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तंदुरुस्ती

क्या आपको इन वसा में घुलनशील विटामिनों की कमी है?

16 अक्टूबर 2019

एरिक मैड्रिड एमडी द्वारा

इस लेख में:


20वीं शताब्दी के आरंभ में, यह माना जाता था कि मनुष्यों को केवल चार प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत होती है: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, और खनिज। तब से, स्वास्थ्य और पोषण-संबधी जरूरतों के बारे में हमारा ज्ञान काफी विकसित हो गया है। यह बात बीमारी, दीर्घावधि रोग, और सामान्य निर्बलता की रोकथाम पर खास तौर पर लागू होती है।

हमारे द्वारा स्वास्थ्य के बारे में समझी गई सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक यह है कि कुछ खास विटामिनों की गंभीर कमी से सुपरिचित रोग हो सकते हैं, जैसे:

"खाद्य संवर्धन" की खोज और सारे विश्व में बेहतर खाद्य आपूर्ति संभव होने से, यह माना जाने लगा था कि विटामिनों की कमी का व्यापक रूप से उन्मूलन हो गया है। तथापि, हाल ही में, हमने जाना है कि किसी भी व्यक्ति की अद्वितीय आनुवंशिकी, जीवनशैली, वातावरण के विषैले पदार्थों से संपर्क, और एंटीऑक्सिडैंटों का सेवन कुछ लोगों के लिए कुछ खास विटामिनों और खनिजों की विशेष जरूरतें पैदा कर सकता है, जो अन्य व्यक्तियों की जरूरतों से ज्यादा हो सकती हैं। इसके अलावा, कुछ खास रोगों की गैरमौजूदगी इस बात का संकेत नहीं है कि वह व्यक्ति अपनी पोषण तत्वों की जरूरतें पूरी कर रहा है। 

हममें से प्रत्येक व्यक्ति इन में से एक श्रेणी में आता है: 

  • आप में एक या अधिक पोषक तत्वों की कमी है
  • आप में किसी भी दिए गए समय पर हर पोषक तत्व की एकदम सही मात्रा होती है
  • आप में एक या अधिक विशिष्ट पोषक तत्व की अत्यधिक मात्राएं हैं, जो या तो भंडारित की जाएंगी या उत्सर्जित की जाएंगी।

पहले परिदृश्य पर ध्यान देना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2006 की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व भर में हर तीन में से एक व्यक्ति को कई प्रकार के विटामिनों और/या खनिजों की कमी है। यह समस्या कई पीढ़ियों को प्रभावित कर सकती है। जब बच्चे और गर्भवती स्त्रियाँ विटामिनों की कमी से ग्रस्त होती हैं, तब दीर्घावधि स्वास्थ्य-परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ये कमियाँ केवल दुबले-पतले लोगों में ही नहीं देखी जाती हैं -- अधिक वजन वाले और स्थूलकाय लोगों में भी पोषक तत्वों की उल्लेखनीय कमी हो सकती है। 

वसा में घुलनशील विटामिन बनाम पानी में घुलनशील विटामिन

विटामिन दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किए गए हैं: पानी में घुलनशील और वसा में घुलनशील। पानी में घुलनशील विटामिनों का मतलब है कि वे पानी में घुल जाते हैं, यानी उन्हें आम तौर पर शरीर में भंडारित नहीं किया जाता है और उन्हें भोजन में खाया जाना चाहिए। यह बात वसा में घुलनशील विटामिनों के विपरीत है, जो वसा की मदद से अवशोषित होते हैं। 

वसा में घुलनशील विटामिनों के अवशोषित होने के लिए आहार में वसा की जरूरत पड़ती है। ये विटामिन शरीर में यकृत और वसा ऊतकों में भंडारित किए जाते हैं और जरूरत के समय उपलब्ध हो सकते हैं।

विटामिन ए

विटामिन ए एक शक्तिशाली पोषक तत्व है, फिर भी इसकी कमी सारे विश्व में सबसे आम है। यह एक ताकतवर एंटीऑक्सिडैंट है जो दो रूपों में मिलता है: प्रोविटामिन ए वनस्पति में पाया जाता है और पूर्वनिर्मित विटामिन ए पशु उत्पादों में पाया जाता है। 

जब किसी व्यक्ति के आहार में विटामिन ए का अभाव होता है, तो खास तौर पर बच्चों में, इसके परिणाम भयंकर हो सकते हैं। विटामिन ए स्वस्थ दृष्टि, प्रतिरक्षा प्रणाली की शक्ति, और भविष्य में प्रजनन के विकास में महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सारे विश्व में 250 मिलियन से अधिक प्रीस्कूल आयु वाले बच्चों में इसकी कमी है। गर्भवती और विटामिन ए की कमी से ग्रस्त स्त्रियों को रतौंधी का जोखिम होता है, जबकि विटामिन ए के पर्याप्त स्तरों से रहित गर्भस्थ शिशु को विकास-संबंधी समस्याओं का जोखिम होता है। 

विटामिन ए की कमी के लिए जोखिम कारक

  • डेयरी पदार्थों और अंडों की कमी वाला आहार
  • फलों का अपर्याप्त सेवन 
  • सब्ज़ियों के सेवन में कमी

कई वनस्पति पर आधारित खाद्य पदार्थों में बीटा कैरोटीन (प्रो-विटामिन ए), जो विटामिन का पूर्ववर्ती है, होता है। कैरोटिनॉइड कहलाने वाले ये तत्व समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

विटामिन ए की कमी के लक्षण और समस्याएं

  • अंधापन और रतौंधी
  • दस्त
  • शुष्क पपड़ीदार त्वचा
  • संक्रमण के जोखिम में वृद्धि
  • गर्भपात के जोखिम में वृद्धि

विटामिन ए के खाद्य स्रोत

  • यकृत
  • कॉड लीवर तेल
  • पालक
  • गाजर
  • पंपकिन (कद्दू)
  • टमाटर
  • लाल शिमला मिर्च
  • दूध
  • अंडे

किसी विटामिन ए से युक्त अच्छे मल्टीविटामिन का सेवन करना महत्वपूर्ण है, और कुछ मामलों में, एक अलग विटामिन ए पूरक की जरूरत पड़ सकती है। तथापि, इसकी चर्चा पहले अपने डॉक्टर के साथ करनी चाहिए। 

पूर्वनिर्मित विटामिन ए की अत्यधिक मात्राओं, 25,000 आईयू या उससे अधिक, का रोजाना सेवन करने से विटामिन ए विषाक्तता हो सकती है। 

यह भी माना जाता है कि अत्यधिक विटामिन ए विटामिन डी के लाभदायक प्रभावों के साथ अंतर्क्रिया कर सकता है। बीटा-कैरोटीन को खाद्य पदार्थ के रूप में खाने पर कोई भी ज्ञात विषैले प्रभाव नहीं होते हैं या उसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है। तथापि, कुछ लोगों में इसका बड़ी मात्रा में सेवन करने पर त्वचा का रंग उत्क्रमणीय रूप से नारंगी हो सकता है, जिसे बीटा-कैरोटिनीमिया कहते हैं। 

कुछ अध्ययनों के अनुसार, धूम्रपान करने वालों को विटामिन ए के अनुपूरण के बारे में अधिक सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह फेफड़े के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। पहले किसी चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

 विटामिन डी

पिछले दशक में किए गए हजारों अध्ययनों में विटामिन डी के सेवन को इष्टतम बनाने के स्वास्थ्य लाभों को दर्शाया है। ये अध्ययन हमें बताते हैं कि जिन लोगों के खून में विटामिन डी अधिक मात्रा में होता है उन्हें दिल के दौरे, स्तन कैंसर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने का जोखिम कम होता है।

इसकी कमी का होना आम है। यहाँ तक कि मेरी सदर्न कैल्फोर्निया मेडिकल प्रैक्टिस में भी, एक स्थान जहाँ साल में 300 दिन धूप निकलती है, पाँच में से चार (80 प्रतिशत) रोगियों में विटामिन डी की नैदानिक कमी है, यानी उनके खून में इसका स्तर 30 नैनोग्राम/मिली (75 नैनोमॉल/ली) या उससे कम है।

विटामिन डी के कम स्तरों का संबंध निम्नलिखित के लिए जोखिम में वृद्धि से जोड़ा गया है:

  • स्वलीनता
  • स्वप्रतिरक्षित अवस्थाएं
  • मनोभ्रंश
  • फाइब्रोमायल्जिया
  • हृदय रोग/उच्च रक्तचाप 
  • कैंसर (बड़ी आंत, स्तन, अंडाशयी, प्रॉस्टेट)
  • ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस 
  • मस्तिष्काघात, हृदय रोग, और परिधीय धमनी रोग

समग्र स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए धूप से पर्याप्त संपर्क महत्वपूर्ण है। कमी से ग्रस्त अधिकांश वयस्कों को विटामिन डी (कॉलेकैल्सिफेरॉल) की 2000-5000 आईयू तक की दैनिक खुराक की जरूरत पड़ती है। कुछ लोगों को इससे अधिक की जरूरत पड़ सकती है। 

गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं को भी रोजाना 5,000 आईयू विटामिन डी अनुपूरण लेने पर विचार करना चाहिए। 1 से 18 वर्ष तक की उम्र के अधिकांश स्वस्थ बच्चे विटामिन डी ले सकते हैं। सामान्य खुराक 1,000-2,000 आईयू रोजाना के बीच है। 

विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल)

विटामिन ई को यकृत के अलावा, वसा ऊतक में भंडारित किया जा सकता है। यह फ्री रैडिकल्स से एंटीऑक्सिडैंट सुरक्षा प्रदान करता है, और जब इसकी कमी होती है, तब कोशिकीय ऑक्सीकरण और तंत्रिकाओं की क्षति का जोखिम बढ़ जाता है। जबकि कई चिकित्सक मानते हैं कि विटामिन ई की कमी कुल मिलाकर दुर्लभ है, हाल के शोध ने इस लंबे समय से चली आ रही मान्यता पर प्रश्न चिह्न लगाया है। 

एशिया में 2019 में किए गए और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ विटामिन एंड न्यूट्रीशन रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन ने सुझाया है कि विटामिन ई की कमी 67 प्रतिशत तक शिशुओं, 80 प्रतिशत तक बच्चों, 56 प्रतिशत तक किशोरों, और 72 प्रतिशत तक वृद्धों और गर्भवती स्त्रियों को प्रभावित करती है। इसी प्रकार, 2015 में दक्षिण कोरिया में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि 20-59 वर्ष के लोगों में से 23 प्रतिशत लोग विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल) के अपर्याप्त स्तरों के शिकार थे। अंत में, अमेरिका में 2006 में 2 से 5 वर्ष के बच्चों में किए गए एक अध्ययन ने दर्शाया कि 68 प्रतिशत अमेरिकी बच्चों के खून में विटामिन ई की कमी थी। 

विटामिन ई की कमी के कारण और जोखिम

  • समयपूर्व जन्म
  • आहार में विशिष्ट खाद्य पदार्थों के सेवन की कमी (नीचे सूची देखें)
  • कुअवशोषण रोगसमूह (लीकी गट, सीलियाक रोग, क्रोन्स रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस)
  • विटामिन ई की पारिवारिक वियुक्त कमी (दुर्लभ आनुवंशिक विकार)

विटामिन ई की कमी के लक्षण

  • तंत्रिकातंत्रीय और मस्तिष्क संबंधी मुद्दे
  • न्यूरोपैथी
  • रक्ताल्पता
  • थकान
  • मांसपेशियों की कमजोरी
  • दृष्टि संबंधी समस्याएं (रेटिनोपैथी)
  • क्षीण प्रतिरक्षा प्रणाली

विटामिन ई के खाद्य स्रोत

जब आहार पर्याप्त नहीं होता है, तब कोई अच्छा मल्टीविटामिन रोज लेने से पर्याप्त विटामिन ई सेवन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। जब यह पर्याप्त नहीं होता है, तो कुछ लोग विटामिन ई पूरक अलग से 200 से 400 आईयू प्रतिदिन की खुराक पर ले सकते हैं। अधिकतर लोगों को 1,000 आईयू प्रतिदिन से अधिक अनुपूरण से बचना चाहिए। 

विटामिन के

विटामिन के एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो हड्डी, मस्तिष्क, और खून के समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तीन मुख्य रूपों में उपलब्ध है:

  • विटामिन के1 (फाइलोक्विनोन) 
  • विटामिन के2 (मेनाक्विनोन) 
  • विटामिन के3 (मेनाडायोन)

विटामिन के1 मुख्य रूप से हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में पाया जाता है, जबकि विटामिन के2 आम तौर पर बैक्टीरियल (पेट के बैक्टीरिया) मूल का होता है और मांस और डेयरी जैसे किण्वित और पशु-आधारित खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है। विटामिन के3 को संश्लेषण द्वारा बनाकर कुछ पूरकों में मिलाया जाता है।

कई स्वस्थ बैक्टीरिया, जो हमारी आंतों में रहते हैं (पेट के माइक्रोबायोम), विटामिन के2 का निर्माण कर सकते हैं। जब किसी व्यक्ति को एंटीबायोटिक्स पर रखा जाता है, तब विटामिन के2 का उत्पादन रुक सकता है क्योंकि एंटीबायोटिक औषधि स्वस्थ बैक्टीरिया को मार देती है। यह माना जाता है कि यह खून को पतला करने वाली दवाई कूमैडिन (वारफैरिन) लेने वाले लोगों के "खून के पतलेपन" में उस समय बदलाव का कारण हो सकता है जब वे कुछ खास दवाइयाँ लेते हैं या हरी पत्तेदार सब्ज़ियों की अत्यधिक मात्रा वाले आहार का सेवन करते हैं। 

जिन लोगों के खून में विटामिन के की मात्रा कम होती है, उन्हें हड्डी के कमजोर होने का जोखिम भी होता है, जैसे ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस। विटामिन के की मात्रा में कमी को हृदय रोग के जोखिम में वृद्धि से भी जोड़ा गया है, जिस कारण से, संभव है कि हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ समग्र हृदय और वाहिकीय स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती हैं। 

विटामिन के की कमी के जोखिम और कारण

  • नवजात शिशुओं को अधिक जोखिम होता है (यही वजह है कि सारी दुनिया में कई अस्पताल शिशुओं के जन्म के बाद उन्हें विटामिन के का इंजेक्शन देते हैं)
  • आहार में विशिष्ट खाद्य पदार्थों के सेवन की कमी (नीचे सूची देखें)
  • वज़न घटाने के लिए शल्यचिकित्सा (बेरियाट्रिक)
  • कुअवशोषण रोगसमूह (लीकी गट, सीलियाक रोग, क्रोन्स रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस)
  • एंटीबायोटिक्स का दीर्घावधि या बारंबार उपयोग 

विटामिन के की कमी के लक्षण

  • आसानी से खरोंच लगना
  • भारी मासिक स्राव होना
  • मसूड़ों से खून निकलना

विटामिन के के खाद्य स्रोत

  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (गोभी, पालक, कोलार्ड ग्रीन्स, ब्रॉकोली, हरा सलाद पत्ता, आदि)
  • मछली
  • यकृत/मांस (गोमांस, सूअर का मांस)
  • पोल्ट्री (चिकन, टर्की)
  • अंडे
  • सूखे बेर
  • पनीर
  • एवोकैडो

आदर्श रूप से, किसी भी व्यक्ति की विटामिन के की जरूरतें स्वस्थ आहार और पेट का इष्टतम स्वास्थ्य हासिल करने से पूरी हो जानी चाहिए। अधिकांश अच्छे मल्टीविटामिन विटामिन के से युक्त होते हैं, तथा हड्डी और हृदय के स्वास्थ्य के लिए चिंतित लोगों को अतिरिक्त विटामिन के अनुपूरण की जरूरत पड़ सकती है। नुस्खे पर लिखी गई कूमैडिन (वारफैरिन) नामक खून को पतला करने वाली दवाई लेने वाले लोगों को चिकित्सक से परामर्श लिए बिना विटामिन के नहीं लेना चाहिए। 

संदर्भ:

  1. GUIDELINES ON FOOD FORTIFICATION WITH MICRONUTRIENTS 2006 https://apps.who.int/iris/bitstream/handle/10665/43412/9241594012_eng.pdf?ua=1
  2. Nutr Cancer. 2009;61(6):767-74. doi: 10.1080/01635580903285155. Lung Cancer risk and Beta-Carotene
  3. Internatonal Journal of Vitamin Nutrition Research. 2019 May 24:1-14. doi: 10.1024/0300-9831/a000590. (Vitamin E deficiency in Asia)
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  5. Elder SJ, Haytowitz DB, Howe J, Peterson JW, Booth SL. Vitamin K contents of meat, dairy, and fast food in the U.S. Diet. J Agric Food Chem 2006;54:463-7.

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