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क्या आप में आवश्यक विटामिनों की कमी है? यहाँ विटामिन की कमी का पता लगाने के 5 लक्षण बताए गए हैं

एंड्रिया कोलोन, एनएमडी द्वारा

इस लेख में:


विटामिन की कमी दुनिया भर में आम है। विटामिन की कमी विकसित होने का प्राथमिक कारण आहार में विटामिन की पर्याप्त मात्रा नहीं लेना हो सकता है। और दूसरे दर्जे की विटामिन की कमी किसी और वजह से हो सकती है, जैसे पेट में विटामिनों का ख़राब अवशोषण। विटामिन की कमी किसी भी आयु वर्ग में हो सकती है, हालाँकि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में इसकी कमी की संभावना अधिक होती है। कोई भी व्यक्ति जो पूर्ण स्वस्थ आहार नहीं खाता है उसमें विटामिन की कमी हो सकती है। कुछ लोगों में विटामिन की कमी के लक्षण सूक्षम हो सकते हैं और अन्य लोगों में अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। यहाँ कई आम लक्षण दिए गए हैं जो यह संकेत दे सकते हैं कि आप में विटामिन की कमी है और आप इसे पूरा करने के लिए क्या कर सकते हैं।

‌‌‌‌चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि विश्व स्तर पर 300 मिलियन लोग चिंता विकार से प्रभावित हैं। चिंता के सामान्य लक्षणों में अत्यधिक परेशानी, भय, दिल की धड़कन, पसीना, अनिद्रा और हाइपरवेंटिलेशन शामिल हो सकते हैं। कई अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन की कमी लोगों में बढ़ती चिंता से जुड़ी हो सकती है।

विटामिन डी वसा में घुलने वाला विटामिन है जो दृढ़ीकृत खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है और प्राकृतिक धूप से भी शरीर में इसका निर्माण होता है। खाद्य पदार्थों से प्राप्त विटामिन डी और धूप को शरीर में एक रासायनिक रूपांतरण से गुजरना चाहिए। इसका सबसे सक्रिय रूप है विटामिन डी3, जिसे कैल्सीट्रियोल के रूप में भी जाना जाता है। यह हड्डी के विकास और गठन, प्रतिरक्षा प्रकार्य और सूजन को कम करने में शामिल होता है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन डी की कमी, जो वास्तव में एक हार्मोन अग्रदूत है, चिंता-संबंधित व्यवहार से जुडी हो सकती है। 2017 के एक अध्ययन से पता चलता है कि विटामिन डी के पूरक से चिंता और अवसाद में सुधार हो सकता है। 

कई अध्ययनों से पता चलता है कि बी विटामिनों की कमी चिंता के बढ़े हुए लक्षणों से जुड़ी हो सकती है। विटामिन बी6, या पाइरिडोक्सिन, गामा-अमीनोबूटाईरिक एसिड के संश्लेषण में शामिल एक सह-कारक है, जिसे GABA, सेरोटोनिन और डोपामाइन के रूप में भी जाना जाता है। ये सभी न्यूरोट्रांसमीटर हैं जो मन और शरीर पर शांत प्रभाव डाल सकते हैं। कई अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन बी6 पूरक महिलाओं में चिंता और अवसाद को कम कर सकता है। विटामिन बी6 पैनिक अटैक और हाइपरवेंटिलेशन हमलों का कारण भी हो सकता है। 

विटामिन बी3, या नियासिन, एक आवश्यक, पानी में घुलनशील विटामिन है। कई अध्ययनों के अनुसार, विटामिन बी3 ट्रिप्टोफैन से सेरोटोनिन के रूपांतरण में शामिल होता है, जो चिंता और अवसाद को विनियमित करने में शामिल हो सकता है।

‌‌‌‌रात में कम दिखाई देना

यदि आपको रात में देखने में परेशानी होती है या तेज रोशनी से मंद रोशनी में जाने पर अपनी आखों को समायोजित करने में परेशानी होती है, तो आपको रतौंधी नामक बीमारी हो सकती है। विटामिन ए की कमी रतौंधी का कारण हो सकती है। वसा में घुलनशील विटामिन जो दृष्टि प्रकार्य, प्रतिरक्षा प्रकार्य और त्वचा ऊतक में भूमिका निभाता है, विटामिन ए विद्युत आवेगों को रेटिना में भेजने में शामिल होता है, जो आंख के पीछे प्रकाश प्राप्त करने वाला क्षेत्र है। 

विटामिन ए कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से विभिन्न रूपों में पाया जाता है। पशुओं और मछलियों में पूर्ववर्ती विटामिन ए सबसे अधिक होता है, जो विटामिन ए का सबसे उपयोगी रूप है। बीफ लीवर में पशुओं में पाए जाने वाले विटामिन ए के उस सक्रिय रूप की सबसे अधिक मात्रा होती है। कॉड लिवर का तेल में विटामिन ए की उच्च मात्रा होती है। पादप खाद्य पदार्थों में कैरोटीनॉयड होता है, जिसे शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित किया जा सकता है। कैरोटीनॉयड्स वर्णक होते हैं जिनकी वजह से फलों और सब्जियों को उनके पीले, लाल या नारंगी रंग मिलते हैं, जिनमें गाजर, पीली और लाल मिर्च, रतालू, और मीठे आलू शामिल हैं। एक अध्ययन से पता चलता है कि कैरोटीनॉयड्सलुटें लुटिन या जेयाजन्थिन के पूरक रात की दृष्टि में सुधार कर सकते हैं। 

‌‌‌‌मसूड़ों से खून आना

स्कर्वी एक ऐसी स्थिति है जिसमें संयोजी ऊतक को बनाए रखने के लिए आवश्यक विटामिन सी की कमी के कारण व्यक्ति के मसूड़ों से खून आ सकता है। अन्य लक्षणों में दांतों में सड़न, बालों का पतला होना और थकान शामिल हो सकते हैं। 15वीं शताब्दी में यह एक आम चिंता का विषय था, स्कर्वी आज दुर्लभ है, हालाँकि कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि यह खराब आहार और गरीबी के कारण वापसी कर सकता है।

विटामिन सी, या एस्कॉर्बिक एसिड, पानी में घुलने वाला एक आवश्यक विटामिन है। यह एक एंटीऑक्सिडेंट है जो मुक्त कणों से लड़ता है, प्रतिरक्षा प्रकार्य में भूमिका निभाता है, और आयरन के अवशोषण में सहायता करता है। विटामिन सी कोलेजन के उत्पादन में शामिल होता है। मानव सीधे विटामिन सी बनाने में असमर्थ हैं। विटामिन सी की कमी आमतौर पर आहार में विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों की कमी के कारण होती है। लक्षण जो चिरकालिक विटामिन सी की कमी से संबंधित हो सकते हैं उनमें थकान, त्वचा के घावों का आसानी से ना भरना और जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।

खट्टे फलों, ब्रोकोली, और टमाटर में विटामिन सी सबसे अधिक होता है।

जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें धूम्रपान ना करने वाले लोगों की तुलना में अधिक विटामिन सी की आवश्यकता होती। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का सुझाव है कि प्रति दिन 1 ग्राम विटामिन सी का पूरक लेने से इसका लगभग 70-90% अवशोषण हो जाता है। 

‌‌‌‌थकान

थकान कई लोगों के लिए एक आम चिंता का विषय है। यह नींद की कमी, बीमारी या खराब आहार सहित कई कारकों के कारण हो सकती है। यह एक या एक से अधिक विटामिन की कमी का लक्षण भी हो सकती है।

विटामिन ई एक और वसा में घुलने वाला विटामिन है। विटामिन ई का सबसे अधिक अध्ययनित रूप अल्फा-टोकोफ़ेरॉल है। विटामिन ई एक एंटीऑक्सिडेंट है जो सूजन को भी कम कर सकता है। यह प्रतिरक्षा प्रकार्य में शामिल होता है। अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन ई का निम्न स्तर थकान के स्तर को बढ़ा सकता है। एक अध्ययन, विशेष रूप से, सुझाव देता है कि कम विटामिन ई मांसपेशियों की थकान का कारण हो सकता है। विटामिन ई गिरी और बीज और हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जा सकता है।

बी विटामिन भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने में सामूहिक रूप से शामिल होते हैं। वे क्रेब्स साइकिल में शामिल वो सह-कारक हैं, जो एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट का निर्माण करते हैं जो कोशिका के पॉवर हाउस होते हैं। एक अध्ययन से पता चलता है कि सीएफएस वाले लोगों में बी विटामिन के निम्न स्तर हो सकते हैं। क्रोनिक फटीग सिंड्रोम वाले कुछ लोगों को बी विटामिन पूरक से लाभा हो सकता है ।

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम वाले लोगों में विटामिन डी का भी निम्न स्तर देखा गया है। अध्ययन बताते हैं कि विटामिन डी का पूरक थकान के स्तर को सुधारने में मदद कर सकता है। 

‌‌‌‌नाखूनों और बालों का नाजुक होना

नाखूनों का नाजुक होना बार-बार हाथ धोने, बर्तन धोने या कई विटामिन की कमी के कारण हो सकता है।

विटामिन बी7, जिसे आमतौर पर बायोटिन के रूप में जाना जाता है, ऊर्जा उत्पादन में शामिल एक और बी विटामिन है। बायोटिन प्रोटीन का निर्माण करने वाले अमीनो एसिड में शामिल होता है जो नाखून और बालों के विकास के लिए आवश्यक हैं। बायोटिन की कमी के लक्षणों में चेहरे पर चकत्ते, बालों का नाजुक होना, अंगों का सुन्न होना और उनमें झुनझुनी होना, भूख न लगना, या अवसाद शामिल हैं।

बायोटिन युक्त खाद्य पदार्थों में अंडे, पालक, लीवर और सामन शामिल हैं। 2017 के एक अध्ययन से पता चलता है कि बायोटिन पूरकता नाखूनों और बालों के विकास को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। 

नाखून और बालों के स्वास्थ्य में शामिल एक अन्य महत्वपूर्ण खनिज आयरन होता है, जो हीमोग्लोबिन उत्पादन में शामिल है। हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो रक्त में ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करता है। नाखूनों को स्वस्थ रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। कोइलोनीचिया के रूप में जानी जाने वाली एक स्थिति जिसमें नाखून का आकार असामान्य हो कर अवतल हो जाता है। इसे नेल स्पूनिंग भी कहा जाता है। 

आयरन की कमी से भी नाख़ून नाजुक हो सकते हैं। इसके अलावा, यदि आप में आयरन की कमी है, तो आप थकान, सिरदर्द, चक्कर आना या सांस की तकलीफ का अनुभव भी कर सकते हैं।

आयरन की कमी से बाल भी टूट सकते हैं। यह सामान्य है कि एक दिन में लगभग 100 बाल तक गिर जाएं। यदि आप पाते हैं कि एक ही बारे में आपके बहुत सारे बाल झड़ रहे हैं, तो आपके शरीर में कुछ और हो सकता है।

आयरन के दो अलग-अलग रूप हैं: हीम और गैर-हीम। हीम आयरन पशु उत्पादों से आता है और गैर-हीम की तुलना में बेहतर अवशोषित होता है, जो पौधे के स्रोतों से आता है। जिन खाद्य पदार्थों में आयरन की मात्रा अधिक होती है उनमें ऑयस्टर, बीफ लीवर, गुड़ और बीन्स शामिल होते हैं। शाकाहारी लोगों में आयरन की कमी यह आयरन की कमी के कारण एनीमिया होने का अधिक खतरा हो सकता है।

ध्यान दें कि आयरन का पूरक केवल चिकित्सक के निर्देशन में लेना चाहिए क्योंकि बहुत अधिक आयरन हानिकारक हो सकता है।

जिंक एक ट्रेस एलिमेंट है जो शरीर में कई प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। यह प्रतिरक्षा प्रकार्य, प्रोटीन संश्लेषण और हार्मोन उत्पादन में शामिल होता है। जिंक की कमी से स्वाद का ना पता लगना, दस्त, घाव का अच्छे से ना भरना और मांसपेशियों का नुकसान हो सकता है। यह देखते हुए कि जिंक कोशिकीय प्रक्रियाओं में शामिल है, अध्ययन से पता चलता है कि जिंक की कमी बालों के झड़ने और बालों के पतले होने का कारण हो सकती है। उन लोगों में जिंक की कमी हो सकती है जिनमें बाल झड़ने के कोई क्षतचिह्न नहीं होते। 

आंत्र रोग वाले लोगों में ख़राब अवशोषण की समस्या के कारण जिंक की कमी हो सकती है। शाकाहारी लोगों में भी जिंक की कमी होने का खतरा अधिक हो सकता है।

अध्ययनों से पता चला है कि जिंक पूरकता से बालों का झड़ना कम हो सकता है। पूरकों में जिंक के विभिन्न रूप होते हैं, जिनमें जिंक पिकोलिनेट, ग्लूकोनेट, जिंक सल्फेट और जिंक एसीटेट शामिल हैं। जिंक के किस रूप का इस्तेमाल किया गया है इस आधार पर जिंक की मात्रा भिन्न हो सकती है।

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