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सेब के सिरके का स्वाद पसंद नहीं? एसीवी पूरक आज़माने के 6 कारण

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सेब का सिरका (एसीवी) रसोईघर में मौजूद एक मुख्य पदार्थ है जो स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। पिछले कुछ सालों में यह एक लोकप्रिय विषय रहा है जिसके लाभों में सुंदर त्वचा से लेकर वज़न घटाना तक चर्चित है।

सेब का सिरका पारंपरिक रूप से खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है और बहुत सारी कैलरी, नमक, या वसा बढ़ाए बिना अपने भोजन में स्वाद का तड़का लगाने का यह एक बढ़िया तरीका है। इस बहुपयोगी सामग्री का कई अन्य तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाता है, जैसे साफ़-सफ़ाई, बाल धोने, कुल्ला करने, रोगाणुओं को रोकने, भोजन को सुरक्षित रखने, त्वचा की रंगत निखारने, त्वचा को रगड़कर साफ़ करने तथा और बहुत-से कामों के लिए।

‌‌सेब के सिरके के स्वास्थ्य लाभ

पिछले कुछ सालों में सेब का सिरका इतना लोकप्रिय इसलिए हो गया है क्योंकि इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। जैसे-जैसे लोग अपने स्वास्थ्य को अधिक कुदरती तरीके से सुधारने में विश्वास करने लगे हैं, सेब के सिरके में बहुत लोगों की रुचि पैदा हुई है। हमें पता चल रहा है कि यह रक्त शर्करा को नियंत्रित करने, पाचन को सुधारने, कोलेस्ट्रॉल को कम करने और वज़न घटाने में मदद करने समेत हमारे स्वास्थ्य के कई पहलुओं पर एक संभावित भूमिका निभा सकता है।

सेब के सिरके का स्वाद और गंध तेज़ होते हैं क्योंकि इसमें एसीटिक अम्ल होता है, जो इसका मुख्य सक्रिय घटक है। खुशनसीबी से, भले ही आपको इसका तेज़ स्वाद पसंद न हो, फिर भी आप एसीवी पूरकों के साथ सेब के सिरके के संभावित लाभ पा सकते हैं। सेब का सिरका तरल या गोली के रूप में उपलब्ध है। एसीवी पूरकों की गोली में सिरका सूखे रूप में होता है। पूरकों में एसीटिक अम्ल की मात्रा आमतौर पर लगभग 250 मिलीग्राम से लेकर 1600 मिलीग्राम प्रति गोली तक होती है और अधिकांश ब्रांड के पूरकों में लगभग 500 मिलीग्राम होती है। कुछ ब्रांडों के पूरकों में एसीवी के साथ-साथ अन्य यौगिक शामिल हो सकते हैं जैसे कि बायोपैरिन, जो सिरके को बेहतर ढंग से अवशोषित करने में शरीर की मदद करता है। कुछ ब्रांडों में एसीवी के साथ अन्य सामग्रियां मिलाई हुई हो सकती हैं जैसे कि केएन मिर्च, ग्रेपफ्रूट (पाचन में सहायता करने के लिए) चुकंदर, अनार, या ब्लैक करंट (रंग और स्वाद के लिए)। जैसा कि सभी पूरकों के मामले में होता है, लेबल पढ़कर यह जानना हमेशा महत्वपूर्ण होता है कि आप असल में क्या सामग्रियां ले रहे हैं। एसीवी पूरकों पर सीमित शोध के कारण कोई मानक खुराक नहीं है, इसलिए पैकेज पर लिखे निर्देशों का पालन ज़रूर करें और अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें।

‌‌‌‌1. सेब के सिरके को सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है

हालांकि अब सेब के सिरके का चलन बहुत बढ़ गया है, मगर असल में यह सबसे पुराने प्राकृतिक स्वास्थ्य उपचारों में से एक है और इसका खाना पकाने और चिकित्सा दोनों में हज़ारों सालों से उपयोग किया जाता रहा है। प्राचीन मिस्रवासी इसे घावों के इलाज के लिए उपयोग करते थे और अच्छे पाचन के लिए इसे पीते भी थे। प्राचीन रोम के लोगों ने भी इसके पाचन गुणों का लाभ उठाया था। वे बड़े भोज में ब्रेड भिगोने के लिए मेज़ों पर इसके कटोरे रखते थे ताकि एक बड़ी दावत के बाद पाचन में मदद मिले। लगभग 400 ईसा पूर्व, आधुनिक चिकित्सा के संस्थापक हिप्पोक्रेट्स ने सामान्य स्वास्थ्य के लिए एक टॉनिक के रूप में सिरके का सुझाव दिया था और इसका उपयोग एंटीबायोटिक, पाचन में सहायक, अल्सर और घावों की सफ़ाई के लिए एंटीसेप्टिक और सर्दी और खांसी समेत कई अन्य बीमारियों के उपचार के तौर पर किया था। सिरके के एंटीसेप्टिक गुणों के कारण इसे पूरे इतिहास में युद्ध में सैनिकों के घावों को साफ़ और कीटाणुरहित करने के लिए उपयोग किया गया है और घाव भरने के लिए इसका उपयोग अमेरिकी गृह युद्ध में भी किया गया था। जैसा कि आप देख सकते हैं, सिरके का इतिहास काफ़ी लंबा और दिलचस्प है।

‌‌‌‌2. सेब के सिरके में प्रोबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं

इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए सेब के सिरके के बनने की प्रक्रिया को जानना महत्वपूर्ण है। एसीवी को सेब, यीस्ट और चीनी के साथ किण्वन की 2 चरणों वाली प्रक्रिया से बनाया जाता है। पहले चरण में, सेबों को मसलकर यीस्ट के साथ मिलाया जाता है, जिससे किण्वन प्रक्रिया शुरू होती है। सेब से उत्पादित हुई चीनी शराब में बदल जाती है। दूसरे चरण में, एसिटोबैक्टर नामक बैक्टीरिया शराब को और किण्वित करता है, जिससे एसीटिक अम्ल बनता है। एसीटिक अम्ल सिरके का मुख्य सक्रिय घटक है और इसी से सिरके में जाना-माना बेहद खट्टा स्वाद आता है। सिरके के स्वास्थ्य लाभ भी मुख्य रूप से इसी यौगिक की देन हैं।

किण्वन प्रक्रिया के दूसरे चरण के दौरान एक झिल्ली जैसी सामग्री का निर्माण होता है। यह बैक्टीरिया, प्रोटीन और एंजाइमों के मेल से बना होता है। इसे “माँ” कहा जाता है। यदि आप सेब के सिरके की बोतल को देखें, तो आप इसके रेशों को तैरते हुए देख सकते हैं। कुछ उत्पाद अधिक आकर्षक दिखने के लिए इसे फ़िल्टर कर देते हैं लेकिन माँ से अतिरिक्त पोषण का लाभ मिलता है।

माँ में मौजूद बैक्टीरिया अच्छे और आंत के लिए लाभकारी होते हैं जिन्हें हम आमतौर पर प्रोबायोटिक कहते हैं। प्रोबायोटिक आपके पाचन तंत्र को सही से चलाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखने में भी मदद करते हैं। आपकी प्रतिरक्षा कोशिकाओं का 70-80% आपके पाचन तंत्र में रहता है, इसलिए स्वस्थ पाचन तंत्र का मतलब है स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली और संक्रमण से लड़ने की अधिक क्षमता। एसीवी तरल की तरह ही, पूरकों में इस्तेमाल होने वाला सिरका भी फ़िल्टर या बिना फ़िल्टर वाला हो सकता है इसलिए कुछ में माँ होती है और कुछ में नहीं होती।

सेब के सिरके में पॉलीफेनोल जैसे जैवसक्रिय यौगिक भी होते हैं जो इसके स्वास्थ्य लाभों को बढ़ाते हैं। पॉलीफेनोल वनस्पति-आधारित एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर में हानिकारक मुक्त कणों को बेअसर करने में मदद करते हैं और गंभीर बीमारी को रोकने में मदद कर सकते हैं।

‌‌‌‌3. सेब का सिरका रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है

सेब के सिरके के जिस स्वास्थ्य लाभ पर सबसे अधिक अध्ययन किए गए हैं, वह रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करने की इसकी क्षमता है। मधुमेह एक स्वास्थ्य समस्या है जिसकी विशेषता रक्त शर्करा का ऊंचा स्तर है। यह या तो इंसुलिन प्रतिरोध या शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम होने के कारण होता है। मधुमेह एक विश्वव्यापी जन स्वास्थ्य समस्या है। अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में अगले 25 सालों में टाइप 2 मधुमेह रोगियों की संख्या 50% बढ़ने का अंदेशा है। सेब के सिरके को भोजन के बाद रक्त शर्करा की प्रतिक्रियाओं को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में मददगार पाया गया है। कई नैदानिक परीक्षणों में ये निष्कर्ष सामने आए हैं।

एक अध्ययन में प्रतिभागियों को उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन के साथ 20 ग्राम सेब का सिरका या प्लेसबो दिया गया था। 30 और 60 मिनट बाद रक्त के नमूने इकट्ठे किए गए। एसीवी समूहों में रक्त शर्करा का स्तर कम होने के साथ-साथ इंसुलिन प्रतिक्रिया भी बेहतर हुई। अन्य अध्ययनों से पता चला है कि एसीवी खाली पेट रक्त शर्करा को कम करने में भी मदद कर सकता है। मधुमेह रोगियों पर किए गए एक छोटे अध्ययन में, सोने से पहले सेब के सिरके के दो बड़े चम्मच पीने वाले प्रतिभागियों में अगली सुबह खाली पेट ग्लूकोज़ का स्तर कम था।

यह अभी भी पता नहीं चल पाया है कि असल में किस प्रक्रिया के द्वारा एसीवी रक्त शर्करा को कम करता है और संभावित कारणों में पेट खाली होने में देरी और स्टार्च के अवशोषण में रूकावट शामिल हैं। एसीवी की कार्यविधि पर अधिक शोध के साथ-साथ इस पर भी शोध करने की आवश्यकता है कि मधुमेह के उपचार के लिए इसे एक सहायक उपचार के तौर पर कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

4. सेब का सिरका कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है

पशुओं पर हुए अध्ययनों में पाया गया है कि सेब का सिरका कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम कर सकता है। हालांकि, इंसानों पर सीमित अध्ययन हुए हैं। इंसानों पर हुए दो छोटे अध्ययनों में पाया गया कि सेब का सिरका लेने से आठ या 12 हफ़्तों में कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल (“खराब”) कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड कम हो सकते हैं। हालांकि नतीजे उत्साहजनक हैं, मगर लिपिड को कम करने की एसीवी की क्षमता को जांचने के लिए अधिक नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है।

5. सेब का सिरका वज़न प्रबंधन में मदद कर सकता है

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि सिरका तृप्ति को बढ़ा सकता है, जो भूख मिटने का एहसास होता है। तृप्ति बढ़ने से कैलोरी के सेवन में कमी आ सकती है और इस तरह वज़न कम हो सकता है। पशुओं पर हुए अध्ययनों से पता चला है कि एसीटिक अम्ल वसा के भंडारण को कम कर सकता है, चयापचय को बढ़ा सकता है और मूसों और चूहों में भूख को कम कर सकता है। इंसानों पर हुए शोध इतने ठोस नहीं हैं। जापान में किए गए 2009 के एक परीक्षण का हवाला व्यापक रूप से दिया जाता है, जिसमें 179 मोटे सब्जेक्ट पर अध्ययन किया गया था जिन्हें एक दिन में शून्य, एक या दो चम्मच सिरका पीने के लिए दिया गया था। 12 हफ़्तों के बाद, सिरके का सेवन न करने वाले लोगों की तुलना में सिरके का सेवन करने वाले प्रतिभागियों के शरीर का वज़न, बीएमआई, आंतों की चर्बी, कमर का घेरा और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम था। 2018 के एक और हालिया रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के नतीजे भी ऐसे ही निकले। 39 प्रतिभागियों ने सीमित कैलोरी वाला आहार लिया। एक समूह ने दिन में दो बार सेब के सिरके का सेवन किया और दूसरे समूह ने बिल्कुल नहीं किया। 12 हफ़्तों के बाद दोनों समूहों का वज़न कम हो गया, लेकिन सेब के सिरके वाले समूह का अधिक कम हुआ। उनका बीएमआई, कमर का घेरा, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर (और एचडीएल का बढ़ा हुआ स्तर) भी कम हो गया था। इस समूह के प्रतिभागियों को भूख में कमी भी महसूस हुई। हालांकि ये अध्ययन बेहद छोटे थे और केवल कम अवधि तक प्रतिभागियों का निरीक्षण किया गया था, इसलिए अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

‌‌‌‌6. सेब के सिरके के पूरक दांतों की इनेमल परत को नष्ट नहीं करते

सेब का विशुद्ध सिरका बेहद अम्लीय होता है और असल में आपके दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे आपके दांतों में सड़न और कैविटी का जोख़िम बढ़ सकता है और दांतों में झनझनाहट की समस्या हो सकती है। बड़ी मात्रा में लेने से मुंह और गले के ऊतकों में जलन और नुकसान होने की संभावना रहती है। एसीवी पूरक लेने से आप इन संभावित समस्याओं से बच सकते हैं।

‌‌सेब के सिरके के दुष्प्रभाव और सावधानियां

एसीवी लेने के बाद गले में जलन, मतली और अपच की कुछ सूचनाएं मिली हैं। लंबे समय तक एसीवी लेने से पोटैशियम का स्तर कम होने की भी सूचना मिली है। यह बात पोटैशियम के स्तर को कम कर सकने वाली दवाएं ले रहे लोगों के लिए खासकर महत्वपूर्ण है (जैसे उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए उपयोग किए जाने वाले मूत्रवर्धक)। मूत्रवर्धक के अलावा, एसीवी अन्य दवाओं के साथ भी नकारात्मक प्रतिक्रिया कर सकता है, जैसे कि मधुमेह की मौखिक दवाएं, इंसुलिन और डिजोक्सिन। एसीवी इंसुलिन पर निर्भर मधुमेह मेलिटस रोगियों में देर से पेट खाली होने का कारण बन सकता है। इससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करना अधिक मुश्किल बन सकता है और रक्त शर्करा का स्तर बेहद कम हो सकता है। जैसा कि सभी दवाओं और पूरकों के मामले में होता है, एसीवी पूरक लेना शुरू करने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से ज़रूर पूछ लें।

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