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शक्तिशाली त्वचा माइक्रोबायोम के लिए 4 मुख्य एंटीऑक्सीडेंट्स

गेब्रियल एस्पिनोज़ा, एमडी द्वारा

इस लेख में:


‌‌त्वचा माइक्रोबायोम क्या है?

त्वचा, शरीर का सबसे बड़ा अंग है। यह बाहरी जीवों या हानिकारक पदार्थों के नुकसान से शरीर की रक्षा करने वाले रक्षा कवच की तरह काम करता है।

आपका त्वचा माइक्रोबायोम, विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीवों से मिलकर बना है जिनमें बैक्टीरिया, वायरस, और यहाँ तक कि फंगस भी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश, हानिरहित होते हैं, जो हमारे साथ एक सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं, और हमारे शरीर की दुर्गन्ध को कम करने में मदद के साथ-साथ हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं।

त्वचा और जटिल माइक्रोबायोम को स्वस्थ रखना, आपके द्वारा लिए जाने वाले न्यूट्रीएंट्स और आपके आसपास के परिवेश पर निर्भर करता है।

‌‌‌‌त्वचा की संरचना

त्वचा में तीन परतें होती हैं जिनमें एपिडर्मिस भी शामिल है, जो धीरे-धीरे पूरी तरह परिपक्व होने वाली त्वचा कोशिकाओं से बना होता है। यह एकदम सही संतुलन में लाखों बाहरी कीटाणुओं से रक्षा करने वाली पहली परत है।

त्वचा की थोड़ी गहरी परत में, पसीना ग्रंथियां, तेल ग्रंथियां, और बालों के रोएं पाए जाते हैं, जिनके साथ बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिनियाँ भी होती हैं जो त्वचा की ऊपरी परत तक न्यूट्रीएंट्स और बेकार चीजों को लाने-ले जाने का काम करती हैं।

इनमें तरह-तरह के कीटाणु भी होते हैं जिनमें बैक्टीरिया और फंगस भी शामिल हैं, और व्यायाम करते समय या पसीना निकलने पर आने वाली गंध इन्ही के कारण आती है। सबसे गहरे स्तर पर सबक्यूटेनियस नामक परत होती है जो मुख्य रूप से वसा युक्त ऊतकों से बनी होती है, जहाँ बड़ी-बड़ी रक्त वाहिनियाँ स्थित होती हैं। यहाँ कुछ सूक्ष्म जीव भी पाए जाते हैं, लेकिन यह हिस्सा, त्वचा टर्गर के लिए जरूरी होता है।

न्यूट्रीशन, त्वचा का एक प्रतिबिम्ब है क्योंकि त्वचा से ही शरीर के स्वस्थ होने का पता चलता है। माइक्रोबायोम को संतुलित रखना बहुत जरूरी है क्योंकि इस सहजीवी संबंध के कारण ही आपकी त्वचा को स्वस्थ दिखने में मदद मिलती है। न्यूट्रीएंट्स की कमी के कारण ये सूक्ष्म जीव, फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकते हैं।

‌‌त्वचा हाइड्रेशन

त्वचा की इलास्टिसिटी को बनाए रखने के लिए त्वचा को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है क्योंकि आपकी कोशिकाओं का 50% से ज्यादा हिस्सा, पानी से ही बना है। डिहाइड्रेटेड त्वचा, देखने में सूखी, शल्क युक्त, और कड़ी लग सकती है। इससे खुजली भी हो सकती है और त्वचा पर दरारें भी पड़ सकती है जिससे बैक्टीरिया को एक अक्षुण्ण रक्षा कवच को भेदने का मौका मिल जाता है जिससे सेल्यूलाइटिस जैसे त्वचा इन्फेक्शन हो सकते हैं। इसके अलावा, अपनी इलास्टिसिटी और टाईटनेस को बनाए रखने के लिए, डिहाइड्रेटेड त्वचा, तेल ग्रंथियों को ज्यादा तेल छोड़ने का संकेत भेजती है, जिससे छेद जाम हो सकते हैं जिससे वे इन्फेक्टेड हो सकते हैं।

यदि आपको प्यासा होने का अनुभव बहुत कम ही होता है और आपका मूत्र रंगहीन या हल्का पीला है तो इसका मतलब है कि आप पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड हैं। कुछ लोगों को पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड रहने के लिए कुछ गिलास पानी की जरूरत पड़ सकती है, और अन्य लोगों को 15 गिलास तक पानी पीना पड़ सकता है। यह सब आपके क्रियाकलापों के स्तर पर निर्भर करता है। संभव है पानी खुद ही बड़ा स्वादहीन लगने लगे, इसलिए पानी को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें कुछ डाल कर पिया जाए तो पानी की खपत बढ़ाई जा सकती है।

‌‌त्वचा को साफ़ रखना

पर्याप्त परिमाण में पानी पीकर अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी त्वचा की सतह को साफ़ और सूखा रखना भी है। अत्यधिक नमी के कारण बैक्टीरिया और फंगस की अत्यधिक वृद्धि हो सकती है जिससे लोकल त्वचा इन्फेक्शन हो सकते हैं। ख़ास तौर पर पसीना निकलने के बाद ऐसा होने की ज्यादा सम्भावना रहती है क्योंकि कोने-कोने में मौजूद नमी के कारण काफी रुकावट पैदा हो सकती है और प्रकाश को पहुँचने में दिक्कत हो सकती है जिससे बैक्टीरिया और फंगस की अतिवृद्धि हो सकती है। इससे रिंगवर्म, त्वचा कैंडिडा, और एथलीट्स फूट जैसे फंगल इन्फेक्शन हो सकते हैं। इसलिए, त्वचा की सतह को सूखा रखना और नमी सोखने वाले कपड़े, जैसे माइक्रो-मोडाल और सूती कपड़े पहनना जरूरी है।

त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अपने हाथों को साफ़ रखना भी जरूरी है क्योंकि उनकी मदद से ही हम बाहरी दुनिया तक पहुँचते और उससे जुड़ते हैं। हम उनकी मदद से ही घंटे में लगभग 10 से भी ज्यादा बार अपने चेहरों को छूते हैं। इसलिए, अपने हाथों को बार-बार एंटीबैक्टीरियल साबुन और पानी से कम-से-कम 20 सेकंड तक धोना जरूरी है। साबुन और पानी आसानी से उपलब्ध न होने पर, आप कम-से-कम 60% अल्कोहल युक्त हैण्ड सेनिटाइज़र का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके अलावा, हैण्ड सेनिटाइज़र का इस्तेमाल करते समय एक खुशबू रहित मॉइस्चराइसिंग लोशन का भी इस्तेमाल करें क्योंकि हैण्ड सेनिटाइज़र में मौजूद अल्कोहल के कारण त्वचा ड्राई हो सकती है और उसमें दरारें पड़ सकती है जिससे त्वचा में जलन पैदा हो सकती है और उस पर छोटे-मोटे लोकल त्वचा इन्फेक्शन भी हो सकते हैं।

‌‌‌‌त्वचा के लिए प्रोटीन्स जरूरी हैं

आपके त्वचा माइक्रोबायोम को फलने-फूलने के लिए एक मजबूत बुनियाद की जरूरत है। त्वचा की बुनियाद, कोलेजन से बनी होती है जो मानव शरीर में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन है। त्वचा की संरचना, दृढ़ता, और मजबूती का ख्याल रखना इसी प्रोटीन की जिम्मेदारी है। कोलेजन सप्लीमेंट का इस्तेमाल करके, त्वचा के नॉर्मल एजिंग डैमेज को पलटा जा सकता है।

निगलकर लेने पर, कोलेजन सप्लीमेंट, त्वचा के हाइड्रेशन और इलास्टिसिटी में मदद कर सकता है क्योंकि यह प्रोटीन विभाजित होकर उसके मुख्य बिल्डिंग ब्लॉक्स में बदलकर त्वचा में डिपोजिट हो जाता है। प्लेसिबो की तुलना में, कोलेजन सप्लीमेंट, आँखों की झुर्रियों की उपस्थिति को कम करने में भी मदद कर सकता है। इसकी प्रस्तावित दैनिक खुराक, अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हो सकती है। अध्ययनों से पता चला है कि कुछ लोगों को 1.5 से 2.5 ग्राम प्रतिदिन, तो कुछ लोगों को 10 ग्राम प्रतिदिन तक लेने का सुझाव दिया जाता है।

‌‌‌‌त्वचा के लिए 4 मुख्य एंटीऑक्सीडेंट्स

ख़ास तौर पर UV लाइट एक्सपोजर के कारण, और आम तौर पर साधारण मेटाबोलिक रिएक्शन्स और कॉस्मेटिक्स के कारण, हमारी त्वचा पर बहुत ज्यादा ऑक्सीकारी दबाव पड़ सकता है। हमारे त्वचा माइक्रोबायोम को एक कोमल संतुलन में रखना जरूरी है क्योंकि बहुत ज्यादा ऑक्सीकारी दबाव के कारण त्वचा अस्वस्थ हो सकती है और तेजी से बूढ़ी भी हो सकती है। इसलिए, एंटीऑक्सीडेंट्स और निम्नलिखित विटामिन्स से भरपूर चीजें लेना बहुत जरूरी है।

विटामिन सी और एंटी-एजिंग

विटामिन सी, एक स्वस्थ मानव आहार का एक आवश्यक घटक है क्योंकि शरीर इसे खुद नहीं बना सकता है। विटामिन सी, ताजे फलों, खट्टी चीजों, और कई तरह के मिर्च में पाया जाता है। विटामिन सी, टॉपिकल सीरम्स में फायदेमंद हो सकता है क्योंकि यह त्वचा पर पाए जाने वाले कोलेजन प्रोटीन का मुख्य घटक है। यह त्वचा डिसकलरेशन और एंटी-एजिंग सन प्रोटेक्शन में मदद कर सकता है। मौखिक रूप से लेने पर, विटामिन सी एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और फ्री रेडिकल्स के कारण त्वचा की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है।

विटामिन ई के रक्षात्मक प्रभाव

विटामिन ई एक और एंटीऑक्सीडेंट विटामिन है जो कोलेजन प्रोटीन के साथ-साथ त्वचा की परत के नीचे मौजूद वसा ऊतकों की रक्षा करके एंटी-एजिंग में मदद कर सकता है। यह कुसुम के तेल, मक्का, सोया, और कुछ प्रकार के मांस में मिल सकता है। विटामिन ई और सी एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं और घर से बाहर निकलने पर शरीर के UV किरणों के संपर्क में आने पर होने वाले कोशिका के नुकसान को स्थिर करने में मदद कर सकते हैं।

विटामिन ए और धूप से रक्षा

विटामिन ए, कैरोटीनॉयड्स नामक व्युत्पादों से प्राप्त होता है जिनमें बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, और रेटिनॉल शामिल हैं। ये काफी असरदार एंटीऑक्सीडेंट्स हैं और धूप से होने वाले नुकसान से रक्षा करने में मदद करते हैं। गाजर, कद्दू, शकरकंद, आम, और पपीते में बीटा-कैरोटीन मिल सकता है। बीटा-कैरोटीन का सप्लीमेंट लेने से, बहुत ज्यादा धूप के संपर्क में आने के बाद होने वाले त्वचा बर्न्स की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है।

लाइकोपीन, बीटा-कैरोटीन के विपरीत, लाल रंग के फलों में पाया जाता है, जैसे टमाटर, तरबूज, या अन्य लाल फल। अत्यधिक UV लाइट के संपर्क में आने पर, सबसे पहले लाइकोपीन नष्ट होता है, और इस तरह इसका सप्लीमेंट लेने से और ज्यादा सन डैमेज को रोकने में मदद मिल सकती है।

रेटिनॉल, मानव शरीर के लिए एक और महत्वपूर्ण कैरोटीनॉयड है क्योंकि शरीर इसे तैयार नहीं कर सकता है। यह त्वचा की नई कोशिकाओं के विकास और त्वचा की ऊपरी परतों के रखरखाव के लिए जरूरी है। यह वसा युक्त भोजन में पाया जा सकता है, जिसमें दूध, अंडे की जर्दी, पनीर, और वसा युक्त पनीर शामिल हैं। ओरल और टॉपिकल दोनों तरह के रेटिनॉल, बहुत ज्यादा धूप के संपर्क में आने के कारण होने वाली एडवांस्ड त्वचा एजिंग से बचने में मदद कर सकते हैं।

विटामिन डी और सूजन

मानव शरीर, मुख्य रूप से धूप के संपर्क में आने पर, खुद अपना विटामिन डी बना सकता है और त्वचा इसे तैयार करने की मुख्य जगह है। मानव शरीर में विटामिन डी की कई भूमिकाएं हैं जिनमें इम्यून पॉवर को बढ़ाने में मदद करना और सूजन को नियंत्रित करना भी शामिल है।

शरीर के बूढ़ा होने के साथ, शरीर की विटामिन डी तैयार करने की क्षमता कम होती जाती है, इसलिए इसका सप्लीमेंट लेना बहुत जरूरी है, ख़ास तौर पर लम्बे समय तक घर के अन्दर रहने वाले लोगों के लिए। द अमेरिकन अकैडमी ऑफ़ डर्मेटोलॉजी, वयस्कों के लिए कम-से-कम 200 IU, और 50 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए 400 IU का सुझाव देता है। विटामिन डी का एक सुरक्षित स्तर, 10,000 IU से 40,000 IU प्रतिदिन से अधिक नहीं है।

‌‌त्वचा के लिए हर्बल एंटीऑक्सीडेंट्स

ग्रीन टी, त्वचा की सेहत के लिए कुछ हद तक फायदेमंद साबित हुई है। ग्रीन टी युक्त टॉपिकल फॉर्मूलेशंस लेने से त्वचा की इलास्टिसिटी में सुधार होते देखा गया है। यह बहुत ज्यादा धूप में रहने के कारण होने वाले नुकसान को रोकने में भी मदद कर सकता है।

हल्दी का मुख्य घटक, करक्यूमिन, ऑक्सीकारी दबाव के दौरान शरीर की मदद कर सकता है। इसे अपने पसंदीदा भोजन में एक मसाले के तौर पर डाला जा सकता है, दूध की चाय के रूप में पिया जा सकता है, और सप्लीमेंट्स के रूप में लिया जा सकता है। सूजन से राहत दिलाने में मदद करने वाले मसाले, उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं जिन्हें चिरकालिक सूजन युक्त त्वचा प्रॉब्लम्स हैं।

‌‌क्या प्रोबायोटिक्स से त्वचा को लाभ हो सकता है?

आंत के माइक्रोफ्लोरा की तरह, त्वचा का माइक्रोबायोम भी एक स्थिर संतुलन में रहता है। अनुमान लगाया गया है कि प्रोबायोटिक्स, ख़ास तौर पर लैक्टोबेसिली और एंटेरोकोक्की, जो आंत की नली में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं, इनका सप्लीमेंट लेने से त्वचा माइक्रोबायोम को कुछ स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि एक स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम, इम्यून पॉवर को बढ़ा सकता है और सूजन को कम कर सकता है, जिससे मुंहासे जैसे त्वचा इन्फेक्शन के साथ-साथ अन्य चिरकालिक सूजन संबंधी त्वचा प्रॉब्लम्स होने की सम्भावना को कम करने में मदद मिल सकती है।

याद रखें, आपके शरीर, आपकी त्वचा, और आपकी त्वचा के माइक्रोबायोम को एक स्वस्थ संतुलन की जरूरत है। विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर स्वास्थ्यप्रद आहार लेने से, आपकी त्वचा को शक्तिशाली बनाने और माइक्रोबायोम को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी। बार-बार हाथ धोने से आप और आपके प्रियजन सुरक्षित रहेंगे। अंत में, अपनी त्वचा को जवां और सेहतमंद दिखने लायक बनाए रखने के लिए अपने आपको हाइड्रेट रखने के साथ-साथ अपनी त्वचा की सतह को साफ़ रखना भी याद रखें।

संदर्भ:

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