना किसी मनोरोग संबंधी बीमारी वाले वयस्कों को प्लेसिबो समूह की तुलना में अवस्थातमक व्यग्रता (state anxiety) में उल्लेखनीय कमी और बेहतर नींद का अनुभव हुआ। एक छोटे प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण में, 16 स्वस्थ वयस्क स्वैच्छिकों को एल-थियानीन 200 मिग्रा/दिन बनाम एल्प्रैज़ोलैम 1 मिग्रा या प्लेसिबो के लिए यादृच्छीकृत किया गया जिन्हें विश्राम की और प्रायौगिक रूप से प्रेरित तीव्र व्यग्रता की अवस्था के दौरान मॉनीटर किया गया। बेसलाइन अवस्था के दौरान एल-थियानीन ने कुछ विश्राम देने वाले प्रभाव उत्पन्न किए लेकिन न तो एल्प्रैज़ोलैम और न ही एल-थियानीन ने विश्राम की अवस्था या प्रायौगिक रूप से प्रेरित व्यग्रता की अवस्था के दौरान प्लेसिबो से अधिक व्यग्रतारोधी प्रभाव प्रदर्शित नहीं किए। 

एक 10 सप्ताह के प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन (N=46) में व्यापक व्यग्रता विकार के DSM-5 निदान वाले वयस्कों को एल-थियानीन (450 से 900 मिग्रा/दिन) बनाम प्लेसिबो लेने के लिए यादृच्छीकृत किया गया जिसके साथ उन्हें अपनी वर्तमान दवाई जारी रखनी थी। अनुबद्ध एल-थियानीन समूह ने व्यग्रता में कमी या नींद की बेहतर गुणवत्ता के मापों पर प्लेसिबो समूह से बेहतर प्रदर्शन नहीं किया। एक छोटे प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन (N=34) में 18-40 वर्ष के स्वस्थ वयस्कों को एक एल-थियानीन पेय बनाम प्लेसिबो दिया गया और फिर बहुकार्यन संज्ञानात्मक तनावकारक के संपर्क में लाया गया। प्लेसिबो की तुलना में एल-थियानीन समूह ने पेय को पीने के एक घंटे बाद उल्लेखनीय रूप से कम तनाव अनुक्रिया की सूचना दी। एल-थियानीन 200 मिग्रा, फॉस्फेटिडिलसेरीन 1 मिग्रा, कैमोमाइल 10 मिग्रा, और ग्लिसरिलफॉस्फोरिलकोलीन 25 मिग्रा से युक्त एक पोषक पेय पर एक और अध्ययन ने पाया कि इसके सेवन के 1 घंटे बाद विषयपरक तनाव अनुक्रियाओं में उल्लेखनीय कमी हुई और सेवन के 3 घंटे बाद सीरम कॉर्टिसॉल स्तर उल्लेखनीय रूप से कम हो गए। 

एल-थियानीन और अन्य मनोरोग संबंधी विकार

एक प्लेसिबो-नियंत्रित अध्ययन में पाया गया कि एल-थियानीन 100 मिग्रा रोजाना दो बार ने एडीएचडी से ग्रस्त लड़कों में नींद की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जिससे लगता है कि एल-थियानीन एडीएचडी के लिए एक कारगर सहायक उपचार हो सकता है। एल-थियानीन उनींदापन नहीं पैदा करता हालांकि सोने के समय एल-थियानीन 200 मिग्रा लेने से व्यग्रता में कमी होने के कारण नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। 

नए निष्कर्ष इस बात का समर्थन करते हैं कि एल-थियानीन के अवसादित मूड और पागलपन के लक्षणों पर लाभदायक प्रभाव हो सकते हैं। एक 8 सप्ताह के खुले लेबल के अध्ययन (N=20) में, एल-थियानीन 250 मिग्रा/दिन से उपचार किए गए प्रमुख अवसादात्मक विकार से निदान किए गए वयस्कों ने मूड, व्यग्रता और नींद की गुणवत्ता में सुधार सूचित किया। 

एल-थियानीन के पागलपन से संबंधित व्यग्रता पर लाभदायक प्रभाव भी होते हैं। एक 8 सप्ताह के प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण के निष्कर्ष समर्थन करते हैं कि स्किज़ोफ्रीनिया और स्किज़ोअफेक्टिव विकार वाले व्यक्तियों में एल-थियानीन संवर्धन व्यग्रता के स्तरों को कम करता है। इस आबादी में एल-थियानीन के लाभदायक प्रभावों का कारण कॉर्टिसॉल और मस्तिष्क में व्युत्पन्न न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (बीडीएनएफ) में वृद्धि हो सकती है। न्यूरोस्टेरॉयड प्रेग्नेनोलोन और अमीनो एसिड एल-थियानीन से युक्त एक संयोजन उपचार के पागलपन के लक्षणों पर लाभदायक प्रभाव हो सकते हैं। एक 8 सप्ताह के दोहरे-अज्ञात, प्लेसिबो-नियंत्रित परीक्षण (N=40) में एंटीसाइकोटिक दवाओं से उपेष्टतम अनुक्रिया वाले स्किज़ोफ्रीनिया या स्किज़ोअफेक्टिव विकार से ग्रस्त वयस्कों को प्रेग्नेनोलोन (50 मिग्रा/दिन) और एल-थियानीन (400 मिग्रा/दिन) बनाम प्लेसिबो के लिए यादृच्छीकृत किया गया और उनकी पागलपन-रोधी दवाई को जारी रखा गया। अध्ययन के अंत बिंदु पर, प्रेग्नेनोलोन और एल-थियानीन प्राप्त करने वाले समूह को प्लेसिबो समूह की तुलना में कुंद भाव, सुखदुःखाभाव और वाक्शक्ति के अभाव जैसे पागलपन के नकारात्मक लक्षण उल्लेखनीय रूप से कम हुए, व्यग्रता में काफी कमी हुई, और सामान्य गतिविधि में अधिक सुधार हुए। 

L-थियानीन, मस्तिष्क-वाहिकीय रोग और मस्तिष्काघात

पशु अध्ययनों के निष्कर्ष सुझाते हैं कि एल-थियानीन मस्तिष्क-वाहिकीय रोग की रोकथाम करने में मदद कर सकता है और मस्तिष्क-वाहिकीय दुर्घटनाओं (जैसे मस्तिष्काघात) के प्रभाव को कम करता है। क्षणिक सेरेब्रल इस्कीमिया (मस्तिष्क की स्थानिक अरक्तता) के बाद एल-थियानीन के तंत्रिका-रक्षात्मक प्रभावों का संबंध AMPA ग्लूटामीन रिसेप्टर्स के एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में इसके कार्य से हो सकता है। एल-थियानीन (0.3 से 1 मिग्रा/किलोग्राम) से उपचार करने से पहले प्रायौगिक रूप से प्रेरित सेरेब्रल इस्कीमिया के आवर्ती प्रकरणों को सहने वाले चूहों ने स्थानिक याददाश्त में उल्लेखनीय रूप से कम कमी और तंत्रिका कोशिकाओं की मृत्यु में उल्लेखनीय कमी दर्शाई। 

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